प्रदीप रावत
| जन्म तिथि | 21 January 1952 |
| उम्र | 74 वर्ष(2026) |
| राशि | कुंभ (Aquarius) |
| जन्म स्थान | जबलपुर, मध्य प्रदेश, भारत |
| निवास स्थान | मुंबई, महाराष्ट्र (गोरेगांव स्थित आवास) |
| पिता | एम. एस. रावत (भारतीय सेना में कार्यरत) |
| माता | एम. एम. रावत |
| कद | लगभग 1.78 मीटर (5 फीट 10 इंच) |
| वैवाहिक हि. | विवाहित |
| वैवाहिक दि. | 2006-08-18 |
| जीवनसंगी | कल्याणी रावत |
| बच्चे | दो पुत्र हैं - विक्रम रावत, सिंह रावत |
| शिक्षा | जबलपुर, मध्य प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा |
| योग्यता | स्नातक (Graduate) |
| पेशा | अभिनेता |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
| नेट वर्थ | अनुमानित ₹20 करोड़ से ₹41 करोड़ के बीच |
| मृत्यु | 5 अगस्त 2026 को शाम को |
प्रदीप राम सिंह रावत––
एक अभिनेता जिसने खलनायकी को कला बनाया
प्रदीप राम सिंह रावत, जिन्हें प्रदीप रावत के नाम से जाना जाता है, भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने अपनी दमदार उपस्थिति और अभिनय क्षमता से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। 21 जनवरी 1952 को जन्मे और 4 अगस्त 2026 को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले इस अभिनेता ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों में काम किया। 'गजनी' (2005, 2008) में दोहरी भूमिका और 'लगान' (2001) में देवा सिंह सोढ़ी का किरदार उनकी प्रतिभा का पर्याय बन गया। उनके निधन के साथ ही भारतीय फिल्म उद्योग ने एक बहुमुखी और दमदार अभिनेता को खो दिया। यह विस्तृत जीवनी उनके जीवन, करियर, संघर्ष, उपलब्धियों और उनकी विरासत का व्यापक विवरण प्रस्तुत करती है।
भारतीय सिनेमा के विशाल और विविध परिदृश्य में, कुछ अभिनेता ऐसे होते हैं जो अपनी भूमिकाओं से इतिहास रच देते हैं। प्रदीप राम सिंह रावत, जिन्हें आमतौर पर प्रदीप रावत के नाम से पुकारा जाता है, ऐसे ही एक अभिनेता थे। अपनी विशाल काया, गरजती आवाज़ और तीखी आँखों के साथ, उन्होंने स्क्रीन पर खलनायकी को एक नया आयाम दिया। जहाँ एक तरफ उन्होंने 'गजनी' में एक निर्मम और दहशत फैलाने वाले विलेन का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में दहशत पैदा की, वहीं 'लगान' में उन्होंने एक सिख सिपाही की मजबूत लेकिन वफादार छवि पेश कर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
प्रदीप रावत का करियर एक साधारण बैंक कर्मचारी से शुरू होकर भारतीय सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बनने तक का सफर तय करता है। उन्होंने अपने 38 वर्षों के लंबे करियर में 150 से अधिक फिल्मों में काम किया। इस जीवनी में हम उनके शुरुआती जीवन, संघर्ष, फिल्मी सफर, पुरस्कार, व्यक्तिगत जीवन और उनकी अमिट विरासत पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि––
जन्म और परिवार––
प्रदीप राम सिंह रावत का जन्म 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था। उनके पिता एम. एस. रावत सेना में कार्यरत थे, जबकि उनकी माता का नाम एम. एम. रावत था। उनकी एक बहन थी, जिनका नाम अल्का भाटिया था। प्रदीप रावत ने अपना बचपन और युवावस्था जबलपुर में ही बिताई, जहाँ उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।
बैंकिंग करियर से अभिनय तक––
अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले, प्रदीप रावत एक बैंक कर्मचारी थे। उन्होंने यू.सी.ओ. बैंक, राइट टाउन, जबलपुर में नौकरी की। यह एक स्थिर और सुरक्षित नौकरी थी, लेकिन उनके अंदर अभिनय के प्रति गहरी रुचि थी। एक बैंक कर्मचारी के रूप में उनका जीवन सामान्य था, लेकिन उनकी विशाल काया और चेहरे पर एक अलग तेज था, जो उन्हें भीड़ से अलग बनाता था। यह उनकी इसी शारीरिक बनावट और आकर्षक व्यक्तित्व ने उन्हें फिल्म उद्योग की ओर आकर्षित किया।
अभिनय की ओर रुझान––
बैंक की नौकरी के दौरान, प्रदीप रावत ने मॉडलिंग और थिएटर में रुचि दिखानी शुरू कर दी। हालांकि, उनका फिल्मी करियर आसान नहीं था। शुरू में उन्हें कई अस्वीकृतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस ने उन्हें लगातार प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। आखिरकार, उनकी किस्मत उस समय चमकी जब उनकी भव्य उपस्थिति ने प्रसिद्ध निर्देशक बी.आर. चोपड़ा का ध्यान आकर्षित किया, जो उस समय अपनी महत्वाकांक्षी टेलीविजन श्रृंखला 'महाभारत' के लिए कलाकारों की तलाश कर रहे थे।
