बाबा रामदेवजी एक प्रसिद्ध लोक संत और धार्मिक व्यक्तित्व थे, जिन्हें राजस्थान और भारत के अन्य हिस्सों में भगवान के अवतार के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्म 14वीं शताब्दी में राजस्थान के बाड़मेर जिले के रुणिचा गाँव में हुआ था। बाबा रामदेवजी को "रामसा पीर" या "रुणिचा वाले बाबा" के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा समान रूप से सम्मान दिया जाता है, जो उनकी सामाजिक एकता और धार्मिक सद्भाव की शिक्षाओं को दर्शाता है।
बाबा रामदेवजी ने समाज में छुआछूत, जातिगत भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और सभी वर्गों के लोगों को समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने गरीबों और दलितों की सेवा की और उनके उत्थान के लिए काम किया। उनकी शिक्षाएँ आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
रामदेवजी की मृत्यु के बाद, उनके अनुयायियों ने उनकी याद में रामदेवरा नामक स्थान पर एक मंदिर बनवाया, जो आज एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। हर साल भाद्रपद माह में यहाँ रामदेवरा मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। बाबा रामदेवजी की कथाएँ और भजन आज भी लोक संस्कृति का हिस्सा हैं और उनकी शिक्षाएँ लोगों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
बाबा रामदेवजी का जन्म 14वीं शताब्दी में राजस्थान के बाड़मेर जिले के रुणिचा गाँव में हुआ था। उनके जन्म को लेकर एक लोकप्रिय कथा प्रचलित है, जो उनके दिव्य और चमत्कारिक स्वरूप को दर्शाती है।
जन्म की कथा:
बाबा
रामदेवजी के पिता का नाम अजमालजी तंवर और माता का नाम मैणादे था। कहा जाता
है कि मैणादे को लंबे समय तक संतान नहीं थी। एक बार उन्होंने भगवान कृष्ण
की तपस्या की और उनसे एक पुत्र की माँग की। उनकी भक्ति और तपस्या से
प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके घर पुत्र
के रूप में जन्म लेंगे। इसी वरदान के फलस्वरूप मैणादे के घर बाबा रामदेवजी
का जन्म हुआ।
कथा के अनुसार, बाबा रामदेवजी का जन्म भाद्रपद माह की द्वितीया (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) को हुआ था। उनके जन्म के समय कई चमत्कारिक घटनाएँ घटीं, जिनसे यह स्पष्ट हो गया कि वे कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि दिव्य अवतार हैं। उनके जन्म के बाद से ही उनमें अलौकिक शक्तियाँ और दिव्य गुण दिखाई देने लगे।
परिवार:
बाबा
रामदेवजी के पिता अजमालजी तंवर एक राजपूत शासक थे, जो रुणिचा गाँव के शासक
थे। उनकी माता मैणादे एक धार्मिक और भक्तिमय महिला थीं। बाबा रामदेवजी का
विवाह नेतलदे (अमृतदे) नामक एक राजकुमारी से हुआ था। उनकी पत्नी भी उनके
साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सहयोग करती थीं।
बाबा रामदेवजी के जीवन की घटनाएँ और उनके चमत्कार उनके भक्तों के बीच आज भी प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म और जीवन लोक कल्याण और धार्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
बाबा रामदेवजी के बाल्यकाल से ही उनमें अलौकिक शक्तियाँ और दिव्य गुण दिखाई देने लगे थे। उनके बचपन की कई चमत्कारी घटनाएँ प्रसिद्ध हैं, जो उनके दिव्य स्वरूप को प्रमाणित करती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख घटनाएँ दी गई हैं:
1. अँधे को दृष्टि देना:
एक
बार बाबा रामदेवजी के गाँव में एक अँधा व्यक्ति आया। उसने बाबा से
प्रार्थना की कि वे उसकी अँधेपन की समस्या को दूर करें। बाबा ने अपनी दिव्य
शक्ति से उस अँधे व्यक्ति को दृष्टि प्रदान की। यह घटना देखकर गाँव वाले
हैरान रह गए और उन्हें भगवान का अवतार मानने लगे।
2. गायों का दूध बढ़ाना:
एक
