डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि

डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि जी के बारे मेंं

डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि

डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि

(प्रोफेसर वी. कामकोटि)

जन्म स्थान चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
निवास स्थान चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
पिता एन. वीज़ीनाथन
शिक्षा पी.एस. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मायलापुर, चेन्नई
कॉलेज श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (SVCE)
विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास (B.E.), IIT मद्रास (M.S. एवं Ph.D.)
योग्यता B.E. (Computer Science & Engineering), M.S. (Research), Ph.D. (Computer Science)
पेशा कंप्यूटर वैज्ञानिक, प्रोफेसर, IIT मद्रास के निदेशक
राष्ट्रीयता भारतीय
पुरस्कार 2026 में पद्म श्री
नेट वर्थ मासिक वेतन लगभग ₹2,25,000

डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि: एक दूरदर्शी नेता, शिक्षाविद् और राष्ट्र-निर्माता की जीवनी


प्रस्तावना


भारत के तकनीकी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में कुछ नाम ऐसे हैं जो अपनी अद्वितीय उपलब्धियों और राष्ट्रीय योगदान के लिए सदैव स्मरण किए जाते रहेंगे। डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि, जिन्हें प्रोफेसर वी. कामकोटि के नाम से भी जाना जाता है, ऐसे ही एक विलक्षण व्यक्तित्व हैं। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के निदेशक हैं और एक प्रतिष्ठित कंप्यूटर वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता तथा नीति-निर्माता के रूप में विख्यात हैं। एक ऐसे व्यक्ति जिसने कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा, VLSI डिज़ाइन और स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है, डॉ. कामकोटि की यात्रा संघर्ष, दृढ़ता, असाधारण प्रतिभा और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है।


यह विस्तृत जीवनी डॉ. कामकोटि के जीवन के हर पहलू को उजागर करने का प्रयास है - उनके बचपन और शिक्षा से लेकर उनके शानदार अकादमिक करियर, महत्वपूर्ण शोध उपलब्धियों, प्रशासनिक भूमिकाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और नीति-निर्माण में योगदान, प्राप्त सम्मानों तथा उनके दूरदर्शी नेतृत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह जीवनी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने की एक प्रेरणादायक यात्रा है।


प्रथम अध्याय: प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि


1.1 जन्म और परिवार


डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि का जन्म वर्ष 1968 में चेन्नई, तमिलनाडु में एक प्रतिष्ठित और शिक्षा-प्रेमी परिवार में हुआ था। उनके पिता मद्रास विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफेसर थे, जो अपने परिवार की गहन शैक्षणिक परंपरा को दर्शाता है। एक संस्कृत विद्वान के पुत्र होने के नाते, डॉ. कामकोटि का बचपन एक ऐसे वातावरण में बीता जहाँ ज्ञान, विद्या और बौद्धिक चिंतन को अत्यधिक महत्व दिया जाता था। उनके पिता की अकादमिक पृष्ठभूमि ने उनमें सीखने, खोजबीन और आलोचनात्मक सोच के प्रति गहरी रुचि पैदा की।


हालाँकि, डॉ. कामकोटि का प्रारंभिक बचपन पूरी तरह से चेन्नई की शहरी जीवनशैली में नहीं बीता। वे अपने दादा-दादी के साथ दक्षिणी तमिलनाडु के गाँवों - मुदिकोंडन और विष्णुपुरम में भी रहे। इन ग्रामीण क्षेत्रों में बिताया गया समय उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव छोड़ गया। यहीं से उन्हें भारत की ग्रामीण संस्कृति, परंपराओं और वहाँ की समस्याओं को समझने का अवसर मिला। गाँवों में रहने के दौरान उन्होंने कृषि, सामुदायिक जीवन और स्थानीय मुद्दों को करीब से देखा, जिसने बाद में उनके कार्यों और विचारों को प्रभावित किया। यह ग्रामीण जड़ें ही थीं जिन्होंने उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं की गहरी समझ दी और उन्हें एक संवेदनशील एवं जमीनी सोच वाला इंसान बनाया।


1.2 पारिवारिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत


डॉ. कामकोटि के परिवार की अकादमिक परंपरा को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि ज्ञान-विज्ञान उनके खून में था। उनके पिता मद्रास विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफेसर थे - एक ऐसा पद जो अपने आप में अत्यंत प्रतिष्ठित है। संस्कृत, जो भारतीय ज्ञान-परंपरा की भाषा है, उनके पारिवारिक वातावरण में प्रमुखता से विद्यमान थी। इस संस्कृत-प्रेमी वातावरण ने डॉ. कामकोटि को भारतीय दर्शन, साहित्य और विज्ञान की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया, जबकि उन्होंने आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपना करियर बनाया। उनके जीवन की यह द्वैतवादी प्रकृति - प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा में गहरी पैठ और साथ ही अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में अग्रणी भूमिका - उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाती है।


द्वितीय अध्याय: शिक्षा और अकादमिक यात्रा


2.1 प्रारंभिक शिक्षा और संघर्ष


डॉ. कामकोटि की शिक्षा की शुरुआत तमिलनाडु के स्थानीय स्कूलों से हुई। एक ऐसे समय में जब इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाना हर किसी के लिए संभव नहीं था, उन्होंने विज्ञान और गणित में अपनी गहरी रुचि विकसित की। हालाँकि, उनका जीवन संघर्षों से रहित नहीं था।


एक बहुचर्चित और प्रेरणादायक तथ्य यह है कि डॉ. कामकोटि ने JEE (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) की परीक्षा में असफलता का सामना किया था। खबरों के अनुसार, उन्होंने रसायन विज्ञान (Chemistry) में केवल एक अंक प्राप्त किया था और JEE को पास नहीं कर पाए थे। यह उस समय एक बड़ा झटका था, क्योंकि उन दिनों IIT में प्रवेश पाना प्रत्येक विज्ञान-प्रेमी छात्र का सपना होता था। लेकिन इस असफलता ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया। बल्कि, यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।


