जया किशोरी

जया किशोरी जी के बारे मेंं

जया किशोरी

जया किशोरी

(जया शर्मा)

जन्म तिथि 13 July 1995
जन्म स्थान सुजानगढ़, चुरू जिला, राजस्थान, भारत
पिता श्री भगवान शर्मा
माता श्रीमती सोनिया शर्मा
शिक्षा शिक्षा कोलकाता में स्थित महादेवी बिड़ला वर्ल्ड एकेडमी | संगीत की शिक्षा पंडित गोविंदराम मिश्रा
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू
पुरस्कार आध्यात्मिक आइकॉन अवॉर्ड – 2019 | युवा आदर्श पुरस्कार

प्रारंभिक जीवन और बचपन--

जया किशोरी का जन्म 13 जुलाई 1995 को राजस्थान के सुजानगढ़ शहर में हुआ। उनका जन्म एक साधारण किंतु धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जिसमें बचपन से ही भक्ति, संस्कार और अध्यात्म का वातावरण था। उनके पिता भगवान शर्मा एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं और माता सोनिया शर्मा भी अत्यंत संस्कारी एवं भक्ति भाव से ओत-प्रोत हैं।

बचपन से ही जया में भक्ति संगीत और कथा सुनने की गहरी रुचि थी। उनके घर में अक्सर भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होते थे, जिनका असर उनकी सोच और जीवन पर पड़ा।


बचपन में ही उन्होंने हनुमान चालीसा, भगवद गीता के श्लोक, और सूरदास, मीरा, तुलसीदास के भजनों का कंठस्थ पाठ करना शुरू कर दिया था। उनके दादा-दादी उन्हें अक्सर भगवान श्रीकृष्ण, राम और संतों की कथाएँ सुनाया करते थे, जिससे उनके मन में भक्ति का बीज और गहरा होता चला गया।


शिक्षा-- 

जया किशोरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में स्थित महादेवी बिड़ला वर्ल्ड एकेडमी से प्राप्त की। बचपन में ही उनकी स्मरण शक्ति अद्भुत थी और वे बिना किसी कठिनाई के लंबे-लंबे श्लोक, चालीसा और भजन याद कर लेती थीं।

उन्होंने संगीत की शिक्षा पंडित गोविंदराम मिश्रा से ली। संगीत के प्रति उनकी रुचि इतनी गहरी थी कि छोटी उम्र में ही उन्होंने स्वर, लय और ताल का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया।


आध्यात्मिक गुरु और मार्गदर्शन--

जया किशोरी के आध्यात्मिक जीवन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान पंडित गोविंदराम मिश्रा का रहा, जिन्होंने न केवल उन्हें संगीत सिखाया, बल्कि भगवद गीता, भागवत कथा और अन्य शास्त्रों का गहन अध्ययन कराया। उन्होंने ही जया को "किशोरी जी" नाम से संबोधित करना शुरू किया, क्योंकि जया का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति विशेष लगाव था और वे राधा-कृष्ण की लीला कथाओं में गहरी रुचि रखती थीं।


भजन और कीर्तन की शुरुआत--

जया किशोरी ने महज 7 वर्ष की उम्र में भजन-कीर्तन गाना शुरू किया। शुरुआत में वे अपने गुरु और परिवार के साथ भजन मंडली में गाती थीं। उनकी मीठी, मधुर और भावपूर्ण आवाज़ ने जल्दी ही सबका दिल जीत लिया।


13 वर्ष की आयु में उन्होंने ‘सात दिनों की भागवत कथा’ और ‘तीन दिनों की सुंदरकांड’ का वाचन करना शुरू किया। धीरे-धीरे वे एक प्रसिद्ध कथा वाचिका के रूप में पहचानी जाने लगीं।


प्रमुख रचनाएँ और भजन--

जया किशोरी ने अब तक कई लोकप्रिय भजनों को अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है, जिनमें प्रमुख हैं –

