बालकाण्ड

जौं बालक कह तोतरि बाता — सरल अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ, FAQ | रामचरितमानस

दोहे / चौपाई:

“जौं बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता॥
हँसिहहिं कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी॥५॥”


सरल अर्थ (शब्दार्थ सहित)


  • जौं = यदि / अगर

  • बालक = बच्चा

  • तोतरि बाता = तुतली बोली, अस्पष्ट बोलना

  • सुनहिं = सुनते हैं

  • मुदित मन = प्रसन्न मन से

  • पितु अरु माता = पिता और माता

  • हँसिहहिं = हँसते हैं

  • कूर, कुटिल, कुबिचारी = दुष्ट, कुटिल स्वभाव वाले, बुरे विचार वाले

  • जे = जो

  • पर = दूसरे पर

  • दूषण = दोष

  • भूषणधारी = आभूषण की तरह धारण करने वाला (जिसे बुराई करना अच्छा लगे)


सरल अर्थ (हिंदी में)

यदि कोई छोटा बच्चा तुतली मीठी बोली बोलता है, तो माँ-बाप उसे बड़ा ही प्रसन्न होकर सुनते हैं।
लेकिन दुष्ट, कुटिल और बुरे विचार वाले लोग दूसरों की बुराइयों को हँसी-मज़ाक का विषय बनाते हैं और दूसरे की निंदा करना ही अपना शौक समझते हैं।


भावार्थ (Bhavarth)


इस चौपाई में यह बताया गया है कि निर्मलता और निष्कपटता हमेशा आनंद देती है
छोटे बच्चे की तुतली वाणी सुनकर माता-पिता प्रसन्न होते हैं, क्योंकि उसमें निर्दोषता, प्रेम और पवित्रता होती है।

इसके विपरीत जो लोग कुटिल मन वाले होते हैं, उन्हें दूसरों की बुराइयों में मज़ा आता है। ऐसे लोग दूसरों की निंदा करना, दोष निकालना और उपहास करना ही अपनी ख़ुशी और आदत बना लेते हैं।

तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि सच्ची प्रसन्नता भलेपन में है, बुराई में नहीं। हृदय की कोमलता और सरलता ही मनुष्य को जीवन में आनंद देती है।


FAQ — जौं बालक कह तोतरि बाता (चौपाई)

Q1. यह चौपाई किस ग्रंथ से ली गई है?

A. यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस से ली गई है।

Q2. इस चौपाई का मुख्य संदेश क्या है?

A. निर्माणता और निष्कपटता ही आनंद का कारण है, जबकि कुटिलता और दूसरों की निंदा करना बुरे स्वभाव का परिचय ह

Q3. "तोतरि बाता" का अर्थ क्या है?

A. “तोतरि बाता” का अर्थ है बच्चे की तुतली या अस्पष्ट प्यारी बोली।

Q4. “कूर कुटिल कुबिचारी” किसे कहा गया है?

A. दुष्ट, कुटिल और बुरे विचार रखने वाले, जो दूसरों की बुराई में आनंद लेते हैं।

Q5. माँ-बाप बच्चे की तुतली बोली सुनकर क्यों प्रसन्न होते हैं?

A. क्योंकि बच्चा निष्कपट, सरल और प्रेम से बोलता है, जिसमें कोई छल या बुराई नहीं होती।

Q6. इस चौपाई में तुलसीदास जी किस प्रकार के लोगों की तुलना कर रहे हैं?

A. एक ओर निर्दोष बच्चा, और दूसरी ओर कुटिल स्वभाव वाले निंदक लोग

Q7. “पर दूषण भूषणधारी” का अर्थ क्या है?

A. जो लोग दूसरों की बुराई या दोष निकालने को अपना शौक समझते हैं और उसे जैसे आभूषण की तरह धारण करते हैं।

Q8. इस चौपाई से हमें क्या सीख मिलती है?

A. हमें सरल और प्रेमपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए और किसी की बुराई या निंदा में आनंद नहीं लेना चाहिए।

Q9. क्या यह चौपाई सामाजिक शिक्षा भी देती है?

A. हाँ, यह लोगों को बताती है कि अच्छाई में आनंद है, बुराई में नहीं।

Q10. क्या इस चौपाई को बच्चों को समझाया जा सकता है?

