बालकाण्ड

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन श्लोक का सरल हिंदी अर्थ

दोहा/चौपाई

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।

करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • नील सरोरुह – नीले कमल

  • श्याम – श्याम वर्ण वाले (सुंदर गहरे नीले रंग के)

  • तरुन – युवा, कोमल

  • अरुन बारिज नयन – अति लाल (अरुण) कमल जैसे नेत्र

  • करउ – करूँ

  • सो – वही

  • मम उर धाम – मेरे हृदय का धाम/निवास

  • सदा – सदा, हमेशा

  • छीरसागर सयन – क्षीरसागर (दूध के समुद्र) में शयन करने वाले भगवान


सरल अर्थ (Simple Hindi Meaning)

“हे भगवान! आपके नीलकमल के समान श्याम शरीर और लाल कमलों जैसे सुंदर नेत्र हैं। ऐसे छीरसागर में विश्राम करने वाले प्रभु, आप सदा मेरे हृदय में निवास करें।”


भावार्थ (Bhavarth)

इस चौपाई में भक्त भगवान विष्णु से विनय करता है कि—

  • हे प्रभु, आपका रूप अत्यंत सुंदर और मन को आनंद देने वाला है।

  • आप नीले कमल जैसे श्याम हैं और आपके नेत्र अरुण कमलों की तरह आकर्षक हैं।

  • आप जो क्षीरसागर में शयन करने वाले, ब्रह्मांड के पालनहार हैं,

  • वही प्रभु कृपापूर्वक मेरे हृदय में सदा के लिए निवास करें,

  • ताकि मेरा मन शुद्ध रहे और जीवन में भक्ति और सद्गति बनी रहे।

यह चौपाई भगवान विष्णु के दिव्य रूप का ध्यान कराते हुए उनको अपने हृदय में बसाने की प्रार्थना है।


कवितामय व्याख्या

नील कमल-सा श्याम बिराजे,
तन पर छाया शांत उजास।
अरुण कमल-से लाल नयन हैं,
जिनमें प्रेम का गहरा प्रकाश।

छीरसागर के करतल पर,
शेषनाग की शीतल छाँव,
वही विष्णु मेरे हृदय में,
सदा करें अपना मधुर ठाँव।

उनकी मुस्कान सुबह की किरण-सी,
मन पर झरती शीतल छुअन;
उनके चरणों की धूल भरें,
हर जन्म का क्लेश-घन।

हे प्रभु! ऐसे सुंदर रूप के,
मैं नित ध्यान में डूबा रहूँ;
आप बसी रहें मेरे उर में,
बस यही विनय, यही कहूँ।

नयन तुम्हारे प्रेम से टपके,
भक्त पर करुणा की धार,
श्याम मनोहर, कमल विहारी —
तुम ही जीवन का आधार।

अंतर्मन की हर धड़कन में,
तेरा मधुर स्मरण ही बसे;
हे छीरसागर-वासी नाथ,
मेरे हृदय-गृह में सदा निवास करे।


नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन श्लोक का सरल हिंदी अर्थ

दोहा/चौपाई

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।

करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • नील सरोरुह – नीले कमल

  • श्याम – श्याम वर्ण वाले (सुंदर गहरे नीले रंग के)

  • तरुन – युवा, कोमल

  • अरुन बारिज नयन – अति लाल (अरुण) कमल जैसे नेत्र

  • करउ – करूँ

  • सो – वही

  • मम उर धाम – मेरे हृदय का धाम/निवास

  • सदा – सदा, हमेशा

  • छीरसागर सयन – क्षीरसागर (दूध के समुद्र) में शयन करने वाले भगवान


सरल अर्थ (Simple Hindi Meaning)

“हे भगवान! आपके नीलकमल के समान श्याम शरीर और लाल कमलों जैसे सुंदर नेत्र हैं। ऐसे छीरसागर में विश्राम करने वाले प्रभु, आप सदा मेरे हृदय में निवास करें।”


भावार्थ (Bhavarth)

इस चौपाई में भक्त भगवान विष्णु से विनय करता है कि—

  • हे प्रभु, आपका रूप अत्यंत सुंदर और मन को आनंद देने वाला है।

  • आप नीले कमल जैसे श्याम हैं और आपके नेत्र अरुण कमलों की तरह आकर्षक हैं।

  • आप जो क्षीरसागर में शयन करने वाले, ब्रह्मांड के पालनहार हैं,

  • वही प्रभु कृपापूर्वक मेरे हृदय में सदा के लिए निवास करें,

  • ताकि मेरा मन शुद्ध रहे और जीवन में भक्ति और सद्गति बनी रहे।

यह चौपाई भगवान विष्णु के दिव्य रूप का ध्यान कराते हुए उनको अपने हृदय में बसाने की प्रार्थना है।


कवितामय व्याख्या

नील कमल-सा श्याम बिराजे,
तन पर छाया शांत उजास।
अरुण कमल-से लाल नयन हैं,
जिनमें प्रेम का गहरा प्रकाश।

छीरसागर के करतल पर,
शेषनाग की शीतल छाँव,
वही विष्णु मेरे हृदय में,
सदा करें अपना मधुर ठाँव।

उनकी मुस्कान सुबह की किरण-सी,
मन पर झरती शीतल छुअन;
उनके चरणों की धूल भरें,
हर जन्म का क्लेश-घन।

हे प्रभु! ऐसे सुंदर रूप के,
मैं नित ध्यान में डूबा रहूँ;
आप बसी रहें मेरे उर में,
बस यही विनय, यही कहूँ।

नयन तुम्हारे प्रेम से टपके,
भक्त पर करुणा की धार,
श्याम मनोहर, कमल विहारी —
तुम ही जीवन का आधार।

अंतर्मन की हर धड़कन में,
तेरा मधुर स्मरण ही बसे;
हे छीरसागर-वासी नाथ,
मेरे हृदय-गृह में सदा निवास करे।