नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा
भाषा-निबन्धम् अत्य-मंजुलम् आतनोति॥ ७॥
सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)
तुलसीदास जी कहते हैं कि रामायण में जो बातें अनेक पुराणों, वेदों और आगमों द्वारा प्रमाणित हैं, और कहीं-कहीं अन्य ग्रंथों में भी वर्णित हैं, उन्हीं पवित्र कथाओं को मैं अपने हृदय के सुख के लिए, सरल भाषा में, बहुत ही सुंदर ढंग से लिख रहा हूँ।
शब्दार्थ (Word-by-word Meaning)
-
नानापुराण — अनेक पुराण
-
निगम — वेद
-
आगम — अन्य शास्त्र
-
सम्मतम् — जिनसे प्रमाणित, मान्य
-
यत् — जो
-
रामायणे निगदितम् — रामायण में कहा गया है
-
क्वचित् अन्यतः अपि — और कहीं अन्य ग्रंथों में भी
-
स्वान्तः सुखाय — अपने मन के सुख के लिए
-
तुलसी — तुलसीदास
-
रघुनाथ गाथा — श्रीराम की कथा
-
भाषा निबन्धम् — देशी भाषा में लेख
-
अति-मंजुलम् — बहुत सुंदर
-
आतनोति — विस्तृत कर रहे हैं, लिख रहे हैं
भावार्थ (Bhavarth)
इस दोहे में तुलसीदास जी अपने रामचरितमानस लिखने का उद्देश्य बताते हैं। वे कहते हैं—
राम की जो पवित्र कथा वेदों, पुराणों और अनेक शास्त्रों में वर्णित और प्रमाणित है, वही कथा मैं अपने हृदय की प्रसन्नता के लिए, सरल और मीठी भाषा में लिख रहा हूँ।
तुलसीदास का उद्देश्य प्रसिद्धि, वाद-विवाद या किसी को प्रभावित करना नहीं है।
वे तो केवल अपने मन के आनंद, भक्ति की तृप्ति और राम प्रेम के रस को प्रकट करने के लिए रामचरितमानस की रचना करते हैं।
यह विनम्रता, भक्तिभाव और काव्य-निष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।
बच्चों की कहानी की तरह अर्थ
एक समय की बात है…
तुलसीदास जी राम जी के बहुत बड़े भक्त थे।
उन्हें जब भी राम जी की बातें सुनाई देतीं, उनका मन खुश हो जाता था — जैसे किसी बच्चे को अपनी पसंदीदा कहानी सुनकर खुशी होती है।
एक दिन उन्होंने सोचा —
“राम जी की इतनी अच्छी-अच्छी कहानियाँ वेदों, पुराणों और पुराने ग्रंथों में लिखी हैं।
क्यों न मैं वही अच्छी कहानी अपनी भाषा में, बेहद सरल तरीके से लिख दूँ?
ताकि मेरा मन भी खुश हो और बाकी लोगों को भी मज़ा आए!”
बस…
तभी उन्होंने रामचरितमानस लिखना शुरू किया।
वे इसे किसी को दिखाने के लिए नहीं,
बल्कि अपने मन की खुशी और भगवान राम से प्यार जताने के लिए लिख रहे थे।
“तुलसीदास जी राम जी की कहानी अपनी खुशी और प्रेम से, सरल भाषा में लिख रहे हैं।”
FAQs (Hindi)
1. नानापुराणनिगमागमसम्मतम् श्लोक का सरल अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि राम की जो कथाएँ वेदों और पुराणों में मिलती हैं, तुलसीदास वही कथा सुंदर भाषा में अपने आनंद के लिए लिख रहे हैं।
2. तुलसीदास जी यह श्लोक क्यों कहते हैं?
ताकि वे बता सकें कि रामचरितमानस लिखने का उद्देश्य केवल उनकी आंतरिक भक्ति और सुख है।
3. ‘स्वान्तः सुखाय’ का क्या अर्थ है?