टेलीविजन से करियर की शुरुआत––
'महाभारत' में अश्वत्थामा (1988-1990)––
प्रदीप रावत के करियर में टर्निंग प्वाइंट बी.आर. चोपड़ा की टेलीविजन श्रृंखला 'महाभारत' (1988-1990) में अश्वत्थामा की भूमिका थी। इस महाकाव्य धारावाहिक ने पूरे देश में धूम मचाई और करोड़ों घरों में लोग इसे देखते थे। अश्वत्थामा, जो द्रोणाचार्य के पुत्र और कौरवों की ओर से युद्ध करने वाले योद्धा थे, एक जटिल चरित्र था। प्रदीप रावत ने इस चरित्र को जिस गंभीरता, आक्रामकता और पीड़ा के साथ निभाया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हालाँकि, कुछ स्रोतों के अनुसार उन्हें इस धारावाहिक में 'प्रदीप सारंगी' के नाम से क्रेडिट किया गया था। 'महाभारत' में उनके काम ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई। इस भूमिका ने उन्हें एक मजबूत और खलनायकी चरित्र वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जिसके बाद उन्हें फिल्मों में खलनायक की भूमिकाओं के लिए काफी दरवाजे खुले।
'चंद्रकांता' और 'युग' में उपस्थिति––
'महाभारत' के बाद, प्रदीप रावत ने अन्य टेलीविजन श्रृंखलाओं में भी काम किया। उन्होंने 'चंद्रकांता' में अय्यार हिम्मत सिंह की भूमिका निभाई, जो उस समय एक बेहद लोकप्रिय फंतासी धारावाहिक था। इसके अलावा, वे 'युग' (Yug) नामक धारावाहिक में एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी मार्शल के रूप में दिखाई दिए। इन भूमिकाओं ने टेलीविजन पर उनकी उपस्थिति को और मजबूत किया, हालांकि 'महाभारत' ही वह किरदार था जिसने उन्हें सबसे अधिक प्रसिद्धि दिलाई।
बॉलीवुड में प्रवेश––
फिल्मी करियर की शुरुआत––
प्रदीप रावत ने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक के मध्य में की। हालाँकि 'महाभारत' से उन्हें पहचान मिली, लेकिन फिल्मों में उनका सफर 1985 से शुरू होता है।
'मेरी जंग' (1985) और 'ऐतबार' (1985)––
उनकी पहली फिल्म 1985 में आई थी, हालाँकि इस बात पर मतभेद है कि कौन सी फिल्म पहली थी। कुछ स्रोतों के अनुसार, 'मेरी जंग' उनकी पहली फिल्म थी, जबकि अन्य स्रोत 'ऐतबार' को उनकी पहली फिल्म मानते हैं। 'ऐतबार' का निर्देशन मुकुल आनंद ने किया था और इसमें राज बब्बर और दीप्ति नवल मुख्य भूमिकाओं में थे। इन फिल्मों में उनकी भूमिकाएँ छोटी थीं, लेकिन उन्होंने फिल्मी दुनिया में पैर जमा लिया।
'आग्नीपथ' (1990) और 'बाघी' (1990)––
1990 में, प्रदीप रावत ने अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'आग्नीपथ' में विजय (अमिताभ बच्चन) के सहयोगी की छोटी सी भूमिका निभाई। इसी वर्ष उन्होंने सलमान खान की 'बाघी: ए रिबेल फॉर लव' (1990) में 'बुद्ध' की भूमिका निभाई। दोनों ही फिल्मों में उनकी भूमिकाएँ मुख्य नहीं थीं, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय से निर्देशकों और निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया।
1990 के दशक में बॉलीवुड––
1990 के दशक में, प्रदीप रावत ने बॉलीवुड में कई महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से खलनायक या सहायक भूमिकाएँ निभाईं।
'सरफ़रोश' (1999) में सुल्तान––
1999 में आई फिल्म 'सरफ़रोश' उनके करियर की एक अहम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने 'सुल्तान' नामक आतंकवादी की भूमिका निभाई थी। आमिर खान अभिनीत इस फिल्म में एक क्रूर और दहशत फैलाने वाले खलनायक के रूप में उनका अभिनय बेहद सराहा गया। हालाँकि यह भूमिका लंबी नहीं थी, लेकिन आमिर खान के साथ उनकी पहली स्क्रीन शेयरिंग थी और इसने उन्हें आमिर खान के साथ आगे आने वाली फिल्मों के लिए तैयार किया।
'मेजर साब' (1998) और 'कोयला' (1997)––
'सरफ़रोश' से पहले, उन्होंने 'मेजर साब' (1998) में सूबेदार सिंह की भूमिका निभाई, जिसमें अमिताभ बच्चन और अजय देवगन मुख्य भूमिकाओं में थे। 1997 में आई फिल्म 'कोयला' में वे डी.आई.जी. के रूप में दिखे, जो राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित और शाहरुख खान अभिनीत थी। इन फिल्मों के अलावा, उन्होंने 'पत्थर के फूल' (1991), 'इंसानियत' (1994), और 'संगदिल सनम' (1994) जैसी फिल्मों में भी काम किया। इस दौरान, वे बड़े कलाकारों के साथ काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें अभी तक वह बड़ा ब्रेक नहीं मिला था जो उन्हें स्टार बना सके।