  • “शिव तेरा भस्मांधार”
  • “मेरे कान्हा घर आए”
  • “मेरा अच्युतम केशवम”
  • “मुझे सांवरिया बुला ले”
  • “राम नाम की लूट है”
  • “मेरा कान्हा”

उनके भजन न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी बहुत लोकप्रिय हैं।


समाजसेवा--

जया किशोरी सिर्फ कथा और भजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाजसेवा में भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं।

उनकी कथाओं से जो भी धनराशि प्राप्त होती है, वह नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर को दान कर दी जाती है। यह संस्थान गरीबों, विकलांगों और जरूरतमंदों की सहायता करता है।

उन्होंने कई बार शिक्षा, पर्यावरण और नारी सशक्तिकरण पर भी प्रेरक भाषण दिए हैं।


प्रेरणादायक व्यक्तित्व--

जया किशोरी का जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आधुनिक जीवनशैली के साथ आध्यात्मिकता को संतुलित करना चाहते हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि भक्ति केवल वृद्धावस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह युवावस्था में भी जीवन का आधार बन सकती है।


पुरस्कार और सम्मान--

  • आध्यात्मिक आइकॉन अवॉर्ड – 2019
  • युवा आदर्श पुरस्कार
  • विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित


व्यक्तिगत जीवन--

जया किशोरी अविवाहित हैं और अपने जीवन को भगवान की भक्ति और समाजसेवा में समर्पित किए हुए हैं। वे कोलकाता में अपने परिवार के साथ रहती हैं।


जया किशोरी जी के प्रमुख भजन--

जया किशोरी जी की मधुर आवाज़ और भक्ति से भरे भजनों ने लाखों भक्तों के दिलों में जगह बनाई है। उनके भजन न केवल धार्मिक होते हैं बल्कि उनमें जीवन दर्शन और प्रेरणा का संदेश भी होता है। यहाँ उनके कुछ प्रसिद्ध भजनों की सूची दी जा रही है—

मेरे कान्हा गुस्सा न हो जाना

राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति को समर्पित एक बेहद लोकप्रिय भजन।

अच्युतम केशवम

भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न नामों और लीलाओं का वर्णन करने वाला भजन।

मुझे सांवरिया बुला ले

भक्त और भगवान के मिलन की तड़प को व्यक्त करता है।


शिव स्तुति

भगवान शिव की महिमा का गान, विशेषकर महाशिवरात्रि पर गाया जाता है।

मैं तो सांवरिया के रंग में रंगी

भगवान के प्रेम में पूरी तरह डूब जाने की भावना से भरा हुआ।

नैना लागे पिया से

राधा-कृष्ण के मधुर मिलन और विरह को दर्शाने वाला भजन।

राधा रानी लागी लगन

राधा रानी की भक्ति और प्रेम पर आधारित सुंदर रचना।

गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो

नाम संकीर्तन पर केंद्रित एक ऊर्जावान भजन, जो भक्ति भाव बढ़ाता है।

राधा नाम की बरसे फुहार

राधा नाम की महिमा का वर्णन करने वाला भजन।

श्याम तेरे चरणों में

जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित करने की भावना से लिखा गया भजन।


जया किशोरी जी का जीवन शैली (Lifestyle)--

जया किशोरी जी का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण, अनुशासित और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित है। उनका हर दिन भक्ति, साधना और सेवा में बीतता है। भले ही वे लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन उनका रहन-सहन संतों और साधकों जैसा ही है।


1. दिनचर्या--

प्रातःकाल – वे सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और फिर ध्यान, योग एवं भगवान का स्मरण करती हैं।

भक्ति और साधना – प्रातःकालीन समय में वे जप, पाठ, और भजन की साधना में लीन रहती हैं।

साधारण आहार – उनका भोजन सात्विक और हल्का होता है, जिसमें मुख्य रूप से फल, दूध और शाकाहारी भोजन शामिल है।