डॉ. कामकोटि की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि एक परीक्षा किसी व्यक्ति के भविष्य को परिभाषित नहीं करती। उन्होंने कहा कि FAIL का मतलब "पहली बार सीखने का प्रयास" (First Attempt In Learning) होता है। उनकी यह सोच और दृढ़ता ही उन्हें सफलता के शिखर पर ले गई। उन्होंने अपनी असफलता को कभी अपनी क्षमता पर संदेह करने का कारण नहीं बनाया, बल्कि उसे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी।


2.2 विश्वविद्यालयीय शिक्षा: BE, MS और PhD


JEE में असफलता के बावजूद, डॉ. कामकोटि ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (BE) की उपाधि प्राप्त की।


इसके बाद उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के लिए IIT मद्रास में प्रवेश लिया - वही संस्थान जहाँ वे बाद में निदेशक बने। उन्होंने IIT मद्रास के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से MS (By Research) की उपाधि प्राप्त की। शोध पर आधारित यह MS कार्यक्रम उनके शोध-उन्मुख दृष्टिकोण का पहला संकेत था। इसके बाद उन्होंने वहीं से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में PhD की उपाधि भी प्राप्त की। उनकी PhD (वर्ष 1995 में पूरी हुई) का विषय संभवतः कंप्यूटर आर्किटेक्चर और VLSI डिज़ाइन से संबंधित था, जो उनके बाद के शोध करियर का केंद्र बिंदु बना।


IIT मद्रास से PhD की उपाधि प्राप्त करना डॉ. कामकोटि के जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण था। यह वही संस्थान था जहाँ उन्होंने एक बार JEE की परीक्षा में असफलता का सामना किया था और अब वे इसी संस्थान से भारत के सर्वोच्च शोध उपाधियों में से एक प्राप्त कर रहे थे। उनकी यह यात्रा लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।


2.3 पोस्ट-डॉक्टोरल शोध


अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद, डॉ. कामकोटि ने शोध के क्षेत्र में और अधिक गहराई से काम करने का निर्णय लिया। उन्होंने दो पोस्ट-डॉक्टोरल असाइनमेंट पूरे किए:


सुपरकंप्यूटर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु - यह भारत का प्रमुख विज्ञान अनुसंधान संस्थान है, जहाँ उन्हें सुपरकंप्यूटिंग और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला।


इंस्टिट्यूट ऑफ मैथमैटिकल साइंसेज (IMS), चेन्नई - यह गणितीय विज्ञान का एक प्रतिष्ठित शोध केंद्र है।


इन पोस्ट-डॉक्टोरल शोधों ने डॉ. कामकोटि के ज्ञान और शोध क्षमता को और अधिक निखारा। विभिन्न संस्थानों में काम करने से उन्हें विभिन्न शोध पद्धतियों, दृष्टिकोणों और विचारधाराओं को समझने का अवसर मिला।


तृतीय अध्याय: अकादमिक करियर - IIT मद्रास में फैकल्टी से निदेशक तक


3.1 2001: IIT मद्रास में फैकल्टी के रूप में शामिल होना


वर्ष 2001 डॉ. कामकोटि के करियर का एक ऐतिहासिक वर्ष था। इस वर्ष उन्होंने IIT मद्रास के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग में एक फैकल्टी सदस्य के रूप में अपना करियर शुरू किया। अपने अल्मा मेटर में वापस आना उनके लिए एक भावुक और गर्व का क्षण रहा होगा। उन्होंने एक ऐसे संस्थान में पढ़ाना और शोध करना शुरू किया, जहाँ उन्होंने स्वयं अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।


इस अवधि में, डॉ. कामकोटि ने कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा और VLSI डिज़ाइन के क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया और कई छात्रों को PhD तथा MS की उपाधियाँ प्रदान करने में मार्गदर्शन किया।


3.2 IIT मद्रास में विभिन्न प्रशासनिक पद


अपने दो दशकों के फैकल्टी करियर के दौरान, डॉ. कामकोटि ने IIT मद्रास में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाएँ निभाईं:


JEE (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) के अध्यक्ष - उन्होंने उसी परीक्षा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जिसमें उन्होंने एक बार असफलता का सामना किया था। यह उनके जीवन का सबसे प्रेरणादायक पहलू है - एक ऐसे व्यक्ति जो कभी JEE में असफल हुआ, वही बाद में उसी परीक्षा का अध्यक्ष बना।


सहायक डीन, औद्योगिक परामर्श और प्रायोजित अनुसंधान (Associate Dean, Industrial Consultancy and Sponsored Research - ICSR) - इस भूमिका में उन्होंने उद्योग और सरकार के साथ संस्थान के संबंधों को मजबूत किया।


3.3 2022: IIT मद्रास के निदेशक के रूप में पदभार


17 जनवरी 2022 को डॉ. कामकोटि ने IIT मद्रास के निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती प्रोफेसर भास्कर राममूर्ति का स्थान लिया, जिन्होंने अपने दो कार्यकाल पूरे कर लिए थे।


डॉ. कामकोटि ने अपने निदेशक पदभार के अवसर पर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. पवन गोयनका, जो उस समय IIT मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष थे, ने इस अवसर पर वर्चुअल रूप से भाग लिया। अपने उद्घाटन भाषण में, डॉ. कामकोटि ने अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट कीं:


NIRF (नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) में IIT मद्रास की शीर्ष स्थिति बनाए रखना - "मेरा ध्यान IIT मद्रास को रैंकिंग में शीर्ष पर बनाए रखने पर होगा, साथ ही संस्थान की शैक्षणिक और शोध उत्कृष्टता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करूंगा,"।


ऑनलाइन शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा का विस्तार


स्कूली शिक्षा बोर्डों के साथ सहयोग कर एक समग्र पाठ्यक्रम को मजबूत करना


उच्च-गुणवत्ता वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कौशल विकास कार्यक्रम


युवा स्कूली छात्रों के साथ बातचीत बढ़ाकर विज्ञान और शोध में रुचि को प्रोत्साहित करना


