बालकाण्ड

रामायण बालकाण्ड श्लोक का सरल हिंदी अर्थ

श्लोक

यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।

यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्‌ - 6


सरल हिंदी अर्थ (Simple Words Meaning)

“जिसकी माया से यह पूरा विश्व—देवता, ब्रह्मा, असुर—सब कार्यरत दिखते हैं;
जिसकी सत्य सत्ता के कारण यह असत्य जैसा संसार भी वास्तविक प्रतीत होता है, ठीक उसी तरह जैसे अँधेरे में रस्सी साँप जैसी दिखाई देती है;
जिसके चरण ही इस जन्म-मरण रूपी संसार-सागर से पार ले जाने वाली एकमात्र नाव हैं;
मैं उस समस्त कारणों के कारण, भगवान राम कहलाने वाले परमेश्वर श्री हरि की वंदना करता हूँ।”


विस्तृत सरल भावार्थ

  1. “यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलम्…”
    भगवान की माया (दैवी शक्ति) से पूरा संसार चलता है—देवता हों, ब्रह्मा हों या दानव। हर कोई उसी शक्ति के अधीन है।

  2. “यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथा हेर्भ्रमः”
    भगवान की उपस्थिति के कारण यह असत्य सा संसार भी सच लगता है, जैसे अंधेरे में रस्सी को गलती से साँप समझ लेते हैं।

  3. “यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावताम्”
    यह संसार जन्म-मरण का समुद्र है। इससे पार होने के लिए केवल भगवान के चरण (उनकी भक्ति) ही एक नाव की तरह हमारी सहायता करते हैं।

  4. “वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्”
    मैं उन भगवान राम की वंदना करता हूँ, जो सभी कारणों के भी कारण हैं — जो परमेश्वर हैं, श्री हरि हैं।


“भगवान राम की शक्ति से यह पूरा संसार चलता है।
हम जो दुनिया देखते हैं, वह असली लगती है, लेकिन यह भगवान की बनाई हुई एक लीला है—जैसे अँधेरे में रस्सी को गलती से साँप समझ लेते हैं।
इस जन्म-मरण वाली दुनिया से पार जाने का एक ही रास्ता है—भगवान राम के चरणों का सहारा।
मैं उन भगवान राम को प्रणाम करता हूँ, जो सबके पैदा होने का असली कारण हैं और सबके मालिक हैं।”


शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning in Simple Hindi)

यत् — जिसके
माया-वश-वर्ति — माया के असर में चलने वाला
विश्वम् अखिलम् — पूरा संसार
ब्रह्म-आदि देव-असुरा — ब्रह्मा, देवता और असुर
यत्-सत्त्वात् — जिसकी सत्ता/उपस्थिति से
अमृषा इव भाति सकलम् — असत्य भी सत्य जैसा दिखाई देता है
रज्जौ यथा हेः भ्रमः — जैसे रस्सी को अंधेरे में साँप समझने का भ्रम
यत्-पाद-प्लवम् — जिसके चरण नाव जैसे हैं
एकम् एव — केवल एक ही
हि — वास्तव में
भव-अम्भोधेः — जन्म-मरण रूपी समुद्र से
तितीर्षावताम् — पार होना चाहने वालों के लिए
वन्देऽहम् — मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
तम् — उस
अशेष-कारण-परम् — सभी कारणों के भी कारण, परम
राम-आख्यम् — राम नाम वाले
ईशम् हरिम् — भगवान हरि को


FAQs (Hindi)

1. यह श्लोक किस ग्रंथ का है?

यह श्लोक वाल्मीकि रामायण के बालकांड की राम-स्तुति का एक महत्वपूर्ण भाग है।

2. इस श्लोक का मुख्य संदेश क्या है?

भगवान राम ही संसार के परम कारण हैं और उनके चरण ही जीवन-सागर से पार लगाने वाले हैं।

3. “रस्सी को साँप समझने” का उदाहरण क्यों दिया गया है?

यह बताने के लिए कि दुनिया जैसी दिखती है, वास्तव में वैसी नहीं — यह भगवान की माया है।

4. बच्चों के लिए इसका सरल सार क्या है?