कार्यक्रमों में भागीदारी – दिन का बड़ा हिस्सा प्रवचन, कथा, भजन-कीर्तन और सामाजिक कार्यों में बीतता है।

अध्ययन – धार्मिक ग्रंथों, आध्यात्मिक पुस्तकों और संत साहित्य का अध्ययन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।


2. पहनावा और आभूषण--

वे प्रायः साधारण सूती या रेशमी साड़ी/सलवार-कुर्ता पहनती हैं, जो हल्के रंग के होते हैं।

आभूषण के रूप में केवल रुद्राक्ष, तुलसी की माला या साधारण चांदी की जंजीर पहनती हैं।

कोई भारी गहने या मेकअप का प्रयोग नहीं करतीं।


3. रहने का तरीका--

जया किशोरी जी आलीशान बंगले में नहीं, बल्कि साधारण और शांत वातावरण वाले घर में रहती हैं।

उनका कमरा बहुत सादा, साफ-सुथरा और धार्मिक चित्रों व मूर्तियों से सजा हुआ है।

घर में एक छोटा सा पूजा कक्ष है, जहां वे प्रतिदिन आरती और पूजा करती हैं।


4. खानपान की आदतें--

वे सात्विक और शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करती हैं।

मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करतीं।

चाय और कॉफी भी कम ही लेती हैं, अधिकतर हर्बल ड्रिंक या दूध पसंद करती हैं।


5. यात्रा और प्रचार--

उनका अधिकतर समय देश-विदेश में कथाओं और प्रवचनों के लिए यात्रा करने में गुजरता है।

यात्राओं में भी वे सादगी बनाए रखती हैं और साधारण साधु-संतों की तरह रहना पसंद करती हैं।


6. सोशल मीडिया और तकनीक का उपयोग--

भले ही वे आधुनिक तकनीक का सीमित उपयोग करती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी बड़ी उपस्थिति है।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से वे लाखों लोगों तक आध्यात्मिक संदेश पहुँचाती हैं।


7. सामाजिक और सेवा कार्य--

वे अपने कथाओं और भजनों से जो भी राशि प्राप्त करती हैं, उसका बड़ा हिस्सा गौसेवा, शिक्षा, चिकित्सा और गरीबों की मदद में लगाती हैं।

अनाथालय, वृद्धाश्रम और विकलांग बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करती हैं।


जया किशोरी जी की नेट वर्थ (Net Worth)--

अनुमानित राशि

कई स्रोतों के अनुसार, जया किशोरी जी की कुल संपत्ति लगभग ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच मानी जाती है 

कुछ रिपोर्ट्स उन्हें थोड़ा कम आंकते हुए, ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ के बीच मानती हैं 


आय के मुख्य स्रोत--

प्रवचन (कथा) शुल्क

एक कथा (जैसे श्रीमद्भागवत या सुंदरकांड) के लिए ₹9 लाख तक चार्ज किया जाता है।

इसमें से ₹4.5 लाख एडवांस लिए जाते हैं और शेष कार्यक्रम के बाद 


YouTube और डिजिटल कमाई--

जया किशोरी के YouTube चैनल और सोशल मीडिया पर बड़ी उपस्थिति है, जहाँ से विज्ञापन (Adsense) और अन्य माध्यमों से अच्छी-खासी आय होती है।

Lifetime कमाई मात्र YouTube से ही ₹50–60 लाख, और अन्य सोशल मीडिया से ₹30–50 लाख तक पहुंचती है 


परोपकार एवं दान--

 लगभग 50% हिस्सा दान कर देती हैं, खासकर नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर को, जो शर्मीले, अनाथ, और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता करता है 


निष्कर्ष--

जया किशोरी जी की नेट वर्थ ₹1.5–2 करोड़ के बीच आंकी गई है, जो उनके प्रवचन, भजन, YouTube व सोशल मीडिया कंटेंट से प्राप्त आय का परिणाम है। उनकी वित्तीय सफलता में यह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि वे अपनी बड़ी आय का आधा हिस्सा समाज और धर्मार्थ कार्यों में सजगता से दान करती हैं।