उद्योग-उन्मुख MTech कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए


पाठ्यक्रम में बहु-विषयकता में वृद्धि, विशेष रूप से भाषाओं, दर्शन, कला, पर्यावरण और मूल्य-आधारित शिक्षा पर जोर


उद्योग भागीदारी में वृद्धि


सामाजिक प्रासंगिकता की समस्याओं पर अनुवादात्मक शोध - जिसमें पुनर्योजी कृषि, उद्योग 4.0, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, और स्मार्ट सिविल निर्माण प्रौद्योगिकी शामिल हैं


AI-संचालित हाइपर-ऑटोमेशन के माध्यम से कागज-रहित, कुशल और प्रभावी शासन


चतुर्थ अध्याय: शोध योगदान - SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर से लेकर AI नीति तक


4.1 SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर: भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर


डॉ. कामकोटि की सबसे बड़ी उपलब्धि SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर का विकास है, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित माइक्रोप्रोसेसर है। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई, जब डॉ. कामकोटि और उनकी टीम ने एक बड़ी कमी को पहचाना - भारत के पास माइक्रोप्रोसेसरों का एक ऐसा परिवार नहीं था जो छोटे एम्बेडेड उपकरणों से लेकर पूर्ण क्लाउड सर्वर तक विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा कर सके।


2014 में SHAKTI प्रोसेसर कार्यक्रम को औपचारिक रूप से IIT मद्रास के रीकॉन्फ़िगरेबल इंटेलिजेंट सिस्टम्स इंजीनियरिंग (RISE) समूह से लॉन्च किया गया। यह कार्यक्रम भारत की विदेशी-डिज़ाइन, IP-लॉक्ड प्रोसेसर आर्किटेक्चर पर निर्भरता को कम करने के लिए शुरू किया गया था। SHAKTI ओपन RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो इसे अधिक सुलभ, अनुकूलन योग्य और लागत-प्रभावी बनाता है।


इस परियोजना का महत्व केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भारत की डिजिटल संप्रभुता का प्रतीक है। जब भू-राजनीतिक तनावों ने विदेशी चिप आर्किटेक्चर पर निर्भरता के जोखिमों को उजागर किया, तब SHAKTI ने भारत को कंप्यूटिंग की बौद्धिक संपदा (IP) परत का स्वामित्व देने का प्रयास किया। आज SHAKTI पारिस्थितिकी तंत्र एम्बेडेड सिस्टम, एज कंप्यूटिंग और सर्वर के लिए प्रोसेसरों तक फैला हुआ है और भारत की सबसे प्रमुख स्वदेशी कंप्यूटिंग पहलों में से एक बन गया है।


डॉ. कामकोटि के नेतृत्व में, इस कार्यक्रम ने स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज के माध्यम से पूरे देश से 1,000 से अधिक टीमों को आकर्षित किया। यह बाद में सरकार के डिजिटल इंडिया RISC-V मिशन का हिस्सा बन गया, जिसमें डॉ. कामकोटि को मुख्य आर्किटेक्ट नियुक्त किया गया।


SHAKTI प्रोसेसर के अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं - मोबाइल कंप्यूटिंग उपकरणों, नेटवर्किंग सिस्टम, संचार और रक्षा क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के लिए भी SHAKTI-आधारित सेमीकंडक्टर चिप विकसित किया गया है। IIT मद्रास के प्रताप सुब्रमण्यम सेंटर फॉर डिजिटल इंटेलिजेंस एंड सिक्योर हार्डवेयर आर्किटेक्चर (PSCDISHA) में डॉ. कामकोटि ने इस परियोजना का नेतृत्व किया।


4.2 कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा और VLSI डिज़ाइन


डॉ. कामकोटि की विशेषज्ञता कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा, सुरक्षित सिस्टम इंजीनियरिंग, VLSI डिज़ाइन, नेटवर्क सुरक्षा और गोपनीयता के क्षेत्रों में है। उनके शोध में रीकॉन्फ़िगरेबल सिस्टम्स डिज़ाइन, VLSI के लिए सॉफ़्टवेयर, और FPGA (फील्ड प्रोग्रामेबल गेट ऐरे) के लिए सर्किट डिज़ाइन शामिल हैं।


उनके महत्वपूर्ण शोध योगदानों में शामिल हैं:


FPGA के लिए प्लेसमेंट समस्या का समाधान - उन्होंने "समानांतर आनुवंशिक एल्गोरिदम" (parallel genetic algorithms) की अवधारणा पेश की।


FPGA के लिए रूटिंग समस्या का समाधान - उन्होंने तंत्रिका नेटवर्क (neural network) का उपयोग किया।


LFSR-आधारित स्ट्रीम सिफर की कमज़ोरियाँ - उन्होंने दिखाया कि n-bit LFSR की स्थिति को O(n) पावर मापनों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।


साइबर हमलों के लिए AI-संचालित रीयल-टाइम डिटेक्शन।


रिवर्सिबल लॉजिक का उपयोग करके ऑनलाइन टेस्टेबल सर्किट।


4.3 AI और मशीन लर्निंग में योगदान


लंबे समय से जनरेटिव AI के क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले डॉ. कामकोटि ने भारत की AI नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने 10 डोमेन की पहचान की जहाँ AI का उपयोग किया जा सकता है।


IIT मद्रास में, उन्होंने AI और डेटा साइंस विभाग की स्थापना की, जिसमें जिम्मेदार AI (Responsible AI) एक प्रमुख प्रभाग है। इस विभाग के लिए लगभग ₹10 करोड़ का कोष प्राप्त किया गया है। उन्होंने भाषा और संज्ञान प्रयोगशाला (Language and Cognition Lab) का भी उद्घाटन किया, जो भारत की भाषाई विविधता का अध्ययन करती है और AI को भाषाई रूप से सूचित करने के लिए काम करती है। इस प्रयोगशाला में आई-ट्रैकिंग और प्रतिक्रिया-समय अध्ययन जैसी उन्नत प्रयोगात्मक विधियों का उपयोग किया जाता है।


