लता मंगेशकर
(स्वर-साम्राज्ञी)
| जन्म तिथि | 28 September 1929 |
| जन्म स्थान | इंदौर, भारत |
| पिता | दीनानाथ मंगेशकर |
| माता | शेवन्ती मंगेशकर |
| शिक्षा | संगीत की शिक्षा अपने पिता से प्राप्त |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
| पुरस्कार | राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, भारतरत्न |
| मृत्यु | 6 फरवरी 2022 मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल |
जीवन परिचय--
लता मंगेशकर जन्म 28 सितंबर, 1929 इंदौर भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका हैं, जिनका छ: दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। हालाँकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रूप में रही है। अपनी बहन आशा भोंसले के साथ लता जी का फ़िल्मी गायन में सबसे बड़ा योगदान रहा है।
लता की जादुई आवाज़ के भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है। लता दीदी को भारत सरकार ने 'भारतरत्न' से सम्मानित किया है।
भारत की सबसे प्रतिष्ठित पार्श्वगायिका हैं जिन्होंने कई फिल्मी और गैरफिल्मी यादगार गीत गाए हैं। दुनिया भर में उनके करोड़ों प्रशंसक हैं जो लता को मां सरस्वती का अवतार मानते हैं। लता ने हजार से ज्यादा हिंदी फिल्मों में गीत गाए हैं। मुख्यत: उन्होंने हिंदी, मराठी और बंगाली में गाने गाए हैं। वे 36 से ज्यादा भाषाओं में गीत गा चुकी हैं जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।
वे पंडित दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती की बड़ी बेटी हैं। लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे जबकि मां गुजराती थीं। शेवंती उनकी दूसरी पत्नी थी। उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था जिसकी मृत्यु के बाद दीनानाथ ने नर्मदा की छोटी बहन शेवंती को अपनी जीवन संगिनी बनाया।
पिता दिनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक थे।
उन्होने अपना पहला गाना मराठी फिल्म 'किती हसाल' (कितना हसोगे?) (1942) में गाया था।
लता मंगेशकर को सबसे बड़ा ब्रेक फिल्म महल से मिला। उनका गाया "आयेगा आने वाला" सुपर डुपर हिट था।
लता मंगेशकर अब तक 20 से अधिक भाषाओं में 30000 से अधिक गाने गा चुकी हैं।
लता मंगेशकर ने 1980 के बाद से फ़िल्मो में गाना कम कर दिया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान देने लगी।
लता ही एकमात्र ऐसी जीवित व्यक्ति हैं जिनके नाम से पुरस्कार दिए जाते हैं।
लता मंगेशकर ने आनंद घन बैनर तले फ़िल्मो का निर्माण भी किया है और संगीत भी दिया है।
वे हमेशा नंगे पाँव गाना गाती हैं।
हार्डीकर से मंगेशकर--
पंडित दीनानाथ का सरनेम हार्डीकर था जिसे बदल कर उन्होंने मंगेशकर कर दिया। वे गोआ में मंगेशी के रहने वाले थे और इसके आधार पर उन्होंने अपना नया सरनेम चुना।
लता के जन्म के समय उनका नाम हेमा रखा गया था जिसे बदल कर लता कर दिया गया। यह नाम दीनानाथ को अपने नाटक 'भावबंधन' के एक महिला किरदार लतिका के नाम से सूझा। लता के बाद मीना, आशा, उषा और हृदयनाथ का जन्म हुआ।
क्यों नहीं स्कूल गईं लता? --
बचपन से ही लता को घर में गीत-संगीत और कला का माहौल मिला और वे उसी ओर आकर्षित हुईं। पांच वर्ष की उम्र से ही लता को उनके पिता संगीत का पाठ पढ़ाने लगे। उनके पिता के नाटकों में लता अभिनय भी करने लगीं। लता को स्कूल भी भेजा गया, लेकिन पहले ही दिन उनकी टीचर से अनबन हो गई।
लता अपने साथ अपनी छोटी बहन आशा को भी स्कूल ले गईं। टीचर ने आशा को कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी इससे लता को गुस्सा आ गया और वे फिर कभी स्कूल नहीं गईं।
13 वर्ष की उम्र में परिवार का बोझ --
1942 में लता मंगेशकर पर मुसीबत का पहाड़ टूट गया। उनके पिता की जब मृत्यु हुई तब लता मात्र 13 वर्ष की थी। लता पर परिवार का बोझ आ गया। नवयुग चित्रपट मूवी कंपनी के मालिक मास्टर विनायक, मंगेशकर परिवार के नजदीकी लोगों ने लता का करियर गायिका और अभिनेत्री के रूप में संवारने के लिए मदद की।
लता को अभिनय पसंद नहीं था, लेकिन पैसो की तंगी के कारण उन्होंने कुछ हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया। मंगला गौर (1942), माझे बाल (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी मां (1945), जीवन यात्रा (1946) जैसी फिल्मों में लता ने छोटी-मोटी भूमिकाएं अदा की।
लता को सदाशिवराव नेवरेकर ने एक मराठी फिल्म में गाने का अवसर 1942 में दिया। लता ने गाना रिकॉर्ड भी किया, लेकिन फिल्म के फाइनल कट से वो गाना हटा दिया गया। 1942 में रिलीज हुई मंगला गौर में लता की आवाज सुनने को मिली। इस गाने की धुन दादा चांदेकर ने बनाई थी। 1943 में प्रदर्शित मराठी फिल्म 'गजाभाऊ' में लता ने हिंदी गाना 'माता एक सपूत की दुनिया बदल दे तू' गाया।
1945 में लता मंगेशकर मुंबई शिफ्ट हो गईं और इसके बाद उनका करियर आकार लेने लगा। वहां पर उन्होंने भिंडीबाजार घराना के उस्ताद अमन अली खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया। फिल्म बड़ी मां (1945) में गाए भजन 'माता तेरे चरणों में' और 1946 में रिलीज हुई 'आपकी सेवा में' लता द्वारा गाए गीत 'पा लागूं कर जोरी' ने लोगों का ध्यान लता की ओर खींचा।
लता को किया रिजेक्ट--
वसंत देसाई और गुलाम हैदर जैसे संगीतकारों के सम्पर्क में लता आईं और उनका करियर निखरने लगा। लता के गुलाम हैदर मेंटर बन गए। वे लता को दिग्गज फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी के पास ले गए जो उस समय 'शहीद' (1948) नामक फिल्म बना रहे थे।
हैदर ने लता को लेने की सिफारिश मुखर्जी से की। लता को सुनने के बाद मुखर्जी ने यह कहते हुए लता को लेने से इंकार कर दिया कि लता की आवाज बहुत पतली है। इससे हैदर भड़क गए। वे लता की प्रतिभा को पहचान चुके थे। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में लता छा जाएगी और ये सारे निर्माता-निर्देशक लता के चरणों में गिर कर लता से अपनी फिल्मों में गाने की मिन्नत करेंगे।
गुलाम हैदर ने लता से 'मजबूर' (1948) में एक गीत 'दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोड़ा' गवाया। यह गीत लता का पहला हिट माना जा सकता है।
गुलाम हैदर ने लता में जो प्रतिभा देखी थी इसका जिक्र अक्सर लता करती रही हैं। लता के अनुसार गुलाम हैदर उनके सही मायनों में गॉडफादर थे और उन्हें लता की प्रतिभा में पूरा विश्वास था।
खुद की शैली लता ने की विकसित :--
लता जब पार्श्वगायन के क्षेत्र में अपना करियर बना रही थी तब नूरजहां, शमशाद बेगम जैसी गायिकाओं का बोलबाला था। लता पर भी इन गायिकाओं का प्रभाव था और वे उसी शैली में गाती थीं। लता समझ गईं कि यदि उन्हें आगे बढ़ना है तो अपनी शैली विकसित करनी होगी और उन्होंने यही किया। उन्होंने हिंदी और उर्दू के उच्चारण सीखे।
आएगा आने वाला से नहीं देखा पीछे मुड़ कर--
1949 में एक फिल्म रिलीज हुई 'महल'। इसमें खेमचंद प्रकाश ने लता से 'आएगा आने वाला' गीत गवाया जिसे मधुबाला पर फिल्माया गया था। यह गीत सुपरहिट रहा। इस गीत ने एक तरह से ऐलान कर दिया कि आएगा आने वाला आ चुका है। यह गीत लता के बेहतरीन गीतों में से एक माना जाता है और आज भी सुना जाता है। इस गीत की कामयाबी के बाद लता ने फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
1950 से 1970 का बेहतरीन दौर--
1950 से 1970 का दौर भारतीय फिल्म संगीत के लिए बेहतरीन माना जाता है। जब एक से बढ़कर एक गायक, संगीतकार, गीतकार और फिल्मकार थे। सबने मिल कर बेहतरीन फिल्में और संगीत रचा और लता मंगेशकर के स्वरों में ढल कर एक से बढ़कर एक गीत सुनने को मिले।
अनिल बिस्वास, शंकर जयकिशन, सचिनदेव बर्मन, नौशाद, हुस्नलाल भगतराम, सी. रामचंद्र, सलिल चौधरी, सज्जाद-हुसैन, वसंत देसाई, मदन मोहन, खय्याम, कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, राहुल देव बर्मन जैसे नामी संगीतकार मधुर धुनों का निर्माण कर रहे थे और लता मंगेशकर सभी की पहली पसंद थी।
इन संगीतकारों के साथ लता ने अनेक यादगार गीत गाए जिनकी लोकप्रियता की कोई सीमा नहीं रही। लता के आवाज का माधुर्य आम जन के सिर चढ़ कर बोला और लता मंगेशकर देखते ही देखते चोटी की गायिका बन गईं। महिला गायिकाओं में उनके इर्दगिर्द कोई भी नजर नहीं आता था।
कई फिल्में महज इसलिए सफल रही क्योंकि लता मंगेशकर के गाए गाने लोकप्रिय हुए और इस कारण ही फिल्म चल निकली। अपने सहज सरल स्वभाव के कारण लता फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और संगीतकारों की पहली पसंद बन गई। हर गाने को लेकर उनकी मेहनत गाने में झलकती थी।
हर गाने को लता विशेष बना देती थीं। चाहे वो रोमांटिक गाना हो, राग आधारित हो, भजन हो, देशभक्ति से ओतप्रोत हो। उनके द्वारा गाए गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को सुन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भी आंख भर आई थी।
दीदार, बैजू बावरा, उड़न खटोला, मदर इंडिया, बरसात, आह, श्री 420, चोरी चोरी, सज़ा, हाउस नं 44, देवदास, मधुमति, आज़ाद, आशा, अमरदीप, बागी, रेलवे प्लेटफॉर्म, देख कबीरा रोया, चाचा जिंदाबाद, मुगल-ए-आजम, दिल अपना और प्रीत पराई, बीस साल बाद, अनपढ़, मेरा साया, वो कौन थी, आए दिन बहार के, मिलन, अनिता, शगिर्द, मेरे हमदम मेरे दोस्त, दो रास्ते, जीने की राह जैसी सैकड़ों फिल्मों में लता ने मधुर नगमे गाए।
संगीतकार लता के पास कठिन से कठिन गीत लाते थे और लता बड़ी आसानी से उन्हें गा देती थी। राज कपूर, बिमल रॉय, गुरुदत्त, मेहबूब खान, कमाल अमरोही जैसे दिग्गज फिल्मकार की पहली पसंद लता ही रही।
1970 से फिल्म संगीत में गिरावट आना शुरू हो गई, लेकिन लता ने अपने आपको इससे बचाए रखा। उनके गाने क्वालिटी लिए होते थे और वे सफलता के शीर्ष पर बनी रहीं।
इस दौर में भी उन्होंने पाकीज़ा, प्रेम पुजारी, अभिमान, हंसते जख्म, हीर रांझा, अमर प्रेम, कटी पतंग, आंधी, मौसम, लैला मजनूं, दिल की राहें, सत्यम शिवम सुंदरम जैसी कई फिल्मों में यादगार गीत गाए।
अस्सी और नब्बे के दशक में भी गूंजते रहे नगमे
अस्सी के दशक में कई नए संगीकार उभर कर आएं। अनु मलिक, शिवहरी, आनंद-मिलिंद, राम-लक्ष्मण ने भी लता से गीत गवाना पसंद किया।
सिलसिला, फासले, विजय, चांदनी, कर्ज, एक दूजे के लिए, आसपास, अर्पण, नसीब, क्रांति, संजोग, मेरी जंग, राम लखन, रॉकी, फिर वही रात, अगर तुम न होते, बड़े दिल वाला, मासूम, सागर, मैंने प्यार किया, बेताब, लव स्टोरी, राम तेरी गंगा मैली जैसी सैकड़ों फिल्म में लता के गाए गीत गली-गली गूंजते रहे।
90 के दशक में लता ने गाना कम कर दिया। इस दौर में भी डर, लम्हें, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, मोहब्बतें, दिल से, पुकार, ज़ुबैदा, रंग दे बसंती, 1942 ए लव स्टोरी जैसी फिल्मों में लता को सुनने को मिला। हालांकि वे समय-समय पर कहती भी रहीं कि आज के दौर के संगीतकार उनके पास अच्छे गीत का प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें गीत गाने में कोई समस्या नहीं है।
लगभग सात दशक से भारतीय फिल्में लता के गीतों से लकदक होती रहीं। मधुबाला से लेकर तो माधुरी दीक्षित तक जैसी तमाम हीरोइनों को उन्होंने आवाज दी। लता की आवाज कभी भी किसी भी अभिनेत्री पर मिसफिट नहीं लगी। शाहरुख खान ने तो एक बार लता के सामने कहा भी था कि काश उन पर भी कोई लता की आवाज में गीत फिल्माया जाता।
सभी के परिवार का हिस्सा--
लता मंगेशकर हमेशा अपने सौम्य स्वभाव के लिए जानी गईं। तमाम फिल्म निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, गायक, हीरो, हीरोइनों से उनके पारिवारिक रिश्ते रहे। दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, अमिताभ बच्चन, यश चोपड़ा, राहुलदेव बर्मन, मुकेश, किशोर कुमार से उनके घनिष्ठ संबंध रहे। पीढ़ी दर पीढ़ी उनके संबंध मधुर रहे। लता को हर किसी ने अपने परिवार का ही हिस्सा माना।
इक्के-दुक्के रहे विवाद
अक्सर सफेद साड़ी में नजर आने वाली लता ने विवादों से हमेशा अपने आपको दूर रखा। सचिन देव बर्मन से जरूर एक बार उनका मनमुटाव हो गया था और दोनों ने पांच साल तक साथ काम नहीं किया। इसी तरह मोहम्मद रफी और लता गीतों की रॉयल्टी पर एकमत नहीं हो सके और उन्होंने भी कुछ समय नहीं गाया। सी. रामचंद्र और ओपी नैयर से उनका छोटा-मोटा विवाद रहा। हालांकि इन्हें विवाद की बजाय मनमुटाव कहना ही ठीक होगा जो कि आमतौर पर साथ में काम करने वालों के बीच हो जाता है।
लता मंगेशकर को दिया था जहर?
वर्ष 1962 में लता की जान लेने की कोशिश की गई। लता को एक दिन सुबह उठते ही उन्हें पेट में जबरदस्त दर्द हुआ। उनकी हालत ऐसी थी कि अपनी जगह से हिलने में भी उन्हें दिक्कत होने लगी। लता जी को स्लो प्वॉइजन दिया गया था। हालांकि उन्हें मारने की कोशिश किसने की, इस बारे में आज तक खुलासा नहीं हो पाया।
लता और शादी--
लता मंगेशकर की शादी नहीं हो पाई। बचपन से ही परिवार का बोझ उन्हें उठाना पड़ा। इस दुनियादारी में वे इतना उलझ गईं कि शादी के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली।
बताया जाता है कि संगीतकार सी. रामचंद्र ने लता मंगेशकर के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लता जी ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि लता ने इस बारे में कभी खुल कर नहीं कहा, परंतु बताया जाता है कि सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं।
एक इंटरव्यू में सी. रामचंद्र ने कहा था कि लता उनसे शादी करना चाहती थीं, परंतु उन्होंने इंकार कर दिया क्योंकि वह पहले से शादीशुदा थे। लेकिन रोचक बात यह है कि लता को इंकार करने की बात कहने वाले सी. रामचंद्र ने इस घटना के बाद अपनी एक अन्य महिला मित्र शांता को दूसरी पत्नी बना लिया था।
1958 में सी. रामचंद्र के साथ व्यावसायिक रिश्ते खत्म कर लेने के बारे में लता ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक रेकॉर्डिस्ट इंडस्ट्री में मेरे बारे में उल्टी-सीधी बातें फैला रहा था और मैंने सी. रामचंद्र से कहा कि उसे हटा दें। परंतु वह उस रेकॉर्डिस्ट के साथ काम करने पर ही अड़े हुए थे। इस बात के बाद मैंने उनके साथ काम न करने का फैसला किया।
कितने गीत गाए लता ने?
लता मंगेशकर के कौन से गीत पसंद किए गए या लोकप्रिय रहे इसकी सूची बहुत लंबी है। लता ने ढेर सारे गाने गाए जिनमें से अधिकांश पसंद किए गए। किसी को मदन मोहन के संगीत में लता की गायकी पसंद आई तो किसी को नौशाद के संगीत में। सब की अपनी-अपनी पसंद रही। लता ने कितने गाने गाए इसको लेकर भी बढ़ा-चढ़ा कर दावे किए गए।
खुद लता ने कहा कि वे नहीं जानती कि उन्होंने कितने गाने गाए क्योंकि उन्होंने कोई रिकॉर्ड नहीं रखा। गिनीज़ बुक में भी उनका नाम शामिल किया गया था, लेकिन इसको लेकर भी खासा विवाद हुआ। 25 या 30 हजार गानों की बातें करना बेमानी है। लगभग 5 से 6 हजार गीतों में लता ने अपनी आवाज दी है।
मान-सम्मान और पुरस्कार :--
लता मंगेशकर को ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिले। जितने मिले उससे ज्यादा के लिए उन्होंने मना कर दिया। 1970 के बाद उन्होंने फिल्मफेअर को कह दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नहीं लेंगी और उनकी बजाय नए गायकों को यह दिया जाना चाहिए। लता को मिले प्रमुख सम्मान और पुरस्कार इस तरह से हैं:
भारत सरकार पुरस्कार :--
- 1969 - पद्म भूषण
- 1989 - दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
- 1999 - पद्म विभूषण
- 2001 - भारत रत्न
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार :--
- 1972 - फिल्म परी के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- 1974 - फ़िल्म कोरा कागज़ के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
- 1990 - फिल्म लेकिन के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
फिल्मफेयर अवार्ड्स--
- 1959 - "आजा रे परदेसी" (मधुमती)
- 1963 - "काहे दीप जले कही दिल" (बीस साल बाद)
- 1966 - "तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा" (खानदान)
- 1970 - "आप मुझसे अच्छे लगने लगे" (जीने की राह से)