A. बिल्कुल, इसे बच्चे भी आसानी से समझ सकते हैं क्योंकि यह निर्दोषता और कुटिलता का सरल तुलना है।

जौं बालक कह तोतरि बाता — सरल अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ, FAQ | रामचरितमानस

दोहे / चौपाई:

“जौं बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता॥
हँसिहहिं कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी॥५॥”


सरल अर्थ (शब्दार्थ सहित)


  • जौं = यदि / अगर

  • बालक = बच्चा

  • तोतरि बाता = तुतली बोली, अस्पष्ट बोलना

  • सुनहिं = सुनते हैं

  • मुदित मन = प्रसन्न मन से

  • पितु अरु माता = पिता और माता

  • हँसिहहिं = हँसते हैं

  • कूर, कुटिल, कुबिचारी = दुष्ट, कुटिल स्वभाव वाले, बुरे विचार वाले

  • जे = जो

  • पर = दूसरे पर

  • दूषण = दोष

  • भूषणधारी = आभूषण की तरह धारण करने वाला (जिसे बुराई करना अच्छा लगे)


सरल अर्थ (हिंदी में)

यदि कोई छोटा बच्चा तुतली मीठी बोली बोलता है, तो माँ-बाप उसे बड़ा ही प्रसन्न होकर सुनते हैं।
लेकिन दुष्ट, कुटिल और बुरे विचार वाले लोग दूसरों की बुराइयों को हँसी-मज़ाक का विषय बनाते हैं और दूसरे की निंदा करना ही अपना शौक समझते हैं।


भावार्थ (Bhavarth)


इस चौपाई में यह बताया गया है कि निर्मलता और निष्कपटता हमेशा आनंद देती है
छोटे बच्चे की तुतली वाणी सुनकर माता-पिता प्रसन्न होते हैं, क्योंकि उसमें निर्दोषता, प्रेम और पवित्रता होती है।

इसके विपरीत जो लोग कुटिल मन वाले होते हैं, उन्हें दूसरों की बुराइयों में मज़ा आता है। ऐसे लोग दूसरों की निंदा करना, दोष निकालना और उपहास करना ही अपनी ख़ुशी और आदत बना लेते हैं।

तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि सच्ची प्रसन्नता भलेपन में है, बुराई में नहीं। हृदय की कोमलता और सरलता ही मनुष्य को जीवन में आनंद देती है।


FAQ — जौं बालक कह तोतरि बाता (चौपाई)

Q1. यह चौपाई किस ग्रंथ से ली गई है?

A. यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस से ली गई है।

Q2. इस चौपाई का मुख्य संदेश क्या है?

A. निर्माणता और निष्कपटता ही आनंद का कारण है, जबकि कुटिलता और दूसरों की निंदा करना बुरे स्वभाव का परिचय ह

Q3. "तोतरि बाता" का अर्थ क्या है?

A. “तोतरि बाता” का अर्थ है बच्चे की तुतली या अस्पष्ट प्यारी बोली।

Q4. “कूर कुटिल कुबिचारी” किसे कहा गया है?

A. दुष्ट, कुटिल और बुरे विचार रखने वाले, जो दूसरों की बुराई में आनंद लेते हैं।

Q5. माँ-बाप बच्चे की तुतली बोली सुनकर क्यों प्रसन्न होते हैं?

A. क्योंकि बच्चा निष्कपट, सरल और प्रेम से बोलता है, जिसमें कोई छल या बुराई नहीं होती।

Q6. इस चौपाई में तुलसीदास जी किस प्रकार के लोगों की तुलना कर रहे हैं?

A. एक ओर निर्दोष बच्चा, और दूसरी ओर कुटिल स्वभाव वाले निंदक लोग

Q7. “पर दूषण भूषणधारी” का अर्थ क्या है?

A. जो लोग दूसरों की बुराई या दोष निकालने को अपना शौक समझते हैं और उसे जैसे आभूषण की तरह धारण करते हैं।

Q8. इस चौपाई से हमें क्या सीख मिलती है?

A. हमें सरल और प्रेमपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए और किसी की बुराई या निंदा में आनंद नहीं लेना चाहिए।

Q9. क्या यह चौपाई सामाजिक शिक्षा भी देती है?

A. हाँ, यह लोगों को बताती है कि अच्छाई में आनंद है, बुराई में नहीं।

Q10. क्या इस चौपाई को बच्चों को समझाया जा सकता है?

A. बिल्कुल, इसे बच्चे भी आसानी से समझ सकते हैं क्योंकि यह निर्दोषता और कुटिलता का सरल तुलना है।