बालकाण्ड

सम प्रकाश तम पाख दोहा अर्थ और भावार्थ

दोहा:

सम प्रकाश तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह। ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह॥


शब्दार्थ (Word Meaning)

  1. सम – समान

  2. प्रकाश – उजाला, ज्ञान, रौशनी

  3. तम – अंधकार, अज्ञान

  4. पाख – पक्ष, भेद

  5. दुहुँ नाम – दोनों के नाम (अर्थात उजाले और अंधकार, या गुण और दोष)

  6. भेद बिधि कीन्ह – भेद करने का तरीका बताया

  7. ससि – चंद्रमा

  8. सोषक – जो खाता है, जो नष्ट करता है (इस संदर्भ में चंद्रमा का प्रकाश अंधकार को समाप्त करता है)

  9. पोषक – जो बढ़ाता है, पालन करता है (चंद्रमा की ज्योति जीवन को पोषित करती है)

  10. समुझि – समझकर

  11. जग – दुनिया, सृष्टि

  12. जस अपजस दीन्ह – गुण और अपगुण का प्रदर्शन किया


सरल हिंदी अर्थ:
सत्य और असत्य, उजाला और अंधकार दोनों के भेद को समझना चाहिए। जैसे चंद्रमा अंधकार को कम करता है (सोषक) और जीवन को पोषित करता है (पोषक), वैसे ही संसार में अच्छाई और बुराई दोनों को देखकर उनके प्रभाव को समझना चाहिए।

भावार्थ (भावनात्मक अर्थ / Moral):
इस दोहे में यह बताया गया है कि जीवन में अच्छाई और बुराई, गुण और दोष, उजाला और अंधकार—सबको समझना ज़रूरी है। हमें किसी चीज़ को सिर्फ देख कर नहीं आंकना चाहिए, बल्कि उसके उपयोग और असर को भी समझना चाहिए। चंद्रमा की तरह हमें अंधकार को कम करना और अच्छाई को बढ़ावा देना चाहिए।

सरल भाषा में अर्थ:
इस दोहे में कहा गया है कि दुनिया में दो तरह की चीजें होती हैं – उजाला और अंधकार, अच्छाई और बुराई। इसे समझने का तरीका भी बताया गया है।


जैसे चाँद:

  • रात में अंधेरा होता है, लेकिन चाँद की रोशनी उसे दूर करती है। (सोषक – जो अंधकार को दूर करता है)

  • चाँद की रोशनी जीवन को सुंदर बनाती है, चीजों को दिखाती है। (पोषक – जो जीवन को बढ़ावा देता है)


यही संदेश यहाँ है कि दुनिया में अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं, और हमें उन्हें समझकर उनके असर के अनुसार काम करना चाहिए।


भावार्थ:

  1. जीवन में अच्छाई और बुराई दोनों को पहचानना जरूरी है।

  2. केवल नजरों से देखना या सुनना काफी नहीं, उनके परिणाम को भी समझो।

  3. जैसे चाँद अंधकार को खत्म करता है और जीवन को रोशन करता है, वैसे ही हमें अपने जीवन में अच्छाई फैलानी चाहिए और बुराई को कम करना चाहिए।


एक उदाहरण से समझें:

अगर किसी काम में मुश्किल या परेशानी है (अंधकार), और उसके बीच में आप सही तरीका अपनाते हैं (उजाला), तो न केवल समस्या हल होगी बल्कि सबको फायदा भी होगा।


दोहा FAQ – सरल हिंदी में

1. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?
दोहा सिखाता है कि जीवन में उजाला और अंधकार, अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं, और हमें उन्हें समझकर सही निर्णय लेना चाहिए।

2. ‘सम प्रकाश तम’ का क्या अर्थ है?

  • सम = समान

  • प्रकाश = उजाला

  • तम = अंधकार
    अर्थात उजाला और अंधकार दोनों समान रूप से मौजूद हैं, और उनके बीच फर्क जानना जरूरी है।

3. ‘ससि सोषक पोषक’ से क्या समझना चाहिए?

  • ससि = चाँद

  • सोषक = जो नष्ट करता है (अंधकार को दूर करता है)

  • पोषक = जो बढ़ावा देता है (जीवन को रोशन करता है)
    यानि जैसे चाँद रात के अंधकार को दूर करता है और जीवन को रोशन करता है, वैसे ही हमें अच्छे और बुरे प्रभाव को समझना चाहिए।

4. ‘जग जस अपजस दीन्ह’ का भाव क्या है?
दोहा कहता है कि संसार में अच्छाई और बुराई दोनों हैं, और हर व्यक्ति या घटना का प्रभाव अलग होता है। हमें समझकर ही उसकी प्रशंसा या आलोचना करनी चाहिए।

5. इस दोहे का व्यवहार में क्या उपयोग है?

