राज कुमार
(कुलभूषण पंडित)
| जन्म तिथि | 08 October 1926 |
| जन्म स्थान | लोरलाई, बलूचिस्तान एजेंसी, ब्रिटिश भारत |
| जीवनसंगी | गायत्री |
| बच्चे | पुरु राज कुमार, पाणिनी राज कुमार, वास्तविकता राज कुमार |
| शिक्षा | स्नातक |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
| पुरस्कार | सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार (1966) |
| मृत्यु | 3 जुलाई 1996 (उम्र 69 वर्ष) मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत |
प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत--
राज कुमार ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में काम किया। एक रात गश्त के दौरान एक सिपाही ने उन्हें बताया कि वह हीरो की तरह दिखते हैं, जिससे उनका झुकाव फिल्मों की ओर हुआ। निर्माता बलदेव दुबे ने उनके बोलने के अंदाज़ से प्रभावित होकर उन्हें 'शाही बाजार' फिल्म में भूमिका दी। इसके लिए राज कुमार ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी। हालांकि शुरुआती फिल्में असफल रहीं, लेकिन वह संघर्ष करते रहे।
फ़िल्मी करियर की सफलता--
1957 में 'मदर इंडिया' में एक छोटी भूमिका के बाद राज कुमार को पहचान मिली। 1959 की 'पैग़ाम' में दिलीप कुमार के साथ अभिनय कर उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'वक़्त', 'नीलकमल', 'पाकीज़ा', 'हीर रांझा', 'सौदागर' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। उनका संवाद "चिनॉय सेठ..." फिल्म 'वक़्त' से बेहद प्रसिद्ध हुआ।
विविध भूमिकाएँ--
राज कुमार ने कभी भी खुद को किसी एक इमेज में सीमित नहीं किया। उन्होंने रोमांटिक, गंभीर, और चरित्र भूमिकाएँ निभाईं। 'कर्मयोगी', 'बुलंदी', 'कुदरत', 'धर्मकांटा', 'मरते दम तक', 'तिरंगा' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के विभिन्न रंग देखने को मिले।
नब्बे का दशक और अंतिम समय--
1990 के दशक में उन्होंने 'तिरंगा', 'पुलिस और मुजरिम', 'बेताज बादशाह', 'गॉड और गन' जैसी फिल्में कीं। राज कुमार एकांतप्रिय व्यक्ति थे। उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के बाद ही मृत्यु की सूचना देने का निर्देश दिया था।
प्रेम कहानी--
राज कुमार की मुलाकात एयर होस्टेस जेनिफर से हुई, जिन्होंने शादी के बाद हिन्दू धर्म अपनाकर 'गायत्री कुमार' नाम रखा। दोनों के तीन बच्चे हुए: पुरु राज कुमार, पनिनी राज कुमार और वास्तविकता पंडित।
डायलॉग और स्टाइल--
उनकी आवाज़ और संवादों की शैली लोगों के दिलों में बस गई। उनके लोकप्रिय डायलॉग आज भी दोहराए जाते हैं:
"आपके पाँव बहुत हसीन हैं..."
"हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे..."
"हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है..."
राज कुमार के प्रसिद्ध डायलॉग्स (Famous Dialogues)--
“आपके पांव बहुत हसीन हैं, इन्हें ज़मीन पर मत उतारिएगा... मैले हो जाएंगे।”
फिल्म: पाकीज़ा (1971)
“चिनॉय सेठ, जिनके घर शीशे के होते हैं... वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।”
फिल्म: वक़्त (1965)
“हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे... लेकिन वो वक्त भी हमारा होगा, बंदूक भी हमारी होगी, और गोली भी हमारी होगी।”
फिल्म: सौदागर (1991)
“हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है... दुश्मन से सीधी बात करती है।”
फिल्म: तिरंगा (1992)
“हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते... हम तो आंखें ही चुरा लेते हैं।”
फिल्म: तिरंगा
“हम तुम्हें वो मौत देंगे जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी, ना किसी मुजरिम ने सोची होगी।”
फिल्म: तिरंगा
“दादा तो इस दुनिया में दो ही हैं... एक ऊपर वाला और दूसरा मैं।”
फिल्म: मरते दम तक (1987)
“हम कुत्तों से बात नहीं करते।”
फिल्म: मरते दम तक
“बाज़ार के किसी सड़कछाप दर्ज़ी को बुलाओ... और अपने कफन का नाप दे दो।”
फिल्म: मरते दम तक
“काश तुमने हमें आवाज़ दी होती... हम मौत की नींद से भी उठकर चले आते।”
फिल्म: सौदागर
दुनिया जानती है कि राजेश्वर सिंह जब दोस्ती निभाता है तो अफ़साने बन जाते हैं मगर दुश्मनी करता है तो इतिहास लिखे जाते है |
पुरस्कार--
फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार: 'दिल एक मंदिर' और 'वक़्त' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार: 1996 (मरणोपरांत)
राज कुमार से जुड़ी रोचक बातें--
- असली नाम कुलभूषण पंडित था।
- फिल्मों में आने से पहले पुलिस इंस्पेक्टर थे।
- अपने संवाद और अंदाज के लिए मशहूर थे।
- पान खाने के शौक़ीन थे।
- किसी फिल्मी कैंप में शामिल नहीं हुए।
- अमिताभ बच्चन के साथ फिल्में ठुकराईं।
- सौदागर में दिलीप कुमार के साथ काम किया।
- सेट पर अक्सर गॉगल्स और पगड़ी में आते थे।
- बेटी वास्तविकता पंडित ने फिल्म में काम किया।
- अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु की खबर अंतिम संस्कार के बाद दी जाए।
- राज कुमार भारतीय सिनेमा के एक ऐसे अभिनेता रहे जिन्होंने अपनी संवाद शैली और अंदाज से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।
Early life and beginning of career--
Success of film career--
Diverse roles--
Nineties and last days--
Love story--
Dialogues and style--
"Your feet are very beautiful..."
"We will kill you and we will definitely kill you..."
"Our tongue is also like our bullet..."
Raj Kumar's famous dialogues--
"Your feet are very beautiful, don't put them on the ground... they will get dirty."
"Chinoy Seth, those who live in glass houses... do not throw stones at others."
"We will kill you and we will definitely kill you... but that time will be ours, the gun will be ours, and the bullet will also be ours."
"Our tongue is also like our bullet... it talks directly to the enemy."
"We do not steal the kohl from the eyes... we steal the eyes themselves." Film: Tiranga
“We will give you such a death which is neither written in any law book nor any criminal would have thought of.”
“There are only two Dadas in this world… one is the one above and the other is me.”
“We do not talk to dogs.”
“Call any roadside tailor in the market… and give the measurement of your shroud.”
“If only you had called us… we would have woken up from the sleep of death and come to you.”
The world knows that when Rajeshwar Singh maintains friendship then stories are made but when he does enmity then history is written.
Awards--
- Filmfare Award: Best Supporting Actor for 'Dil Ek Mandir' and 'Waqt'
- Dada Saheb Phalke Award: 1996 (posthumously)
Interesting facts about Raj Kumar--
- Real name was Kulbhushan Pandit.
- He was a police inspector before coming into films.
- He was famous for his dialogue and style.
- He was fond of eating paan.
- He did not join any film camp.
- He rejected films with Amitabh Bachchan.
- Worked with Dilip Kumar in Saudagar.
- He often came to the set wearing goggles and turban.
- Daughter Vakratika Pandit worked in the film.
- His last wish was that the news of his death should be given after the funeral.
- Raj Kumar was one such actor of Indian cinema who left an indelible mark in the hearts of the audience with his dialogue style and style.