साउथ इंडियन सिनेमा में कदम और सफलता––
हालाँकि प्रदीप रावत ने बॉलीवुड में काम किया, लेकिन उनकी असली पहचान और सफलता दक्षिण भारतीय सिनेमा में हुई। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा में कई कालजयी फिल्में दीं।
तेलुगु सिनेमा में पदार्पण: 'स्ये' (2004)––
प्रदीप रावत के करियर का सबसे बड़ा मोड़ एस.एस. राजामौली द्वारा निर्देशित फिल्म 'स्ये' (Sye) के साथ आया, जो 2004 में रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने एक दमदार विलेन 'भिक्षु यादव' की भूमिका निभाई थी। फिल्म को दर्शकों और आलोचकों दोनों की ओर से भारी सराहना मिली, और प्रदीप रावत के अभिनय को विशेष रूप से सराहा गया।
'स्ये' की सफलता ने उन्हें तेलुगु फिल्म उद्योग में एक स्थापित खलनायक बना दिया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार (तेलुगु), नंदी पुरस्कार और संतोषम पुरस्कार मिला। इस फिल्म की सफलता ने उनके लिए साउथ इंडियन सिनेमा के दरवाजे खोल दिए और वे मनोरंजन उद्योग के सबसे अधिक मांग वाले खलनायकों में से एक बन गए।
तेलुगु फिल्मों में सफलता––
'स्ये' के बाद, प्रदीप रावत ने तेलुगु सिनेमा में एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। उनके कुछ महत्वपूर्ण तेलुगु फिल्मों की सूची इस प्रकार है:
'छत्रपति' (2005): इस फिल्म में उन्होंने राज बिहारी की भूमिका निभाई, जो पहली बार प्रभास के साथ उनकी स्क्रीन शेयरिंग थी।
'भद्र' (2005): इस फिल्म में उन्होंने वीरैया की भूमिका निभाई, जिसमें रवि तेजा मुख्य भूमिका में थे।
'अंदरीवाडु' (2005): इसमें उन्होंने सत्ती पहलवान की भूमिका निभाई, जो कृष्णा और अक्किनेनी नागार्जुन अभिनीत फिल्म थी।
'जगपति' (2005): इस फिल्म में उन्होंने एमएलए गौड़ की भूमिका निभाई।
'स्टालिन' (2006): अक्किनेनी नागार्जुन के साथ, उन्होंने एक एमएलए की भूमिका निभाई।
'देसमुद्रु' (2007): इस फिल्म में उन्होंने अल्लू अर्जुन के साथ तंबी दुरई की भूमिका निभाई।
'योगी' (2007): इस फिल्म में उन्होंने नरसिंह पहलवान की कैमियो भूमिका निभाई, जिसमें प्रभास थे।
'राक्षस' (2008): इस फिल्म में उन्होंने संतान बाबा की भूमिका निभाई।
'सर्राइनोडु' (2016): इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में उन्होंने अल्लू अर्जुन के साथ ओबुल रेड्डी की भूमिका निभाई।
'नेने राजु नेने मंत्री' (2017): इस फिल्म में उन्होंने राणा दग्गुबाती के साथ सरपंच की भूमिका निभाई।
उनके अन्य तेलुगु फिल्मों में 'बालाडूर' (2008), 'ओय!' (2009), 'कास्को' (2009), 'आदविश्नु' (2008), 'पंचाक्षरी' (2010), 'रगड़ा' (2010), 'पूला रंगाडु' (2012), और 'नायक' (2013) शामिल हैं।
तमिल सिनेमा में सफलता और 'गजनी' (2005)––
प्रदीप रावत ने तमिल सिनेमा में भी शानदार सफलता पाई। 2005 में, ए.आर. मुरुगादॉस द्वारा निर्देशित फिल्म 'गजनी' (Ghajini) रिलीज़ हुई, जिसमें सूर्या मुख्य भूमिका में थे। प्रदीप रावत ने इस फिल्म में दोहरी भूमिका निभाई - एक क्रूर और निर्मम खलनायक के रूप में, जो लक्ष्मण और राम के जुड़वाँ भाइयों का किरदार था। उनका अभिनय इतना भयावह और दमदार था कि फिल्म में उनके आतंक ने दर्शकों को डरा दिया और उन्हें तमिल सिनेमा में एक स्थापित खलनायक बना दिया।
2008 की हिंदी 'गजनी'––
'गजनी' की तमिल संस्करण की जबरदस्त सफलता के बाद, निर्माताओं ने इसे हिंदी में आमिर खान के साथ रीमेक करने का निर्णय लिया। प्रदीप रावत को फिर से 'गजनी धर्मात्मा' की भूमिका के लिए चुना गया, क्योंकि उन्होंने मूल फिल्म में जबरदस्त अभिनय किया था। 2008 में रिलीज़ हुई हिंदी 'गजनी' ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई और प्रदीप रावत की खलनायकी को पूरे भारत में पहचाना गया। यह फिल्म उनके करियर की सबसे पहचानी जाने वाली फिल्मों में से एक बन गई।
अन्य तमिल और मलयालम फिल्में––
तमिल में, उन्होंने 'थोट्टी जया' (2005), 'शबरी' (2007), 'वीरम' (2014), 'जिल्ला' (2014), 'अंबाला' (2015), 'एली' (2015) और 'कजुगु' (2012) जैसी फिल्मों में काम किया।