जया किशोरी जी के प्रमुख प्रवचन एवं कथाएँ--

जया किशोरी जी अपने भक्ति, प्रेम और सरल भाषा में दिए गए प्रवचनों के लिए जानी जाती हैं। उनकी कथाओं में आध्यात्मिक ज्ञान, भक्तिमार्ग, जीवन मूल्य और सामाजिक संदेश का अद्भुत संगम होता है। उन्होंने अपने जीवन में कई प्रसिद्ध धार्मिक कथाएँ और प्रवचन प्रस्तुत किए हैं, जिनमें मुख्यतः श्रीमद्भागवत कथा और नानी बाई रो मायरो विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।


1. श्रीमद्भागवत कथा--

विषय – श्रीकृष्ण के जीवन, बाल लीलाओं, भक्त और भगवान के प्रेम, तथा जीवन में धर्म के महत्व पर आधारित।

विशेषताएँ –

वे कथा के दौरान सुंदर भजनों के माध्यम से भक्तों को भाव-विभोर कर देती हैं।

कथा में गीता के श्लोक और भक्तों के लिए व्यावहारिक जीवन उपदेश भी सम्मिलित होते हैं।

उद्देश्य – लोगों में भगवान के प्रति भक्ति जागृत करना और नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना।


2. नानी बाई रो मायरो--

विषय – राजस्थान की लोकभक्ति पर आधारित यह कथा नानी बाई और श्रीकृष्ण के दिव्य संबंध की कहानी है।

कथानक – नानी बाई के विवाह के समय श्रीकृष्ण का चमत्कारिक रूप से मायरा (मौसेरे भाई द्वारा दी जाने वाली भेंट) देना।

विशेषताएँ –

कथा में राजस्थान के लोकगीत, भजनों और लोक संस्कृति का सुंदर मिश्रण।

जया किशोरी जी इसे अत्यंत भावुक और मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

उद्देश्य – यह कथा भक्ति, त्याग और भगवान पर अटूट विश्वास का संदेश देती है।


3. अन्य प्रवचन और कार्यक्रम--

शिव महापुराण कथा – भगवान शिव की महिमा और उनके भक्तों की कथाएँ।

सुंदरकांड पाठ – श्रीराम के भक्त हनुमानजी के अद्भुत पराक्रम और भक्ति का वर्णन।

गीता प्रवचन – जीवन में गीता के उपदेशों का महत्व और आधुनिक जीवन में उनका प्रयोग।

भक्ति सत्संग – विभिन्न संतों की शिक्षाएँ और भक्ति मार्ग का प्रचार।

जया किशोरी जी की कथाओं की खास बातें

वे कथा में श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव बना लेती हैं।

लोकभाषा और सरल हिंदी का प्रयोग, जिससे हर उम्र के लोग समझ सकें।

भजनों के बीच-बीच में कथा का प्रवाह, जिससे माहौल भक्तिमय बन जाता है।

सामाजिक संदेश जैसे – नशामुक्ति, बेटी बचाओ, गौसेवा आदि का समावेश।


जया किशोरी जी की कथा बुकिंग प्रक्रिया--

जया किशोरी जी की कथाओं की बुकिंग एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से होती है, क्योंकि उनके कार्यक्रम काफी पहले से तय रहते हैं और देश-विदेश से भारी संख्या में निमंत्रण आते हैं।

1. आधिकारिक माध्यम से संपर्क

जया किशोरी जी की कथा बुकिंग के लिए किसी भी व्यक्तिगत या अनधिकृत एजेंट पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

उनका ऑफिशियल मैनेजमेंट टीम इस काम को संभालती है।

आमतौर पर, उनकी वेबसाइट या सोशल मीडिया प्रोफाइल (Instagram, Facebook, YouTube) पर बुकिंग के लिए ईमेल आईडी और फोन नंबर उपलब्ध होता है।


2. आवश्यक जानकारी जो आपको देनी होगी--

बुकिंग के लिए संपर्क करते समय आपको इन जानकारियों को तैयार रखना चाहिए:

कार्यक्रम का प्रकार – (श्रीमद्भागवत कथा, नानी बाई रो मायरो, गीता प्रवचन आदि)

स्थान और शहर – जहाँ कथा आयोजित करनी है।

तारीख और अवधि – सामान्यतः कथा 7 दिन या 9 दिन की होती है।

आयोजक समिति का विवरण – आपके संगठन या समिति का नाम, संपर्क व्यक्ति और पता।

अनुमानित श्रोताओं की संख्या – ताकि मंच और व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सके।

संपूर्ण व्यवस्थाएँ – जैसे यात्रा, आवास, मंच, साउंड सिस्टम आदि का प्रबंध।


3. शुल्क और शर्तें--

जया किशोरी जी कथा के लिए व्यक्तिगत पारिश्रमिक नहीं लेतीं, बल्कि उनकी कथाओं से प्राप्त दान और सहयोग सामाजिक और धार्मिक कार्यों में लगाया जाता है।

फिर भी, आयोजकों को यात्रा, आवास, मंच सजावट और कार्यक्रम व्यवस्था की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती है।

कई बार कथा की तिथि के लिए 6 महीने से 1 साल पहले बुकिंग करनी पड़ सकती है, क्योंकि उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त होता है।


4. संपर्क के संभावित आधिकारिक माध्यम--

(उदाहरण के तौर पर)

ईमेल: management@jayakishori.com (यह बदल सकता है, इसलिए हमेशा ऑफिशियल पेज पर चेक करें)

फोन/WhatsApp: केवल आधिकारिक वेबसाइट पर दिया गया नंबर।

वेबसाइट: https://www.jayakishori.com

सोशल मीडिया: जया किशोरी जी के वेरीफाइड अकाउंट से मैसेज द्वारा।


जया किशोरी जी के बारे में रोचक जानकारियाँ--

  • जन्म से ही धार्मिक माहौल – जया किशोरी का जन्म 13 जुलाई 1995 को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के एक गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका पालन-पोषण धार्मिक वातावरण में हुआ।
  • अद्भुत स्मरण शक्ति – मात्र 7 वर्ष की उम्र में उन्होंने भजन, चालीसा और संस्कृत श्लोक कंठस्थ कर लिए थे।
  • पहला सार्वजनिक भजन कार्यक्रम – जया किशोरी ने सिर्फ 9 साल की उम्र में पहली बार सुंदरकांड का पाठ किया था, जिसे सुनने हजारों लोग आए थे।
  • 'किशोरी जी' नाम की वजह – उनके भजन और प्रवचनों में राधा-कृष्ण की भक्ति का विशेष महत्व होने के कारण लोग उन्हें किशोरी जी कहने लगे।
  • शिक्षा के साथ संतुलन – आध्यात्मिक कार्यक्रमों की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी स्कूली और स्नातक शिक्षा पूरी की।
  • भक्ति का अनोखा अंदाज – उनके प्रवचन में भक्ति और आधुनिक जीवन की प्रेरणाएँ एक साथ देखने को मिलती हैं, जिसके कारण युवा पीढ़ी भी उनसे जुड़ाव महसूस करती है।
  • सोशल मीडिया पर लोकप्रियता – जया किशोरी के भजन और प्रवचन यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लाखों लोग देखते हैं।
  • 'कथावाचक' से प्रेरक वक्ता तक – वे सिर्फ भजन गाने या कथा कहने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज वे एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी जानी जाती हैं।
  • भाषाओं का ज्ञान – जया किशोरी को हिंदी, बंगाली, और अंग्रेज़ी भाषा का अच्छा ज्ञान है, जिससे वे अलग-अलग दर्शकों से जुड़ पाती हैं।
  • चैरिटी के लिए कार्यक्रम – उनके अधिकांश कथा और भजन कार्यक्रमों की आय गौशालाओं, गरीब बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में दान की जाती है।
  • युवाओं पर खास असर – जया किशोरी जी के कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है, क्योंकि वे जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और भक्ति के महत्व को सरल तरीके से समझाती हैं।
  • पुरस्कार और सम्मान – उन्हें कई संस्थाओं द्वारा 'युवा आइकॉन' और 'भक्ति की देवी' जैसे उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।


जया किशोरी जी से जुड़े सामान्य प्रश्न और उत्तर--

प्रश्न 1: जया किशोरी जी का वास्तविक नाम क्या है?

उत्तर: जया किशोरी जी का वास्तविक नाम जया शर्मा है।


प्रश्न 2: जया किशोरी जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: उनका जन्म 13 जुलाई 1995 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था।


प्रश्न 3: उन्हें 'किशोरी जी' नाम क्यों कहा जाता है?

उत्तर: वे अपने प्रवचनों और भजनों में राधा-कृष्ण की भक्ति को प्रमुखता देती हैं, इसलिए लोग उन्हें स्नेह से 'किशोरी जी' कहने लगे।


प्रश्न 4: जया किशोरी जी की शिक्षा कहाँ हुई?

उत्तर: उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई लोरैटो कॉन्वेंट स्कूल, कोलकाता से की और स्नातक की पढ़ाई भी कोलकाता से पूरी की।


प्रश्न 5: जया किशोरी जी पहली बार सार्वजनिक मंच पर कब आईं?

उत्तर: मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने सुंदरकांड का पाठ किया, जो उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था।


प्रश्न 6: जया किशोरी जी किस प्रकार के कार्यक्रम करती हैं?

उत्तर: वे श्रीमद् भागवत कथा, नानी बाई का मायरा, भजन संध्या, और मोटिवेशनल स्पीच के कार्यक्रम करती हैं।


प्रश्न 7: क्या जया किशोरी जी अविवाहित हैं?

उत्तर: हाँ, जया किशोरी जी अविवाहित हैं और अपने जीवन को भक्ति, समाजसेवा और प्रेरणादायक कार्यों के लिए समर्पित कर चुकी हैं।


प्रश्न 8: क्या वे केवल धार्मिक विषयों पर ही बोलती हैं?

उत्तर: नहीं, वे जीवन में सफलता, अनुशासन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर भी प्रेरणादायक भाषण देती हैं।


प्रश्न 9: उनके कार्यक्रमों से होने वाली आय का क्या किया जाता है?

उत्तर: अधिकतर आय गौशालाओं, गरीब बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और चैरिटी कार्यों में दान की जाती है।


प्रश्न 10: जया किशोरी जी को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?

उत्तर: उन्हें 'युवा आइकॉन', 'भक्ति की देवी' जैसी उपाधियाँ और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

Early Life and Childhood--

Jaya Kishori was born on 13 July 1995 in Sujangarh, Rajasthan. She was born into a simple yet deeply religious Brahmin family, where devotion, values, and spirituality were an integral part of daily life. Her father, Bhagwan Sharma, is a religiously inclined person, and her mother, Sonia Sharma, is also deeply cultured and filled with devotional sentiment.

From a very young age, Jaya developed a keen interest in devotional music and listening to spiritual discourses. Her home frequently hosted bhajans, kirtans, and religious programs, which greatly influenced her thinking and way of life.

During her childhood, she began memorizing the Hanuman Chalisa, verses from the Bhagavad Gita, and devotional songs of saints like Surdas, Meera, and Tulsidas. Her grandparents often narrated stories of Lord Krishna, Lord Ram, and saints, which further deepened the seed of devotion in her heart.


Education--

Jaya Kishori completed her early education at Mahadevi Birla World Academy in Kolkata. From childhood, her memory power was remarkable, and she could easily memorize long verses, chalisa, and bhajans without difficulty.

She learned music from Pandit Govindram Mishra. Her interest in music was so deep that at a young age, she gained a strong understanding of melody, rhythm, and beats.


Spiritual Mentor and Guidance--

The most important contributor to Jaya Kishori’s spiritual journey was Pandit Govindram Mishra, who not only taught her music but also guided her in the deep study of the Bhagavad Gita, Bhagavat Katha, and other scriptures. He was the one who began addressing her as “Kishori Ji,” because of her special attachment to Lord Krishna and her deep interest in the divine tales of Radha-Krishna.


Beginning of Bhajans and Kirtans--

Jaya Kishori began singing bhajans and kirtans at just 7 years old. Initially, she sang along with her guru and family in bhajan gatherings. Her sweet, melodious, and soulful voice quickly won people’s hearts.

At the age of 13, she started performing “seven-day Shrimad Bhagavat Katha” and “three-day Sundarkand” recitations. Gradually, she became recognized as a well-known storyteller and devotional singer.


Major Works and Bhajans--

Some of her most popular bhajans include:

  • “Shiv Tera Bhasmaandhaar”

  • “Mere Kanha Ghar Aaye”

  • “Mera Achyutam Keshavam”

  • “Mujhe Sanwariya Bula Le”

  • “Ram Naam Ki Loot Hai”

  • “Mera Kanha”

Her bhajans are not only popular in India but also among Indian communities abroad.


Social Service--

Jaya Kishori is not limited to storytelling and singing bhajans; she is also actively engaged in social service.

The donations and contributions received from her discourses are given to the Narayan Seva Sansthan in Udaipur, which helps the poor, disabled, and needy.

She has also delivered inspiring speeches on education, environmental awareness, and women’s empowerment.


Inspirational Personality--

Jaya Kishori’s life is an inspiration for young people who want to balance modern life with spirituality. She has proven that devotion is not just for old age—it can also be the foundation of youth.


Awards and Honors--

  • Spiritual Icon Award – 2019

  • Youth Role Model Award

  • Honored by various social and cultural organizations


Personal Life--

Jaya Kishori is unmarried and has dedicated her life to the service of God and society. She lives with her family in Kolkata.


Some of Her Famous Bhajans--

Her devotional songs are not only religious but also carry messages of life philosophy and inspiration. Some notable ones are:

  • Mere Kanha Gussa Na Ho Jana – Dedicated to the love and devotion for Radha-Krishna.

  • Achyutam Keshavam – Describes the various names and leelas of Lord Krishna.

  • Mujhe Sanwariya Bula Le – Expresses the longing of the devotee to meet the Lord.

  • Shiv Stuti – Praise of Lord Shiva, especially sung during Mahashivratri.

  • Main To Sanwariya Ke Rang Mein Rangi – Expresses complete immersion in divine love.

  • Naina Lage Piya Se – Depicts the sweet union and separation of Radha and Krishna.

  • Radha Rani Lagi Lagan – Based on Radha Rani’s devotion and love.

  • Govind Bolo Hari Gopal Bolo – Focused on chanting the holy name.

  • Radha Naam Ki Barse Phuhaar – Highlights the glory of Radha’s name.

  • Shyam Tere Charanon Mein – Expresses complete surrender to the Lord.


Lifestyle of Jaya Kishori Ji--

  1. Daily Routine

    • Wakes up early, bathes, and starts her day with meditation, yoga, and prayers.

    • Engages in chanting, recitation, and devotional singing in the morning.

    • Eats a simple sattvic vegetarian diet—mainly fruits, milk, and light vegetarian food.

    • Spends most of the day in discourses, bhajans, and social service.

    • Reads religious scriptures and saint literature daily.

  2. Dress and Jewelry

    • Wears simple cotton or silk sarees/salwar-kurta in light colors.

    • Only wears rudraksha, tulsi mala, or a simple silver chain.

    • Avoids heavy jewelry or makeup.

  3. Living Style

    • Lives in a simple and peaceful home, not a lavish bungalow.

    • Her room is simple, clean, and decorated with religious pictures and idols.

