प्रल्हाद जोशी

प्रल्हाद जोशी जी के बारे मेंं

प्रल्हाद जोशी

प्रल्हाद जोशी

(ब्लू-आइड बॉय)

जन्म तिथि 27 November 1962
राशि धनु (Sagittarius)
जन्म स्थान बीजापुर (अब विजयपुरा), कर्नाटक
निवास स्थान दिल्ली: 11, अकबर रोड, नई दिल्ली
पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी
माता मालतीबाई
भाई दो भाई
जीवनसंगी ज्योति जोशी
बच्चे तीन पुत्रियाँ (उनकी एक पुत्री का नाम अनन्या वी. जोशी है।)
शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली
कॉलेज श्री कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज, हुबली
विश्वविद्यालय कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़
योग्यता 1983 में कला स्नातक (B.A.)
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू
नेट वर्थ ₹21.09 करोड़ से अधिक

प्रल्हाद जोशी: शिक्षा मंत्री की जीवनी

प्रस्तावना

प्रल्हाद वेंकटेश जोशी भारतीय राजनीति के एक ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी कर्मठता, संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व क्षमता के बल पर जमीनी स्तर से उठकर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक का सफर तय किया है। 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रल्हाद जोशी आज भारत के शिक्षा मंत्री के रूप में देश की शिक्षा नीति को दिशा देने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक कला स्नातक से लेकर पाँच बार के लोकसभा सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।


प्रल्हाद जोशी का राजनीतिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित रहा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत छात्र राजनीति और संगठनात्मक कार्यों से की और धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं में अपनी जगह बनाई। कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पाँच बार सांसद चुने जाने का रिकॉर्ड उनकी जनप्रियता और राजनीतिक सूझबूझ का प्रमाण है।


प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

जन्म एवं परिवार

प्रल्हाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक राज्य के विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर) में हुआ था। वे एक पारंपरिक उत्तरी कर्नाटक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे, जबकि उनकी माता का नाम मालतीबाई था।


प्रल्हाद जोशी अपने माता-पिता की तीसरी संतान थे। उनका परिवार एक साधारण एवं मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आता था। रेलवे कर्मचारी होने के कारण उनके पिता का तबादला होता रहता था, लेकिन परिवार ने कभी भी अपने मूल्यों और संस्कारों से समझौता नहीं किया। रेलवे क्वार्टरों में बिताया गया बचपन उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा।


शिक्षा

प्रल्हाद जोशी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने हुबली के श्री कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज (के.एस. आर्ट्स कॉलेज) में दाखिला लिया, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध था।


सन् 1983 में प्रल्हाद जोशी ने कला स्नातक (Bachelor of Arts – B.A.) की डिग्री प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मानविकी (ह्यूमैनिटीज़) से रही है, जो उन्हें इंजीनियरिंग, कानून या प्रबंधन जैसे पेशेवर विषयों में डिग्री रखने वाले कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों से अलग करती है। कर्नाटक विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी, उत्तरी कर्नाटक के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है, जिसने अनेक राजनेताओं, सिविल सेवकों और सार्वजनिक हस्तियों को जन्म दिया है।


आरंभिक रुचियाँ

अपने छात्र जीवन के दौरान ही प्रल्हाद जोशी ने सार्वजनिक मुद्दों, सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास में गहरी रुचि विकसित कर ली थी। राजनीति में आने से पहले वे उद्यमिता और सामुदायिक पहलों से जुड़े रहे, जो रोज़गार सृजन और जमीनी स्तर के विकास में उनकी प्रारंभिक रुचि को दर्शाता है।


राजनीतिक यात्रा का आरंभ

RSS से जुड़ाव

प्रल्हाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव बना लिया था। RSS की विचारधारा ने उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने संघ के कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और धीरे-धीरे संगठनात्मक कार्यों में कुशलता हासिल की।


एक RSS कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी यह पृष्ठभूमि ही थी जिसने उन्हें बाद में भाजपा के संगठनात्मक ढाँचे में मजबूती से स्थापित होने में सहायता की।


छात्र राजनीति और जन आंदोलन

प्रल्हाद जोशी ने अपनी राजनीतिक यात्रा छात्र राजनीति और संगठनात्मक कार्यों से शुरू की। 1990 के दशक की शुरुआत में वे कर्नाटक में जन आंदोलनों के माध्यम से चर्चा में आए।