मलयालम सिनेमा में, उन्होंने 'चाइना टाउन' (2011), 'कजिन्स' (2014), 'इथु पथिरामनाल' (2013) और 'हीरो 420' (2016) में अपनी भूमिकाएँ निभाईं।
कन्नड़ सिनेमा में कदम––
कन्नड़ सिनेमा में भी प्रदीप रावत का दबदबा रहा। उन्होंने 'गज' (2008), 'शिवलिंग' (2016), 'लक्ष्मण' (2016), 'चैंपियन' (2022) और 'इल्लिंदा अरम्बगिडे' (2021) जैसी कन्नड़ फिल्मों में काम किया।
2010-2026: बाद का करियर और अंतिम फिल्में––
2010 के बाद के दशक में, प्रदीप रावत ने अपने करियर को जारी रखा। हालाँकि उनकी उम्र बढ़ती गई, लेकिन वे अभी भी कई फिल्मों में सक्रिय थे।
'ग्रैंड मस्ती' (2013) और अन्य फिल्में––
2013 में, उन्होंने बॉलीवुड की कॉमेडी फिल्म 'ग्रैंड मस्ती' में रॉबर्ट परेरा की भूमिका निभाई, जो एक कॉमेडी भूमिका थी और उनके पारंपरिक खलनायकी चरित्र से अलग थी। इसके अलावा, 2015 में उन्होंने 'सिंह इज ब्लिंग' में अक्षय कुमार के साथ काम किया, जिसमें उन्होंने किरपाल सिंह की भूमिका निभाई।
2020 के दशक की फिल्में––
अपने अंतिम वर्षों में भी, प्रदीप रावत कई फिल्मों में दिखाई दिए। उनकी कुछ महत्वपूर्ण हालिया फिल्मों में शामिल हैं:
'टाइगर नागेश्वर राव' (2023): इस तेलुगु फिल्म में उन्होंने कलकत्ता सेठ की भूमिका निभाई।
'डीडी रिटर्न्स' (2023): इस फिल्म में उन्होंने फर्नांडीज की भूमिका निभाई।
'ओरु कदथ नादन कथा' (2023): इस मलयालम फिल्म में उन्होंने बाबा की भूमिका निभाई।
'छावा' (2025): यह उनकी आखिरी फिल्मों में से एक थी, जिसमें उन्होंने येसाजी कांक की भूमिका निभाई।
इसके अलावा, 'जनता बार' (2025), 'जतधारा' (2025) जैसी फिल्में उनके निधन के बाद रिलीज़ हुई हैं या रिलीज़ होने वाली हैं। उनकी अंतिम फिल्म 'आ बाटा आमा' और 'गयापद्द सिम्हा' में उन्होंने 2025 में काम किया था।
प्रदीप रावत की विशेष अभिनय शैली––
खलनायकी के विभिन्न पहलू––
प्रदीप रावत की खासियत थी कि वे अपने खलनायकी चरित्रों में अलग-अलग रंग भर सकते थे। 'गजनी' में उनका किरदार पूरी तरह से क्रूर, दहशत फैलाने वाला और मानसिक रूप से असंतुलित था। वहीं, 'लगान' में देवा सिंह एक कठोर लेकिन निष्ठावान सिख सिपाही था, जो अंग्रेजों के खिलाफ अपनी टीम का समर्थन करता था। 'स्ये' में भिक्षु यादव एक गैंगस्टर था, लेकिन उसमें एक अलग तरह का ठाठ और शैली थी। इस तरह, वे हर भूमिका में कुछ नया लेकर आते थे।
दोहरी भूमिका की क्षमता––
'गजनी' (2005 और 2008) में उन्होंने जुड़वाँ भाइयों की दोहरी भूमिका निभाई, जो अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम था। दोनों भाइयों के व्यक्तित्व में अंतर दिखाना और दोनों को समान रूप से खतरनाक बनाना उनकी अभिनय क्षमता का प्रमाण था।
सहायक और हास्य भूमिकाएँ––
हालाँकि वे मुख्य रूप से एक खलनायक के रूप में जाने जाते थे, प्रदीप रावत ने 'ग्रैंड मस्ती' में कॉमेडी भूमिका निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने 'सिंह इज ब्लिंग' और 'डीडी रिटर्न्स' जैसी फिल्मों में भी हल्की-फुल्की भूमिकाएँ निभाईं, जो दिखाता है कि वे केवल गंभीर किरदारों तक सीमित नहीं थे।
व्यक्तिगत जीवन और विवाद––
परिवार और विवाह––
प्रदीप रावत का पारिवारिक जीवन उनके फिल्मी जीवन की तरह ही चर्चित रहा है। उन्होंने 18 अगस्त 2006 को कल्याणी रावत से विवाह किया। कल्याणी से उनके दो पुत्र हैं - विक्रम रावत (जिन्हें विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है) और सिंह रावत। उनके पुत्र विक्रमादित्य 2026 में 18 वर्ष के होंगे। उनके पिता एम.एस. रावत एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी थे, जिनका निधन हो चुका है, जैसा कि उनकी माता एम.एम. रावत का भी।
धर्म और रुचियाँ––
वे हिंदू धर्म को मानते थे और शाकाहारी भोजन पसंद करते थे। उनके शौक में यात्रा करना और बागवानी शामिल थी।
विवाद––
प्रदीप रावत के जीवन में कुछ विवाद भी रहे हैं। उनकी पहली पत्नी के साथ उनके संबंधों को लेकर विवाद था, जिन्होंने उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था, जिसके कारण केवल पाँच महीने की शादी के बाद ही तलाक हो गया। बाद में, प्रदीप रावत ने इन आरोपों को निराधार बताया। इसके अलावा, 2010 के दशक में, वे 'बुलबुल' फिल्म के सेट पर एक क्रू सदस्य के साथ बहस में पड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों द्वारा कानूनी कार्रवाई की गई, जिसे बाद में सुलझा लिया गया।
