उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥५॥
सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning in Hindi):
मैं प्रभु राम की प्रिया सीता माता को प्रणाम करता हूँ,
जो सृष्टि का उद्भव (जन्म), स्थिति (पालन) और संहार (समापन) करने वाली शक्ति हैं,
जो सभी दुखों और क्लेशों को दूर करने वाली हैं,
और जो हर प्रकार का कल्याण और शुभ फल देने वाली हैं।
शब्दार्थ (Word-by-word Meaning):
-
उद्भव — सृष्टि की उत्पत्ति
-
स्थिति — पालन-पोषण, धारणा
-
संहार — विनाश, समाप्ति
-
कारिणीं — करने वाली, स्वरूप रखने वाली
-
क्लेशहारिणीम् — दुख और कष्ट दूर करने वाली
-
सर्व-श्रेयस्करीम् — सभी प्रकार का शुभ व कल्याण देने वाली
-
सीताम् — माता सीता
-
नतः अहम् — मैं नत (प्रणाम करता हूँ)
-
राम-वल्लभाम् — भगवान राम की प्रिय पत्नी
व्याख्यात्मक अर्थ:
यह श्लोक माता सीता की दिव्य शक्ति, करुणा और कल्याणकारी स्वरूप को व्यक्त करता है। भक्त कहता है कि—
हे सीता माता!
आप वह शक्ति हैं जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार— इन तीनों को संचालित करती हैं। भले ही संसार में इन कार्यों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा किया जाता है, परंतु उनके पीछे प्रेरणा और ऊर्जा आप ही हैं।
आप ही वह आद्य शक्ति हैं जो हर जीव के जीवन के हर चरण में साथ रहती हैं।
आपका स्वभाव अत्यंत करुणामयी और कृपालु है। आप अपने भक्तों के सभी क्लेश, कष्ट और दुःख दूर कर देती हैं।
मन में छिपी चिंता हो, जीवन की कठिनाइयाँ हों या मन की अशांति— आपकी कृपा से सब हल्का हो जाता है।
इसके आगे भक्त कहता है कि—
माता, आप सर्वश्रेष्ठ कल्याण देने वाली हैं।
आप भक्ति, शांति, समृद्धि, सौभाग्य और धर्म— सभी प्रकार के शुभ फल अपने उपासकों को प्रदान करती हैं।
जैसे सीता माता ने स्वयं अपने जीवन में धैर्य, त्याग, पवित्रता और शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया— उसी प्रकार आपके स्मरण मात्र से जीवन में स्थिरता और सद्गति प्राप्त होती है।
अंत में भक्त विनम्र भाव से प्रणाम करता है:
"हे श्री राम की प्रिय सीता! मैं आपको नमन करता हूँ, आप ही मेरे जीवन की रक्षक, मार्गदर्शक और सुख–शांति देने वाली हैं।"
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥५॥
सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning in Hindi):
मैं प्रभु राम की प्रिया सीता माता को प्रणाम करता हूँ,
जो सृष्टि का उद्भव (जन्म), स्थिति (पालन) और संहार (समापन) करने वाली शक्ति हैं,
जो सभी दुखों और क्लेशों को दूर करने वाली हैं,
और जो हर प्रकार का कल्याण और शुभ फल देने वाली हैं।
शब्दार्थ (Word-by-word Meaning):
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उद्भव — सृष्टि की उत्पत्ति
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स्थिति — पालन-पोषण, धारणा
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संहार — विनाश, समाप्ति
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कारिणीं — करने वाली, स्वरूप रखने वाली
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क्लेशहारिणीम् — दुख और कष्ट दूर करने वाली
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सर्व-श्रेयस्करीम् — सभी प्रकार का शुभ व कल्याण देने वाली
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सीताम् — माता सीता
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नतः अहम् — मैं नत (प्रणाम करता हूँ)
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राम-वल्लभाम् — भगवान राम की प्रिय पत्नी
व्याख्यात्मक अर्थ:
यह श्लोक माता सीता की दिव्य शक्ति, करुणा और कल्याणकारी स्वरूप को व्यक्त करता है। भक्त कहता है कि—
हे सीता माता!
आप वह शक्ति हैं जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार— इन तीनों को संचालित करती हैं। भले ही संसार में इन कार्यों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा किया जाता है, परंतु उनके पीछे प्रेरणा और ऊर्जा आप ही हैं।
आप ही वह आद्य शक्ति हैं जो हर जीव के जीवन के हर चरण में साथ रहती हैं।
आपका स्वभाव अत्यंत करुणामयी और कृपालु है। आप अपने भक्तों के सभी क्लेश, कष्ट और दुःख दूर कर देती हैं।
मन में छिपी चिंता हो, जीवन की कठिनाइयाँ हों या मन की अशांति— आपकी कृपा से सब हल्का हो जाता है।
इसके आगे भक्त कहता है कि—
माता, आप सर्वश्रेष्ठ कल्याण देने वाली हैं।
आप भक्ति, शांति, समृद्धि, सौभाग्य और धर्म— सभी प्रकार के शुभ फल अपने उपासकों को प्रदान करती हैं।
जैसे सीता माता ने स्वयं अपने जीवन में धैर्य, त्याग, पवित्रता और शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया— उसी प्रकार आपके स्मरण मात्र से जीवन में स्थिरता और सद्गति प्राप्त होती है।
अंत में भक्त विनम्र भाव से प्रणाम करता है:
"हे श्री राम की प्रिय सीता! मैं आपको नमन करता हूँ, आप ही मेरे जीवन की रक्षक, मार्गदर्शक और सुख–शांति देने वाली हैं।"