गीता रबारी
(कच्छ की कोयल)
| जन्म तिथि | 31 December 1996 |
| उम्र | 28 वर्ष(2025) |
| राशि | मकर |
| जन्म स्थान | टप्पर गांव, कच्छ, गुजरात, भारत |
| निवास स्थान | कच्छ, गुजरात |
| पिता | कांजीभाई रबारी |
| माता | नाम ज्ञात नहीं |
| कद | लगभग 5 फीट 3 इंच |
| वजन | लगभग 50-55 किलोग्राम |
| वैवाहिक हि. | अविवाहित |
| जीवनसंगी | पृथ्वी रबारी |
| शिक्षा | स्थानीय सरकारी स्कूल |
| पेशा | भजन गायिका |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
| पुरस्कार | 2019 में, उन्होंने 12वां गौरववंता गुजराती पुरस्कार जीता। |
| भाषाएँ | गुजराती, हिंदी |
| नेट वर्थ | ₹5 से ₹7 करोड़ के बीच |
गीता रबारी– जीवनी--
कच्छ की कोयल, जो हर दिल को छू जाए
गीता रबारी, जिन्हें 'कच्छ की कोयल' के नाम से भी जाना जाता है, गुजराती लोक संगीत की एक प्रमुख गायिका हैं। उनका जन्म 31 दिसंबर 1996 को कच्छ जिले के टप्पर गांव में हुआ था। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली गीता रबारी ने अपनी गायन यात्रा की शुरुआत बचपन में की थी। उनके पिता कांजीभाई रबारी समान ढोने का काम करते थे, और वे गीता को संगीत कार्यक्रमों में ले जाते थे, जिससे उनका गायन में रुचि बढ़ी।
गीता रबारी की गायन यात्रा स्कूल के कार्यक्रमों से शुरू हुई, और धीरे-धीरे उन्होंने मंच पर गायन करना शुरू किया। उनकी आवाज़ में एक विशेष मिठास और भावनात्मक गहराई है, जो श्रोताओं को आकर्षित करती है। उनकी गायन शैली में कच्छ की लोक धुनों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
उनका प्रसिद्ध गीत "रोना सेर मा" 2017 में रिलीज़ हुआ था, जिसने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई हिट गीतों की प्रस्तुति दी, जिनमें "श्री राम घर आए" शामिल है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहा।
गीता रबारी के कार्यक्रमों में नवरात्रि के दौरान विशेष उत्साह देखा जाता है। वह गुजरात के विभिन्न हिस्सों में लाइव प्रदर्शन करती हैं, और उनके कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। उनकी गायन शैली और मंच पर उनकी उपस्थिति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।
उनकी उपलब्धियों में "वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ यूरोप" और "लंदन" में सम्मानित होना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने 2023 में अपने लोक दायरे से 4 करोड़ रुपये की राशि गौशाला को दान की, जो उनके सामाजिक योगदान को दर्शाता है।
गीता रबारी की गायन यात्रा एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाती है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, प्रतिभा और मेहनत से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। उनकी आवाज़ में एक विशेष मिठास और भावनात्मक गहराई है, जो श्रोताओं को आकर्षित करती है। उनकी गायन शैली में कच्छ की लोक धुनों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
गीता रबारी का जीवन और करियर एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाता है कि कठिनाइयों के बावजूद, यदि किसी के पास जुनून और समर्पण हो, तो वह किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।
गीता रबारी, जिन्हें "कच्छ की कोयल" के नाम से भी जाना जाता है, गुजराती लोक संगीत की एक प्रमुख गायिका हैं। उनका जन्म 31 दिसंबर 1996 को कच्छ जिले के टप्पर गांव में हुआ था। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली गीता रबारी ने अपनी गायन यात्रा की शुरुआत बचपन में की थी। उनके पिता कांजीभाई रबारी समान ढोने का काम करते थे, और वे गीता को संगीत कार्यक्रमों में ले जाते थे, जिससे उनका गायन में रुचि बढ़ी।
लाइफस्टाइल:--
गीता रबारी का जीवन साधारण और ग्रामीण परिवेश में बसा हुआ है। वे अधिकतर समय अपने गांव में बिताती हैं और लोक संगीत कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। उनकी दिनचर्या में गायन, अभ्यास और सामाजिक कार्य शामिल हैं।
गीता रबारी – 30+ रोचक जानकारियाँ
- गीता रबारी का जन्म 31 दिसंबर 1996 को गुजरात के कच्छ जिले के टप्पर गांव में हुआ।
- उन्हें “कच्छ की कोयल” के नाम से जाना जाता है।
- गीता बचपन से ही संगीत में रुचि रखती थीं और उनके पिता उन्हें कार्यक्रमों में ले जाते थे।
- उनके पिता का नाम कांजीभाई रबारी है।
- माता का नाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
