बालकाण्ड

जानि कृपाकर किंकर मोहू अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और सरल व्याख्या

मूल पंक्तियाँ

जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥
निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाहीं॥२॥


शब्दार्थ (Meaning of words)

  • जानि – जानकर

  • कृपा कर – दया करके

  • किंकर – सेवक

  • मोहु – मुझे

  • सब मिलि – सब लोग मिलकर

  • छाड़ि – छोड़कर

  • छल – धोखा

  • छोहू – मोह, लालच

  • निज – अपनी

  • बुधि – बुद्धि, समझ

  • बल – ताकत, सामर्थ्य

  • भरोस – भरोसा

  • मोहि – मुझे

  • नाहीं – नहीं

  • तातें – इसलिए

  • बिनय – विनती, निवेदन

  • पाहीं – सबके सामने, सबको


सरल अर्थ (Easy Hindi meaning)

हे प्रभु! मुझे अपना सेवक मानकर मुझ पर कृपा करें।
आप सब मिलकर मेरे मन से छल, कपट और मोह को दूर कर दें।
मुझमें अपनी बुद्धि, सामर्थ्य और कोई भरोसा नहीं है।
इसलिए मैं सबके सामने आपसे विनती करता हूँ।


भावार्थ (Bhavarth – Inner meaning)


कवि या भक्त प्रभु से कहता है कि —
मैं अपने बल, बुद्धि और समझ पर भरोसा नहीं करता। मेरे अंदर छल, कपट, लालच, लोभ जैसे दोष हैं। हे भगवान! आप मुझे अपना दास मानकर इन बुराइयों को दूर कर दीजिए। मैं पूरी निष्ठा से आपसे शरण मांगता हूँ।

अर्थ यह है कि जब मनुष्य स्वयं को असहाय मानकर भगवान से निष्कपट रूप में प्रार्थना करता है, तब भगवान उसकी सहायता करते हैं और उसके मन के दोषों को मिटाकर उसे सही मार्ग दिखाते हैं।


FAQ – “जानि कृपाकर किंकर मोहू…” (सरल प्रश्न–उत्तर)


1. यह पंक्ति कहाँ से ली गई है?

यह पंक्ति गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस से ली गई है।


2. इस पंक्ति में कौन प्रभु से प्रार्थना कर रहा है?

इसमें भक्त भगवान से कह रहा है कि उसे अपना सेवक मानकर कृपा करें।


3. “किंकर” शब्द का क्या अर्थ है

किंकर का अर्थ है — सेवक, दास, भगवान का भक्त।


4. “छल और छोह” का क्या मतलब है?

छल का अर्थ धोखा या कपट और छोह का अर्थ मोह, लोभ या लालच है।

 

5. इसमें भक्त क्या निवेदन कर रहा है?

भक्त कहता है कि उसके भीतर जो छल-कपट और मोह आदि बुराइयाँ हैं, भगवान उन्हें दूर कर दें।


6. “निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं” का क्या अर्थ है?

इसका मतलब है — “मुझे अपनी बुद्धि, ताकत या समझ पर कोई भरोसा नहीं है।”


7. यह पंक्ति हमें क्या संदेश देती है?

यह पंक्ति सिखाती है कि मनुष्य को अपने अहंकार को छोड़कर भगवान से सहायता और मार्गदर्शन मांगना चाहिए।


8. “बिनय करउँ सब पाहीं” में “बिनय” का क्या अर्थ है?

बिनय का मतलब है विनती, नम्र निवेदन और सब पाहीं का अर्थ सबके सामने।


9. आध्यात्मिक दृष्टि से इस पंक्ति का क्या भावार्थ है?

आध्यात्मिक रूप से यह बताती है कि सच्ची भक्ति तब होती है जब व्यक्ति अपनी कमज़ोरी स्वीकारकर ईश्वर की शरण लेता है।


10. इस दोहे को साधारण जीवन में कैसे अपनाएँ?