बार गाँव में दूध की कमी हो गई। बाबा रामदेवजी ने अपनी चमत्कारी शक्ति से
गायों के थनों से दूध की धारा बहा दी। इससे गाँव वालों की समस्या दूर हो गई
और उन्हें बाबा की दिव्यता पर विश्वास हो गया।
3. मृत बच्चे को जीवनदान:
एक
बार एक गरीब महिला का बच्चा मर गया। वह बाबा रामदेवजी के पास रोती हुई
पहुँची और उनसे प्रार्थना की। बाबा ने अपनी दिव्य शक्ति से उस बच्चे को
जीवित कर दिया। यह घटना देखकर लोगों ने उन्हें भगवान का रूप मान लिया।
4. जल में चलने की शक्ति:
बाबा
रामदेवजी के बचपन में ही उनमें जल पर चलने की अद्भुत शक्ति थी। एक बार वे
अपने मित्रों के साथ तालाब के किनारे खेल रहे थे। उनके मित्रों ने उन्हें
चुनौती दी कि वे तालाब के पार जाएँ। बाबा ने तालाब के पानी पर चलकर उसे पार
कर लिया। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
5. अन्न की वर्षा:
एक
बार गाँव में अकाल पड़ गया और लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं था।
बाबा रामदेवजी ने अपनी दिव्य शक्ति से आकाश से अन्न की वर्षा करवाई। इससे
गाँव वालों की भूख मिट गई और उन्हें बाबा की महानता का एहसास हुआ।
6. साँप को दूध पिलाना:
एक
बार बाबा रामदेवजी ने एक साँप को दूध पिलाया। यह देखकर गाँव वाले डर गए,
लेकिन बाबा ने उन्हें बताया कि सभी जीवों में ईश्वर का वास होता है और
उन्हें प्रेम और दया से देखना चाहिए।
बाबा रामदेवजी के बाल्यकाल की ये चमत्कारी घटनाएँ उनके दिव्य स्वरूप और लोक कल्याण की भावना को दर्शाती हैं। उनकी ये कथाएँ आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं और उन्हें प्रेरणा देती हैं।
बाबा रामदेवजी ने अपने जीवनकाल में धार्मिक शिक्षाओं और समाज सुधार के माध्यम से लोगों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनकी शिक्षाएँ और समाज सुधार के प्रयास आज भी प्रासंगिक हैं। यहाँ उनके कुछ प्रमुख धार्मिक शिक्षाएं और समाज सुधार के कार्यों का वर्णन किया गया है:
धार्मिक शिक्षाएं:
भक्ति और समर्पण:
बाबा
रामदेवजी ने लोगों को भगवान की भक्ति और समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने
कहा कि ईश्वर की भक्ति करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह
सभी दुखों से मुक्त हो जाता है।
सभी धर्मों का सम्मान:
बाबा
रामदेवजी ने सभी धर्मों को समान माना और लोगों को धार्मिक सहिष्णुता का
पाठ पढ़ाया। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ
रहने और प्रेम से जीने की शिक्षा दी।
निष्काम कर्म:
बाबा
रामदेवजी ने निष्काम कर्म की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को बिना
किसी स्वार्थ के कर्म करना चाहिए और फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए।
सत्य और अहिंसा:
बाबा
रामदेवजी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा
कि सत्य बोलने और अहिंसा का पालन करने से मनुष्य का जीवन सफल होता है।
जातिगत भेदभाव का विरोध:
बाबा
रामदेवजी ने जातिगत भेदभाव और छुआछूत का विरोध किया। उन्होंने सभी वर्गों
के लोगों को समान माना और उन्हें एक साथ रहने की शिक्षा दी। उन्होंने
दलितों और गरीबों की सेवा की और उनके उत्थान के लिए काम किया।
स्त्री शिक्षा और सम्मान:
बाबा
रामदेवजी ने स्त्रियों के शिक्षा और सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि
स्त्रियों को भी पुरुषों के समान अधिकार मिलने चाहिए और उन्हें शिक्षित
होना चाहिए।
गरीबों की सेवा:
बाबा
रामदेवजी ने गरीबों और दलितों की सेवा को महत्व दिया। उन्होंने गरीबों को
भोजन, वस्त्र और आश्रय प्रदान किया और उनके कल्याण के लिए काम किया।
धार्मिक एकता:
बाबा
रामदेवजी ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता बढ़ाने का प्रयास
किया। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ रहने और प्रेम से जीने
