बालकाण्ड

रामचरितमानस चौपाई अर्थ: जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं | सरल अर्थ, शब्दार्थ और भावार्थ

चौपाई :

जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं॥
समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई॥6॥


सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)

जिस तेज (आँधी) से सुमेरु जैसे विशाल पर्वत भी उड़ सकते हैं, बताइए, उस शक्ति के सामने रुई की क्या गिनती है?

भगवान श्रीराम की अनंत (असीम) महिमा को समझकर उनकी कथा लिखने में मेरा मन बहुत झिझकता है।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • मारुत – हवा, वायु, आँधी

  • गिरि मेरु (सुमेरु) – बहुत बड़ा पर्वत

  • तूल – रुई, कपास

  • लेखे में – गिनती में

  • अमित – असीम, जिसका अंत न हो

  • प्रभुताई – प्रभुता, शक्ति, महिमा

  • कदराई – डरना, झिझकना, हिचकिचाना


भावार्थ (Bhavarth)

कवि (तुलसीदास जी) कहते हैं कि जिस प्रभु की शक्ति इतनी महान है कि प्रचंड हवा बड़े-बड़े पर्वतों को भी उड़ा सकती है, उसके सामने रुई का कोई मूल्य नहीं रहता। उसी तरह भगवान श्रीराम की महिमा इतनी अपार है कि उनके विषय में लिखने, कहने या वर्णन करने में मेरा मन डरता और झिझकता है, क्योंकि उनकी महिमा को शब्दों में समेटना लगभग असंभव है।

अर्थात —
श्रीराम की महिमा इतनी अनंत है कि साधारण मनुष्य उसका पूरा वर्णन नहीं कर सकता।


चौपाई FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. यह चौपाई किस ग्रंथ से है?

यह चौपाई रामचरितमानस से है, विशेष रूप से बालकाण्ड से।


2. “मारुत” का क्या अर्थ है?

“मारुत” का अर्थ है तेज़ हवा, आँधी या वायु


3. “गिरि मेरु” किस पहाड़ को कहते हैं?

“गिरि मेरु” का अर्थ है सुमेरु पर्वत, जो अत्यंत विशाल और शक्तिशाली माना जाता है।


4. यहाँ रुई (तूल) का उदाहरण क्यों दिया है?

रुई बहुत हल्की होती है। तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि
जब तेज आँधी से विशाल पर्वत भी उड़ सकते हैं, तो रुई की क्या औकात?
यानी, जब भगवान की शक्ति इतनी बड़ी है, तो उसके सामने हम छोटे मनुष्य कुछ भी नहीं।


5. “अमित राम प्रभुताई” का मतलब क्या है?

इसका मतलब है —
भगवान श्रीराम की असीम प्रभुता, अनंत शक्ति और अकल्पनीय महिमा।


6. “कथा रचने में मन कदराई” का अर्थ क्या है?

तुलसीदास जी कह रहे हैं कि
श्रीराम की असीम महिमा जानकर उनकी कथा लिखने में मन हिचकता है,
क्योंकि वे सोचते हैं कि इतने बड़े प्रभु का पूर्ण वर्णन कैसे हो पाएगा।


7. इस चौपाई का मुख्य संदेश क्या है?

मुख्य संदेश — भगवान राम की महिमा अनंत है, जिसे शब्दों में पूरी तरह नहीं बताया जा सकता।


8. यहाँ कवि का भाव क्या है?

कवि बहुत नम्रता और भक्ति भाव से कह रहे हैं कि वे छोटे हैं,
और भगवान की महिमा बहुत विशाल है, इसलिए वे विनम्र होकर उनकी कथा आरंभ कर रहे हैं।

रामचरितमानस चौपाई अर्थ: जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं | सरल अर्थ, शब्दार्थ और भावार्थ

चौपाई :

जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं॥
समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई॥6॥


सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)

जिस तेज (आँधी) से सुमेरु जैसे विशाल पर्वत भी उड़ सकते हैं, बताइए, उस शक्ति के सामने रुई की क्या गिनती है?

भगवान श्रीराम की अनंत (असीम) महिमा को समझकर उनकी कथा लिखने में मेरा मन बहुत झिझकता है।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • मारुत – हवा, वायु, आँधी

  • गिरि मेरु (सुमेरु) – बहुत बड़ा पर्वत

  • तूल – रुई, कपास

  • लेखे में – गिनती में

  • अमित – असीम, जिसका अंत न हो

  • प्रभुताई – प्रभुता, शक्ति, महिमा

  • कदराई – डरना, झिझकना, हिचकिचाना


भावार्थ (Bhavarth)

कवि (तुलसीदास जी) कहते हैं कि जिस प्रभु की शक्ति इतनी महान है कि प्रचंड हवा बड़े-बड़े पर्वतों को भी उड़ा सकती है, उसके सामने रुई का कोई मूल्य नहीं रहता। उसी तरह भगवान श्रीराम की महिमा इतनी अपार है कि उनके विषय में लिखने, कहने या वर्णन करने में मेरा मन डरता और झिझकता है, क्योंकि उनकी महिमा को शब्दों में समेटना लगभग असंभव है।

अर्थात —
श्रीराम की महिमा इतनी अनंत है कि साधारण मनुष्य उसका पूरा वर्णन नहीं कर सकता।


चौपाई FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. यह चौपाई किस ग्रंथ से है?

यह चौपाई रामचरितमानस से है, विशेष रूप से बालकाण्ड से।


2. “मारुत” का क्या अर्थ है?

“मारुत” का अर्थ है तेज़ हवा, आँधी या वायु


3. “गिरि मेरु” किस पहाड़ को कहते हैं?

“गिरि मेरु” का अर्थ है सुमेरु पर्वत, जो अत्यंत विशाल और शक्तिशाली माना जाता है।


4. यहाँ रुई (तूल) का उदाहरण क्यों दिया है?

रुई बहुत हल्की होती है। तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि
जब तेज आँधी से विशाल पर्वत भी उड़ सकते हैं, तो रुई की क्या औकात?
यानी, जब भगवान की शक्ति इतनी बड़ी है, तो उसके सामने हम छोटे मनुष्य कुछ भी नहीं।


5. “अमित राम प्रभुताई” का मतलब क्या है?

इसका मतलब है —
भगवान श्रीराम की असीम प्रभुता, अनंत शक्ति और अकल्पनीय महिमा।


6. “कथा रचने में मन कदराई” का अर्थ क्या है?

तुलसीदास जी कह रहे हैं कि
श्रीराम की असीम महिमा जानकर उनकी कथा लिखने में मन हिचकता है,
क्योंकि वे सोचते हैं कि इतने बड़े प्रभु का पूर्ण वर्णन कैसे हो पाएगा।


7. इस चौपाई का मुख्य संदेश क्या है?

मुख्य संदेश — भगवान राम की महिमा अनंत है, जिसे शब्दों में पूरी तरह नहीं बताया जा सकता।


8. यहाँ कवि का भाव क्या है?

कवि बहुत नम्रता और भक्ति भाव से कह रहे हैं कि वे छोटे हैं,
और भगवान की महिमा बहुत विशाल है, इसलिए वे विनम्र होकर उनकी कथा आरंभ कर रहे हैं।