बीमारी, निधन और विरासत––
कैंसर से लड़ाई––
प्रदीप रावत ने अपने जीवन के अंतिम कुछ वर्षों में कैंसर के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। 2022 में उन्हें ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) का पता चला। कुछ समय बाद, यह बीमारी दोबारा लौट आई (relapse)। इसके बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में, उन्हें भिवंडी के एक कैंसर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। उनके प्रबंधक सिद्धार्थ तिवारी के अनुसार, उनके प्लेटलेट्स काफी कम हो गए थे, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। लगभग एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद, 4 अगस्त 2026 को शाम लगभग 6 बजे उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
अंतिम संस्कार––
उनके निधन के बाद, उनके पार्थिव शरीर को उनके गोरेगांव स्थित आवास पर रखा गया, जहाँ परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। 5 अगस्त 2026 को शाम को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
भारतीय सिनेमा में योगदान––
प्रदीप रावत ने भारतीय सिनेमा में लगभग 38 वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं और 150 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, उड़िया और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में फिल्मों में काम किया। उन्होंने 'स्ये' और 'छत्रपति' के माध्यम से तेलुगु सिनेमा को एक नई पहचान दी और 'गजनी' के माध्यम से तमिल और हिंदी दोनों सिनेमा में खलनायकी की एक नई परिभाषा गढ़ी। उनके अभिनय ने दर्शकों को डराया, हँसाया और उनके किरदारों के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ा।
विरासत––
प्रदीप रावत को आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे महान खलनायकों में से एक माना जाता है। अश्वत्थामा से लेकर गजनी धर्मात्मा तक, उन्होंने ऐसे किरदार बनाए जो आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। उनकी दोहरी भूमिका, उनकी दमदार आवाज, और स्क्रीन पर उनकी भयानक उपस्थिति हमेशा याद रखी जाएगी। उनके निधन के बाद, दिग्गज अभिनेताओं और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। कुछ स्रोतों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति ₹41 करोड़ थी।
निष्कर्ष––
प्रदीप राम सिंह रावत का जीवन एक प्रेरणा है। एक साधारण बैंक कर्मचारी से लेकर भारतीय सिनेमा के एक बड़े खलनायक तक का सफर उनके जीवन का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने 'महाभारत' के अश्वत्थामा से लेकर 'गजनी' के गजनी धर्मात्मा तक, हर भूमिका में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
उनकी सफलता का राज था उनकी मेहनत, समर्पण और अपनी कला के प्रति प्यार। उन्होंने अपनी दमदार आवाज, विशाल काया और गहरी आँखों से दर्शकों को अपनी बंदी बना लिया। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अतुलनीय है और उन्होंने वहाँ भी अपना एक मुकाम बनाया।
प्रदीप राम सिंह रावत: 50 रोचक जानकारियाँ––
अभिनेता प्रदीप रावत के जीवन और करियर से जुड़ी 50 खास बातें:
जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन
जन्म: 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ ।
पूरा नाम: प्रदीप राम सिंह रावत ।
पिता: एम. एस. रावत, भारतीय सेना में अधिकारी थे ।
माता: एम. एम. रावत ।
बहन: अल्का भाटिया नाम की एक बहन थीं ।
पत्नी: कल्याणी रावत, आंध्र प्रदेश के काकीनाडा की रहने वाली हैं। 'स्ये' फिल्म के सेट पर मुलाकात के बाद दोनों ने शादी की ।
बच्चे: दो पुत्र - विक्रम रावत (विक्रमादित्य) और सिंह रावत ।
तेलुगु दामाद: कल्याणी से शादी के बाद वे तेलुगु परिवार के दामाद बने ।
पहली शादी: पहली पत्नी से केवल पाँच महीने बाद तलाक हो गया। उन पर घरेलू हिंसा के आरोप भी लगे थे ।
बैंक से अभिनय तक का सफर
बैंक कर्मचारी: अभिनय से पहले जबलपुर के यू.सी.ओ. बैंक में क्लर्क थे ।
नौकरी छोड़ना: फिल्मों में पूरा समय देने के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी ।