इस दौरान उन्होंने हुबली के इदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। यह आंदोलन कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने उन्हें एक जुझारू और राष्ट्रभक्त नेता के रूप में स्थापित किया। 1992 से 1994 के बीच चले इस आंदोलन ने उनकी पहचान को मजबूत किया।


इसके अलावा, उन्होंने 1992 में "सेव कश्मीर मूवमेंट" (कश्मीर बचाओ आंदोलन) का भी नेतृत्व किया, जिससे उन्हें राज्य स्तर पर पहचान मिली। इन आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने अपनी वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया।


भाजपा में प्रवेश

RSS की पृष्ठभूमि से आते हुए प्रल्हाद जोशी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अपनी सक्रिय सदस्यता शुरू की। उन्होंने पार्टी के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया।


वे पहले भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष बने, जहाँ उन्होंने 1995 से 1998 तक अपनी सेवाएँ दीं। इसके बाद 1998 से 2003 तक उन्होंने उसी जिले में पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य किया। इन वर्षों में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करने और कर्नाटक में भाजपा की उपस्थिति का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


संसदीय करियर

पहली बार लोकसभा में (2004)

सन् 2004 में प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और अपनी पहली जीत दर्ज की। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इसी के साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया।


14वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में उन्होंने संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से उनकी यह जीत किसी संयोग से नहीं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत, जनसंपर्क और संगठनात्मक कौशल का परिणाम थी।


लगातार पाँच बार सांसद

2004 में पहली जीत के बाद प्रल्हाद जोशी ने 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी लगातार विजय प्राप्त की। इस प्रकार वे धारवाड़ क्षेत्र से लगातार पाँच बार सांसद चुने गए।


2024 के आम चुनावों में उन्होंने 7,16,231 वोट प्राप्त करके जीत दर्ज की, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के विनोद असूति को 6,18,907 वोट मिले। इस जीत का अंतर 97,324 वोटों का था, जो उनकी जनप्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पाँच बार जीतना एक रिकॉर्ड है, जिसे बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।


इस दौरान वे कर्नाटक से भाजपा के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सांसदों में से एक बनकर उभरे।


भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष

प्रल्हाद जोशी ने 12 जुलाई 2012 से 12 जनवरी 2016 तक भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य में पार्टी को मजबूत करने और संगठनात्मक विस्तार के लिए अथक प्रयास किए।


भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस दौरान उन्होंने पार्टी के भीतर आंतरिक एकता बनाए रखने और चुनावी रणनीतियों को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस पद पर के.एस. ईश्वरप्पा का स्थान लिया और बाद में बी.एस. येदियुरप्पा को यह पद सौंपा।


केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यकाल

संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय (2019-2024)

30 मई 2019 को प्रल्हाद जोशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया। उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालयों का प्रभार सौंपा गया।


संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे सरकार और संसद के बीच विधायी समन्वय के केंद्र में थे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने संसद में सरकार के एजेंडे को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने और विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


कोयला मंत्री के रूप में उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए। उन्होंने "कोयला लॉजिस्टिक्स योजना और नीति" की शुरुआत की, जिसमें रेलवे-आधारित प्रणाली की ओर रणनीतिक बदलाव का प्रस्ताव था, जिसका लक्ष्य रेल लॉजिस्टिक्स लागत में 14% की कमी और वार्षिक ₹21,000 करोड़ की बचत करना था।


उन्होंने भूमिगत कोयला खानों से उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया और 100 मिलियन टन कोयला उत्पादन प्राप्त करने के लिए "भूमिगत कोयला खान मिशन योजना" पर काम किया। उनका लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026 तक थर्मल कोयला आयात को शून्य करना था।


कोयला और खान मंत्री के रूप में उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास पर्याप्त कोयला भंडार हैं और देश 2025-26 तक कोयला निर्यात करना शुरू कर देगा। उन्होंने खनन उद्योग से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान को 2026-27 तक 2.5% तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के बावजूद, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला-आधारित उत्पादन की आवश्यकता बनी रहेगी।


उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (2024-2026)

जून 2024 में प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में प्रल्हाद जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों का प्रभार सौंपा गया।


नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को नई दिशा दी। उन्होंने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने तथा 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का नेतृत्व किया।


उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, PM-कुसुम और अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं जैसी प्रमुख पहलों को गति मिली। उन्होंने वार्षिक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लिए बोलियाँ आमंत्रित करने सहित कई नीतिगत उपायों को लागू किया।


उन्होंने 2025 में भारत द्वारा पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले ही स्थापित बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने के ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रकाश डाला।


उन्होंने दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वैश्विक निवेशकों को भारत की तीव्र स्वच्छ ऊर्जा विस्तार में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने "वसुधैव कुटुम्बकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के सिद्धांत पर आधारित भारत की ऊर्जा संक्रमण दृष्टि को रेखांकित किया।


नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने 2025 में नवीकरणीय बिजली उत्पादन में लगभग 24% की वृद्धि दर्ज की, जबकि कोयला और प्राकृतिक गैस से बिजली उत्पादन में 3.7% की गिरावट आई।


शिक्षा मंत्री के रूप में नियुक्ति (2026)

नियुक्ति की पृष्ठभूमि

25 जुलाई 2026 को भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।


इसके तुरंत बाद, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपने का निर्देश दिया। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, "भारत के राष्ट्रपति ने, प्रधानमंत्री की सलाह पर, संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत श्री धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री की सलाह पर, राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा जाए।"


पहले दिन की गतिविधियाँ

26 जुलाई 2026 को प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का पदभार ग्रहण किया। अपने पहले दिन उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की और शिक्षा सुधारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


इस अवसर पर उन्होंने अपने पूर्ववर्ती धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों की सराहना की, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में उनके योगदान को स्वीकार किया और कहा कि वे देश की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए काम करना जारी रखेंगे।


चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री के रूप में एक ऐसे समय में जिम्मेदारी सौंपी गई है जब शिक्षा मंत्रालय NEET-UG विवाद के बाद प्रमुख सुधारों को लागू कर रहा है। उन्हें निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना है:


NEET-UG संकट से निपटना: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के कारण छात्रों का आक्रोश था। जोशी को परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की चुनौती है।


राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार: NTA के पुनर्गठन और NEET को कंप्यूटर-आधारित परीक्षण में बदलने की प्रक्रिया की निगरानी करना।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: NEP 2020 के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाना।


उच्च शिक्षा सुधार: उच्च शिक्षा मान्यता सुधार और कौशल एकीकरण कार्यक्रम।


सार्वजनिक विश्वास का पुनर्निर्माण: प्रवेश परीक्षाओं में जनता का विश्वास बहाल करना।


प्रतिक्रियाएँ

शिक्षा मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद प्रल्हाद जोशी ने कहा कि वे "पूर्ण नम्रता और जिम्मेदारी की मजबूत भावना" के साथ अपनी नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने उन पर विश्वास जताने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।


हालाँकि, उनकी नियुक्ति पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। CPI(ML) नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने सरकार पर "RSS मंत्री गए तो फिर से RSS मंत्री ले आए" का आरोप लगाया।


व्यक्तिगत जीवन

परिवार

प्रल्हाद जोशी का विवाह ज्योति जोशी (ज्योति पी. जोशी) से हुआ है। यह विवाह 1992 में संपन्न हुआ था। दंपति की तीन पुत्रियाँ हैं। उनकी एक पुत्री का नाम अनन्या वी. जोशी है।


पेशा और संपत्ति

अपने चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रल्हाद जोशी का पेशा "सामाजिक सेवा और व्यवसाय" है। उन्होंने अपनी 2024 की चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति ₹21.09 करोड़ और कुल देनदारियाँ ₹8.01 करोड़ घोषित की हैं। उनकी पत्नी के पास लगभग ₹5.93 करोड़ की संपत्ति है, जबकि उनकी पुत्री के पास ₹32 लाख से अधिक की संपत्ति है।


जीवन मूल्य

सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालने के बावजूद, प्रल्हाद जोशी अपने पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सदैव एक साधारण और मूल्य-आधारित जीवनशैली को अपनाया है।


विवाद

राहुल गांधी की तुलना जिन्ना से

मई 2026 में प्रल्हाद जोशी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना मुहम्मद अली जिन्ना से करके विवाद में आ गए। कांग्रेस पार्टी ने इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे "राजनीतिक अदूरदर्शिता" और "इतिहास की अज्ञानता" करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी की तुलना जिन्ना से करना, "जिन्होंने देश को विभाजन की त्रासदी में धकेल दिया," लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।