- उनका परिवार साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आता है।
- गीता ने अपने स्कूल के कार्यक्रमों में गायन शुरू किया।
- उन्होंने गुजराती लोक गीतों में अपनी पहचान बनाई।
- उनका सबसे प्रसिद्ध गीत है “रोना सेर मा”, जो 2017 में रिलीज़ हुआ।
- उन्होंने भजन शैली में भी उत्कृष्ट योगदान दिया है।
- उनका भजन “श्री राम घर आए” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
- गीता का गायन कच्छ की लोक धुनों से प्रभावित है।
- उनके गानों में भावनात्मक गहराई और मिठास स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।
- गीता ने गुजरात के कई त्योहारों और नवरात्रि समारोहों में प्रदर्शन किया है।
- उनका मंच पर प्रदर्शन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
- गीता ने 2023 में अपनी कमाई से 4 करोड़ रुपये गौशाला को दान किए।
- उन्होंने लोक संगीत और भजनों को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।
- गीता की गायन शैली में पारंपरिक और आधुनिक का मिश्रण देखा जा सकता है।
- गीता को कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर आमंत्रित किया गया।
- उन्हें “World Record Book of Europe” में सम्मानित किया गया।
- गीता ने संगीत के क्षेत्र में अपनी मेहनत और समर्पण से पहचान बनाई।
- गीता रबारी का व्यक्तित्व सरल और मधुर है।
- गीता की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता थे, जिन्होंने उनके संगीत में रुचि को प्रोत्साहित किया।
- उनका संगीत बच्चों और बुजुर्गों दोनों को आकर्षित करता है।
- गीता रबारी सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं और अपने गीतों का प्रचार करती हैं।
- उन्होंने कई टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए गाने रिकॉर्ड किए हैं।
- उनकी लोकप्रियता गुजरात के बाहर भी फैल चुकी है।
- गीता की आवाज़ को “गुजरात की लोक धुनों की पहचान” कहा जाता है।
- उन्होंने अपने करियर में संघर्षों का सामना किया लेकिन कभी हार नहीं मानी।
- गीता रबारी ने लोक संगीत को एक नया आयाम दिया और युवाओं को प्रेरित किया।
- उनकी गायन यात्रा ग्रामीण परिवेश से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची।
- उन्होंने अपने गीतों और भजनों से समाज में सकारात्मक संदेश फैलाया।
- गीता रबारी ने पारंपरिक गुजराती गीतों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर नई शैली बनाई।
प्रमुख भजन और गाने--
- श्री राम घर आए: यह पीएम मोदी द्वारा प्रशंसित एक भजन है।
- रोना सेर मा: 2017 में रिलीज़ हुआ उनका पहला हिट ट्रैक, जिसने उनके गायन करियर की शुरुआत की।
- देव द्वारिका वड़ा: यह उनके सर्वश्रेष्ठ गानों में से एक है।
- रण मा खिल्वे फूल: यह उनके लोकप्रिय गानों में से एक है।
- गोकुलिया जेवु गिर: यह उनके शीर्ष गानों की सूची में शामिल है।
- पोपतियु, गोरी, और भेड़ियो: ये उनके नए गुजराती गरबा गीत और गाने हैं, जो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं।
- बालाजी बागेश्वर वाला: यह एक लोकप्रिय भजन है।
- कोइ केजो काना ना कान मा: यह एक अन्य प्रसिद्ध गुजराती गीत है।
निष्कर्ष--
गीता रबारी का जीवन और करियर एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाता है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, प्रतिभा और मेहनत से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। उनकी आवाज़ में एक विशेष मिठास और भावनात्मक गहराई है, जो श्रोताओं को आकर्षित करती है। उनकी गायन शैली में कच्छ की लोक धुनों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
गीता रबारी का जीवन और करियर एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाता है कि कठिनाइयों के बावजूद, यदि किसी के पास जुनून और समर्पण हो, तो वह किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।
Geeta Rabari – Biography--
The Nightingale of Kutch, Touching Every Heart
Geeta Rabari, also known as the "Nightingale of Kutch," is a prominent singer of Gujarati folk music. She was born on 31st December 1996 in Tappar village, Kutch district, Gujarat. Born into a humble family, Geeta Rabari started her musical journey at a very young age. Her father, Kanjibhai Rabari, worked carrying goods and often took Geeta to musical programs, which sparked her interest in singing.