पहला ब्रेक: 'महाभारत' (1988-1990) में अश्वत्थामा की भूमिका से पहचान मिली ।
धारावाहिक 'चंद्रकांता': 'महाभारत' के बाद 'चंद्रकांता' में भी नज़र आए ।
फिल्मी करियर
हिंदी डेब्यू: 1985 में फिल्म 'ऐतबार' से हिंदी सिनेमा में पदार्पण । कुछ स्रोत 'मेरी जंग' (1985) को उनकी पहली फिल्म मानते हैं ।
तेलुगु डेब्यू: 2004 में एस.एस. राजामौली की 'स्ये' से तेलुगु सिनेमा में कदम रखा, जिसमें भिक्षु यादव का किरदार निभाया ।
तमिल डेब्यू: 2005 में 'गजनी' से तमिल सिनेमा में पहली बार आए ।
कन्नड़ डेब्यू: 'परोदी' से कन्नड़ फिल्मों की शुरुआत ।
मलयालम डेब्यू: 'चाइना टाउन' (2011) से मलयालम सिनेमा में ।
'गजनी' में दोहरी भूमिका: तमिल 'गजनी' (2005) में राम और लक्ष्मण नाम के जुड़वाँ भाइयों की दोहरी भूमिका ।
हिंदी 'गजनी': 2008 में आमिर खान के साथ हिंदी रीमेक में भी खलनायक की भूमिका दोहराई ।
आमिर खान का फोन: 'लगान' में देवा सिंह सोढ़ी की भूमिका के लिए आमिर खान का खुद फोन आया। बहन को पहले यह प्रैंक कॉल लगा ।
'लगान' का पहला विकल्प: 'लगान' के लिए पहले मुकेश ऋषि को चुना गया था, लेकिन उनके पास छह महीने का समय नहीं था ।
'सरफ़रोश' से 'लगान' तक: 'सरफ़रोश' (1999) में सुल्तान के किरदार से आमिर खान प्रभावित हुए और उन्होंने 'लगान' के लिए बुलाया ।
'छावा' (2025): विक्की कौशल के साथ 'छावा' उनकी आखिरी हिंदी फिल्म रही ।
आखिरी तेलुगु फिल्म: 'गयापद्द सिम्हा' (2026) उनकी आखिरी तेलुगु फिल्म थी, जिसमें उन्होंने 'स्ये' के भिक्षु यादव की याद दिलाता 'भिक्षु दास' का किरदार निभाया ।
100+ फिल्में: हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, भोजपुरी, नेपाली और मराठी सहित 150 से अधिक फिल्मों में काम किया ।
पुरस्कार और उपलब्धियाँ
'स्ये' के लिए तीन पुरस्कार: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक, नंदी पुरस्कार और संतोषम पुरस्कार ।
राष्ट्रीय स्तर का मुक्केबाज: अभिनय से पहले राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज और कुश्ती में प्रशिक्षित थे ।
शारीरिक बनावट और व्यक्तित्व
कद: लगभग 5 फीट 10 इंच (1.78 मीटर)।
राशि: कुंभ (21 जनवरी को जन्म) ।
खलनायक की परफेक्ट बनावट: उनकी विशाल काया, गरजती आवाज़ और तीखी आँखों ने उन्हें परफेक्ट विलेन बना दिया ।
जीवनशैली और रुचियाँ
शाकाहारी: शाकाहारी भोजन पसंद करते थे ।
शौक: यात्रा करना और बागवानी उनके प्रमुख शौक थे ।
विनम्र स्वभाव: ऑन-स्क्रीन खलनायक के विपरीत, असल जिंदगी में बहुत विनम्र और शांत स्वभाव के थे ।
बीमारी और निधन
कैंसर से जंग: 2022 में ब्लड कैंसर का पता चला ।
रिलैप्स: कैंसर ठीक होने के चार साल बाद फिर लौट आया ।
अस्पताल: मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती, बाद में भिवंडी के कैंसर अस्पताल में शिफ्ट ।
प्लेटलेट्स में गिरावट: अचानक प्लेटलेट्स कम हो गए और वे उबर नहीं पाए ।
निधन: 4 अगस्त 2026 को शाम लगभग 6 बजे मुंबई में निधन ।
अंतिम संस्कार: 5 अगस्त 2026 को हुआ ।
उम्र: 74 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम साँस ली ।
रोचक और अनछुए पहलू
नेट वर्थ: अनुमानित ₹41 करोड़ ।
पैन-इंडिया अभिनेता: वे भारत के उन चुनिंदा अभिनेताओं में थे, जो एक साथ कई भाषाओं के फिल्म उद्योगों में सक्रिय रहे ।
'टाइगर जिंदा है' में सलमान: सलमान खान के साथ 'टाइगर जिंदा है' और 'बाघी' में काम किया ।
अश्वत्थामा का किरदार: 'महाभारत' में अश्वत्थामा की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई ।
'स्ये' ने बदली ज़िंदगी: 'स्ये' से न केवल करियर बदला, बल्कि इसी फिल्म के सेट पर पत्नी कल्याणी से मुलाकात हुई ।
'लगान' की शूटिंग: भुज की चिलचिलाती धूप में नंगे पाँव शूटिंग की, हालाँकि पैर बहुत संवेदनशील थे ।
दो 'गजनी' का रिकॉर्ड: एक ही विलेन का किरदार पहले तमिल और फिर हिंदी में निभाने वाले वे इकलौते अभिनेता हैं ।
सलमान को मिला था 'गजनी' का ऑफर: पहले सलमान खान को 'गजनी' की पेशकश हुई थी, लेकिन काम नहीं बन पाया ।
तीन दशकों का करियर: 1980 के दशक से 2026 तक लगभग चार दशकों तक सक्रिय रहे ।
प्रदीप रावत के बारे में 50 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)––
जीवन-परिचय और व्यक्तिगत जानकारी
1. प्रदीप रावत का पूरा नाम क्या था?