उपलब्धियाँ एवं योगदान

कोयला क्षेत्र में सुधार

कोयला मंत्री के रूप में प्रल्हाद जोशी ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए:


कोयला लॉजिस्टिक्स योजना और नीति की शुरुआत


रेल लॉजिस्टिक्स लागत में 14% की कमी और ₹21,000 करोड़ की वार्षिक बचत


वाणिज्यिक और कैप्टिव खानों से कोयला उत्पादन में 39% की वृद्धि का लक्ष्य


भूमिगत कोयला खान मिशन योजना के तहत 100 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य


थर्मल कोयला आयात को शून्य करने का लक्ष्य


नवीकरणीय ऊर्जा में योगदान

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में:


500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य


राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन


PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना


PM-कुसुम योजना


50 गीगावाट वार्षिक नवीकरणीय ऊर्जा बोलियाँ


संसदीय कार्य

संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उन्होंने सरकार और संसद के बीच विधायी समन्वय को सुगम बनाया और सरकार के विधायी एजेंडे को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।


संक्षिप्त तथ्य

विवरण जानकारी

पूरा नाम प्रल्हाद वेंकटेश जोशी

जन्म तिथि 27 नवंबर 1962

जन्म स्थान विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर), कर्नाटक

राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी

शैक्षणिक योग्यता कला स्नातक (B.A.) 1983

शिक्षा संस्थान कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज, हुबली; कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़

पत्नी ज्योति जोशी

संतान तीन पुत्रियाँ

लोकसभा सदस्य 2004 से (धारवाड़)

कार्यकाल पाँच बार सांसद

भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष 2012-2016

केंद्रीय मंत्री 30 मई 2019 से

निष्कर्ष

प्रल्हाद जोशी की जीवनी भारतीय राजनीति में एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर सर्वोच्च पदों तक पहुँचने की प्रेरणादायक कहानी है। रेलवे कर्मचारी के पुत्र से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर संघर्ष, समर्पण और संगठनात्मक कुशलता का प्रतीक है।


RSS कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले प्रल्हाद जोशी ने भाजपा के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए पार्टी संगठन को मजबूत किया। धारवाड़ से लगातार पाँच बार सांसद चुने जाना उनकी जनप्रियता और राजनीतिक कौशल को दर्शाता है।


कोयला, खान, संसदीय कार्य, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और अब शिक्षा — इतने विविध मंत्रालयों का प्रभार संभालना उनकी प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व गुणों का प्रमाण है। शिक्षा मंत्री के रूप में उनके सामने देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार, NEET विवाद के बाद विश्वास बहाली और NEP 2020 के कार्यान्वयन जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा आलाकमान के विश्वासपात्र प्रल्हाद जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं और आने वाले समय में शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।


प्रल्हाद जोशी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंध उनके राजनीतिक जीवन की सबसे मूलभूत और पहचानी जाने वाली विशेषता है। उन्हें RSS का "वफादार" , "पुराना नाम"  और "कट्टर समर्थक" (die-hard RSS loyalist)  माना जाता है। यह जुड़ाव उनके जीवन के कई पहलुओं में स्पष्ट रूप से दिखता है:


प्रारंभिक जुड़ाव: बहुत कम उम्र में ही RSS से जुड़ गए थे और RSS के प्रशिक्षण शिविरों में सक्रिय भागीदारी निभाई।


संगठनात्मक क्षमता: RSS में ही उनकी संगठनात्मक क्षमता विकसित हुई, जो बाद में भाजपा में उनकी सफलता का आधार बनी।


राजनीतिक करियर की नींव: RSS कार्यकर्ता के रूप में जमीनी स्तर से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में भाजपा के माध्यम से राष्ट्रीय राजनीति में पहुँचे।


प्रमुख आंदोलन: 1992-1994 के दौरान हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, जिससे उन्हें राज्य स्तर पर पहचान मिली।


सार्वजनिक धारणा: मीडिया में उन्हें अक्सर RSS से जुड़ा नेता बताया जाता है। विपक्ष ने भी उन्हें "RSS मंत्री" कहकर संबोधित किया।