की शिक्षा दी।
अंधविश्वासों का विरोध:
बाबा रामदेवजी ने अंधविश्वासों और रूढ़िवादी प्रथाओं का विरोध किया। उन्होंने लोगों को तर्क और विवेक के साथ जीवन जीने की शिक्षा दी।
बाबा रामदेवजी की धार्मिक शिक्षाएं और समाज सुधार के प्रयास आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी शिक्षाएँ मानवता, प्रेम, और एकता के मूल्यों को बढ़ावा देती हैं और समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
लोक-कल्याणकारी कार्य
बाबा रामदेवजी ने अपने जीवनकाल में अनेक लोक-कल्याणकारी कार्य किए, जिनका उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लोगों का कल्याण करना था। उनके ये कार्य न केवल उनके दिव्य स्वरूप को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि उनकी मानवता और सेवा भावना को भी दर्शाते हैं। यहाँ उनके कुछ प्रमुख लोक-कल्याणकारी कार्यों का वर्णन किया गया है
1. गरीबों और दलितों की सेवा:
बाबा रामदेवजी
ने गरीबों और दलितों की सेवा को अपना प्रमुख कर्तव्य माना। उन्होंने गरीबों
को भोजन, वस्त्र और आश्रय प्रदान किया और उनके कल्याण के लिए निरंतर काम
किया। उन्होंने समाज के उपेक्षित वर्ग को सम्मान और सहायता दिलाने का
प्रयास किया।
2. अकाल और महामारी में सहायता:
एक
बार राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ गया था। बाबा रामदेवजी ने अपनी दिव्य
शक्ति से अन्न की वर्षा करवाई और गाँव वालों की भूख मिटाई। इसके अलावा,
महामारी के समय में भी उन्होंने लोगों की सेवा की और उन्हें स्वास्थ्य लाभ
प्रदान किया।
3. जल संरक्षण और कुएँ खुदवाना:
बाबा
रामदेवजी ने जल संरक्षण के महत्व को समझा और गाँवों में कुएँ खुदवाए।
उन्होंने लोगों को जल के महत्व के बारे में जागरूक किया और उन्हें जल
संरक्षण के लिए प्रेरित किया। इससे गाँव वालों को पीने के पानी की समस्या
से निजात मिली।
4. शिक्षा का प्रसार:
बाबा
रामदेवजी ने शिक्षा के महत्व को समझा और लोगों को शिक्षित होने के लिए
प्रेरित किया। उन्होंने स्त्रियों और दलितों को भी शिक्षा प्राप्त करने के
लिए प्रोत्साहित किया। उनके प्रयासों से समाज में शिक्षा का प्रसार हुआ।
5. धार्मिक एकता और सद्भाव:
बाबा
रामदेवजी ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता और सद्भाव बढ़ाने का
प्रयास किया। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ रहने और प्रेम से
जीने की शिक्षा दी। उनके प्रयासों से समाज में धार्मिक सहिष्णुता बढ़ी।
6. अंधविश्वासों का विरोध:
बाबा
रामदेवजी ने अंधविश्वासों और रूढ़िवादी प्रथाओं का विरोध किया। उन्होंने
लोगों को तर्क और विवेक के साथ जीवन जीने की शिक्षा दी। उनके प्रयासों से
समाज में जागरूकता बढ़ी।
7. मृतकों को जीवनदान:
बाबा
रामदेवजी ने अपनी दिव्य शक्ति से कई मृतकों को जीवनदान दिया। यह घटनाएँ
उनकी दिव्यता और लोक कल्याण की भावना को प्रदर्शित करती हैं।
8. रोगियों का उपचार
बाबा
रामदेवजी ने अपनी चमत्कारी शक्ति से कई रोगियों का उपचार किया। उन्होंने
लोगों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया और उनके दुखों को दूर किया।
बाबा रामदेवजी के ये लोक-कल्याणकारी कार्य उनकी मानवता और सेवा भावना को दर्शाते हैं। उनके प्रयासों से समाज में सुधार हुआ और लोगों का जीवन सुखमय बना। उनकी ये कथाएँ आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं और उन्हें प्रेरणा देती हैं।
रुणिचा धाम की महिमा
रुणिचा धाम, जिसे रामदेवरा के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के बाड़मेर
जिले में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह स्थान बाबा रामदेवजी की पावन
भूमि माना जाता है और उनके भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र