प्रदीप राम सिंह रावत ।
2. उनका जन्म कब और कहाँ हुआ था?
21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में ।
3. उनकी राशि क्या थी?
कुंभ (Aquarius) ।
4. उनकी ऊँचाई कितनी थी?
लगभग 5 फीट 10 इंच (178 सेमी) ।
5. उनकी आँखों और बालों का रंग क्या था?
आँखें भूरी (Brown) और बाल काले (Black) थे ।
6. उनका निवास स्थान कहाँ था?
मुंबई, महाराष्ट्र के गोरेगांव इलाके में ।
7. उनके माता-पिता कौन थे?
पिता एम. एस. रावत (सेना में कार्यरत) और माता एम. एम. रावत ।
8. उनके भाई-बहन कौन थे?
एक बहन, अल्का भाटिया ।
9. उनकी शिक्षा क्या थी और कहाँ से हुई?
स्नातक (Graduate), गवर्नमेंट साइंस कॉलेज, जबलपुर से ।
10. उनका धर्म क्या था?
हिंदू ।
11. उनकी पत्नी का नाम क्या था?
कल्याणी रावत, इन्होंने 18 अगस्त 2006 को विवाह किया था ।
12. उनके कितने बच्चे थे?
दो पुत्र - विक्रम रावत (विक्रमादित्य) और सिंह रावत ।
13. वे किस तरह का भोजन पसंद करते थे?
शाकाहारी (Vegetarian) ।
14. उनके शौक क्या थे?
यात्रा करना और बागवानी ।
15. उनकी कुल संपत्ति (नेट वर्थ) कितनी थी?
अनुमानित ₹41 करोड़ ।
फिल्मी करियर
16. उन्होंने अभिनय की शुरुआत कैसे की?
बैंक क्लर्क की नौकरी छोड़कर, राज बब्बर के 'एकजुट' थिएटर ग्रुप से अभिनय सीखा ।
17. उनकी पहचान किस भूमिका से मिली?
बी.आर. चोपड़ा के धारावाहिक 'महाभारत' (1988-1990) में अश्वत्थामा की भूमिका से ।
18. उनकी पहली हिंदी फिल्म कौन सी थी?
'मेरी जंग' (1985) । कुछ स्रोत 'ऐतबार' (1985) को भी पहली फिल्म मानते हैं ।
19. तेलुगु सिनेमा में उनकी पहली फिल्म कौन सी थी?
'स्ये' (Sye, 2004), जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला ।
20. तमिल सिनेमा में उनकी पहली फिल्म कौन सी थी?
'थोट्टी जया' (Thotti Jaya, 2005) ।
21. उनकी सबसे मशहूर फिल्में कौन सी हैं?
'गजनी' (तमिल 2005 और हिंदी 2008), 'लगान' (2001), 'सरफ़रोश' (1999), 'छत्रपति' (2005), और 'स्ये' (2004) ।
22. 'गजनी' में उनकी क्या भूमिका थी?
तमिल संस्करण में दोहरी भूमिका (राम और लक्ष्मण), और हिंदी रीमेक में 'गजनी धर्मात्मा' की भूमिका ।
23. उन्होंने 'लगान' के लिए किरदार कैसे पाया?
'सरफ़रोश' में उनके अभिनय से प्रभावित होकर आमिर खान ने खुद उन्हें फोन किया और 'लगान' में देवा सिंह सोढ़ी की भूमिका की पेशकश की ।
24. उनकी आखिरी हिंदी फिल्म कौन सी थी?
'छावा' (Chhaava, 2025), जिसमें उन्होंने येसाजी कांक की भूमिका निभाई ।
25. उन्होंने कितनी फिल्मों में काम किया?
हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, भोजपुरी, नेपाली, उड़िया और अंग्रेजी सहित कुल 150 से अधिक फिल्में ।
26. क्या उन्होंने टीवी धारावाहिकों में भी काम किया?
हाँ, 'महाभारत' के अलावा 'चंद्रकांता' (1994) में अय्यार हिम्मत सिंह और 'युग' में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी मार्शल की भूमिका निभाई ।
पुरस्कार और उपलब्धियाँ
27. उन्हें कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
'स्ये' (2004) के लिए तीन पुरस्कार - फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक, नंदी पुरस्कार, और संतोषम पुरस्कार ।
28. क्या वे खेल से जुड़े थे?
हाँ, अभिनय से पहले राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज (बॉक्सर) थे और कुश्ती का भी प्रशिक्षण लिया था ।
29. क्या उन्होंने सेना में जाने की कोशिश की?
हाँ, पिता की तरह भारतीय सेना में जाना चाहते थे, लेकिन असफल रहे ।
व्यक्तिगत रुचियाँ और जीवनशैली
30. उनके पसंदीदा अभिनेता कौन थे?
आमिर खान ।
31. उन्हें किस रंग से प्यार था?
काला ।
32. क्या वे सोशल मीडिया पर सक्रिय थे?