संक्षेप में, RSS न केवल उनकी विचारधारा है, बल्कि उनके संपूर्ण राजनीतिक करियर की आधारशिला भी है।




प्रल्हाद जोशी से जुड़ी 50 रोचक जानकारियाँ यहाँ हैं:


प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

जन्म: 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (तत्कालीन बीजापुर) में जन्मे।


पूरा नाम: प्रल्हाद वेंकटेश जोशी।


पारिवारिक पृष्ठभूमि: एक साधारण मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार से हैं।


पिता: स्वर्गीय वेंकटेश जोशी, भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे।


माता: मालतीबाई।


तीसरी संतान: वे अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं।


बचपन: रेलवे क्वार्टरों में बिताया, जिससे जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण सरल रहा।


भाई से अलगाव: अपने भाई गोपाल जोशी से 32 साल से अधिक समय से अलग हैं और उनके किसी भी वित्तीय लेन-देन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।


 शिक्षा

प्रारंभिक शिक्षा: रेलवे स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा।


हाई स्कूल: हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से।


स्नातक: हुबली के श्री कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से कला स्नातक (B.A.)।


विश्वविद्यालय: कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध।


स्नातक वर्ष: 1983 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।


शैक्षणिक विषय: मानविकी (ह्यूमैनिटीज़) से हैं, इंजीनियरिंग या कानून से नहीं।


RSS और राजनीतिक करियर की शुरुआत

RSS से जुड़ाव: कम उम्र में ही RSS से जुड़ गए और वहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।


RSS वफादार: उन्हें RSS का "वफादार" और "कट्टर समर्थक" माना जाता है।


ईदगाह मैदान आंदोलन: 1992-94 में हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन में अहम भूमिका।


कश्मीर बचाओ आंदोलन: 1992 में "सेव कश्मीर मूवमेंट" का नेतृत्व किया।


विधानसभा चुनाव: 1996 में कर्नाटक विधानसभा के लिए चुने गए।


भाजपा जिला अध्यक्ष: 1995-98 तक भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष रहे।


भाजपा महासचिव: 1998-2003 तक धारवाड़ जिला महासचिव रहे।


 संसदीय करियर और मंत्रालय

पहली लोकसभा: 2004 में 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए।


लगातार सांसद: 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार पाँच बार सांसद चुने गए।


निर्वाचन क्षेत्र: कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व।


भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष: 12 जुलाई 2012 से 12 जनवरी 2016 तक।


केंद्रीय मंत्री: 30 मई 2019 को पहली बार केंद्रीय मंत्री बने।


कोयला मंत्री: 2019-2024 तक कोयला मंत्री।


खान मंत्री: 2019-2024 तक खान मंत्री।


संसदीय कार्य मंत्री: 2019-2024 तक संसदीय कार्य मंत्री।


उपभोक्ता मामले मंत्री: जून 2024 से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री।


नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री: जून 2024 से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री।


शिक्षा मंत्री: 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार।


सबसे लंबे समय तक सांसद: कर्नाटक से भाजपा के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सांसदों में से।


उपलब्धियाँ और योगदान

कोयला लॉजिस्टिक्स योजना: कोयला मंत्री के रूप में "कोयला लॉजिस्टिक्स योजना और नीति" की शुरुआत की।


लागत में कमी: रेल लॉजिस्टिक्स लागत में 14% की कमी और ₹21,000 करोड़ की वार्षिक बचत का लक्ष्य।


कोयला आयात शून्य: वित्तीय वर्ष 2026 तक थर्मल कोयला आयात शून्य करने का लक्ष्य।


500 गीगावाट लक्ष्य: नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य।


हरित हाइड्रोजन मिशन: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाया।


PM सूर्य घर योजना: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को गति दी।


वैश्विक मंच: 2026 में दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) में भारत का प्रतिनिधित्व किया।


व्यक्तिगत जीवन और रुचियाँ

विवाह: 1992 में ज्योति जोशी से विवाह।


संतान: तीन पुत्रियाँ हैं।


बेटी का नाम: एक पुत्री का नाम अनन्या वी. जोशी है।


पेशा: चुनावी हलफनामे में पेशा "सामाजिक सेवा और व्यवसाय"।


कुल संपत्ति: 2024 के हलफनामे में ₹21.09 करोड़ की संपत्ति।


पत्नी की संपत्ति: पत्नी के पास लगभग ₹5.93 करोड़ की संपत्ति।


रुचियाँ: भारतीय शास्त्रीय संगीत, पढ़ना, क्रिकेट और बैडमिंटन में गहरी रुचि।


सामाजिक कार्य: कर्नाटक में विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और कल्याणकारी पहलों से जुड़े।