    • Has a small prayer room where she performs daily worship.

  4. Dietary Habits

    • Pure vegetarian and sattvic food.

    • Avoids meat, fish, eggs, onion, garlic.

    • Rarely drinks tea or coffee—prefers herbal drinks or milk.

  5. Travel and Preaching

    • Spends most of her time traveling for discourses in India and abroad.

    • Maintains simplicity in travel, living like saints and sages.

  6. Social Media and Technology

    • Uses technology minimally but has a strong social media presence.

    • Shares spiritual messages with millions via Facebook, Instagram, and YouTube.

  7. Social and Charity Work

    • Donates a large portion of her earnings to cow shelters, education, medical aid, and the poor.

    • Organizes special programs for orphanages, old-age homes, and differently-abled children.


Net Worth of Jaya Kishori Ji--

  • Estimated Amount: ₹1.5 crore – ₹2 crore (some reports estimate ₹1 crore – ₹1.5 crore).

Main Sources of Income

  • Discourses (Katha): Charges up to ₹9 lakh per program (₹4.5 lakh advance).

  • YouTube & Digital Income: YouTube earnings ₹50–60 lakh; other social media ₹30–50 lakh.

  • Charity: Donates about 50% of income to causes, especially Narayan Seva Sansthan, Udaipur.


Major Discourses and Stories--

  1. Shrimad Bhagavat Katha

    • Theme: Life of Krishna, his childhood pastimes, the love between devotee and God, and the importance of dharma.

    • Includes devotional songs and practical life lessons.

  2. Nani Bai Ro Mayro

    • Theme: Rajasthani folk devotion based on the divine relationship between Nani Bai and Lord Krishna.

    • Features folk songs and culture of Rajasthan, presented in an emotional and engaging way.

  3. Other Programs

    • Shiva Mahapuran Katha, Sundarkand Path, Gita Discourses, Bhakti Satsang.


Booking Process for Jaya Kishori Ji’s Katha--

  • Contact only through her official management team (website/social media verified accounts).

  • Provide program details, location, dates, organizer information, audience size, and arrangements.

  • Organizers bear the cost of travel, stay, stage, and sound arrangements.

  • Bookings may need to be made 6–12 months in advance due to her busy schedule.


Interesting Facts about Jaya Kishori Ji--

  • Born in a devotional environment on 13 July 1995 in Kolkata to a Gaud Brahmin family.

  • Memorized bhajans, chalisa, and Sanskrit verses at age 7.

  • First public program at age 9—Sundarkand Path.

  • Called “Kishori Ji” due to her devotion to Radha-Krishna.

  • Balances education with spiritual commitments.

  • Connects youth with devotion through modern yet spiritual talks.

  • Fluent in Hindi, Bengali, and English.

  • Majority of earnings go to charity.

  • Honored with titles like “Youth Icon” and “Goddess of Devotion.”


FAQs--

  1. What is Jaya Kishori Ji’s real name?

    • Jaya Sharma.

  2. When and where was she born?

    • 13 July 1995, Kolkata, West Bengal.

  3. Why is she called “Kishori Ji”?

    • Because of her devotion to Radha-Krishna in her discourses and bhajans.

  4. Where did she study?

    • Early education at Loreto Convent School, Kolkata; graduation also in Kolkata.

  5. When was her first public performance?

    • At age 9—Sundarkand recital.

  6. What kind of programs does she conduct?

    • Shrimad Bhagavat Katha, Nani Bai Ka Mayra, Bhajan Sandhya, Motivational Talks.

  7. Is she married?

    • No, she is unmarried and dedicated to devotion, social service, and motivational work.

  8. Does she only speak on religious topics?

    • No, she also speaks on success, discipline, positive thinking, and self-confidence.

  9. What happens to the income from her programs?

    • Mostly donated to cow shelters, education, health, and charity work.

  10. What awards has she received?

    • Titles like “Youth Icon,” “Goddess of Devotion,” and multiple national and international honors.