भगवान राम सब कुछ चलाते हैं, और उनकी भक्ति हमें सुरक्षित रखती है।

रामायण बालकाण्ड श्लोक का सरल हिंदी अर्थ

श्लोक

यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।

यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्‌ - 6


सरल हिंदी अर्थ (Simple Words Meaning)

“जिसकी माया से यह पूरा विश्व—देवता, ब्रह्मा, असुर—सब कार्यरत दिखते हैं;
जिसकी सत्य सत्ता के कारण यह असत्य जैसा संसार भी वास्तविक प्रतीत होता है, ठीक उसी तरह जैसे अँधेरे में रस्सी साँप जैसी दिखाई देती है;
जिसके चरण ही इस जन्म-मरण रूपी संसार-सागर से पार ले जाने वाली एकमात्र नाव हैं;
मैं उस समस्त कारणों के कारण, भगवान राम कहलाने वाले परमेश्वर श्री हरि की वंदना करता हूँ।”


विस्तृत सरल भावार्थ

  1. “यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलम्…”
    भगवान की माया (दैवी शक्ति) से पूरा संसार चलता है—देवता हों, ब्रह्मा हों या दानव। हर कोई उसी शक्ति के अधीन है।

  2. “यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथा हेर्भ्रमः”
    भगवान की उपस्थिति के कारण यह असत्य सा संसार भी सच लगता है, जैसे अंधेरे में रस्सी को गलती से साँप समझ लेते हैं।

  3. “यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावताम्”
    यह संसार जन्म-मरण का समुद्र है। इससे पार होने के लिए केवल भगवान के चरण (उनकी भक्ति) ही एक नाव की तरह हमारी सहायता करते हैं।

  4. “वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्”
    मैं उन भगवान राम की वंदना करता हूँ, जो सभी कारणों के भी कारण हैं — जो परमेश्वर हैं, श्री हरि हैं।


“भगवान राम की शक्ति से यह पूरा संसार चलता है।
हम जो दुनिया देखते हैं, वह असली लगती है, लेकिन यह भगवान की बनाई हुई एक लीला है—जैसे अँधेरे में रस्सी को गलती से साँप समझ लेते हैं।
इस जन्म-मरण वाली दुनिया से पार जाने का एक ही रास्ता है—भगवान राम के चरणों का सहारा।
मैं उन भगवान राम को प्रणाम करता हूँ, जो सबके पैदा होने का असली कारण हैं और सबके मालिक हैं।”


शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning in Simple Hindi)

यत् — जिसके
माया-वश-वर्ति — माया के असर में चलने वाला
विश्वम् अखिलम् — पूरा संसार
ब्रह्म-आदि देव-असुरा — ब्रह्मा, देवता और असुर
यत्-सत्त्वात् — जिसकी सत्ता/उपस्थिति से
अमृषा इव भाति सकलम् — असत्य भी सत्य जैसा दिखाई देता है
रज्जौ यथा हेः भ्रमः — जैसे रस्सी को अंधेरे में साँप समझने का भ्रम
यत्-पाद-प्लवम् — जिसके चरण नाव जैसे हैं
एकम् एव — केवल एक ही
हि — वास्तव में
भव-अम्भोधेः — जन्म-मरण रूपी समुद्र से
तितीर्षावताम् — पार होना चाहने वालों के लिए
वन्देऽहम् — मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
तम् — उस
अशेष-कारण-परम् — सभी कारणों के भी कारण, परम
राम-आख्यम् — राम नाम वाले
ईशम् हरिम् — भगवान हरि को


FAQs (Hindi)

1. यह श्लोक किस ग्रंथ का है?

यह श्लोक वाल्मीकि रामायण के बालकांड की राम-स्तुति का एक महत्वपूर्ण भाग है।

2. इस श्लोक का मुख्य संदेश क्या है?

भगवान राम ही संसार के परम कारण हैं और उनके चरण ही जीवन-सागर से पार लगाने वाले हैं।

3. “रस्सी को साँप समझने” का उदाहरण क्यों दिया गया है?

यह बताने के लिए कि दुनिया जैसी दिखती है, वास्तव में वैसी नहीं — यह भगवान की माया है।

4. बच्चों के लिए इसका सरल सार क्या है?

भगवान राम सब कुछ चलाते हैं, और उनकी भक्ति हमें सुरक्षित रखती है।