योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ जी के बारे मेंं

योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ

(अजय सिंह बिष्ट)

जन्म तिथि 05 June 1972
जन्म स्थान पंचुर, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड
पिता आनन्द सिंह बिष्ट
माता सावित्री देवी
शिक्षा 1992 में श्रीनगर के हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से इन्होंने गणित में बीएससी
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू

जीवन परिचय :-

योगी आदित्यनाथ एक हिंदू साधु और भारतीय राजनीतिक नेता हैं। वे भारतीय संविधान सभा के एक प्रमुख सदस्य हैं।भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र राजनेता हैं , जो एक महत्वपूर्ण चुनावी राज्य है। वह गोरखपुर में एक हिंदू मठ, गोरखनाथ हिंदू मठ, गोरखनाथ मठ के महंत या मुख्य पुजारी भी हैं । आदित्यनाथ को उनकी वकालत के लिए जाना जाता हैहिंदुत्व और 2017 से भाजपा के चुनाव अभियानों के दौरान अग्रणी भूमिका निभाई है। उनकी सरकार द्वारा कथित रूप से अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने के लिए उत्खनन मशीनों के उपयोग ने " बुलडोजर बाबा " की उपाधि दी है ( बाबा एक शब्द है जिसका अर्थ "पिता" हो सकता है और इसका उपयोग हिंदू तपस्वियों को संबोधित करने के लिए किया जाता है)।


आदित्यनाथ गोरखपुर में एक हिंदू मठ, गोरखनाथ मठ के महंत (मुख्य पुजारी) भी हैं, वह अपने आध्यात्मिक "पिता" महंत अवैद्यनाथ की मृत्यु के बाद सितंबर 2014 से इस पद पर हैं। वह एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। उनकी छवि एक हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादी और एक सामाजिक रूढ़िवादी की है।


प्रारंभिक जीवन :-

5 जून 1972 को उत्तराखण्ड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश; देखें: उत्तर प्रदेश का विभाजन) के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गाँव के एक गढ़वाली क्षत्रिय परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ। इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट है जो एक फॉरेस्ट रेंजर थे, तथा इनकी मां का नाम सावित्री देवी है। 20 अप्रैल 2020 को उनके पिता आनन्द सिंह बिष्ट की मृत्यु हो गई। अपनी माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़ी बहनों व एक बड़े भाई के बाद ये पांचवें थे एवं इनसे और दो छोटे भाई हैं।

इन्होंने 1977 में टिहरी के गजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की व 1987 में यहाँ से दसवीं की परीक्षा पास की। सन् 1989 में ऋषिकेश के श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए ये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। 1992 में श्रीनगर के हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से इन्होंने गणित में बीएससी की परीक्षा पास कीकोटद्वार में रहने के दौरान इनके कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें इनके सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान स्नातकोत्तर करने का इनका प्रयास असफल रह गया। इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में पुनः विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश तो लिया लेकिन राम मंदिर आंदोलन का प्रभाव और प्रवेश को लेकर परेशानी से उनका ध्यान अन्य ओर बंट गया। 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने ये गोरखपुर आए एवं गोरखपुर में अपने चाचा महंत अवैद्यनाथ के शरण में ही चले गए और दीक्षा ले ली। 1994 में ये पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया।

12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के निधन के बाद इन्हें यहाँ का महंत बनाया गया। 2 दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया |          


मिलिए योगी आदित्यनाथ के परिवार से :-

योगी आदित्यनाथ की तीन बहनें हैं। शशि पयाल और दो अन्य बहनें हैं। शशि ही ज्यादातर मीडिया के सामने आती हैं। पौड़ी गढ़वाल में शशि माता भुवनेश्वरी देवी मंदिर के पास चाय-नाश्ते की दुकान चलाती हैं। 

एक इंटरव्यू में शशि से पूछा गया कि अब तो आपका भाई मुख्यमंत्री है। देश का इतना बड़ा नेता है। फिर भी आप लोग ऐसी हालत में क्यों रहती हैं? इसका जवाब देते हुए शशि ने कहा था, 'हर पार्टी के नेता के घरवाले भी राजनीति में आ जाते हैं। हमारे यहां ऐसा नहीं है। अगर हम भी उन्हीं के तरह बन जाएंगे तो ये परिवारवाद हो जाएगा। हम नहीं चाहते और भाई (योगी आदित्यनाथ) का भी यही बोलना है कि अपना कमाओ और खाओ.... मेहनत करो।' 

भाई क्या करते हैं? 