4.4 साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी


डॉ. कामकोटि ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे IIT मद्रास में 'साइबर सुरक्षा, विश्वास और विश्वसनीयता केंद्र' (CyStar) के उद्घाटन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस केंद्र का उद्देश्य साइबर सुरक्षा में मौलिक और अनुप्रयुक्त शोध को बढ़ावा देना है।


उनके शोध में मैलवेयर डिटेक्शन के लिए SUNDEW: एक केस-सेंसिटिव डिटेक्शन इंजन भी शामिल है, जो मैलवेयर विविधता का मुकाबला करता है।


4.5 अन्य शोध क्षेत्र


डॉ. कामकोटि के शोध में रीजनरेटिव एग्रीकल्चर स्टैक आर्किटेक्चर (RASA) भी शामिल है, जो IIT मद्रास द्वारा कार्यान्वित एक परियोजना है। जैविक कृषि में उनकी गहरी रुचि उनके शोध को सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ती है।


4.6 प्रकाशन और शैक्षणिक प्रभाव


डॉ. कामकोटि के 150 से अधिक प्रकाशन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और सम्मेलनों में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने कई डॉक्टोरल और स्नातकोत्तर शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने उद्योग और सरकारी R&D प्रतिष्ठानों के साथ लगभग 50 परियोजनाओं का सफलतापूर्वक समन्वय किया है, जो सिद्धांत को वास्तविक-विश्व अनुप्रयोगों से जोड़ता है।


पंचम अध्याय: राष्ट्रीय सुरक्षा और नीति-निर्माण में योगदान


5.1 राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य


डॉ. कामकोटि भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (National Security Advisory Board - NSAB) के सदस्य हैं। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने सरकार को साइबर सुरक्षा पर सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय 5G संचार मानक स्थापित करने में भी योगदान दिया।


NSAB के सदस्य के रूप में, वे भारत की रणनीतिक प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम कर रहे हैं। कंप्यूटर आर्किटेक्चर और सूचना सुरक्षा में उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण आवाज बना दिया है।


5.2 AI टास्क फोर्स के अध्यक्ष


वर्ष 2017 में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने डॉ. कामकोटि की अध्यक्षता में एक AI टास्क फोर्स का गठन किया। इस टास्क फोर्स ने 10 डोमेन की पहचान की जहाँ AI का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए किया जा सकता है।


इस टास्क फोर्स में 17 सदस्य शामिल थे, और इसका उद्देश्य AI का लाभ उठाकर भारत के विकास को गति देना था। डॉ. कामकोटि के नेतृत्व में इस टास्क फोर्स ने AI के अनुप्रयोगों के बारे में महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं, जो आज भारत की AI नीति का आधार हैं।


5.3 राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रौद्योगिकी समितियाँ


डॉ. कामकोटि राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रौद्योगिकी समितियों में भी सेवा करते हैं। इससे उनके प्रौद्योगिकी ज्ञान और नीति-निर्माण क्षमता की सीमा का पता चलता है, जो केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के वित्तीय क्षेत्र तक भी फैली हुई है।


5.4 AIIMS मदुरै के संस्थान निकाय के सदस्य


डॉ. कामकोटि को AIIMS मदुरै के संस्थान निकाय का सदस्य भी नियुक्त किया गया है। यह चिकित्सा क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और योगदान को दर्शाता है, जहाँ वे स्वास्थ्य सेवा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर काम कर रहे हैं।


षष्ठ अध्याय: पुरस्कार और सम्मान


6.1 पद्म श्री (2026)


2026 में, डॉ. कामकोटि को पद्म श्री से सम्मानित किया गया, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया। इस पुरस्कार की घोषणा 77वें गणतंत्र दिवस पर की गई।


पद्म श्री प्राप्त करने पर डॉ. कामकोटि ने कहा, “पद्म श्री पुरस्कार का मेरे लिए एक ही अर्थ है - कि मैं 'विकसित भारत @ 2047' की दिशा में अपने सर्वोत्तम प्रयास करूंगा”। उन्होंने इस पुरस्कार को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया और इसे अपनी यात्रा का हिस्सा रहने वाले सभी लोगों को समर्पित किया।


6.2 अन्य प्रमुख पुरस्कार


DRDO अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार (DRDO Academic Excellence Award)


इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) टेक्नो विज़नरी अवार्ड (Indian Electronics and Semiconductor Association Techno Visionary Award)


अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप (Abdul Kalam Technology Innovation National Fellowship)


ACCS जीवन-काल उपलब्धि पुरस्कार (ACCS Life-time Achievement Award)


IBM फैकल्टी अवार्ड (IBM Faculty Award)


VASVIK औद्योगिक अनुसंधान पुरस्कार (VASVIK Industrial Research Award)


6.3 नागरिक सम्मान


हमसध्वनि द्वारा 'डिस्टिंग्विश्ड सिटिजन ऑफ द ईयर अवार्ड' (Distinguished Citizen of the Year Award)


सप्तम अध्याय: नेतृत्व के तहत IIT मद्रास की उपलब्धियाँ


7.1 NIRF रैंकिंग में लगातार शीर्ष स्थान


डॉ. कामकोटि के नेतृत्व में, IIT मद्रास ने NIRF 2025 में इंजीनियरिंग श्रेणी में लगातार 10वें वर्ष शीर्ष स्थान प्राप्त किया और समग्र श्रेणी में लगातार 7वें वर्ष शीर्ष स्थान प्राप्त किया। डॉ. कामकोटि ने इस सफलता का श्रेय "सामंजस्यपूर्ण, समन्वित और केंद्रित तरीके से काम करने" को दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पाँच-वर्षीय रणनीतिक योजना के तहत निर्धारित लक्ष्यों पर सख्ती से पालन किया।


7.2 जिम्मेदार AI और हाइपर-ऑटोमेशन


डॉ. कामकोटि जिम्मेदार AI (Responsible AI) के प्रबल समर्थक हैं। उन्होंने AI और डेटा साइंस विभाग की स्थापना की, जिसमें जिम्मेदार AI एक प्रमुख प्रभाग है। हाइपर-ऑटोमेशन के क्षेत्र में, उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो (PMRF) योजना, स्टडी इन इंडिया जैसे कई पोर्टल बनाए रखे हैं। उन्होंने शिकायत निवारण तंत्र को भी हाइपर-ऑटोमेटेड किया।