- 1993 - फ़िल्मफ़ेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
- 1994 - "दीदी तेरा देवर दीवाना" (हम आपके हैं कौन) के लिए विशेष पुरस्कार
- 2004 - फ़िल्मफ़ेयर स्पेशल अवार्ड : 50 साल पूरे करने वाले फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड्स के अवसर पर एक गोल्डन ट्रॉफी प्रदान की गई
महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार :--
- 1966 - सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका
- 1966 - सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक ('आनंदघन' नाम से)
- 1977 - जैत रे जैत के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका
- 1997 - महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार
- 2001 - महाराष्ट्र रत्न
- बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन अवार्ड्स
- बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर इन फिल्मों के लिए
- 1964 - वो कौन थी
- 1967 - मिलन
- 1968 - राजा और रंक
- 1969 - सरस्वतीचंद्र
- 1970 - दो रास्ते
- 1971 - तेरे मेरे सपने
- 1972 - पाकीज़ा
- 1973 - बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म)
- 1973 - अभिमान
- 1975 - कोरा कागज़
- 1981 - एक दूजे के लिए
- 1983 - A Portrait Of Lataji
- 1985 - राम तेरी गंगा मैली
- 1987 - अमरसंगी (बंगाली फिल्म)
- 1991 - लेकिन
अंतिम समय और निधन--
6 फरवरी 2022 को COVID-19 और संबंधित जटिलताओं के कारण लता मंगेशकर का निधन मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ। पूरे देश ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।विरासत--
लता मंगेशकर ने 30,000 से अधिक गीत 36 भाषाओं में गाए। उनकी आवाज़ आज भी उतनी ही ताज़ा और प्रेरणादायक है। वह हमेशा भारतीय संगीत की अमर स्वर कोकिला के रूप में याद की जाएँगी।Lata Mangeshkar – FAQ--
Q1. लता मंगेशकर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
Ans: Lata Mangeshkar का जन्म 28 September 1929 को इंदौर, मध्य प्रदेश, India में हुआ था।
Q2. लता मंगेशकर का असली नाम क्या था?
Ans: उनका असली नाम Hema Mangeshkar था, जिसे बाद में बदलकर Lata रखा गया।
Q3. लता मंगेशकर को "Swar Kokila" क्यों कहा जाता है?
Ans: उनकी आवाज़ की मिठास, सुर की शुद्धता और भावनाओं की गहराई के कारण उन्हें "Swar Kokila" यानी Nightingale of India कहा जाता है।
Q4. लता मंगेशकर ने कितने गाने गाए?
Ans: उन्होंने लगभग 30,000 से अधिक songs 36 भाषाओं में गाए।
Q5. लता मंगेशकर को भारत का कौन-कौन सा बड़ा सम्मान मिला?
Ans: उन्हें Bharat Ratna (2001), Padma Bhushan (1969), Padma Vibhushan (1999) और Dadasaheb Phalke Award (1989) समेत कई honours मिले।
Q6. लता मंगेशकर का निधन कब हुआ?
Ans: उनका निधन 6 February 2022 को मुंबई के Breach Candy Hospital में हुआ।
Q7. क्या लता मंगेशकर ने शादी की थी?
Ans: नहीं, उन्होंने जीवनभर शादी नहीं की और अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित किया।
Q8. लता मंगेशकर का पहला superhit song कौन सा था?
Ans: 1949 की फिल्म "Mahal" का song "Aayega Aanewala" उनका पहला superhit था।
Q9. लता मंगेशकर ने किन-किन music directors के साथ काम किया?
Ans: उन्होंने Naushad, Shankar-Jaikishan, S.D. Burman, Madan Mohan, Laxmikant-Pyarelal, A.R. Rahman समेत लगभग सभी top music directors के साथ काम किया।
Q10. लता मंगेशकर की last recorded song कौन सा था?
Ans: उनका आखिरी recorded song 2019 में रिलीज़ हुआ था – "Saugandh Mujhe Is Mitti Ki" जो Indian Army को tribute था