विवाद

राहुल गांधी की तुलना: मई 2026 में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना मुहम्मद अली जिन्ना से करके विवाद में आए।


 एक अनोखा तथ्य

संकट प्रबंधक: NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री बनाए गए, उन्हें एक "संकट प्रबंधक" के रूप में देखा जाता है।



यह रहे प्रल्हाद जोशी से जुड़े 50 सबसे पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) और उनके जवाब:


1. प्रल्हाद जोशी का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: प्रल्हाद वेंकटेश जोशी।


2. उनका जन्म कब हुआ?

उत्तर: 27 नवंबर 1962 को।


3. जन्म स्थान कौन-सा है?

उत्तर: विजयपुरा (तत्कालीन बीजापुर), कर्नाटक।


4. उनके पिता का नाम क्या है?

उत्तर: स्वर्गीय वेंकटेश जोशी (भारतीय रेलवे में कर्मचारी)।


5. माता का नाम क्या है?

उत्तर: मालतीबाई।


6. उनकी पत्नी का नाम क्या है?

उत्तर: ज्योति जोशी।


7. कितनी संतानें हैं?

उत्तर: तीन पुत्रियाँ।


8. उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है?

उत्तर: कला स्नातक (Bachelor of Arts – B.A.)।


9. उन्होंने किस कॉलेज से पढ़ाई की?

उत्तर: श्री कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज, हुबली।


10. किस विश्वविद्यालय से संबद्ध थे?

उत्तर: कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़।


11. वे किस लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं?

उत्तर: धारवाड़, कर्नाटक।


12. वे कितनी बार सांसद चुने गए हैं?

उत्तर: लगातार 5 बार (2004, 2009, 2014, 2019, 2024)।


13. उनका RSS से कब जुड़ाव हुआ?

उत्तर: बहुत कम उम्र में ही RSS से जुड़ गए थे।


14. किस आंदोलन से वे चर्चा में आए?

उत्तर: 1992-94 में हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन से।


15. वे भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष कब बने?

उत्तर: 12 जुलाई 2012 से 12 जनवरी 2016 तक।


16. केंद्रीय मंत्री कब बने?

उत्तर: 30 मई 2019 को।


17. पहली बार कौन-से मंत्रालय मिले?

उत्तर: संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय।


18. 2024 में कौन-से मंत्रालय मिले?

उत्तर: उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा।


19. शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार कब मिला?

उत्तर: 25 जुलाई 2026 को (NEET विवाद के बाद)।


20. शिक्षा मंत्री किसकी जगह बने?

उत्तर: धर्मेंद्र प्रधान (जिन्होंने इस्तीफा दिया)।


21. कोयला मंत्री के रूप में उनकी मुख्य उपलब्धि क्या है?

उत्तर: कोयला लॉजिस्टिक्स योजना, जिससे रेल लागत में 14% कटौती और ₹21,000 करोड़ की वार्षिक बचत का लक्ष्य है।


22. नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उनका मुख्य लक्ष्य क्या है?

उत्तर: 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना।


23. किस वैश्विक मंच पर उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया?

उत्तर: 2026 में दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF)।


24. 'वसुधैव कुटुम्बकम' के प्रति उनका क्या दृष्टिकोण है?

उत्तर: एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य — के आधार पर ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देना।


25. NEP 2020 के प्रति उनका क्या रुख है?

उत्तर: इसे पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और पूर्ववर्ती मंत्री के कार्यों की सराहना की।


26. सबसे चर्चित विवाद कौन-सा रहा?

उत्तर: मई 2026 में राहुल गांधी की तुलना मुहम्मद अली जिन्ना से करना।


27. चुनावी हलफनामे में उनका पेशा क्या दर्शाया है?

उत्तर: सामाजिक सेवा और व्यवसाय।


28. 2024 में उनकी कुल संपत्ति कितनी थी?