अपने मन की प्रसन्नता के लिए।
4. यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह श्लोक रामचरितमानस के बालकाण्ड के आरंभिक छंदों में मिलता है।
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा
भाषा-निबन्धम् अत्य-मंजुलम् आतनोति॥ ७॥
सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)
तुलसीदास जी कहते हैं कि रामायण में जो बातें अनेक पुराणों, वेदों और आगमों द्वारा प्रमाणित हैं, और कहीं-कहीं अन्य ग्रंथों में भी वर्णित हैं, उन्हीं पवित्र कथाओं को मैं अपने हृदय के सुख के लिए, सरल भाषा में, बहुत ही सुंदर ढंग से लिख रहा हूँ।
शब्दार्थ (Word-by-word Meaning)
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नानापुराण — अनेक पुराण
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निगम — वेद
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आगम — अन्य शास्त्र
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सम्मतम् — जिनसे प्रमाणित, मान्य
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यत् — जो
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रामायणे निगदितम् — रामायण में कहा गया है
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क्वचित् अन्यतः अपि — और कहीं अन्य ग्रंथों में भी
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स्वान्तः सुखाय — अपने मन के सुख के लिए
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तुलसी — तुलसीदास
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रघुनाथ गाथा — श्रीराम की कथा
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भाषा निबन्धम् — देशी भाषा में लेख
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अति-मंजुलम् — बहुत सुंदर
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आतनोति — विस्तृत कर रहे हैं, लिख रहे हैं
भावार्थ (Bhavarth)
इस दोहे में तुलसीदास जी अपने रामचरितमानस लिखने का उद्देश्य बताते हैं। वे कहते हैं—
राम की जो पवित्र कथा वेदों, पुराणों और अनेक शास्त्रों में वर्णित और प्रमाणित है, वही कथा मैं अपने हृदय की प्रसन्नता के लिए, सरल और मीठी भाषा में लिख रहा हूँ।
तुलसीदास का उद्देश्य प्रसिद्धि, वाद-विवाद या किसी को प्रभावित करना नहीं है।
वे तो केवल अपने मन के आनंद, भक्ति की तृप्ति और राम प्रेम के रस को प्रकट करने के लिए रामचरितमानस की रचना करते हैं।
यह विनम्रता, भक्तिभाव और काव्य-निष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।
बच्चों की कहानी की तरह अर्थ
एक समय की बात है…
तुलसीदास जी राम जी के बहुत बड़े भक्त थे।
उन्हें जब भी राम जी की बातें सुनाई देतीं, उनका मन खुश हो जाता था — जैसे किसी बच्चे को अपनी पसंदीदा कहानी सुनकर खुशी होती है।
एक दिन उन्होंने सोचा —
“राम जी की इतनी अच्छी-अच्छी कहानियाँ वेदों, पुराणों और पुराने ग्रंथों में लिखी हैं।
क्यों न मैं वही अच्छी कहानी अपनी भाषा में, बेहद सरल तरीके से लिख दूँ?
ताकि मेरा मन भी खुश हो और बाकी लोगों को भी मज़ा आए!”
बस…
तभी उन्होंने रामचरितमानस लिखना शुरू किया।
वे इसे किसी को दिखाने के लिए नहीं,
बल्कि अपने मन की खुशी और भगवान राम से प्यार जताने के लिए लिख रहे थे।
“तुलसीदास जी राम जी की कहानी अपनी खुशी और प्रेम से, सरल भाषा में लिख रहे हैं।”
FAQs (Hindi)
1. नानापुराणनिगमागमसम्मतम् श्लोक का सरल अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि राम की जो कथाएँ वेदों और पुराणों में मिलती हैं, तुलसीदास वही कथा सुंदर भाषा में अपने आनंद के लिए लिख रहे हैं।
2. तुलसीदास जी यह श्लोक क्यों कहते हैं?
ताकि वे बता सकें कि रामचरितमानस लिखने का उद्देश्य केवल उनकी आंतरिक भक्ति और सुख है।
3. ‘स्वान्तः सुखाय’ का क्या अर्थ है?
अपने मन की प्रसन्नता के लिए।
4. यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह श्लोक रामचरितमानस के बालकाण्ड के आरंभिक छंदों में मिलता है।