हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की उत्पत्ति राहु और केतु से जुड़ी हुई है। यह कथा समुद्र मंथन (अमृत मंथन) के प्रसंग में आती है।
समुद्र मंथन और अमृत प्राप्ति:
देवताओं
और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिससे अमृत (अमरत्व का अमृत)
प्राप्त हुआ। अमृत बाँटने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण किया
और केवल देवताओं को ही अमृत पिलाने की योजना बनाई।
राहु का छल:
एक असुर राहु (जिसका वास्तविक नाम स्वर्भानु
था) ने देवताओं का रूप धारण करके अमृत पी लिया। लेकिन सूर्य (सूर्य देव)
और चंद्रमा (चंद्र देव) ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को सूचित किया।
विष्णु द्वारा राहु का वध:
विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पी चुकने के कारण राहु का सिर (राहु) और धड़ (केतु) दोनों अमर हो गए।
ग्रहण का कारण:
राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से शत्रुता रखते हैं, क्योंकि उन्होंने ही उन्हें पहचानकर विष्णु को बताया था।
इसलिए, जब भी राहु या केतु सूर्य या चंद्रमा के पास आते हैं, तो वे उन्हें निगलने का प्रयास करते हैं, जिससे सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण होता है।
चूँकि राहु का केवल सिर है, इसलिए वह सूर्य या चंद्रमा को निगल तो लेता है, लेकिन वे उसके गले से नीचे नहीं जाते और फिर बाहर आ जाते हैं। इसीलिए ग्रहण अस्थायी होता है।
सूर्य ग्रहण: जब राहु सूर्य को ग्रसित करता है।
चंद्र ग्रहण: जब केतु चंद्रमा को ग्रसित करता है।
अमावस्या (Amavasya): जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है, तो चंद्रमा का अंधकारमय भाग पृथ्वी की ओर होता है। इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता। पौराणिक मान्यताओं में इसे पितृों से जुड़ा समय माना जाता है।
पूर्णिमा (Purnima): जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो चंद्रमा पूरी तरह प्रकाशित होता है। इस दिन को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है, जैसे गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा आदि।
हिंदू शास्त्रों में ग्रहण को अशुभ माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन बनाने या खाने से मना किया जाता है।
मान्यता है कि ग्रहण के समय राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए सावधानियाँ बरती जाती हैं।
ग्रहण के बाद स्नान, दान और मंत्र जाप करने का विधान है।
According to Hindu mythology, the origin of solar and lunar eclipses is linked to Rahu and Ketu. This story is part of the Samudra Manthan (Churning of the Ocean of Milk) episode.
Samudra Manthan and the Nectar of Immortality:
The Devas (gods) and Asuras (demons) jointly churned the ocean to obtain Amrita (the nectar of immortality). When the Amrita emerged, Lord Vishnu took the form of Mohini, a beautiful enchantress, to distribute it only among the Devas.
Rahu’s Deception:
An Asura named Svarbhanu (later known as Rahu) disguised himself as a Deva and drank the Amrita. However, Surya (the Sun God) and Chandra (the Moon God) recognized him and alerted Lord Vishnu.
Vishnu Beheads Rahu:
Enraged, Vishnu used his Sudarshan Chakra to sever Rahu’s head from his body. But since Rahu had already consumed the Amrita, both his head (Rahu) and body (Ketu) became immortal.
Rahu and Ketu hold a grudge against the Sun and Moon for exposing them.
To take revenge, Rahu (the head) tries to swallow the Sun, causing a Solar Eclipse (Surya Grahan).
Ketu (the headless body) tries to swallow the Moon, causing a Lunar Eclipse (Chandra Grahan).
Since Rahu has no body, the Sun and Moon pass through his throat and reappear, making eclipses temporary.
Amavasya (New Moon): When the Moon is between the Earth and the Sun, its dark side faces Earth, making it invisible. In Hindu beliefs, this day is associated with ancestral rituals (Pitru Paksha).
Purnima (Full Moon): When the Earth is between the Sun and Moon, the Moon is fully illuminated. This day holds spiritual significance (e.g., Guru Purnima, Sharad Purnima).
Eclipses are considered inauspicious in Hinduism.
People avoid cooking, eating, or performing religious rituals during an eclipse.
It is believed that negative energies (Rahu-Ketu’s influence) are strongest during this time.
After the eclipse, bathing, charity (daan), and chanting mantras are recommended for purification.