7.3 मानविकी और प्रौद्योगिकी का एकीकरण


डॉ. कामकोटि ने मानविकी और प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सततता स्कूल (School of Sustainability) और नीति केंद्र (Centre for Policy) की स्थापना की। उनका लक्ष्य ह्यूमैनिटीज़ फैकल्टी द्वारा 22 भारतीय भाषाओं में पाठों का अनुवाद करना है, ताकि बड़ी भाषा मॉडल (LLMs) के विकास में सहायता मिल सके।


7.4 ग्रामीण संपर्क और सामाजिक पहल


डॉ. कामकोटि का ग्रामीण भारत से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने तमिलनाडु में 242 ग्रामीण संपर्क केंद्र खोले, जिनकी संख्या भविष्य में 500 तक बढ़ाने की योजना है। इन केंद्रों के माध्यम से पास प्रतिशत 50% से बढ़कर 98% हो गया है। उन्होंने IIT BHU के साथ काशी-तमिल संगमम के लिए सहयोग किया, जिसके तहत वाराणसी में 100 से अधिक स्कूल शामिल किए गए।


7.5 मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान


डॉ. कामकोटि ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया। कोविड-19 के बाद की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, उन्होंने सामाजिकता की कमी को एक प्रमुख समस्या बताया। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए कई पहलें कीं।


अष्टम अध्याय: विवाद और आलोचना


8.1 गोमूत्र संबंधी टिप्पणी


वर्ष 2025 में, डॉ. कामकोटि ने गोमूत्र के औषधीय लाभों का समर्थन किया। इस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई, और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया। हालाँकि, कई लोगों ने उनका बचाव किया, यह कहते हुए कि "प्रोफेसर कामकोटि डीप टेक में काम करते हैं: माइक्रो-प्रोसेसर डिज़ाइन"।


8.2 प्रतिक्रिया


डॉ. कामकोटि ने स्पष्ट किया कि गोशाला में यह एक निजी कार्यक्रम था, जिसमें उन्होंने अपनी निजी क्षमता में भाग लिया। यह विवाद बाद में शांत हो गया, लेकिन यह दर्शाता है कि एक सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में उनके प्रत्येक वक्तव्य की जाँच-पड़ताल होती है।


नवम अध्याय: व्यक्तिगत जीवन, रुचियाँ और सामाजिक योगदान


9.1 जैविक कृषि (Organic Farming)


डॉ. कामकोटि की जैविक कृषि में गहरी रुचि है। वे एक जैविक किसान हैं और चेन्नई और उसके आसपास की कई गोशालाओं से जुड़े हुए हैं। IIT मद्रास में रीजनरेटिव एग्रीकल्चर स्टैक आर्किटेक्चर (RASA) परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं।


9.2 सामाजिक योगदान


उन्होंने आईआईटी मद्रास के ग्रामीण संपर्क केंद्रों के माध्यम से हजारों ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने उद्योग 4.0, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और स्मार्ट सिविल निर्माण प्रौद्योगिकी में अनुवादात्मक शोध पर जोर दिया। उनकी दूरदर्शिता में शून्य-उत्सर्जन ट्रकिंग, ग्रीन हाइड्रोजन वैली, आयुष अस्पताल और ग्रीन सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई के लिए एक सततता परिसर बनाना शामिल है।


9.3 सांस्कृतिक और भाषाई विरासत


हालाँकि डॉ. कामकोटि एक कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, उनकी संस्कृत में पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें भारतीय भाषाओं और संस्कृति से गहराई से जोड़ा है। IIT मद्रास में भाषा और संज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना तथा 22 भारतीय भाषाओं में पाठों के अनुवाद की पहल इस बात का प्रमाण है।


दशम अध्याय: दृष्टिकोण और विरासत


10.1 'स्वदेशी' भावना और 'विकसित भारत @ 2047'


डॉ. कामकोटि 'स्वदेशी' भावना के प्रबल समर्थक हैं। उनका SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर इस भावना का प्रतीक है। उन्होंने 'विकसित भारत @ 2047' के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।


10.2 शिक्षा में सुधार


उनका मानना है कि IIT मद्रास को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वे कोर इंजीनियरिंग विषयों के महत्व पर बल देते हैं और बहु-विषयक शिक्षा के पक्षधर हैं।


10.3 वैश्विक मान्यता


"स्थानीय प्रासंगिकता हमें वैश्विक पहचान देगी" - यह डॉ. कामकोटि का मानना है। उनके नेतृत्व में, IIT मद्रास गहन-प्रौद्योगिकी (deep-tech) नवाचार और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन में अग्रणी बन गया है।


10.4 एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व


डॉ. कामकोटि की जीवन-यात्रा लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। JEE में असफलता से IIT मद्रास के निदेशक बनने तक - यह दृढ़ता, समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रतीक है। उनका कहना है, "असफलता जीवन का अंत नहीं है, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है"।


निष्कर्ष


डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि का जीवन और करियर भारतीय प्रौद्योगिकी, शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक अमूल्य योगदान है। 1968 में चेन्नई में जन्मे, एक संस्कृत प्रोफेसर के पुत्र, JEE में असफल होने वाले, IIT मद्रास से MS और PhD करने वाले, 2001 में फैकल्टी बनने और 2022 में निदेशक बनने वाले डॉ. कामकोटि ने साबित किया है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ता और राष्ट्र-प्रेम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।


SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर, AI टास्क फोर्स की अध्यक्षता, NSAB की सदस्यता, 150 से अधिक शोध पत्र, पद्म श्री - ये सभी उनकी बहुमुखी प्रतिभा और राष्ट्र-निर्माण में योगदान के प्रतीक हैं। वे न केवल एक कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, जैविक किसान और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।