उत्तर: ₹21.09 करोड़।


29. कुल देनदारियाँ कितनी हैं?

उत्तर: ₹8.01 करोड़।


30. उनकी पत्नी की संपत्ति कितनी है?

उत्तर: लगभग ₹5.93 करोड़।


31. उनकी व्यक्तिगत रुचियाँ क्या हैं?

उत्तर: भारतीय शास्त्रीय संगीत, क्रिकेट, बैडमिंटन और किताबें पढ़ना।


32. भाजपा में कौन-कौन से संगठनात्मक पद संभाले?

उत्तर: जिला अध्यक्ष, महासचिव, प्रदेश अध्यक्ष, और केंद्रीय मंत्री।


33. संसदीय कार्य मंत्री के रूप में क्या भूमिका थी?

उत्तर: सरकार और संसद के बीच विधायी समन्वय स्थापित करना।


34. NEET संकट को लेकर क्या रणनीति है?

उत्तर: परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाली और NTA (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) में सुधार।


35. क्या वे इंजीनियर या वकील हैं?

उत्तर: नहीं, वे कला स्नातक (B.A.) हैं।


36. किस समुदाय से आते हैं?

उत्तर: उत्तरी कर्नाटक का एक पारंपरिक ब्राह्मण परिवार।


37. कैबिनेट मंत्री हैं या राज्य मंत्री?

उत्तर: कैबिनेट मंत्री (मंत्रिमंडल सदस्य)।


38. क्या वे कभी विधायक रहे?

उत्तर: हाँ, 1996 में कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे।


39. कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल कितना था?

उत्तर: 2012 से 2016 (लगभग 3.5 वर्ष)।


40. कोयला आयात पर उनकी क्या योजना है?

उत्तर: वित्तीय वर्ष 2026 तक थर्मल कोयला आयात को शून्य करना।


41. भूमिगत कोयला खनन का क्या लक्ष्य है?

उत्तर: 100 मिलियन टन उत्पादन हासिल करना।


42. वे किस प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम कर रहे हैं?

उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।


43. उनका जन्म किस राज्य में हुआ?

उत्तर: कर्नाटक में।


44. 1996 के विधानसभा चुनाव में कहाँ से जीते?

उत्तर: कर्नाटक के हुबली विधानसभा क्षेत्र से (पहली बार)।


45. शिक्षा क्षेत्र में अब मुख्य चुनौती क्या है?

उत्तर: NTA पुनर्गठन, प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और NEP 2020 का क्रियान्वयन।


46. क्या उनका RSS से जुड़ाव आज भी कायम है?

उत्तर: हाँ, उन्हें विचारधारात्मक रूप से RSS का वफादार और कट्टर समर्थक माना जाता है।


47. PM सूर्य घर योजना में क्या भूमिका निभाई?

उत्तर: नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में इस मुफ्त बिजली योजना को आगे बढ़ाया।


48. विपक्षी दल उन्हें किस नाम से पुकारते हैं?

उत्तर: विपक्ष अक्सर उन्हें "RSS मंत्री" कहकर संबोधित करता है।


49. क्या वे कभी रेलवे कर्मचारी रहे?

उत्तर: नहीं, उनके पिता रेलवे कर्मचारी थे, वे स्वयं नहीं।


50. उनका अंतिम दीर्घकालिक राजनीतिक लक्ष्य क्या है?

उत्तर: शिक्षा प्रणाली को संकट से उबारकर विश्वस्तरीय बनाना, NEP को पूर्णता देना, तथा 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करना।



नेट वर्थ और संपत्ति का विवरण

2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:


चल संपत्ति: इसमें नकदी, बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ (₹10 लाख), एलआईसी पॉलिसी (₹21 लाख), तथा सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं। इसमें इनो नू केम प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के शेयर और एसबीआई ब्लू चिप फंड जैसे म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं।


अचल संपत्ति: हुबली के मयूरी एस्टेट और बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में ₹5.99 करोड़ से अधिक मूल्य का मकान और फ्लैट, तथा हुबली और बेंगलुरु में ₹5.25 करोड़ से अधिक मूल्य की कृषि-ेतर भूमि शामिल है।


वाहन: न तो उनके पास और न ही उनकी पत्नी के पास कोई कार या वाहन है।


देनदारियाँ: उन्होंने ₹8 करोड़ से अधिक की देनदारी घोषित की है।