नहीं, वे सोशल मीडिया पर बहुत कम सक्रिय थे ।
33. क्या उन्हें सेल्फी लेना पसंद था?
नहीं, वे सेल्फी लेने से परेशान हो जाते थे और प्रशंसकों के अनुरोध से बचते थे ।
34. क्या उन्हें स्टेज फियर था?
हाँ, इतनी फिल्में करने के बावजूद उन्हें स्टेज पर बोलने में घबराहट होती थी ।
35. उन्होंने बिजनेस भी किया?
हाँ, 2022 में पत्नी के साथ मिलकर मुंबई में 'गो फ्यूल' (Go Fuel) नाम से डोर-स्टेप डीजल डिलीवरी व्यवसाय शुरू किया ।
36. उनके शौक में क्या-क्या शामिल थे?
क्रिकेट, खाना बनाना, ज्योतिष (Astrology) में रुचि ।
विवाद
37. क्या उनके जीवन में कोई विवाद था?
हाँ, पहली पत्नी ने उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया, जिसके कारण पाँच महीने की शादी के बाद तलाक हो गया। बाद में उन्होंने इन आरोपों को झूठा बताया ।
बीमारी और निधन
38. उन्हें कौन सी बीमारी थी?
ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर), जो 2022 में फिर से लौट आया (relapse) ।
39. उनका निधन कब हुआ?
4 अगस्त 2026 को शाम लगभग 6 बजे ।
40. उनका निधन किस अस्पताल में हुआ?
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में ।
41. निधन का मुख्य कारण क्या था?
कैंसर रिलैप्स के दौरान प्लेटलेट्स अचानक बहुत कम हो गए, जिससे वे उबर नहीं पाए ।
42. उनका अंतिम संस्कार कब हुआ?
5 अगस्त 2026 को ।
43. उनके पीछे कौन-कौन बचे हैं?
पत्नी कल्याणी और 18 वर्षीय पुत्र विक्रमादित्य ।
रोचक और अनछुए तथ्य
44. सलमान खान से उनकी दोस्ती कैसी थी?
'बाघी' (1990) के सेट पर दोस्ती हुई। सलमान ने एक बार उन्हें 4-6 महीने तक अपने घर पर रोक लिया था, जहाँ वे खाते-पीते, सोते और साथ में एक्सरसाइज़ करते थे। सलमान पार्टियों के लिए उन्हें सूट भी किराए पर दिलाते थे ।
45. उन्होंने सलमान के साथ रहना क्यों छोड़ा?
उन्हें लगा कि इस आरामदायक जीवन में उनकी अपनी करियर में तरक्की नहीं होगी, इसलिए उन्होंने सलमान से दूरी बना ली ।
46. 'स्ये' में उन्हें कैसे कास्ट किया गया?
फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर 'लगान' देखते समय उनके किरदार देवा सिंह से प्रभावित हुए और उन्होंने प्रदीप रावत से संपर्क किया ।
47. क्या उन्हें स्टेज पर बोलने में डर लगता था?
हाँ, स्टेज फियर (stage fright) था ।
48. क्या वे आध्यात्मिक थे?
हाँ, वे मंदिर जाना पसंद करते थे और आध्यात्मिक स्वभाव के थे ।
49. क्या उनका हेयर ट्रांसप्लांट हुआ था?
हाँ, उन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट करवाया था ।
50. उनका पारिवारिक मूल कहाँ से है?
हालाँकि जन्म जबलपुर में हुआ, उनके पारिवारिक मूल अंबाला, हरियाणा से हैं ।
प्रदीप रावत का 4 अगस्त, 2026 को मुंबई में 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया । उनके निधन की मुख्य वजह ब्लड कैंसर से जुड़ी जटिलताएँ थीं । आइए, उनकी बीमारी और अंतिम क्षणों से जुड़े विवरणों पर एक नज़र डालते हैं:
बीमारी और अंतिम दिन––
बीमारी का पता: करीब चार साल पहले उन्हें पेट का कैंसर हुआ था, जो ठीक हो गया था। हालांकि, मई 2026 में उन्हें फिर से परेशानी शुरू हुई और उनका वज़न तेज़ी से घटने लगा, जिसके बाद टेस्ट में ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई ।
अस्पताल में भर्ती: जुलाई 2026 में, उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में, ब्लड कैंसर के इलाज के लिए उन्हें भिवंडी के एक कैंसर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया ।
मौत का कारण: उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि निधन से पहले उनके शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम (6,000 प्रति माइक्रोलीटर) हो गई थी, जबकि सफेद रक्त कोशिकाएं बहुत बढ़ गई थीं। इससे उनकी इम्यूनिटी बेहद कमज़ोर हो गई थी ।
अंतिम क्षण और अंतिम संस्कार––
अंतिम क्षण: उनके बेटे विक्रमादित्य ने बताया कि जब उनकी हालत बिगड़ी, तो परिवार आईसीयू के बाहर था। उन्होंने डॉक्टरों को उन्हें सीपीआर (CPR) देते देखा, जिसके बाद उनकी मां रोने लगीं ।
अंतिम संस्कार: 5 अगस्त, 2026 को मुंबई के गोरेगांव स्थित ओशिवारा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया । इस मौके पर आमिर खान, सलमान खान, 'लगान' के निर्देशक आशुतोष गोवारीकर और कई सह-कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी ।