जगजीत सिंह
(द गजल किंग)
| जन्म तिथि | 08 February 1941 |
| जन्म स्थान | श्री गंगानगर, राजस्थान भारत |
| पिता | सरदार अमर सिंह धीमन |
| माता | सरूप कौर |
| जीवनसंगी | चित्रा सिंह |
| बच्चे | बेटा – विवेक सिंह, सौतेली बेटी – मोनिका चौधरी |
| शिक्षा | प्रारंभिक शिक्षा श्री गंगानगर | DAV कॉलेज, जालंधर | कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (M.A.) |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | सिख |
जगजीत सिंह – जीवनी--
(ग़ज़लों के बादशाह, सुरों के सम्राट और दिलों की आवाज़)
भारतीय संगीत जगत में अनेक महान गायक हुए हैं जिन्होंने अपनी कला और गायन शैली से श्रोताओं के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन जब बात ग़ज़ल गायकी की आती है तो सबसे पहला नाम जगजीत सिंह का आता है। उन्होंने न केवल ग़ज़लों को आम जनता तक पहुँचाया बल्कि उन्हें एक नया आयाम भी दिया। अपनी गहरी आवाज़, सुरीली धुनों और भावपूर्ण प्रस्तुति के कारण उन्हें "ग़ज़लों का बादशाह" कहा जाता है।
जगजीत सिंह का जीवन केवल संगीत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उनका संघर्ष, उनका समर्पण और उनका दुख-सुख भी उनकी ग़ज़लों में झलकता है। उनकी आवाज़ में वह जादू था जो हर दिल को छू लेता था।
प्रारंभिक जीवन--
जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को श्री गंगानगर, राजस्थान में हुआ था।
उनका मूल नाम था – जगमोहन सिंह धीमन, बाद में वे "जगजीत सिंह" के नाम से मशहूर हुए।
उनके पिता सरदार अमर सिंह धीमन थे, जो भारतीय सरकार की लोक निर्माण विभाग (PWD) में सरकारी कर्मचारी थे।
उनकी माता का नाम सरूप कौर था, जो गृहिणी थीं।
वे अपने माता-पिता की पाँच संतानों में से एक थे।
बचपन--
जगजीत का बचपन बहुत ही सादगी और संस्कारों से भरा हुआ था।
उनके पिता चाहते थे कि वे इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनें, लेकिन जगजीत का मन बचपन से ही संगीत में रमता था।
बचपन से ही उन्हें संगीत की ओर झुकाव था और वे हारमोनियम तथा तबला बजाने में रुचि रखते थे।
शिक्षा--
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा श्री गंगानगर में प्राप्त की।
इसके बाद DAV कॉलेज, जालंधर से उन्होंने स्नातक (B.A.) किया।
पढ़ाई के दौरान ही वे संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे थे।
बाद में उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (M.A.) की पढ़ाई की।
संगीत की शिक्षा उन्होंने महान उस्ताद पंडित छगन लाल शर्मा और बाद में उस्ताद जमाल खान से प्राप्त की।
उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में विशेष प्रशिक्षण लिया।
मुंबई का सफर और संघर्ष--
1965 में वे अपने सपनों को हकीकत बनाने के लिए मुंबई आ गए।
शुरुआती दिनों में उन्हें बेहद कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
किराए का मकान लेना मुश्किल था, वे बहुत साधारण स्थिति में रहते थे।
उन्हें छोटे-छोटे विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाने का मौका मिला।
धीरे-धीरे रेडियो और छोटे संगीत कार्यक्रमों में गाना शुरू किया।
करियर की शुरुआत--
1967 में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में ग़ज़ल गाना शुरू किया।
1970 के दशक में उन्होंने म्यूजिक एल्बम निकालने की कोशिश की।
1976 में उनकी पहली बड़ी सफलता मिली जब एल्बम "द अनफॉरगेटेबल्स" (The Unforgettables) रिलीज़ हुआ, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ मिलकर गाया।
यह एल्बम ग़ज़ल जगत में क्रांतिकारी साबित हुआ।
ग़ज़लों का नया दौर--
जगजीत सिंह ने ग़ज़ल को एक नया आयाम दिया –
उन्होंने शास्त्रीय ग़ज़लों को सरल भाषा और संगीत में ढालकर आम जनता के लिए सुलभ बनाया।
ग़ज़लों को फिल्मी गीतों की तरह लोकप्रिय बना दिया।
उनकी ग़ज़लों में दर्द, रोमांस, जीवन के अनुभव और दर्शन सब झलकते थे।
प्रमुख एल्बम और ग़ज़लें--
- द अनफॉरगेटेबल्स (1976)
- एक बार कहो (1981)
- प्रेमगीत (1981 – फ़िल्म)
- अर्थ (1982 – फ़िल्म)
- साथ साथ (1982 – फ़िल्म)
- सिलसिले (1981 – फ़िल्म, पार्श्वगायन)
- मरासिम (1999) – गुलज़ार के साथ
- फेस टू फेस
- आशियाना
- सेहर
चित्रा सिंह और पारिवारिक जीवन--
1967 में उनकी मुलाकात चित्रा सिंह से हुई।
चित्रा पहले से शादीशुदा थीं और एक बेटी (मोनिका) की मां थीं।
बाद में चित्रा ने अपने पहले पति से तलाक लेकर 1969 में जगजीत से विवाह कर लिया।
इस दंपत्ति का एक बेटा हुआ – विवेक सिंह।
लेकिन 1990 में उनके बेटे विवेक का कार दुर्घटना में निधन हो गया। यह जगजीत और चित्रा के लिए सबसे बड़ा आघात था।
इसके बाद चित्रा सिंह ने गाना छोड़ दिया।
जगजीत ने भी लंबे समय तक ग़ज़लें गाना बंद कर दिया, लेकिन फिर वे अपने संगीत के जरिए लौटे।
फिल्मी करियर--
1980 के दशक में उन्होंने फिल्मों में भी कई ग़ज़लें और गाने गाए।
अर्थ, साथ साथ, प्रेमगीत, बाज़ार जैसी फिल्मों की ग़ज़लें आज भी अमर हैं।
"होठों से छू लो तुम", "तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो", "झुकी झुकी सी नज़र" उनकी फिल्मी ग़ज़लों की पहचान बन गईं।
योगदान--
उन्होंने ग़ज़ल को भारत और विदेशों में लोकप्रिय बनाया।
शास्त्रीयता और आधुनिकता का संतुलन स्थापित किया।
अनेक नए गायकों को प्रेरणा दी।
उनकी ग़ज़लें आज भी रेडियो और मंचों पर गाई जाती हैं।
पुरस्कार और सम्मान--
1998 – साहित्य अकादमी पुरस्कार (ग़ज़ल को लोकप्रिय बनाने के लिए)
2003 – पद्म भूषण (भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
अनेक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और संगीत सम्मान
अंतिम समय और निधन--
2011 में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ।
23 सितंबर 2011 को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
10 अक्टूबर 2011 को उनका निधन हो गया।
उनकी मृत्यु से संगीत जगत में गहरा शोक छा गया।
जगजीत सिंह की शैली--
गहरी और मधुर आवाज़
सरल और समझ में आने वाली ग़ज़लें
शास्त्रीय और आधुनिक संगीत का मेल
दर्द और भावनाओं से भरी प्रस्तुति
रोचक जानकारियाँ--
- जगजीत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ था।
- उनके पिता उन्हें IAS बनाना चाहते थे।
- उनका असली नाम जगमोहन सिंह था।
- उन्हें बचपन में "जीता" कहकर बुलाया जाता था।
- उन्होंने हारमोनियम और तबला बजाना बचपन से सीखा।
- मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्होंने रेडियो जिंगल्स गाए।
- उनकी पत्नी चित्रा सिंह भी मशहूर ग़ज़ल गायिका हैं।
- उनका पहला एल्बम "द अनफॉरगेटेबल्स" था।
- उन्होंने फिल्मों में भी गाने गाए, लेकिन ग़ज़लें ही उनकी पहचान बनीं।
- उनका बेटा विवेक केवल 21 साल की उम्र में गुजर गया।
- बेटे की मौत के बाद चित्रा ने गाना छोड़ दिया।
- उनकी ग़ज़लों ने लोगों के दिलों में दर्द को शब्द दिए।
- वे पहली बार ग़ज़लों को कैसेट और रिकॉर्ड के जरिए घर-घर ले गए।
- उन्होंने गुलज़ार, जावेद अख्तर जैसे कवियों के साथ काम किया।
- "होठों से छू लो तुम" उनकी सबसे लोकप्रिय ग़ज़लों में से एक है।
- उन्हें ग़ज़ल जगत का "माइलस्टोन" माना जाता है।
- उन्होंने अनेक उभरते गायकों को मंच दिया।
- उनकी ग़ज़लों में आम आदमी की भावनाएँ झलकती थीं।
- उन्होंने भारत के अलावा विदेशों में भी ग़ज़लें गाई।
- वे बहुत सादगीपूर्ण जीवन जीते थे।
- वे ग़ज़लों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करने में सफल रहे।
- उनकी ग़ज़लें आज भी फिल्मों और सीरियल्स में उपयोग होती हैं।
- उनका नाम "ग़ज़लों के सम्राट" के रूप में लिया जाता है।
- उन्होंने अपने जीवन में 40 से अधिक एल्बम निकाले।
- उनका निधन 10 अक्टूबर 2011 को हुआ।
जगजीत सिंह के प्रमुख भजन--
हे राम, हे राम – (राम भक्ति से भरा हुआ भजन, बेहद लोकप्रिय)
हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए
जय गणेश देवा – (गणेश जी की स्तुति में)
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
ओम नमः शिवाय – (शिव भजन, बहुत प्रसिद्ध)
वैष्णव जन तो तेने कहिए – (महात्मा गांधी का प्रिय भजन, जिसे जगजीत जी ने अपनी आवाज़ में गाया)
कृष्ण कृष्ण कहो
राम नाम की लूट है
श्याम तेरी बंसी पुकारे आधी रात को
गणपति गणेश देवा
साईं बाबा बोलो – (साईं भजन)
ओ जब तक हैं दम में दम
मंगलम भगवान विष्णु
प्रभु जी तू ही मेरे मन भाया
सत्यनारायण व्रत कथा भजन
हरे कृष्ण हरे राम
ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे (फिल्म लगान से, भक्ति भाव का अद्भुत गीत)
राम सीता राम, सीता राम कहो भाई
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम
जय जय शिव शंकर
विशेष बात--
जगजीत सिंह ने ग़ज़लों के अलावा भक्ति संगीत के कई एल्बम भी दिए हैं, जैसे –
हे राम
महाशिव
श्री गणेश
साईं भजन संग्रह
भजन संध्या
उनके भजन कार्यक्रम मंदिरों और भक्ति मंचों पर आज भी गाए जाते हैं।
जगजीत सिंह का परिवार--
पिता – सरदार अमर सिंह धीमन
पेशे से सरकारी कर्मचारी (लोक निर्माण विभाग – PWD)।
वे चाहते थे कि जगजीत पढ़-लिखकर IAS अधिकारी बनें।
बहुत अनुशासित और सख़्त स्वभाव के व्यक्ति थे।
माता – सरूप कौर
गृहिणी थीं।
धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं।
उन्होंने ही जगजीत को बचपन से ही संगीत और भक्ति भाव की ओर प्रेरित किया।
भाई-बहन
जगजीत सिंह पाँच भाई-बहनों में से एक थे।
सभी भाई-बहन पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन केवल जगजीत का झुकाव संगीत की ओर था।
पत्नी – चित्रा सिंह
मशहूर ग़ज़ल गायिका।
मूल नाम – चित्रा दत्ता।
पहले उनकी शादी डेबो मुखर्जी (संगीतकार) से हुई थी और उनसे एक बेटी (मोनिका) थी।
1967 में चित्रा की मुलाकात जगजीत से हुई।
1969 में दोनों ने विवाह किया और साथ मिलकर ग़ज़ल जगत की सबसे मशहूर जोड़ी बने।
बेटे की मृत्यु (1990) के बाद चित्रा ने गाना छोड़ दिया।
बेटा – विवेक सिंह (Viviek Singh)--
जन्म : 21वीं सदी के आरंभ में।
निधन : 1990 में सड़क दुर्घटना में (सिर्फ़ 21 साल की उम्र में)।
विवेक की असमय मृत्यु ने जगजीत और चित्रा की ज़िंदगी बदल दी।
सौतेली बेटी – मोनिका चौधरी (Monica Choudhary)--
चित्रा सिंह और उनके पहले पति की बेटी।
विवेक की मृत्यु के बाद मोनिका ही उनके परिवार का सहारा बनीं।
मोनिका का जीवन भी दुखद रहा। उन्होंने 2009 में आत्महत्या कर ली।
इस घटना से चित्रा सिंह और भी टूट गईं।
परिवार की विशेष बातें--
जगजीत और चित्रा की जोड़ी को "ग़ज़ल जगत का बादशाह और रानी" कहा जाता था।
परिवार पर कई दुखद घटनाएँ आईं –
पहले बेटा विवेक की मौत (1990)।
फिर बेटी मोनिका की आत्महत्या (2009)।
इन आघातों ने चित्रा सिंह को पूरी तरह संगीत से दूर कर दिया।
जगजीत सिंह खुद भी बहुत भावुक हो गए थे, लेकिन उन्होंने संगीत को ही अपने जीवन का सहारा बनाया।
जगजीत सिंह – प्रश्नोत्तर (Q&A)--
1. जगजीत सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उनका जन्म 8 फ़रवरी 1941 को श्री गंगानगर, राजस्थान में हुआ था।
2. जगजीत सिंह का पूरा नाम क्या था?
उनका वास्तविक नाम जगमोहन सिंह धीमन था।
3. जगजीत सिंह को किस नाम से जाना जाता है?
उन्हें "ग़ज़लों का बादशाह" और "सुरों का सम्राट" कहा जाता है।
4. उनके पिता का नाम क्या था?
उनके पिता का नाम सरदार अमर सिंह धीमन था।
5. उनकी माता का नाम क्या था?
उनकी माता का नाम सरूप कौर था।
6. उनकी पत्नी कौन थीं?
उनकी पत्नी चित्रा सिंह थीं, जो खुद भी मशहूर ग़ज़ल गायिका हैं।
7. उनका बेटा कौन था और उसका क्या हुआ?
उनके बेटे का नाम विवेक सिंह था, जिसकी 1990 में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
8. उनकी सौतेली बेटी का नाम क्या था?
उनकी सौतेली बेटी का नाम मोनिका चौधरी था, जिसने 2009 में आत्महत्या कर ली थी।
9. जगजीत सिंह ने संगीत की शिक्षा किससे ली?
उन्होंने पंडित छगन लाल शर्मा और बाद में उस्ताद जमाल खान से संगीत सीखा।
10. उनकी शिक्षा कहाँ से हुई?
उन्होंने DAV कॉलेज, जालंधर से B.A. किया और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से M.A. किया।
11. उन्होंने ग़ज़ल गाना कब शुरू किया?
1967 में ऑल इंडिया रेडियो से उन्होंने ग़ज़ल गाना शुरू किया।
12. उनकी पहली बड़ी सफलता कौन-सा एल्बम था?
The Unforgettables (1976) उनका पहला सफल एल्बम था।
13. जगजीत सिंह की आवाज़ की क्या विशेषता थी?
उनकी आवाज़ गहरी, दर्दभरी, सुरीली और भावपूर्ण थी।
14. उनकी सबसे लोकप्रिय फिल्मी ग़ज़लें कौन-सी हैं?
"होठों से छू लो तुम" (प्रेमगीत),
"तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो" (अर्थ),
"झुकी झुकी सी नज़र" (अर्थ)।
उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने गाना क्यों छोड़ दिया?
बेटे विवेक की मौत (1990) के बाद उन्होंने गाना छोड़ दिया।
16. जगजीत सिंह ने किन कवियों के साथ काम किया?
उन्होंने गुलज़ार, जावेद अख़्तर, क़तील शिफ़ाई जैसे बड़े शायरों के साथ काम किया।
17. क्या उन्होंने भजन भी गाए?
हाँ, उन्होंने कई प्रसिद्ध भजन और भक्ति एल्बम गाए – "हे राम", "ओम नमः शिवाय", "वैष्णव जन तो" आदि।
18. क्या उन्होंने फिल्मों के लिए भी गाया?
हाँ, उन्होंने "प्रेमगीत", "अर्थ", "साथ साथ", "बाज़ार" जैसी फिल्मों में ग़ज़लें गाईं।
19. उन्हें कौन-सा राष्ट्रीय सम्मान मिला?
उन्हें 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
20. जगजीत सिंह की मृत्यु कब और कैसे हुई?
23 सितंबर 2011 को उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और 10 अक्टूबर 2011 को उनका निधन हो गया।
21. उनके अंतिम समय में वे कहाँ थे?
वे दिल्ली में एक संगीत कार्यक्रम के लिए आए हुए थे।
22. उन्हें "ग़ज़लों का बादशाह" क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने ग़ज़लों को आम जनता तक पहुँचाया और उन्हें लोकप्रिय बनाया।
23. उनका पहला गाना किस फिल्म में था?
उनका पहला फिल्मी गीत "दर्द" (1976) फिल्म में था।
24. क्या उनकी ग़ज़लें विदेशों में भी लोकप्रिय हुईं?
हाँ, उनकी ग़ज़लें भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में भी बहुत लोकप्रिय हुईं।
निष्कर्ष--
जगजीत सिंह सिर्फ़ गायक नहीं थे, बल्कि वे एक भावनाओं के कलाकार थे। उन्होंने अपनी आवाज़ के जरिए ग़ज़लों को वह ऊँचाई दी जो पहले कभी नहीं मिली थी। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी ग़ज़लें आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों को छूती रहेंगी।
Jagjit Singh – Biography--
(The Emperor of Ghazals, the King of Melody, and the Voice of Hearts)
In the world of Indian music, many legendary singers have left an indelible mark with their art and style of singing. But when it comes to Ghazals, the first name that comes to mind is Jagjit Singh. He not only brought Ghazals to the masses but also gave them a completely new dimension. With his deep, soulful voice, melodious compositions, and emotional renditions, he earned the title of “The King of Ghazals.”
Jagjit Singh’s life was not just about music—it was about his struggles, dedication, and personal joys and sorrows, all of which reflected in his Ghazals. His magical voice touched every heart.
Early Life
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Jagjit Singh was born on 8 February 1941 in Sri Ganganagar, Rajasthan.
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His birth name was Jagmohan Singh Dhiman, but he later became famous as Jagjit Singh.
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His father, Sardar Amar Singh Dhiman, was a government employee in the Public Works Department (PWD).
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His mother, Saroop Kaur, was a homemaker.
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He was one of five children of his parents.
Childhood
Jagjit grew up in a simple and cultured environment.
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His father wished for him to become an engineer or a civil servant, but Jagjit was drawn towards music from childhood.
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He loved playing the harmonium and tabla during his early years.
Education
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Jagjit completed his early education in Sri Ganganagar.
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He then pursued B.A. at DAV College, Jalandhar.
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During his college years, he actively participated in music competitions.
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Later, he completed his M.A. from Kurukshetra University.
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He received classical music training under Pandit Chhagan Lal Sharma and later from Ustad Jamal Khan, specializing in Hindustani classical music.
Journey to Mumbai & Struggles
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In 1965, Jagjit Singh moved to Mumbai to chase his dreams.
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The initial years were extremely tough—he lived in modest conditions and struggled to even rent a house.
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To survive, he started singing advertising jingles and performing on radio and small shows.
Career Beginnings
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In 1967, he began singing Ghazals for All India Radio.
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During the 1970s, he attempted to release music albums.
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His major breakthrough came in 1976 with the album “The Unforgettables”, sung along with his wife Chitra Singh.
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This album was a turning point in the history of Ghazals.
A New Era of Ghazals--
Jagjit Singh revolutionized the world of Ghazals:
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He simplified traditional Ghazals, making them easy to understand and appealing to the common audience.
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He gave Ghazals a film-song-like popularity.
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His Ghazals expressed pain, romance, life experiences, and philosophy.
Major Albums & Famous Ghazals
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The Unforgettables (1976)
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Ek Bar Kaho (1981)
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Prem Geet (1981 – Film)
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Arth (1982 – Film)
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Saath Saath (1982 – Film)
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Silisile (1981 – Film, Playback singing)
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Marasim (1999 – with Gulzar)
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Face to Face
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Aashiana
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Seher
Personal Life & Chitra Singh
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In 1967, Jagjit met Chitra Singh.
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Chitra was already married and had a daughter, Monica.
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After divorcing her first husband, she married Jagjit in 1969.
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The couple had a son, Vivek Singh.
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In 1990, tragedy struck when Vivek died in a car accident at just 21 years old.
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This shattered the family—Chitra Singh quit singing, and Jagjit Singh too stopped for a while before returning to music.
Film Career
In the 1980s, Jagjit Singh sang many timeless film Ghazals:
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Arth, Saath Saath, Prem Geet, Bazaar.
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Popular songs:
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“Hothon Se Chhoo Lo Tum” (Prem Geet)
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“Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho” (Arth)
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“Jhuki Jhuki Si Nazar” (Arth)
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These songs remain immortal classics.
Contribution
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Popularized Ghazals across India and globally.
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Blended classical tradition with modern simplicity.
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Inspired countless new singers.
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Brought Ghazals into homes through cassettes and records.
Awards & Honors
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1998 – Sahitya Akademi Award (for popularizing Ghazals)
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2003 – Padma Bhushan, India’s third-highest civilian honor
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Several Filmfare Awards and other music recognitions
Final Years & Death
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In September 2011, while in Delhi for a concert, he suffered a brain hemorrhage.
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He was admitted on 23 September 2011.
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On 10 October 2011, Jagjit Singh passed away.
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His death left the music world in deep sorrow.
Style & Voice
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Deep and soothing voice
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Simple yet profound lyrics
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Blend of classical and modern music
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Emotional and soulful renditions
Interesting Facts
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Born into a Sikh family.
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His father wanted him to become an IAS officer.
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Original name: Jagmohan Singh Dhiman.
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Nickname in childhood: Jeeta.
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Learned harmonium & tabla as a child.
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Sang radio jingles in Mumbai for survival.
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His wife, Chitra Singh, was also a renowned Ghazal singer.
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First album: The Unforgettables (1976).
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Sang in films but became famous for Ghazals.
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Son Vivek died young in a tragic accident.
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Step-daughter Monica committed suicide in 2009.
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Worked with legendary poets like Gulzar and Javed Akhtar.
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Released over 40 albums.
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Lived a simple and humble life despite fame.
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Known worldwide as the Emperor of Ghazals.
Popular Devotional Songs (Bhajans)
Apart from Ghazals, Jagjit Singh also sang many Bhajans:
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Hey Ram, Hey Ram
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Hey Prabhu Ananddata Gyaan Humko Deejiye
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Jai Ganesh Deva
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Shri Krishna Govind Hare Murari
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Om Namah Shivaya
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Vaishnav Jan To Tene Kahiye
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Sai Baba Bolo
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Achyutam Keshavam Krishna Damodaram
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Ram Sita Ram
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Jai Jai Shiv Shankar
He released devotional albums like Hey Ram, Maha Shiv, Shri Ganesh, Sai Bhajan Sangrah, Bhajan Sandhya.
Family
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Father: Sardar Amar Singh Dhiman (PWD employee)
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Mother: Saroop Kaur (homemaker, deeply religious)
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Wife: Chitra Singh (renowned Ghazal singer)
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Son: Vivek Singh (died in 1990 in a car crash)
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Step-daughter: Monica Choudhary (committed suicide in 2009)
The family endured immense tragedies, which deeply affected their lives and music.
Jagjit Singh – Q&A Highlights
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When and where was Jagjit Singh born?
→ 8 February 1941, Sri Ganganagar, Rajasthan. -
What was his real name?
→ Jagmohan Singh Dhiman. -
Why is he called “King of Ghazals”?
→ For bringing Ghazals to the masses and revolutionizing the genre. -
Who was his wife?
→ Chitra Singh, also a famous Ghazal singer. -
What was his first major album?
→ The Unforgettables (1976). -
Which are his most famous film Ghazals?
→ “Hothon Se Chhoo Lo Tum,” “Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho,” “Jhuki Jhuki Si Nazar.” -
Which award did he receive from the Indian government?
→ Padma Bhushan (2003). -
When did he pass away?
→ 10 October 2011, after suffering a brain hemorrhage.
Conclusion--
Jagjit Singh was not just a singer—he was an artist of emotions. Through his voice, he gave Ghazals a height they had never reached before. His life was full of struggles and personal tragedies, yet he never gave up. His Ghazals continue to touch millions of hearts and will remain eternal treasures for generations to come.