उनका दृष्टिकोण - "स्थानीय प्रासंगिकता हमें वैश्विक पहचान देगी" - तथा "एक परीक्षा किसी के भविष्य को परिभाषित नहीं करती" - युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। 'विकसित भारत @ 2047' के लिए उनका समर्पण यह दर्शाता है कि वे भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि का जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपनी असफलताओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदलना चाहता है। उनका योगदान आने वाले कई दशकों तक भारत की प्रौद्योगिकी और शिक्षा को दिशा देता रहेगा।



ये रहे डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि से जुड़े 50 रोचक तथ्य:


शिक्षा और प्रारंभिक जीवन


JEE में असफल - वर्ष 1985 में JEE परीक्षा में रसायन विज्ञान में केवल 1 अंक आने के कारण असफल हुए।


आज JEE के अध्यक्ष - जिस परीक्षा में असफल हुए, आज उसी JEE के अध्यक्ष हैं।


गाँव में बिता बचपन - प्रारंभिक जीवन दक्षिण तमिलनाडु के विष्णुपुरम गाँव में दादा-दादी के साथ बीता।


संस्कृत विद्वान के पुत्र - पिता एन. वीज़ीनाथन मद्रास विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के प्रमुख थे।


विद्या भारती स्कूल - प्रारंभिक शिक्षा विद्या भारती स्कूल से, वहीं वरिष्ठ माध्यमिक पी.एस. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मयिलापुर से।


कांची मठ का संबंध - पिता कांची पेरियवा के अनन्य भक्त थे, जिन्होंने कामकोटि को CS पढ़ने और विदेश न जाने की सलाह दी।


परिवार में शिक्षा परंपरा - परदादा ने 1914 में विष्णुपुरम में स्कूल खोला; पत्नी के दादा ने 1950 के दशक में तिरुवारुर में स्कूल खोला।


IIT मद्रास से MS और PhD - कंप्यूटर साइंस में MS और PhD दोनों IIT मद्रास से।


दो पोस्ट-डॉक्टोरल - IISc बेंगलुरु और IMS चेन्नई से पोस्ट-डॉक्टोरल शोध।


करियर और उपलब्धियाँ


2001 में फैकल्टी - IIT मद्रास के कंप्यूटर साइंस विभाग में 2001 में फैकल्टी बने।


जनवरी 2022 में निदेशक - 17 जनवरी 2022 को IIT मद्रास के निदेशक बने।


10वीं बार NIRF में प्रथम - नेतृत्व में IIT मद्रास ने NIRF 2025 में इंजीनियरिंग में लगातार 10वीं बार प्रथम स्थान पाया।


50,000 छात्रों का लक्ष्य - पाँच वर्षीय कार्यकाल में 50,000 छात्रों को नामांकित करने का लक्ष्य।


पद्म श्री 2026 - विज्ञान और प्रौद्योगिकी में योगदान के लिए 2026 में पद्म श्री से सम्मानित।


SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर


2011 में पहचान - 2011 में भारत को अपने माइक्रोप्रोसेसर की आवश्यकता पहचानी।


2014 में SHAKTI लॉन्च - 2014 में IIT मद्रास के RISE समूह से SHAKTI प्रोसेसर कार्यक्रम लॉन्च।


भारत की पहली स्वदेशी चिप - भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर।


ओपन RISC-V आर्किटेक्चर - SHAKTI ओपन RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित।


1,000+ टीमों ने भाग लिया - स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज में 1,000 से अधिक टीमों ने भाग लिया।


डिजिटल इंडिया RISC-V मिशन - 2022 में सरकार के डिजिटल इंडिया RISC-V मिशन के मुख्य आर्किटेक्ट नियुक्त।


₹76,000 करोड़ सेमीकंडक्टर पहल - व्यापक सेमीकंडक्टर पहल का हिस्सा।


ISRO के लिए चिप - ISRO के लिए SHAKTI-आधारित सेमीकंडक्टर चिप विकसित।


7-नैनोमीटर प्रोसेसर - SHAKTI परियोजना के तहत 7-नैनोमीटर प्रोसेसर पर काम।


AI और साइबर सुरक्षा


AI टास्क फोर्स के अध्यक्ष - 2017 में वाणिज्य मंत्रालय की AI टास्क फोर्स के अध्यक्ष।


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड - NSAB के सदस्य, साइबर सुरक्षा पर सरकार को सलाह।


भारतीय 5G मानक - भारतीय 5G संचार मानक स्थापित करने में योगदान।


जिम्मेदार AI केंद्र - IIT मद्रास में जिम्मेदार AI केंद्र की स्थापना।


NSE और RBI समितियाँ - NSE और RBI की प्रौद्योगिकी समितियों में सेवा।


साइबर सुरक्षा केंद्र - IIT मद्रास में CyStar साइबर सुरक्षा केंद्र के उद्घाटन में भूमिका।


संगीत और कला


प्रशिक्षित कर्नाटक वायलिन वादक - सी.एन. चंद्रशेखरन से वायलिन सीखा।


क्रिकेट के कारण वायलिन - गली क्रिकेट में चश्मा टूटने पर पिता ने बल्ला कुएँ में फेंककर वायलिन थमा दिया।


पसंदीदा राग - पसंदीदा राग 'बिंदुमालिनी'।


एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का सानिध्य - भरत रत्न एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी परिवार की मित्र थीं; उन्होंने स्वयं संगति सिखाई।


लहरिया पहनते हैं - निदेशक पद पर रहते हुए भी पारंपरिक लहरिया पहनते हैं।


व्यक्तिगत जीवन और रुचियाँ


जैविक किसान - पैतृक गाँव में जैविक खेती करते हैं।


शाकाहारी, बिना प्याज-लहसुन - प्याज और लहसुन नहीं खाते।


7am-10pm कार्य - "संस्थान इतना समय माँगता है," 7am से 10pm काम।


कैंपस में नहीं रहते - निदेशक आवास में शिफ्ट होने में 2 वर्ष लगेंगे, पिता के घर में रहते हैं।


पिता के साथ रहे - IISc में संक्षिप्त अवधि को छोड़कर पिता के साथ रहे।


पासपोर्ट नहीं - उनके पास पासपोर्ट नहीं है, कभी विदेश नहीं गए।


गोमूत्र पर विवाद - जनवरी 2025 में गोमूत्र के औषधीय गुणों पर बयान से विवाद।


वैज्ञानिक प्रमाण का हवाला - 'नेचर' सहित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स का हवाला देकर बचाव।