योगी के बड़े भाई का नाम मानवेंद्र मोहन है। वह एक कॉलेज में काम करते हैं। मानवेंद्र के बाद योगी आदित्यनाथ का नंबर आता है। इसके बाद दो लोग उनसे छोटे हैं जिनका नाम शैलेंद्र मोहन और महेंद्र मोहन है। शैलेंद्र सेना में सूबेदार हैं। उनकी तैनाती भारत-चीन बॉर्डर पर है। महेंद्र भी एक स्कूल में काम करते हैं। 

सेना में सूबेदार पद पर तैनात शैलेंद्र से एक न्यूज चैनल ने पूछा था कि क्या उन्हें अपने बड़े भाई से मिलने का वक्त मिल जाता है? तब उन्होंने जवाब दिया था, 'मैं उनसे एक बार दिल्ली में मिला था, जब वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे।'

शैलेंद्र ने आगे कहा, 'महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) ने मुझसे कहा कि अपनी क्षमता के हिसाब से देश की सेवा करनी चाहिए।' शैलेंद्र बताते हैं कि वो और उनका पूरा परिवार मुख्यमंत्री योगी को महाराज जी कहता है। 

शैलेंद्र कहते हैं, किसी बड़े नेता की ऐसी पारिवारिक विरासत लोगों को हौसला देती है। हौसला इस बात का कि अब भी ईमानदारी की कोई कीमत नहीं है। हौसला इस बात का कि बड़े होने से कुछ नहीं होता, बड़ा काम आपको बड़ा बनाता है और हौसला इस बात का भी कि सत्ता की ताकत का दुरुपयोग करने से अब भी लोग बचे हुए हैं।


राजनैतिक जीवन :-

सबसे पहले 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत गए। तब इनकी उम्र केवल 26 वर्ष थी।  वे बारहवीं लोक सभा (1998-99) के सबसे युवा सांसद थे। 1999 में ये गोरखपुर से पुनः सांसद चुने गए।

अप्रैल 2002 में इन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी। 2004 में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता। 2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इन्हें एक हेलीकॉप्टर भी दिया गया।

19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री पद सौंपा गया।


भारतीय जनता पार्टी से सम्बन्ध :-

आदित्यनाथ के भारतीय जनता पार्टी के साथ रिश्ता एक दशक से पुराना है। वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। इससे पहले उनके पूर्वाधिकारी तथा गोरखनाथ मठ के पूर्व महन्त, महन्त अवैद्यनाथ भी भारतीय जनता पार्टी से 1991 तथा 1996 का लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।

लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन :-

योगी आदित्यनाथ सबसे पहले 1998 में गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की। लेकिन उसके बाद हर चुनाव में उनका जीत का अंतर बढ़ता गया और वे 1999, 2004, 2009 तथा 2014 में सांसद चुने गए।  इन्होंने अप्रैल 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी बनायी।


विवाद :-

7 सितम्बर 2008 को योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे। यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से भी अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहूलुहान कर दिया। आदित्यनाथ को गोरखपुर दंगों के दौरान तब गिरफ्तार किया गया जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान चली गयी।  जिलाधिकारी ने बताया कि वह बुरी तरह जख्मी है। तब अधिकारियों ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया परन्तु आदित्यनाथ उस जगह पर जाने को अड़ गए। तब उन्होंने शहर में लगे कर्फ्यू को हटाने की मांग की। अगले दिन उन्होंने शहर के मध्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति देने से मना कर दिया। आदित्यनाथ ने भी इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ़्तारी दी। आदित्यनाथ को सीआरपीसी की धारा 151A, 146, 147, 279, 506 के तहत जेल भेज दिया गया। उनपर कार्यवाही का असर हुआ कि मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फूंक दिए गए, जिसका आरोप उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लगा।


यह दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गए। उनकी गिरफ़्तारी के अगले दिन जिलाधिकारी हरि ओम और पुलिस प्रमुख राजा श्रीवास्तव का तबादला हो गया। कथित रूप से आदित्यनाथ के ही दबाव के कारण मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश सरकार को यह कार्यवाही करनी पड़ी।


योगी धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के लिए काफी चर्चा में रहे। 2005 में योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर 1800 ईसाइयों का शुद्धीकरण कर हिन्दू धर्म में शामिल कराया। ईसाइयों के इस शुद्धीकरण का काम उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किया गया था।