  • अपने अंदर की बुराइयों को पहचानें

  • अहंकार छोड़कर विनम्र रहें

  • अच्छे मार्ग पर चलने के लिए भगवान या सद्गुरु से प्रार्थना करें

जानि कृपाकर किंकर मोहू अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और सरल व्याख्या

मूल पंक्तियाँ

जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥
निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाहीं॥२॥


शब्दार्थ (Meaning of words)

  • जानि – जानकर

  • कृपा कर – दया करके

  • किंकर – सेवक

  • मोहु – मुझे

  • सब मिलि – सब लोग मिलकर

  • छाड़ि – छोड़कर

  • छल – धोखा

  • छोहू – मोह, लालच

  • निज – अपनी

  • बुधि – बुद्धि, समझ

  • बल – ताकत, सामर्थ्य

  • भरोस – भरोसा

  • मोहि – मुझे

  • नाहीं – नहीं

  • तातें – इसलिए

  • बिनय – विनती, निवेदन

  • पाहीं – सबके सामने, सबको


सरल अर्थ (Easy Hindi meaning)

हे प्रभु! मुझे अपना सेवक मानकर मुझ पर कृपा करें।
आप सब मिलकर मेरे मन से छल, कपट और मोह को दूर कर दें।
मुझमें अपनी बुद्धि, सामर्थ्य और कोई भरोसा नहीं है।
इसलिए मैं सबके सामने आपसे विनती करता हूँ।


भावार्थ (Bhavarth – Inner meaning)


कवि या भक्त प्रभु से कहता है कि —
मैं अपने बल, बुद्धि और समझ पर भरोसा नहीं करता। मेरे अंदर छल, कपट, लालच, लोभ जैसे दोष हैं। हे भगवान! आप मुझे अपना दास मानकर इन बुराइयों को दूर कर दीजिए। मैं पूरी निष्ठा से आपसे शरण मांगता हूँ।

अर्थ यह है कि जब मनुष्य स्वयं को असहाय मानकर भगवान से निष्कपट रूप में प्रार्थना करता है, तब भगवान उसकी सहायता करते हैं और उसके मन के दोषों को मिटाकर उसे सही मार्ग दिखाते हैं।


FAQ – “जानि कृपाकर किंकर मोहू…” (सरल प्रश्न–उत्तर)


1. यह पंक्ति कहाँ से ली गई है?

यह पंक्ति गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस से ली गई है।


2. इस पंक्ति में कौन प्रभु से प्रार्थना कर रहा है?

इसमें भक्त भगवान से कह रहा है कि उसे अपना सेवक मानकर कृपा करें।


3. “किंकर” शब्द का क्या अर्थ है

किंकर का अर्थ है — सेवक, दास, भगवान का भक्त।


4. “छल और छोह” का क्या मतलब है?

छल का अर्थ धोखा या कपट और छोह का अर्थ मोह, लोभ या लालच है।

 

5. इसमें भक्त क्या निवेदन कर रहा है?

भक्त कहता है कि उसके भीतर जो छल-कपट और मोह आदि बुराइयाँ हैं, भगवान उन्हें दूर कर दें।


6. “निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं” का क्या अर्थ है?

इसका मतलब है — “मुझे अपनी बुद्धि, ताकत या समझ पर कोई भरोसा नहीं है।”


7. यह पंक्ति हमें क्या संदेश देती है?

यह पंक्ति सिखाती है कि मनुष्य को अपने अहंकार को छोड़कर भगवान से सहायता और मार्गदर्शन मांगना चाहिए।


8. “बिनय करउँ सब पाहीं” में “बिनय” का क्या अर्थ है?

बिनय का मतलब है विनती, नम्र निवेदन और सब पाहीं का अर्थ सबके सामने।


9. आध्यात्मिक दृष्टि से इस पंक्ति का क्या भावार्थ है?

आध्यात्मिक रूप से यह बताती है कि सच्ची भक्ति तब होती है जब व्यक्ति अपनी कमज़ोरी स्वीकारकर ईश्वर की शरण लेता है।


10. इस दोहे को साधारण जीवन में कैसे अपनाएँ?

  • अपने अंदर की बुराइयों को पहचानें

  • अहंकार छोड़कर विनम्र रहें

  • अच्छे मार्ग पर चलने के लिए भगवान या सद्गुरु से प्रार्थना करें