मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
दोहे:
“मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन ।
जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन ॥ (दोहा 2)”
सरल शब्दों में अर्थ (Simple Meaning in Hindi)
भगवान ऐसे दयालु हैं कि उनकी कृपा से गूंगा भी बोलने लगता है और लंगड़ा भी कठिन पर्वत पर चढ़ सकता है। वही दयालु प्रभु सभी पापों और दुखों को नष्ट कर देते हैं।
शब्दार्थ (Word Meaning)
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मूक – गूंगा (जो बोल नहीं सकता)
-
बाचाल – वाकपटु, सुन्दर बोलने वाला
-
पंगु – लंगड़ा, चलने में असमर्थ
-
गिरिबर गहन – ऊँचा और कठिन पर्वत
-
जासु कृपा – जिनकी कृपा से
-
दयाल – अत्यंत दयालु
-
द्रवउ – नष्ट कर देते हैं
-
सकल कलिमल – सभी पाप, दोष और दुख
भावार्थ (Bhavarth / Spiritual Meaning)
इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास जी भगवान श्रीराम की असीम कृपा का वर्णन करते हैं। उनके अनुसार:
-
भगवान की कृपा होने पर असंभव भी संभव हो जाता है।
-
जिस व्यक्ति में कोई शारीरिक या मानसिक कमी हो, वह भी भगवान की कृपा से महान कार्य कर सकता है।
-
भक्त के सभी पाप, दुख और बाधाएँ प्रभु की दया से मिट जाती हैं।
-
यह दोहा हमें बताता है कि साधक को अपने बल पर नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखना चाहिए।
सार: भगवान की कृपा से असंभव संभव हो जाता है, और जीवन के सभी पाप तथा कष्ट मिट जाते हैं।
FAQs
1. यह दोहा किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह दोहा श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में मंगलाचरण के रूप में आता है।
2. “मूक होइ बाचाल” का क्या अर्थ है?इसका सरल अर्थ है— भगवान की कृपा से गूंगा भी बोलने लगता है।
अर्थात प्रभु की कृपा असंभव को भी संभव बना देती है।
3. “पंगु चढ़इ गिरिबर गहन” का क्या आशय है?
इसका अर्थ है— भगवान की दया से लंगड़ा भी ऊँचे और कठिन पर्वत पर चढ़ सकता है।
यह ईश्वर की कृपा की अपार शक्ति दर्शाता है।
4. “जासु कृपाँ” किसकी कृपा को कहा गया है?
यहाँ भगवान श्रीराम की कृपा की बात की गई है, जिनकी दया से सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
5. इस दोहे का मुख्य भाव क्या है?मुख्य भाव यह है कि ईश्वर की कृपा से असंभव कार्य भी सरल हो जाते हैं और सभी पाप-दोष दूर हो जाते हैं।
6. इस दोहे का जीवन में क्या संदेश है?संदेश है—
-
अपने प्रयासों के साथ-साथ भगवान पर भरोसा रखना चाहिए।
-
विनम्रता और श्रद्धा से की गई प्रार्थना जीवन के कठिन रास्ते आसान करती है।
हाँ। यह दोहा भक्ति की महिमा बताता है कि भक्ति और ईश्वर की कृपा से मनुष्य की सीमाएँ मिट जाती हैं।
8. “सकल कलिमल दहन” का क्या अर्थ होता है?इसका अर्थ है— सभी पाप और कष्टों का नाश।
प्रभु की कृपा से जीवन के दुख, बाधाएँ और मानसिक विकार दूर होते हैं।
हाँ, इसे पूजा, पाठ, रामचरितमानस पाठ, कथा, आरती या किसी कार्य की शुरुआत में शुभ मंगल के लिए पढ़ा जाता है।
10. क्या इस दोहे का उपयोग प्रेरणा देने के लिए किया जा सकता है?बिल्कुल। यह दोहा बताता है कि ईश्वर की कृपा से कोई भी कमी बाधा नहीं बनती, इसलिए प्रेरणादायक रूप में उपयोग किया जा सकता है।
मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
दोहे:
“मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन ।
जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन ॥ (दोहा 2)”
सरल शब्दों में अर्थ (Simple Meaning in Hindi)