है। रुणिचा धाम की महिमा अपार है और यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के
लिए आते हैं। यहाँ रुणिचा धाम की महिमा और इसके महत्व के बारे में विस्तार
से बताया गया है:
1. बाबा रामदेवजी का निवास स्थान:
रुणिचा धाम
बाबा रामदेवजी का निवास स्थान था। यहाँ उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश समय
बिताया और लोक कल्याण के कार्य किए। उनकी दिव्य उपस्थिति आज भी इस स्थान को
पवित्र और चमत्कारिक बनाती है।
2. रामदेवरा मेला:
रुणिचा
धाम में हर साल भाद्रपद माह में रामदेवरा मेला लगता है। यह मेला बाबा
रामदेवजी की याद में आयोजित किया जाता है और इसमें लाखों श्रद्धालु भाग
लेते हैं। मेले के दौरान यहाँ भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
किया जाता है।
3. मंदिर और समाधि स्थल:
रुणिचा
धाम में बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध मंदिर और समाधि स्थल है। मंदिर में
बाबा की मूर्ति स्थापित है और श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं। समाधि
स्थल पर बाबा की दिव्य उपस्थिति का एहसास होता है और यहाँ श्रद्धालु
मन्नतें माँगते हैं।
4. चमत्कारिक घटनाएँ:
रुणिचा
धाम में कई चमत्कारिक घटनाएँ घटी हैं, जिन्हें बाबा रामदेवजी की दिव्य
शक्ति का प्रमाण माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ आकर उनकी
मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और उन्हें बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. धार्मिक एकता का प्रतीक:
रुणिचा
धाम हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों के लिए एक पवित्र स्थान है।
बाबा रामदेवजी को "रामसा पीर" के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें दोनों
समुदायों द्वारा समान रूप से पूजा जाता है। यह स्थान धार्मिक एकता और
सद्भाव का प्रतीक है।
6. श्रद्धालुओं की आस्था:
रुणिचा
धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति अटूट है। यहाँ आकर वे
बाबा रामदेवजी के दर्शन करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ आकर उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं और
उन्हें मन की शांति मिलती है।
7. सामाजिक सेवा:
रुणिचा
धाम में बाबा रामदेवजी की शिक्षाओं के अनुसार सामाजिक सेवा के कार्य भी
किए जाते हैं। यहाँ गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और आश्रय प्रदान
किया जाता है। इससे समाज के उपेक्षित वर्ग को सहायता मिलती है।
8. प्राकृतिक सौंदर्य:
रुणिचा
धाम प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ का शांत और सुंदर वातावरण
श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति प्रदान करता है। यह स्थान धार्मिक और
प्राकृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
रुणिचा धाम की महिमा अपार है और यह स्थान बाबा रामदेवजी की दिव्यता और लोक कल्याण की भावना को प्रदर्शित करता है। यहाँ आकर श्रद्धालु बाबा की कृपा प्राप्त करते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाते हैं।
भक्तों की प्रसिद्ध कहानियाँ
बाबा रामदेवजी के भक्तों की कई प्रसिद्ध कहानियाँ हैं, जो उनकी दिव्यता और
भक्तों पर उनकी कृपा को दर्शाती हैं। ये कहानियाँ भक्तों की आस्था और बाबा
की चमत्कारिक शक्तियों को प्रदर्शित करती हैं। यहाँ कुछ प्रसिद्ध कहानियों
का वर्णन किया गया है:
1. धन्ना भक्त की कहानी:
धन्ना भक्त बाबा
रामदेवजी के प्रमुख भक्तों में से एक थे। एक बार धन्ना भक्त ने बाबा से
प्रार्थना की कि वे उनके खेत में अन्न की अच्छी फसल दें। बाबा ने उनकी
प्रार्थना सुन ली और उनके खेत में भरपूर फसल उग आई। धन्ना भक्त ने बाबा को
धन्यवाद दिया और उनकी भक्ति और भी दृढ़ हो गई।
2. मेहा भक्त की कहानी:
मेहा
भक्त बाबा रामदेवजी के एक अन्य प्रसिद्ध भक्त थे। एक बार मेहा भक्त ने
बाबा से प्रार्थना की कि वे उनके बीमार बच्चे को ठीक कर दें। बाबा ने अपनी
दिव्य शक्ति से उस बच्चे को स्वस्थ कर दिया। मेहा भक्त ने बाबा की कृपा से
प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गए।
3. रूपा भक्त की कहानी:
रूपा
भक्त बाबा रामदेवजी की एक अन्य प्रसिद्ध भक्त थीं। एक बार रूपा भक्त ने
बाबा से प्रार्थना की कि वे उनके गाँव में पानी की कमी को दूर करें। बाबा
ने उनकी प्रार्थना सुन ली और गाँव में एक कुआँ खुदवा दिया। इससे गाँव वालों
को पीने के पानी की समस्या से निजात मिली। रूपा भक्त ने बाबा की कृपा से
प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गईं।
4. लखी बनजारा की कहानी:
लखी
बनजारा बाबा रामदेवजी के एक प्रसिद्ध भक्त थे। एक बार लखी बनजारा ने बाबा
से प्रार्थना की कि वे उनके व्यापार में सफलता दें। बाबा ने उनकी प्रार्थना
सुन ली और उनके व्यापार में भरपूर सफलता मिली। लखी बनजारा ने बाबा की कृपा
से प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गए।
5. भीमा भक्त की कहानी:
भीमा
भक्त बाबा रामदेवजी के एक अन्य प्रसिद्ध भक्त थे। एक बार भीमा भक्त ने
बाबा से प्रार्थना की कि वे उनके खोए हुए पुत्र को वापस लाएँ। बाबा ने अपनी
दिव्य शक्ति से उस पुत्र को वापस ला दिया। भीमा भक्त ने बाबा की कृपा से
प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गए।
6. कालू भक्त की कहानी:
कालू
भक्त बाबा रामदेवजी के एक प्रसिद्ध भक्त थे। एक बार कालू भक्त ने बाबा से
प्रार्थना की कि वे उनके गाँव में महामारी को रोकें। बाबा ने उनकी
प्रार्थना सुन ली और महामारी को रोक दिया। कालू भक्त ने बाबा की कृपा से
प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गए।
7. रत्ना भक्त की कहानी:
रत्ना
भक्त बाबा रामदेवजी की एक प्रसिद्ध भक्त थीं। एक बार रत्ना भक्त ने बाबा
से प्रार्थना की कि वे उनके पति को एक गंभीर बीमारी से ठीक कर दें। बाबा ने
अपनी दिव्य शक्ति से उस पति को स्वस्थ कर दिया। रत्ना भक्त ने बाबा की
कृपा से प्रसन्न होकर उनकी भक्ति में और भी लीन हो गईं।
ये कहानियाँ बाबा रामदेवजी की दिव्यता और उनके भक्तों की आस्था को प्रदर्शित करती हैं। इन कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि बाबा रामदेवजी अपने भक्तों की प्रार्थनाओं को सुनते हैं और उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। ये कहानियाँ आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं और उन्हें प्रेरणा देती हैं।
बाबा रामदेवजी के प्रमुख भजन और वाणी
बाबा रामदेवजी ने अपने जीवनकाल में अनेक भजन और वाणियाँ गाईं, जो उनकी
भक्ति, ज्ञान और लोक कल्याण की भावना को प्रदर्शित करती हैं। इन भजनों और
वाणियों में उन्होंने भक्ति, समर्पण, सत्य, अहिंसा और सामाजिक एकता का
संदेश दिया है। यहाँ बाबा रामदेवजी के कुछ प्रमुख भजन और वाणियों का वर्णन
किया गया है:
प्रमुख भजन:
1. "रामदेव रा भजन":
रामदेव रा भजन गावो, रामदेव रा भजन गावो। धरती आसमान गावे, रामदेव रा भजन गावो॥
2. "रामसा पीर रा भजन":
हिंदू मुस्लिम एक हो जावो, रामसा पीर रा भजन गावो॥ रामसा पीर रा भजन गावो, रामसा पीर रा भजन गावो।
3. "रुणिचा वाले बाबा"
भक्तों के दुख हरो, करो उद्धार॥ रुणिचा वाले बाबा, तेरी महिमा अपार।
प्रमुख वाणी:
1. "सत्य और अहिंसा"
सत्य बोलो, अहिंसा का पालन करो। ईश्वर की भक्ति में लीन रहो, सुखी जीवन जियो॥
2. "भक्ति और समर्पण"
ईश्वर की कृपा से सभी दुख दूर होंगे॥ भक्ति करो, समर्पण करो।
3. "धार्मिक एकता"
ईश्वर एक है, उसकी भक्ति में लीन रहो॥ हिंदू मुस्लिम एक हो जाओ, प्रेम से रहो।