  • किसी भी व्यक्ति या स्थिति को केवल देखने या सुनने से जज न करें।

  • अच्छे और बुरे पहलू दोनों समझें।

  • जीवन में अच्छाई फैलाने की कोशिश करें और बुराई को कम करें।

6. इसे याद रखने का आसान तरीका क्या है?
सोचिए चाँद की रोशनी – रात के अंधेरे को दूर करती है और जीवन को सुंदर बनाती है। इसी तरह जीवन में सही निर्णय और समझ जरूरी है।

सम प्रकाश तम पाख दोहा अर्थ और भावार्थ

दोहा:

सम प्रकाश तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह। ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह॥


शब्दार्थ (Word Meaning)

  1. सम – समान

  2. प्रकाश – उजाला, ज्ञान, रौशनी

  3. तम – अंधकार, अज्ञान

  4. पाख – पक्ष, भेद

  5. दुहुँ नाम – दोनों के नाम (अर्थात उजाले और अंधकार, या गुण और दोष)

  6. भेद बिधि कीन्ह – भेद करने का तरीका बताया

  7. ससि – चंद्रमा

  8. सोषक – जो खाता है, जो नष्ट करता है (इस संदर्भ में चंद्रमा का प्रकाश अंधकार को समाप्त करता है)

  9. पोषक – जो बढ़ाता है, पालन करता है (चंद्रमा की ज्योति जीवन को पोषित करती है)

  10. समुझि – समझकर

  11. जग – दुनिया, सृष्टि

  12. जस अपजस दीन्ह – गुण और अपगुण का प्रदर्शन किया


सरल हिंदी अर्थ:
सत्य और असत्य, उजाला और अंधकार दोनों के भेद को समझना चाहिए। जैसे चंद्रमा अंधकार को कम करता है (सोषक) और जीवन को पोषित करता है (पोषक), वैसे ही संसार में अच्छाई और बुराई दोनों को देखकर उनके प्रभाव को समझना चाहिए।

भावार्थ (भावनात्मक अर्थ / Moral):
इस दोहे में यह बताया गया है कि जीवन में अच्छाई और बुराई, गुण और दोष, उजाला और अंधकार—सबको समझना ज़रूरी है। हमें किसी चीज़ को सिर्फ देख कर नहीं आंकना चाहिए, बल्कि उसके उपयोग और असर को भी समझना चाहिए। चंद्रमा की तरह हमें अंधकार को कम करना और अच्छाई को बढ़ावा देना चाहिए।

सरल भाषा में अर्थ:
इस दोहे में कहा गया है कि दुनिया में दो तरह की चीजें होती हैं – उजाला और अंधकार, अच्छाई और बुराई। इसे समझने का तरीका भी बताया गया है।


जैसे चाँद:

  • रात में अंधेरा होता है, लेकिन चाँद की रोशनी उसे दूर करती है। (सोषक – जो अंधकार को दूर करता है)

  • चाँद की रोशनी जीवन को सुंदर बनाती है, चीजों को दिखाती है। (पोषक – जो जीवन को बढ़ावा देता है)


यही संदेश यहाँ है कि दुनिया में अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं, और हमें उन्हें समझकर उनके असर के अनुसार काम करना चाहिए।


भावार्थ:

  1. जीवन में अच्छाई और बुराई दोनों को पहचानना जरूरी है।

  2. केवल नजरों से देखना या सुनना काफी नहीं, उनके परिणाम को भी समझो।

  3. जैसे चाँद अंधकार को खत्म करता है और जीवन को रोशन करता है, वैसे ही हमें अपने जीवन में अच्छाई फैलानी चाहिए और बुराई को कम करना चाहिए।


एक उदाहरण से समझें:

अगर किसी काम में मुश्किल या परेशानी है (अंधकार), और उसके बीच में आप सही तरीका अपनाते हैं (उजाला), तो न केवल समस्या हल होगी बल्कि सबको फायदा भी होगा।


दोहा FAQ – सरल हिंदी में

1. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?
दोहा सिखाता है कि जीवन में उजाला और अंधकार, अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं, और हमें उन्हें समझकर सही निर्णय लेना चाहिए।

2. ‘सम प्रकाश तम’ का क्या अर्थ है?

  • सम = समान

  • प्रकाश = उजाला

  • तम = अंधकार
    अर्थात उजाला और अंधकार दोनों समान रूप से मौजूद हैं, और उनके बीच फर्क जानना जरूरी है।

3. ‘ससि सोषक पोषक’ से क्या समझना चाहिए?

  • ससि = चाँद

  • सोषक = जो नष्ट करता है (अंधकार को दूर करता है)

  • पोषक = जो बढ़ावा देता है (जीवन को रोशन करता है)
    यानि जैसे चाँद रात के अंधकार को दूर करता है और जीवन को रोशन करता है, वैसे ही हमें अच्छे और बुरे प्रभाव को समझना चाहिए।

4. ‘जग जस अपजस दीन्ह’ का भाव क्या है?
दोहा कहता है कि संसार में अच्छाई और बुराई दोनों हैं, और हर व्यक्ति या घटना का प्रभाव अलग होता है। हमें समझकर ही उसकी प्रशंसा या आलोचना करनी चाहिए।

5. इस दोहे का व्यवहार में क्या उपयोग है?

  • किसी भी व्यक्ति या स्थिति को केवल देखने या सुनने से जज न करें।

  • अच्छे और बुरे पहलू दोनों समझें।

  • जीवन में अच्छाई फैलाने की कोशिश करें और बुराई को कम करें।

6. इसे याद रखने का आसान तरीका क्या है?
सोचिए चाँद की रोशनी – रात के अंधेरे को दूर करती है और जीवन को सुंदर बनाती है। इसी तरह जीवन में सही निर्णय और समझ जरूरी है।