Geeta began singing in school programs, gradually performing on stage. Her voice carries a unique sweetness and emotional depth that captivates listeners. Her singing style is strongly influenced by the folk tunes of Kutch.
Her famous song "Rona Ser Ma", released in 2017, brought her widespread recognition. Following this, she delivered many hit songs, including the devotional song "Shri Ram Ghar Aaye," which was praised by Prime Minister Narendra Modi.
During festivals like Navratri, her performances generate immense enthusiasm. She performs live across various regions of Gujarat, attracting thousands of attendees. Her stage presence and singing style mesmerize audiences.
Geeta Rabari has received numerous accolades, including recognition in the World Record Book of Europe and honors in London. In addition, in 2023, she donated ₹4 crore from her earnings to a gaushala (cow shelter), reflecting her social commitment.
Geeta Rabari’s musical journey is an inspiration, showing that despite coming from an ordinary background, talent and hard work can take one to great heights. Her singing style beautifully blends traditional Kutch folk music with emotional depth and sweetness, leaving a lasting impression on listeners.
Lifestyle
Geeta leads a simple life rooted in rural surroundings. She spends most of her time in her village and participates in folk music events. Her daily routine revolves around singing, practice, and social work.
30+ Interesting Facts About Geeta Rabari
-
Born on 31st December 1996 in Tappar village, Kutch, Gujarat.
-
Known as the "Nightingale of Kutch."
-
Interested in music since childhood; her father encouraged her by taking her to programs.
-
Father’s name: Kanjibhai Rabari.
-
Mother’s name is not publicly known.
-
Comes from a simple rural background.
-
Started singing in school programs.
-
Made her mark in Gujarati folk songs.
-
Famous song: “Rona Ser Ma” (2017).
-
Contributed significantly to devotional music as well.
-
“Shri Ram Ghar Aaye” was shared by PM Narendra Modi on social media.
-
Her singing is influenced by Kutch folk tunes.
-
Her songs are known for emotional depth and sweetness.
-
Performed at many festivals and Navratri events across Gujarat.
-
Her stage performances mesmerize audiences.
-
Donated ₹4 crore to a gaushala in 2023.
-
Contributed to popularizing folk and devotional music.
-
Combines traditional and modern elements in her singing style.
-
Invited to perform on national and international stages multiple times.
-
Honored in the World Record Book of Europe.
-
Achieved recognition through hard work and dedication.
-
Personality is simple and charming.
-
Father was her biggest inspiration.
-
Her music appeals to both children and the elderly.
-
Active on social media to promote her songs.
-
Recorded songs for various TV and online platforms.
-
Popularity extends beyond Gujarat.
-
Her voice is considered a representation of Kutch folk music.
-
Overcame challenges but never gave up.
-
Inspired the youth by giving new life to folk music.
-
Journeyed from rural beginnings to international stages.
-
Spreads positive messages through her songs and bhajans.
-
Blends traditional Gujarati songs with modern music to create a new style.
Major Songs & Devotional Tracks
-
Shri Ram Ghar Aaye – A devotional song praised by PM Modi.
-
Rona Ser Ma – Her first hit track released in 2017.
-
Dev Dwarka Vada – One of her best songs.
-
Ran Ma Khilve Phool – Popular folk song.
-
Gokulia Jevu Gir – Another top hit.
-
Popatiyu, Gori, and Bhediyo – New Gujarati Garba songs available on YouTube.
-
Balaji Bageshwar Wala – Popular devotional track.
-
Koi Kejo Kana Na Kan Ma – Another famous Gujarati song.
Conclusion
Geeta Rabari’s life and career are a source of inspiration, showing that despite a humble background, talent and dedication can achieve remarkable success. Her singing, deeply rooted in Kutch folk traditions, combines emotional depth and sweetness, enchanting listeners. Her journey demonstrates that with passion and perseverance, anyone can reach great heights in their chosen field.