मुख्यमंत्री निर्वाचन :-

योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। शपथ समारोह लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में हुआ। इनके साथ दो उप-मुख्यमंत्री भी बनाये गए। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार दो उप-मुख्यमंत्री बने। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। मंच पर अखिलेश यादव और मुलायम सिंह भी मौजूद रहे।


व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम :-

भगवामय बेदाग जीवन- योगी आदित्यनाथ जी महाराज एक खुली किताब हैं जिन्हे कोई भी कभी भी पढ़ सकता है। उनका जीवन एक योगी का जीवन है, सन्त का जीवन है। पीड़ित, गरीब, असहाय के प्रति करुणा, किसी के भी प्रति अन्याय एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध तनकर खड़ा हो जाने का निर्भीक मन, विचारधारा एवं सिद्धान्त के प्रति अटल, लाभ-हानि, मान-सम्मान की चिन्ता किये बगैर साहस के साथ किसी भी सीमा तक जाकर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का प्रयास उनकी पहचान है।


पीड़ित मानवता को समर्पित जीवन -

वैभवपूर्ण ऐश्वर्य का त्यागकर कंटकाकीर्ण पगडंडियों का मार्ग उन्होंने स्वीकार किया है। उनके जीवन का उद्देश्य है - ‘न त्वं कामये राज्यं, न स्वर्ग ना पुनर्भवम्। कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामर्तिनाशनम्।। अर्थात् ‘‘हे प्रभो! मैं लोक जीवन में राजपाट पाने की कामना नहीं करता हूँ। मैं लोकोत्तर जीवन में स्वर्ग और मोक्ष पाने की भी कामना नहीं करता। मैं अपने लिये इन तमाम सुखों के बदले केवल प्राणिमात्र के कष्टों का निवारण ही चाहता हूँ।’’ पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज को निकट से जानने वाला हर कोई यह जानता है कि वे उपर्युक्त अवधारणा को साक्षात् जीते हैं। वरना जहाँ सुबह से शाम तक हजारों सिर उनके चरणों में झुकते हों, जहाँ भौतिक सुख और वैभव के सभी साधन एक इशारे पर उपलब्ध हो जायं, जहाँ मोक्ष प्राप्त करने के सभी साधन एवं साधना उपलब्ध हों, ऐसे जीवन का प्रशस्त मार्ग तजकर मान-सम्मान की चिंता किये बगैर, यदा-कदा अपमान का हलाहल पीते हुए इस कंटकाकीर्ण मार्ग का वे अनुसरण क्यों करते?


सामाजिक समरसता के अग्रदूत-

‘जाति-पाँति पूछे नहिं कोई-हरि को भजै सो हरि का होई’ गोरक्षपीठ का मंत्र रहा है। महायोगी गोरक्षनाथ ने भारत की जातिवादी-रूढ़िवादिता के विरुद्ध जो उद्घोष किया, उसे इस पीठ ने अनवरत जारी रखा। गोरक्षपीठाधीश्वर परमपूज्य महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज के पद-चिह्नों पर चलते हुए पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने भी हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों, जातिवाद, क्षेत्रवाद, नारी-पुरुष, अमीर-गरीब आदि विषमताओं, भेदभाव एवं छुआछूत पर कठोर प्रहार करते हुए, इसके विरुद्ध अनवरत अभियान जारी रखा है। गाँव-गाँव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएँ ‘ मंत्र का उन्होंने उद्घोष किया।


भ्रष्टाचार-आतंकवाद-अपराध विरोधी संघर्ष के नायक -

योगी जी के भ्रष्टाचार-विरोधी तेवर के हम सभी साक्षी हैं। अस्सी के दशक में गुटीय संघर्ष एवं अपराधियों की शरणगाह होने की गोरखपुर की छवि योगी जी के कारण बदली । अपराधियों के विरुद्ध आम जनता एवं व्यापारियों के साथ खड़ा होने के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मनोबल टूटे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में योगी जी के संघर्षों का ही प्रभाव था कि माओवादी-जेहादी आतंकवादी इस क्षेत्र में अपने पॉव नही पसार पाए। नेपाल सीमा पर राष्ट्र विरोधी शक्तियों की प्रतिरोधक शक्ति के रुप में हिन्दु युवा वाहिनी सफल रही है। आज उनका यही स्वरूप माननीय मुख्यमंत्री के रूप में सबके सामने है। प्रदेश भ्रष्टाचार-आतंक एव अपराध मुक्त होने की राह पर तेजी से बढ़ चला है।


शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा के पुजारी-

सेवा के क्षेत्र में शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दिये जाने के गोरक्षपीठ द्वारा जारी अभियान को पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने भी और सशक्त ढंग से आगे बढ़ाया। योगी जी के नेतृत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा अनवरत आज चार दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएँ गोरखपुर एवं महाराजगंज जनपद में कुष्ठरोगियों एवं वनटांगियों के बच्चों की निःशुल्क शिक्षा से लेकर बी0एड0 एवं पालिटेक्निक जैसे रोजगारपरक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का भगीरथ प्रयास जारी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय ने अमीर-गरीब सभी के लिये एक समान उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करायी है। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों ने जनता के घर तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुचायी जाती हैं।


विकास के पथ पर अनवरत गतिशील - योगी आदित्यनाथ जी महाराज के व्यक्तित्व में सन्त और जननेता के गुणों का अद्भुत समन्वय है। ऐसा व्यक्तित्व विरला ही होता है। यही कारण है कि एक तरफ जहॉ वे धर्म-संस्कृति के रक्षक के रूप में दिखते हैं तो दूसरी तरफ वे जनसमस्याओं के समाधान हेतु संवेदनशील रहते हैं। सड़क, बिजली, पानी, खेती आवास, दवाई और पढ़ाई आदि की समस्याओं से प्रतिदिन जुझती जनता के दर्द को समझने वाले जन-नेता के रूप में उनकी ख्याति के आज सभी साक्षी बन रहे हैं।


“बुलडोजर बाबा ”

एक रैली में योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीतिज्ञ और भाजपा नेता योगी आदित्यनाथ एक चुनावी रैली में बुलडोजर का उपयोग करते हुए।

पदभार ग्रहण करने के बाद से योगी आदित्यनाथ का अटूट संबंध बन गया है।बुलडोजर , लाक्षणिक और अन्यथा दोनों तरह से। उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल तेजी से किया है, कथित तौर पर अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने में उनका इस्तेमाल किया है । कुछ लोगों ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने न केवल स्थानीय अपराधियों को बल्कि कार्यकर्ताओं और सरकार के विरोधियों को भी निशाना बनाया है।


समय के साथ, आदित्यनाथ ने बुलडोजर और उससे जुड़ी आक्रामकता को एक अभियान उपकरण में बदल दिया। उन्होंने स्थानीय मीडिया द्वारा गढ़े गए और अपने राजनीतिक विरोधियों द्वारा अपमानजनक रूप से इस्तेमाल किए गए "बुलडोजर बाबा " की उपाधि को अपनाया, और एक मजबूत व्यक्ति के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए इसका लाभ उठाया । हिंदू साधु के भगवा वस्त्र पहने हुए, वह राजनीतिक रैलियों में खुदाई करने वाली मशीनों पर सवार एक विशिष्ट और नाटकीय व्यक्ति की तरह दिखते हैं और भाषणों और नारों में बुलडोजर का जिक्र करते हैं ।


योगी आदित्यनाथ के प्रेरणादायक अनमोल वचन :-

"अगर हमारे एक हाथ में माला है, तो दूसरे हाथ में भाला भी है।"
अर्थ: धर्म के साथ-साथ राष्ट्र की रक्षा के लिए शक्ति भी जरूरी है।
"मैं एक खुली किताब हूँ, जिसे कोई भी पढ़ सकता है।"
अर्थ: पारदर्शिता और ईमानदारी ही एक नेता की असली पहचान है।
"हमारी नीति साफ है – न तुष्टिकरण करेंगे, न भेदभाव करेंगे।"
अर्थ: सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास ही शासन का मूल है।
"राष्ट्र प्रथम, शेष बाद में।"
अर्थ: देशहित सर्वोपरि है, बाकी सभी बातें उसके बाद आती हैं।
"जो समाज के लिए नुकसानदायक है, उसे दंड मिलना चाहिए।"
अर्थ: कानून का राज स्थापित करना हर शासन की जिम्मेदारी है।
"जो अपराध करेगा, वो कहीं भी हो – बख्शा नहीं जाएगा।"
अर्थ: अपराध और अपराधी दोनों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति।
"एक सन्यासी का कर्तव्य है – समाज को सुरक्षित रखना और असत्य के खिलाफ खड़ा होना।"
अर्थ: संयम और धर्म के साथ समाज की सेवा भी आवश्यक है।
"हमने ये साबित किया है कि इच्छाशक्ति हो तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।"
अर्थ: नेतृत्व में संकल्प और साहस हो तो बदलाव निश्चित है।
"हमें सिर्फ सरकार नहीं, व्यवस्था बदलनी है।"
अर्थ: सिस्टम सुधार कर ही सशक्त भारत का निर्माण हो सकता है।
"विकास सबका होगा, तुष्टिकरण किसी का नहीं।"
अर्थ: समानता और न्याय आधारित शासन की प्रतिबद्धता।


प्रश्न–उत्तर: योगी आदित्यनाथ के बारे में :-

प्रश्न 1: योगी आदित्यनाथ का असली नाम क्या है?

उत्तर: योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है।


प्रश्न 2: योगी आदित्यनाथ किस धार्मिक संस्था से जुड़े हुए हैं?

उत्तर: वे गोरखनाथ मठ के महंत हैं, जो नाथ संप्रदाय से संबंधित है।


प्रश्न 3: योगी आदित्यनाथ किस राज्य के मुख्यमंत्री हैं?

उत्तर: वे उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री हैं।


प्रश्न 4: योगी आदित्यनाथ ने पहली बार लोकसभा चुनाव कब लड़ा था?

उत्तर: उन्होंने पहली बार 1998 में गोरखपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।


प्रश्न 5: योगी आदित्यनाथ किस पार्टी से जुड़े हैं?

उत्तर: वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हैं।


प्रश्न 6: योगी आदित्यनाथ किस विचारधारा को मानते हैं?

उत्तर: वे राष्ट्रवादी और हिन्दुत्ववादी विचारधारा को मानते हैं।


प्रश्न 7: योगी आदित्यनाथ का शिक्षा क्षेत्र में क्या योगदान रहा है?

उत्तर: उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्कूल और कॉलेज शुरू किए हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा दिया है।


प्रश्न 8: योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक नीति क्या है?

उत्तर: वे जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन और क्राइम की नीति पर काम करते हैं।


प्रश्न 9: योगी आदित्यनाथ की प्रसिद्धि का कारण क्या है?

उत्तर: उनकी कठोर प्रशासनिक शैली, हिंदू विचारधारा और गोरखपीठ की जिम्मेदारी ने उन्हें प्रसिद्ध बनाया।


प्रश्न 10: योगी आदित्यनाथ जी के कुछ अनमोल वचन क्या हैं?

उत्तर:-

"माला भी हमारे हाथ में है, और भाला भी।"

"राष्ट्र प्रथम, बाकी बाद में।"

"विकास सबका होगा, तुष्टिकरण किसी का नहीं।"

Biography:

Yogi Adityanath is a Hindu monk and an Indian political leader. He is a senior member of the Indian Constituent Assembly. He is a leader of the Bharatiya Janata Party (BJP) and is the only politician to have completed two consecutive full terms as the Chief Minister of Uttar Pradesh, which is a key electoral state. He is also the Mahant (chief priest) of the Gorakhnath Math, a Hindu monastery in Gorakhpur. Adityanath is known for his advocacy of Hindutva and has played a leading role in BJP’s election campaigns since 2017. His government’s use of bulldozers to demolish allegedly illegal properties has earned him the title “Bulldozer Baba” (Baba meaning “father” and also used to address Hindu ascetics).

Adityanath has been the Mahant of the Gorakhnath Math since September 2014, after the death of his spiritual “father,” Mahant Avaidyanath. He is also the founder of the Hindu Yuva Vahini, a Hindu nationalist organization. His image is that of a Hindutva nationalist and a social conservative.


Early Life:

Yogi Adityanath was born on 5 June 1972 in a Garhwali Rajput family in Panchur village, Yamkeshwar tehsil, Pauri Garhwal district of Uttarakhand (then part of Uttar Pradesh; see: Division of Uttar Pradesh). His father, Anand Singh Bisht, was a forest ranger, and his mother’s name is Savitri Devi. His father passed away on 20 April 2020. He was the fifth of seven children, with three elder sisters and one elder brother, and two younger brothers.

He began his education in 1977 at a local school in Gaja, Tehri, and completed his 10th standard in 1987. In 1989, he passed his intermediate examination from Shri Bharat Mandir Inter College, Rishikesh. In 1990, while pursuing graduation, he joined the Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP). In 1992, he earned his B.Sc. in Mathematics from Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University, Srinagar.

While living in Kotdwar, his room was burgled, and his educational certificates were stolen, which led to the failure of his attempt to pursue a postgraduate degree in Science from Gorakhpur. Later, he enrolled again for an M.Sc. in Science in Rishikesh, but the Ram Mandir movement and other issues diverted his attention. In 1993, during his M.Sc. in Mathematics, he came to Gorakhpur to research Guru Gorakhnath, and entered the shelter of his uncle, Mahant Avaidyanath, where he took initiation.

In 1994, he became a full ascetic, changing his name from Ajay Singh Bisht to Yogi Adityanath. After Mahant Avaidyanath’s death on 12 September 2014, he became the Mahant of Gorakhnath Temple and, two days later, was formally enthroned as the Peethadheeshwar (head of the temple) according to Nath Panth tradition.


Meet Yogi Adityanath’s Family:

Yogi Adityanath has three sisters — Shashi Payal and two others. Shashi is the one who often appears in the media. She runs a tea-snack shop near Mata Bhuvneshwari Devi Temple in Pauri Garhwal.

When asked in an interview why the family still lives in modest conditions despite her brother being a powerful Chief Minister, Shashi replied:

“In many parties, leaders’ families also enter politics. This is not the case in our family. If we do the same, it will be family politics. We don’t want that, and my brother also says — earn your living through your own hard work.”

Yogi’s elder brother, Manvendra Mohan, works in a college. After him comes Yogi Adityanath, followed by two younger brothers — Shailendra Mohan and Mahendra Mohan. Shailendra serves as a Subedar in the Indian Army, stationed at the India-China border. Mahendra works in a school.

When asked if he gets time to meet his elder brother, Shailendra replied:

“I met him once in Delhi after he became Chief Minister.”

He added,

“Maharaj Ji (Yogi Adityanath) told me that one should serve the nation according to their ability.”

Shailendra says that the entire family addresses Yogi Adityanath as “Maharaj Ji” and that his example inspires people to believe that honesty still has value, greatness comes from great work, and power should not be misused.


Political Career:

In 1998, Yogi Adityanath contested his first election from Gorakhpur as a BJP candidate and won at the age of just 26, becoming the youngest MP of the 12th Lok Sabha (1998–99). He was re-elected from Gorakhpur in 1999.

In April 2002, he founded the Hindu Yuva Vahini. He won his third Lok Sabha election in 2004, and again in 2009 with a margin of over 200,000 votes. In 2014, he won his fifth consecutive term, again with a margin of over 200,000 votes. In the 2014 general elections, BJP gained a majority, after which 12 Assembly by-elections were held in Uttar Pradesh. Adityanath was heavily involved in campaigning, though the results were disappointing. In the 2017 Assembly elections, BJP’s national president had Yogi Adityanath campaign statewide, even providing him a helicopter.

On 19 March 2017, in a meeting of the BJP’s legislative assembly members, Yogi Adityanath was elected leader and sworn in as Chief Minister of Uttar Pradesh.


Relation with BJP:

Yogi Adityanath’s association with the BJP goes back over a decade. He has considerable influence in eastern Uttar Pradesh. Before him, his predecessor and former Mahant of Gorakhnath Math, Mahant Avaidyanath, had also won the Lok Sabha elections from BJP in 1991 and 1996.


Election Performance:

Adityanath’s first election win in 1998 from Gorakhpur was by a narrow margin, but thereafter, his victory margins steadily increased, and he won in 1999, 2004, 2009, and 2014. In April 2002, he formed the Hindu Yuva Vahini.


Controversies:

On 7 September 2008, Yogi Adityanath survived a deadly attack in Azamgarh. Over 100 vehicles were surrounded, and many people injured. He was arrested during the Gorakhpur riots after a Hindu youth was killed during firing at the Muslim festival of Muharram. Officials advised him not to visit the site, but he insisted and demanded the lifting of the curfew. He later held a condolence meeting without permission, resulting in his arrest under various IPC sections. Following his arrest, parts of the Mumbai-Gorakhpur Godan Express were set on fire, allegedly by members of his Hindu Yuva Vahini.

The riots spread to six districts and three divisions of eastern UP. The next day, two top officials were transferred, reportedly under his pressure.

Yogi Adityanath has been active against religious conversions and in “Ghar Wapsi” (reconversion to Hinduism). In 2005, he reportedly “purified” 1,800 Christians in Etah district, bringing them back into Hinduism.


Becoming Chief Minister:

On Sunday, 19 March 2017, Yogi Adityanath took oath as Chief Minister of Uttar Pradesh at the Kanshiram Smriti Upvan in Lucknow. For the first time in the state’s history, two Deputy Chief Ministers were also appointed. The ceremony was attended by PM Narendra Modi, BJP President Amit Shah, senior party leaders, and also Samajwadi Party leaders Akhilesh Yadav and Mulayam Singh Yadav.


Various Aspects of His Personality:

Saffron, spotless life: Yogi Adityanath is like an open book. He lives the life of a saint, showing compassion to the poor and oppressed, standing fearlessly against injustice and corruption, and protecting religion and culture without concern for personal gain.

Life dedicated to suffering humanity: Rejecting luxury, he has chosen the thorny path to remove the sufferings of living beings. His purpose is —

“I do not desire a kingdom, nor heaven, nor rebirth. I only wish to remove the suffering of living beings.”

Pioneer of social harmony: Following the Gorakhnath tradition against casteism and discrimination, he promotes unity through community meals, urging people to “sit together, eat together.”

Leader against corruption, terrorism, and crime: He changed Gorakhpur’s image from a hub of criminal gangs to a safer region. His efforts prevented Maoist and jihadi terrorists from gaining ground in eastern UP.

Promoter of education and health: Under his leadership, the Maharana Pratap Education Council runs over 40 institutions, offering free education to leprosy patients’ children and tribals, along with affordable, quality education. The Guru Shri Gorakhnath Hospital provides high-standard healthcare for all.

Continuous progress on the path of development: He is both a saint and a public leader, sensitive to public problems and actively addressing them.


“Bulldozer Baba”

Since taking office, Yogi Adityanath has been strongly associated with the bulldozer — both literally and symbolically — as a tool to maintain law and order by demolishing alleged illegal properties. Critics call it politically motivated, targeting not only criminals but also activists and opponents.

Over time, he embraced the nickname “Bulldozer Baba,” using it to build his strongman image, even riding bulldozers at rallies.


Inspirational Quotes by Yogi Adityanath:

  • “If there is a rosary in one hand, there should be a spear in the other.”
    Meaning: Along with religion, strength is necessary to protect the nation.

  • “I am an open book that anyone can read.”
    Meaning: Transparency and honesty are a leader’s true identity.

  • “Our policy is clear — no appeasement, no discrimination.”
    Meaning: Development for all, favoritism for none.

  • “Nation first, everything else later.”
    Meaning: National interest is supreme.

  • “Whoever harms society should be punished.”
    Meaning: Establishing the rule of law is the government’s duty.

  • “Whoever commits a crime will not be spared, wherever they are.”
    Meaning: Zero tolerance for crime and criminals.

  • “A monk’s duty is to protect society and stand against falsehood.”
    Meaning: Service to society with discipline and faith.

  • “We have proved that with willpower, the impossible can be made possible.”
    Meaning: Determined leadership ensures change.

  • “We do not just want to change the government, but the system.”
    Meaning: Reforming the system is key to building a strong India.

  • “Development for all, appeasement for none.”
    Meaning: Commitment to equality and justice.


Q&A about Yogi Adityanath:

Q1: What is Yogi Adityanath’s real name?
A: Ajay Singh Bisht.

Q2: Which religious institution is he associated with?
A: He is the Mahant of Gorakhnath Math, linked to the Nath tradition.

Q3: Which state is he the Chief Minister of?
A: Uttar Pradesh.

Q4: When did he contest his first Lok Sabha election?
A: In 1998, from Gorakhpur, and won.

Q5: Which party is he associated with?
A: Bharatiya Janata Party (BJP).

Q6: What ideology does he follow?
A: Nationalist and Hindutva ideology.

Q7: What has been his contribution to education?
A: Established schools and colleges in Gorakhpur and nearby areas, focusing on rural education.

Q8: What is his administrative policy?
A: Zero tolerance for corruption and crime.

Q9: Why is he famous?
A: For his strict administrative style, Hindu ideology, and leadership of Gorakhpur Math.

Q10: Some of his inspirational quotes?
A:

  • “Rosary in one hand, spear in the other.”

  • “Nation first, everything else later.”

  • “Development for all, appeasement for none.”