Bhakti Sagar


शिव पार्वती का पुनर्मिलन

पौराणिक कथा: शिव-पार्वती का पुनर्मिलन

पृष्ठभूमि

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती का प्रेम और विवाह अद्वितीय है। पार्वती, जो सती के पुनर्जन्म थीं, ने कठोर तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया और उनकी पत्नी बनीं। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब शिव और पार्वती का वियोग हुआ, और फिर उनका मिलन हुआ। यह कथा उनके पुनर्मिलन की है।


शिव-पार्वती का वियोग

एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव के साथ अपने महल में विश्राम कर रही थीं। तभी अचानक देवर्षि नारद वहाँ पहुँचे। शिव जी ध्यानमग्न थे और उन्होंने नारद जी का स्वागत नहीं किया। पार्वती जी ने उनका आदर-सत्कार किया, लेकिन नारद जी को लगा कि शिव जी उनकी उपेक्षा कर रहे हैं।

नारद जी ने क्रोधित होकर पार्वती से कहा – "देवी, आपके पति आपसे प्रेम नहीं करते, वे केवल अपने ध्यान में लीन रहते हैं। यदि आप चाहें तो मैं एक उपाय बताता हूँ जिससे शिव जी आपसे अनुरक्त हो जाएँ।"

पार्वती जी ने उत्सुकता से उपाय पूछा। नारद जी ने कहा – "आप शिव जी के शरीर पर हाथ फेरें, उनका तेज आपके अंदर समा जाएगा और वे आपके वश में हो जाएँगे।"

अविश्वास के बावजूद, पार्वती जी ने ऐसा ही किया। जैसे ही उन्होंने शिव जी को स्पर्श किया, शिव जी का तेज (ऊर्जा) पार्वती में समा गया और शिव जी निष्प्रभ हो गए। पार्वती घबरा गईं और शिव जी से क्षमा माँगी।

तब शिव जी ने कहा – "पार्वती, तुमने मेरी शक्ति को अपने अंदर समाहित कर लिया है। अब मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ। तुम्हें मेरी शक्ति वापस लौटानी होगी, नहीं तो संसार का संतुलन बिगड़ जाएगा।"

पार्वती ने शिव जी की शक्ति लौटाने का प्रयास किया, लेकिन वह असंभव था। शिव जी ने कहा – "अब हमें अलग होना पड़ेगा। जब तक तुम मेरी शक्ति को वापस नहीं करती, मैं तुमसे दूर रहूँगा।"

इस प्रकार, शिव और पार्वती का वियोग हो गया।


पार्वती की तपस्या और पुनर्मिलन

शिव जी के बिना पार्वती जी दुखी रहने लगीं। उन्होंने फिर से कठोर तपस्या शुरू की। वे हिमालय की कंदराओं में जाकर ध्यान लगाने लगीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले – "देवी, आपकी भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें वरदान देना चाहता हूँ।"

पार्वती ने कहा – "मुझे केवल शिव जी की प्राप्ति चाहिए।"

ब्रह्मा जी ने कहा – "शिव जी तुम्हारे तप से प्रसन्न हैं, लेकिन उनकी शक्ति तुम्हारे भीतर है। तुम्हें उसे एक विशेष उपाय से लौटाना होगा।"

ब्रह्मा जी ने पार्वती को एक मंत्र दिया और कहा कि वे इस मंत्र का जाप करते हुए शिव जी की आराधना करें। पार्वती ने ऐसा ही किया।

अंत में, शिव जी प्रकट हुए और बोले – "पार्वती, तुम्हारी भक्ति और तपस्या से मैं प्रसन्न हूँ। अब तुम मेरी शक्ति को मेरे अंदर समाहित कर सकती हो।"

पार्वती ने शिव जी के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और शिव जी ने उन्हें गले लगा लिया। इस प्रकार, उनका पुनर्मिलन हुआ और वे फिर से अविभाज्य हो गए।


कथा का महत्व

यह कथा प्रेम, समर्पण और तपस्या की शक्ति को दर्शाती है। शिव और पार्वती का संबंध केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम कभी नहीं टूटता, भले ही कुछ समय के लिए वियोग हो जाए।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

Shiv parvati punarmilan katha

Mythological Tale: The Reunion of Shiva and Parvati


Background

According to Hindu mythology, the love and marriage of Lord Shiva and Goddess Parvati are unparalleled. Parvati, who was the reincarnation of Sati, pleased Shiva through intense penance and became his wife. However, there came a time when Shiva and Parvati were separated, only to reunite later. This story narrates their reunion.


The Separation of Shiva and Parvati

Once, Goddess Parvati was resting with Lord Shiva in their palace when suddenly, the divine sage Narada arrived. Shiva was deep in meditation and did not greet Narada. Parvati welcomed him with respect, but Narada felt that Shiva was ignoring him.

Angered, Narada said to Parvati, "O Goddess, your husband does not love you. He remains absorbed only in his meditation. If you wish, I can tell you a way to make Lord Shiva deeply devoted to you."

Curious, Parvati asked for the solution. Narada replied, "Gently stroke Shiva’s body. His divine energy will merge into you, and he will fall under your control."

Despite her doubts, Parvati followed his advice. As soon as she touched Shiva, his radiant energy (Tej) flowed into her, leaving Shiva powerless. Parvati panicked and begged for his forgiveness.

Shiva then said, "Parvati, you have absorbed my energy within yourself. Now, I am incomplete without you. You must return my power, or the balance of the universe will be disrupted."

Parvati tried to return Shiva’s energy, but it was impossible. Shiva declared, "Now, we must part ways. Until you restore my power, I shall remain distant from you."

Thus, Shiva and Parvati were separated.


Parvati’s Penance and Reunion

Without Shiva, Parvati was grief-stricken. She began performing intense penance once again, meditating in the caves of the Himalayas. Pleased by her devotion, Lord Brahma appeared before her and said, "O Goddess, I am pleased by your devotion and wish to grant you a boon."

Parvati replied, "I seek only the reunion with Lord Shiva."

Brahma said, "Shiva is pleased with your penance, but his divine energy still resides within you. You must return it through a special method."

Brahma gave her a sacred mantra and instructed her to chant it while worshipping Shiva. Parvati followed his advice.

Finally, Shiva appeared before her and said, "Parvati, I am pleased by your devotion and penance. Now, you may return my energy to me."

Parvati surrendered herself at Shiva’s feet, and Shiva embraced her. Thus, they were reunited and became inseparable once again.


Significance of the Tale

This story illustrates the power of love, devotion, and penance. The bond between Shiva and Parvati is not merely physical but deeply spiritual. It teaches us that true love never fades, even if separation occurs for a while.

॥ Om Namah Shivaya ॥