वन्दे बोधमयं नित्यं श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥३॥
सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)
मैं उस गुरु को नमन करता हूँ जो ज्ञान के स्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं और जिनका स्वरूप भगवान शंकर के समान है। जैसे चन्द्रमा टेढ़ा (अपूर्ण) होते हुए भी भगवान शिव की शरण में आकर सर्वत्र पूजनीय हो जाता है, वैसे ही गुरु की शरण लेने वाला व्यक्ति भी महान और सम्माननीय बन जाता है।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning)
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वन्दे – मैं वंदन करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
-
बोधमयं – ज्ञान का रूप, ज्ञान से पूर्ण
-
नित्यं – सदा, हमेशा
-
गुरुं – गुरु को
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शंकररूपिणम् – जिनका स्वरूप भगवान शंकर जैसा हो
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यम् आश्रितः – जिनकी शरण में जाकर
-
हि – वास्तव में
-
वक्रः अपि – टेढ़ा या अपूर्ण होने पर भी
-
चन्द्रः – चन्द्रमा
-
सर्वत्र वन्द्यते – हर जगह पूजनीय होता है
सार (Essence)
गुरु की शरण लेने से व्यक्ति के दोष भी गुणों में बदल जाते हैं, जैसे शिवजी की जटाओं में स्थान पाने से टेढ़ा चन्द्रमा भी पूजनीय बन गया। गुरु की कृपा व्यक्ति के जीवन को महानता प्रदान करती है।
वन्दे बोधमयं नित्यं श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥३॥
सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)
मैं उस गुरु को नमन करता हूँ जो ज्ञान के स्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं और जिनका स्वरूप भगवान शंकर के समान है। जैसे चन्द्रमा टेढ़ा (अपूर्ण) होते हुए भी भगवान शिव की शरण में आकर सर्वत्र पूजनीय हो जाता है, वैसे ही गुरु की शरण लेने वाला व्यक्ति भी महान और सम्माननीय बन जाता है।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning)
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वन्दे – मैं वंदन करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
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बोधमयं – ज्ञान का रूप, ज्ञान से पूर्ण
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नित्यं – सदा, हमेशा
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गुरुं – गुरु को
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शंकररूपिणम् – जिनका स्वरूप भगवान शंकर जैसा हो
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यम् आश्रितः – जिनकी शरण में जाकर
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हि – वास्तव में
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वक्रः अपि – टेढ़ा या अपूर्ण होने पर भी
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चन्द्रः – चन्द्रमा
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सर्वत्र वन्द्यते – हर जगह पूजनीय होता है
सार (Essence)
गुरु की शरण लेने से व्यक्ति के दोष भी गुणों में बदल जाते हैं, जैसे शिवजी की जटाओं में स्थान पाने से टेढ़ा चन्द्रमा भी पूजनीय बन गया। गुरु की कृपा व्यक्ति के जीवन को महानता प्रदान करती है।