4. "निष्काम कर्म"
ईश्वर की कृपा से सभी काम सफल होंगे॥ कर्म करो, फल की इच्छा मत करो।
5. "गरीबों की सेवा"
गरीबों की सेवा करो, उनके दुख दूर करो। ईश्वर की कृपा से सभी सुखी होंगे॥
बाबा रामदेवजी के ये भजन और वाणियाँ उनकी भक्ति, ज्ञान और लोक कल्याण की भावना को प्रदर्शित करती हैं। इन्हें गाकर और सुनकर लोगों को आंतरिक शांति और प्रेरणा मिलती है। ये भजन और वाणियाँ आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध हैं और उन्हें सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
समाधि कथा और सिद्ध अवतार
बाबा रामदेवजी की समाधि कथा और उनके सिद्ध अवतार के बारे में कई प्रसिद्ध
कथाएँ और मान्यताएँ हैं। ये कथाएँ उनकी दिव्यता और लोक कल्याण की भावना को
प्रदर्शित करती हैं। यहाँ बाबा रामदेवजी की समाधि कथा और उनके सिद्ध अवतार
के बारे में विस्तार से बताया गया है:
समाधि कथा:
बाबा रामदेवजी ने अपने जीवनकाल में अनेक चमत्कार और लोक कल्याण के कार्य
किए। उनकी समाधि कथा उनके अंतिम दिनों और समाधि लेने की घटना से जुड़ी है।
यह कथा उनके भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है।
समाधि की तैयारी:
बाबा
रामदेवजी ने अपने भक्तों को बताया कि वे इस संसार से जाने वाले हैं और
उन्हें समाधि लेनी है। उन्होंने अपने भक्तों को समझाया कि मृत्यु जीवन का
एक अटल सत्य है और उन्हें इससे डरना नहीं चाहिए।
समाधि स्थल:
बाबा
रामदेवजी ने रुणिचा धाम में अपने समाधि स्थल का चयन किया। उन्होंने अपने
भक्तों को बताया कि यह स्थान उनकी दिव्य उपस्थिति का केंद्र बनेगा और यहाँ
आकर भक्तों को मन की शांति मिलेगी।
समाधि लेना:
बाबा
रामदेवजी ने भाद्रपद माह की द्वितीया (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) को समाधि
ली। उन्होंने अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया और कहा कि वे हमेशा उनके साथ
रहेंगे और उनकी प्रार्थनाओं को सुनेंगे। उनकी समाधि के बाद उनके भक्तों ने
उनकी याद में एक मंदिर बनवाया, जो आज रामदेवरा के नाम से प्रसिद्ध है।
सिद्ध अवतार:
भगवान कृष्ण का अवतार:
बाबा
रामदेवजी को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी माता
मैणादे ने भगवान कृष्ण की तपस्या की और उनसे एक पुत्र की माँग की। भगवान
कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके घर पुत्र के रूप में जन्म
लेंगे। इसी वरदान के फलस्वरूप बाबा रामदेवजी का जन्म हुआ।
दिव्य शक्तियाँ:
बाबा
रामदेवजी में अनेक दिव्य शक्तियाँ थीं। उन्होंने अपनी चमत्कारिक शक्तियों
से अनेक लोगों के दुख दूर किए और उन्हें सुखी जीवन प्रदान किया। उनकी दिव्य
शक्तियों के कारण उन्हें एक सिद्ध अवतार माना जाता है।
लोक कल्याण:
बाबा
रामदेवजी ने अपने जीवनकाल में अनेक लोक कल्याण के कार्य किए। उन्होंने
गरीबों, दलितों और उपेक्षित वर्ग के लोगों की सेवा की और उनके उत्थान के
लिए काम किया। उनके इन कार्यों के कारण उन्हें एक सिद्ध अवतार माना जाता
है।
धार्मिक एकता:
बाबा रामदेवजी ने
हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता और सद्भाव बढ़ाने का प्रयास किया।
उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ रहने और प्रेम से जीने की
शिक्षा दी। उनके इन प्रयासों के कारण उन्हें एक सिद्ध अवतार माना जाता है।
बाबा रामदेवजी की समाधि कथा और उनके सिद्ध अवतार की कथाएँ उनकी दिव्यता और
लोक कल्याण की भावना को प्रदर्शित करती हैं। इन कथाओं से यह स्पष्ट होता है
कि बाबा रामदेवजी एक सिद्ध अवतार थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक
चमत्कार और लोक कल्याण के कार्य किए। ये कथाएँ आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध
हैं और उन्हें प्रेरणा देती हैं।