सामाजिक योगदान


242 ग्रामीण संपर्क केंद्र - तमिलनाडु में 242 केंद्र, 98% पास प्रतिशत।


ग्रामीण प्रतिभा पर विश्वास - "ग्रामीण भारत में प्रतिभा का दोहन नहीं किया गया"।


दो ग्रामीण स्कूलों के मेंटर - अपने स्कूल के बच्चे को JEE क्रैक करते देखने का सपना।


आउट-ऑफ-बॉक्स थिंकिंग कोर्स - 10 वर्ष से अधिक आयु के सभी के लिए पाठ्यक्रम शुरू।


जैविक कृषि प्रेरणा - दो शराब न पीने वाले चचेरे भाई कैंसर से गए, इससे जैविक खेती की प्रेरणा।


22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद - मानविकी संकाय द्वारा 22 भारतीय भाषाओं में पाठों के अनुवाद की योजना।


"विकसित भारत @ 2047" - पद्म श्री पुरस्कार को विकसित भारत @ 2047 की दिशा में समर्पित।


"असफलता जीवन का अंत नहीं" - "FAIL का मतलब First Attempt In Learning"।


डॉ. कामकोटि की यात्रा—JEE में असफलता से IIT मद्रास के निदेशक और पद्म श्री विजेता तक—यह दृढ़ता, समर्पण और राष्ट्र-प्रेम की प्रेरणादायक गाथा है।



डॉ. वीज़ीनाथन कामकोटि (प्रो. वी. कामकोटि) से जुड़े 50 सामान्य प्रश्न (FAQ) यहाँ हैं:


शिक्षा एवं प्रारंभिक जीवन


डॉ. कामकोटि का पूरा नाम क्या है? - वीज़ीनाथन कामकोटि (Veezhinathan Kamakoti)।


उनका जन्म कब और कहाँ हुआ? - इनका जन्म लगभग 1968-69 में चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था।


उनके पिता क्या करते थे? - उनके पिता मद्रास विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के प्रमुख थे।


उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कहाँ से प्राप्त की? - चेन्नई के विद्या भारती स्कूल और पी.एस. सीनियर सेकेंडरी स्कूल से।


उन्होंने IIT मद्रास से कौन सी डिग्रियाँ प्राप्त कीं? - कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में एम.एस. और पीएच.डी.。


क्या वे JEE (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) में सफल हुए थे? - नहीं, वे 1985 में JEE में असफल हो गए थे, रसायन विज्ञान में केवल 1 अंक प्राप्त हुए थे।


असफलता के बाद उन्होंने क्या किया? - उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से BE की उपाधि प्राप्त की और फिर IIT मद्रास से MS और PhD किया।


क्या उन्होंने कोई पोस्ट-डॉक्टोरल शोध किया? - हाँ, IISc बेंगलुरु और IMS चेन्नई से।


करियर और IIT मद्रास


उन्होंने IIT मद्रास में कब पढ़ाना शुरू किया? - 2001 में।


वे IIT मद्रास के निदेशक कब बने? - 17 जनवरी 2022 को।


निदेशक बनने से पहले उनके पास कौन-से प्रशासनिक पद थे? - JEE के अध्यक्ष और औद्योगिक परामर्श एवं प्रायोजित अनुसंधान के सहायक डीन।


IIT मद्रास ने NIRF रैंकिंग में उनके नेतृत्व में क्या हासिल किया? - NIRF 2025 में इंजीनियरिंग में लगातार 10वीं बार और समग्र में लगातार 7वीं बार शीर्ष स्थान।


IIT मद्रास को शीर्ष पर बनाए रखने का उनका रहस्य क्या है? - "एकजुट, समन्वित और केंद्रित तरीके से काम करना" तथा पाँच-वर्षीय रणनीतिक योजना।


अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग के बारे में उनका क्या दृष्टिकोण है? - अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग प्राथमिकता है, लेकिन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की कीमत पर नहीं।


शोध एवं तकनीकी योगदान


उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र क्या हैं? - कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा, VLSI डिज़ाइन।


उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानी जाती है? - भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर, SHAKTI का विकास।


SHAKTI प्रोसेसर किस आर्किटेक्चर पर आधारित है? - ओपन RISC-V आर्किटेक्चर।


क्या SHAKTI का उपयोग किसी सरकारी एजेंसी के लिए किया गया है? - हाँ, ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के लिए एक SHAKTI-आधारित चिप विकसित की गई है।


वे किस सरकारी मिशन से जुड़े हैं? - डिजिटल इंडिया RISC-V मिशन (DIR-V) के मुख्य आर्किटेक्ट।


AI के क्षेत्र में उनका क्या योगदान है? - IIT मद्रास में AI और डेटा साइंस विभाग की स्थापना, जिसमें 'जिम्मेदार AI' (Responsible AI) एक प्रमुख प्रभाग है।


राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नीति-निर्माण


राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी क्या भूमिका है? - वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य हैं।


क्या उन्होंने किसी AI टास्क फोर्स का नेतृत्व किया है? - हाँ, उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित AI टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।


क्या वे अन्य वित्तीय संस्थानों की समितियों में हैं? - हाँ, वे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रौद्योगिकी समितियों में सेवा करते हैं।


सम्मान एवं पुरस्कार


उन्हें कौन-सा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान मिला है? - 2026 में पद्म श्री।


पद्म श्री पुरस्कार पाकर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? - "पद्म श्री पुरस्कार का मेरे लिए एक ही अर्थ है - कि मैं 'विकसित भारत @ 2047' की दिशा में अपने सर्वोत्तम प्रयास करूंगा"।


उन्हें कौन-से अन्य पुरस्कार मिले हैं? - DRDO शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार, IESA टेक्नो विज़नरी अवार्ड, अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप, IBM फैकल्टी अवार्ड, VASVIK औद्योगिक अनुसंधान पुरस्कार।


विवाद


गोमूत्र पर उनकी टिप्पणी को लेकर क्या विवाद हुआ? - जनवरी 2025 में, उन्होंने गोमूत्र के औषधीय गुणों का समर्थन किया, जिससे काफी विवाद हुआ।


विवाद पर उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी? - उन्होंने कहा कि उनका बयान 'नेचर' सहित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित शोध पर आधारित था।


क्या वे स्वयं गोमूत्र का सेवन करते हैं? - हाँ, जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने पुष्टि की।


व्यक्तिगत जीवन एवं रुचियाँ


क्या उनका विदेशों से कोई संबंध है? - उनके पास पासपोर्ट नहीं है और वे कभी विदेश नहीं गए।


क्या वे संगीत में रुचि रखते हैं? - हाँ, वे एक प्रशिक्षित कर्नाटक वायलिन वादक हैं।


क्या वे कृषि से जुड़े हैं? - हाँ, वे एक जैविक किसान हैं और IIT मद्रास में पुनर्योजी कृषि परियोजना (RASA) का नेतृत्व कर रहे हैं।


उनके दैनिक कार्य के घंटे क्या हैं? - वे सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक काम करते हैं।


IIT मद्रास में पहल और दृष्टिकोण


वे 'जिम्मेदार AI' (Responsible AI) पर क्यों जोर देते हैं? - AI में नैतिकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए।


'हाइपर-ऑटोमेशन' का उनका क्या मतलब है? - संस्थान के शासन को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के लिए IT-संचालित तंत्र।


वे मानविकी (Humanities) को प्रौद्योगिकी से कैसे जोड़ना चाहते हैं? - 22 भारतीय भाषाओं में पाठों का अनुवाद कर बड़ी भाषा मॉडल (LLMs) विकसित करना।


ग्रामीण भारत से जुड़ने के लिए उन्होंने क्या किया? - तमिलनाडु में 242 ग्रामीण संपर्क केंद्र खोले, जिनकी संख्या बढ़ाकर 500 करने की योजना है।


इन केंद्रों का क्या प्रभाव पड़ा? - पास प्रतिशत 50% से बढ़कर 98% हो गया।


छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए उन्होंने क्या किया? - कोविड-19 के बाद सामाजिकता की कमी को पहचाना और समाधान के लिए कई पहलें शुरू कीं।


'फैकल्टी ऑफ प्रैक्टिस' का उनका क्या विचार है? - यह उद्योग के पेशेवरों को IIT मद्रास में पढ़ाने का अवसर देता है।


अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए उनकी क्या योजना है? - डेटा साइंस, एनर्जी, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में 9 अंतर्राष्ट्रीय MTech पाठ्यक्रम शुरू किए।


स्थिरता (Sustainability) के लिए उनकी क्या योजना है? - शून्य-उत्सर्जन ट्रकिंग, ग्रीन हाइड्रोजन वैली और ग्रीन सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई के लिए एक सततता परिसर बनाना।


उद्योग एवं रोजगार


उद्योग-अकादमिक अंतर को पाटने के लिए उनका क्या दृष्टिकोण है? - उद्योग को पाठ्यक्रम सामग्री देने और IIT मद्रास में परीक्षा आयोजित करने के लिए आमंत्रित करना।


IIT मद्रास के छात्रों के लिए नौकरी के अवसर क्या हैं? - 8 या उससे अधिक CGPA वाले छात्रों को नौकरी मिल जाती है, 7-7.5 CGPA वालों को भी अंततः नौकरी मिल जाती है।


क्या IIT मद्रास के अधिकांश छात्र विदेश जाते हैं? - नहीं, पिछले पाँच वर्षों में केवल 5% स्नातक विदेश गए हैं।


सामान्य प्रश्न


क्या वे JEE के अध्यक्ष हैं? - हाँ।


क्या वे किसी बैंक के निदेशक मंडल में हैं? - हाँ, वे सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड के निदेशक मंडल में हैं।


क्या उन्हें AIIMS मदुरै से कोई संबंध है? - हाँ, वे AIIMS मदुरै के संस्थान निकाय के सदस्य हैं।


क्या वे किसी अन्य संस्थान से जुड़े हैं? - हाँ, वे IIT मद्रास ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन और IITM CDOT SAMGNYA टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के निदेशक हैं।


उनका जीवन-दर्शन क्या है? - "स्थानीय प्रासंगिकता हमें वैश्विक पहचान देगी" और "असफलता जीवन का अंत नहीं है, बल्कि सीखने का अवसर है"।


डॉ. कामकोटि की कहानी—JEE में असफलता से IIT मद्रास के निदेशक और पद्म श्री विजेता बनने तक—यह दृढ़ता, समर्पण और राष्ट्र-प्रेम की प्रेरणादायक गाथा है।




लोकसभा में परीक्षा सुधारों पर बहस के दौरान, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' ('gaumutra expert') कहकर संबोधित किया। यह टिप्पणी जनवरी 2025 में एक कार्यक्रम में गोमूत्र के औषधीय गुणों को लेकर प्रो. कामकोटि द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए की गई थी।


बयान का संदर्भ: प्रियंका गांधी ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) सुधार टास्क फोर्स की क्षमता पर सवाल उठाते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि NTA सुधार टास्क फोर्स में 'गोमूत्र विशेषज्ञ' को शामिल करना उचित नहीं है।


सटीक शब्द: रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने प्रो. कामकोटि को "गौमूत्र" (Cow Urine) विशेषज्ञ कहा।


प्रतिक्रियाएँ:


शैक्षणिक जगत: 200 से अधिक शिक्षाविदों और कई कुलपतियों ने इस टिप्पणी की निंदा की और माफी की मांग की। उन्होंने इसे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् का अपमान और अनुपयुक्त बताया।


बचाव: कुछ लोगों का मानना है कि प्रो. कामकोटि के बयान की आलोचना तो हो सकती है, लेकिन उपहास नहीं। उनके शैक्षणिक योगदान (SHAKTI चिप, JEE अध्यक्ष) को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।