भगवान ऐसे दयालु हैं कि उनकी कृपा से गूंगा भी बोलने लगता है और लंगड़ा भी कठिन पर्वत पर चढ़ सकता है। वही दयालु प्रभु सभी पापों और दुखों को नष्ट कर देते हैं।
शब्दार्थ (Word Meaning)
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मूक – गूंगा (जो बोल नहीं सकता)
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बाचाल – वाकपटु, सुन्दर बोलने वाला
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पंगु – लंगड़ा, चलने में असमर्थ
-
गिरिबर गहन – ऊँचा और कठिन पर्वत
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जासु कृपा – जिनकी कृपा से
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दयाल – अत्यंत दयालु
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द्रवउ – नष्ट कर देते हैं
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सकल कलिमल – सभी पाप, दोष और दुख
भावार्थ (Bhavarth / Spiritual Meaning)
इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास जी भगवान श्रीराम की असीम कृपा का वर्णन करते हैं। उनके अनुसार:
-
भगवान की कृपा होने पर असंभव भी संभव हो जाता है।
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जिस व्यक्ति में कोई शारीरिक या मानसिक कमी हो, वह भी भगवान की कृपा से महान कार्य कर सकता है।
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भक्त के सभी पाप, दुख और बाधाएँ प्रभु की दया से मिट जाती हैं।
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यह दोहा हमें बताता है कि साधक को अपने बल पर नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखना चाहिए।
सार: भगवान की कृपा से असंभव संभव हो जाता है, और जीवन के सभी पाप तथा कष्ट मिट जाते हैं।
FAQs
1. यह दोहा किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह दोहा श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में मंगलाचरण के रूप में आता है।
2. “मूक होइ बाचाल” का क्या अर्थ है?इसका सरल अर्थ है— भगवान की कृपा से गूंगा भी बोलने लगता है।
अर्थात प्रभु की कृपा असंभव को भी संभव बना देती है।
3. “पंगु चढ़इ गिरिबर गहन” का क्या आशय है?
इसका अर्थ है— भगवान की दया से लंगड़ा भी ऊँचे और कठिन पर्वत पर चढ़ सकता है।
यह ईश्वर की कृपा की अपार शक्ति दर्शाता है।
4. “जासु कृपाँ” किसकी कृपा को कहा गया है?
यहाँ भगवान श्रीराम की कृपा की बात की गई है, जिनकी दया से सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
5. इस दोहे का मुख्य भाव क्या है?मुख्य भाव यह है कि ईश्वर की कृपा से असंभव कार्य भी सरल हो जाते हैं और सभी पाप-दोष दूर हो जाते हैं।
6. इस दोहे का जीवन में क्या संदेश है?संदेश है—
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अपने प्रयासों के साथ-साथ भगवान पर भरोसा रखना चाहिए।
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विनम्रता और श्रद्धा से की गई प्रार्थना जीवन के कठिन रास्ते आसान करती है।
हाँ। यह दोहा भक्ति की महिमा बताता है कि भक्ति और ईश्वर की कृपा से मनुष्य की सीमाएँ मिट जाती हैं।
8. “सकल कलिमल दहन” का क्या अर्थ होता है?इसका अर्थ है— सभी पाप और कष्टों का नाश।
प्रभु की कृपा से जीवन के दुख, बाधाएँ और मानसिक विकार दूर होते हैं।
हाँ, इसे पूजा, पाठ, रामचरितमानस पाठ, कथा, आरती या किसी कार्य की शुरुआत में शुभ मंगल के लिए पढ़ा जाता है।
10. क्या इस दोहे का उपयोग प्रेरणा देने के लिए किया जा सकता है?बिल्कुल। यह दोहा बताता है कि ईश्वर की कृपा से कोई भी कमी बाधा नहीं बनती, इसलिए प्रेरणादायक रूप में उपयोग किया जा सकता है।