बालकाण्ड

करन चाहउँ रघुपति गुन गाहा अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और FAQ – श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड

चौपाई —

"करन चाहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा॥
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राउ॥३॥"


सरल शब्दों में अर्थ (Hindi Meaning in Simple Words)

मैं श्री राम जी के गुणों का गान करना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बुद्धि छोटी है और राम के चरित्र बहुत गहरे हैं।
मुझे एक भी उपाय सूझ नहीं रहा है कि कहां से शुरू करूँ। मेरा मन और विचार भले ही गरीब हैं, लेकिन मेरी इच्छा (मनोरथ) राजा के समान बहुत बड़ी है।


शब्दार्थ (Word Meaning)


  • करन चाहउँ — करना चाहता हूँ

  • रघुपति — श्री राम

  • गुन गाहा — गुण गाना, गुणों का वर्णन

  • लघु मति मोरि — मेरी छोटी बुद्धि

  • चरित अवगाहा — चरित्र गहरे हैं, जिनमें डूबना कठिन है

  • सूझ न एकउ — एक भी समझ नहीं आती

  • अंग उपाऊ — कोई उपाय / तरीका

  • मन मति रंक — मन और बुद्धि गरीब

  • मनोरथ राउ — इच्छा राजा के समान बड़ी


भावार्थ (Bhavarth)

कवि तुलसीदास जी कहते हैं —
मैं राम जी के दिव्य गुणों का वर्णन करना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बुद्धि छोटी और सीमित है, जबकि राम जी के चरित्र अनंत और गहरे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उनके गुणों का वर्णन कहाँ से शुरू करूँ। मेरे मन की क्षमता भले ही कम हो, लेकिन मेरे हृदय की इच्छा बहुत बड़ी है कि मैं प्रभु श्री राम की महिमा का गान कर सकूँ।

इस चौपाई में विनम्रता और भक्ति का भाव व्यक्त हुआ है। कवि अपनी अयोग्यता स्वीकार करते हुए भी राम भक्ति का संकल्प लेता है।


संदर्भ (Context)

यह चौपाई श्री रामचरितमानस के बालकाण्ड के मंगलाचरण से है। यहाँ तुलसीदास जी भगवान श्री राम के गुण गाने का संकल्प लेते हुए अपनी विनम्रता व्यक्त कर रहे हैं।



विस्तृत भावार्थ (Detailed Bhavarth)


तुलसीदास जी कहते हैं —
मेरे मन में बहुत इच्छा है कि मैं प्रभु श्री राम के पवित्र गुणों का गान करूँ, उनकी कथा कहूँ और उनके जीवन के चरित्र का वर्णन करूँ। परंतु मेरे सामने एक बड़ी समस्या है:


  • मेरी बुद्धि छोटी है, सीमित है,

  • जबकि श्री राम का चरित्र अत्यंत गहरा, विशाल और अनंत है।


मुझे समझ नहीं आ रहा कि किस प्रकार शुरुआत करूँ, कौन सा रास्ता अपनाऊँ, कौन सा शब्द चुनूँ, या कहाँ से राम की लीला को वर्णन करना शुरू करूँ।


मैं अपने मन और विचार के स्तर पर खुद को बहुत गरीब समझता हूँ, लेकिन राम जी के गुण गाने की इच्छा राजा के समान बहुत ऊँची और महान है।


यहाँ तुलसीदास जी अपना मातृत्व और भक्तिभाव दिखा रहे हैं —
वे कहते हैं कि मैं छोटा हूँ, अयोग्य हूँ, पर मेरा उद्देश्य उच्च है क्योंकि मैं प्रभु के नाम का गुण गान करना चाहता हूँ।



इस चौपाई का केंद्र भाव

विनम्रता — अपने को छोटा मानना
भक्तिभाव — इच्छा बहुत बड़ी होना
असीम गुण — राम का चरित्र अनंत होना
सेवा भावना — प्रभु के गुण गाने का संकल्प


जीवन के लिए प्रेरणा

इस चौपाई से हमें यह सीख मिलती है:


कर्म करने की योग्यता भले छोटी हो, पर मन की भावना और नीयत बड़ी होनी चाहिए।
कभी भी भगवान के कार्य में अपनी कमी महसूस होने पर भी प्रयास अवश्य करना चाहिए।


तुलसीदास जी की तरह हम भी जीवन में बड़े काम की इच्छा रख सकते हैं, चाहे हम स्वयं को छोटा ही क्यों न मानते हों।


FAQ (Frequently Asked Questions)


1. यह चौपाई कहाँ से ली गई है?

यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस, बालकाण्ड के मंगलाचरण (आरंभिक प्रार्थना) से ली गई है।


2. इस चौपाई में कौन बोल रहा है?

इस चौपाई में स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी अपने मन की बात भगवान श्री राम से कह रहे हैं।


3. मुख्य संदेश क्या है?

इस चौपाई का मुख्य संदेश विनम्रता, भक्ति और अपनी अयोग्यता को स्वीकार कर भगवान की कृपा माँगना है।


4. "रघुपति" शब्द का क्या अर्थ है?

"रघुपति" का अर्थ है रघुकुल के पति, यानी भगवान श्री राम


5. "लघु मति" का क्या मतलब है?

"लघु मति" का अर्थ है छोटी बुद्धि या सीमित समझ


6. तुलसीदास जी "चरित अवगाहा" क्यों कहते हैं?

क्योंकि भगवान राम का चरित्र अनंत, गहरा और दिव्य है, जिसे पूरी तरह समझ पाना एक सामान्य मनुष्य के लिए कठिन है।


7. "मन मति रंक मनोरथ राउ" का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है मन और बुद्धि भले ही गरीब हैं, पर इच्छा राजा जैसी बड़ी है।


8. यहाँ तुलसीदास जी क्या स्वीकार कर रहे हैं?

वे स्वीकार करते हैं कि

  • वे सीमित हैं,

  • उनकी भाषा और बुद्धि छोटी है,
    फिर भी राम भक्ति का कार्य करने का दृढ़ संकल्प रखते हैं।


9. इस चौपाई में किस गुण का प्रदर्शन है?

यहाँ विनम्रता, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन है।


10. भक्तिभाव का क्या अर्थ है इस चौपाई में?

भक्तिभाव का अर्थ है — भगवान की महिमा का वर्णन करने की ऊँची इच्छा, भले ही अपनी क्षमता कम हो।


11. इस चौपाई को पढ़ने से क्या प्रेरणा मिलती है?

  • बड़ी इच्छा रखना गलत नहीं

  • अपनी कमी स्वीकार करना महानता है

  • भगवान के गुण गाने का साहस और संकल्प रखना चाहिए


12. क्या यह चौपाई जीवन के व्यवहार में लागू होती है?

हाँ, इस चौपाई से सीख मिलती है कि


हमारा मन छोटा हो सकता है, ज्ञान कम हो सकता है, पर लक्ष्य हमेशा बड़ा रखना चाहिए।

करन चाहउँ रघुपति गुन गाहा अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और FAQ – श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड

चौपाई —

"करन चाहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा॥
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राउ॥३॥"


सरल शब्दों में अर्थ (Hindi Meaning in Simple Words)

मैं श्री राम जी के गुणों का गान करना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बुद्धि छोटी है और राम के चरित्र बहुत गहरे हैं।
मुझे एक भी उपाय सूझ नहीं रहा है कि कहां से शुरू करूँ। मेरा मन और विचार भले ही गरीब हैं, लेकिन मेरी इच्छा (मनोरथ) राजा के समान बहुत बड़ी है।


शब्दार्थ (Word Meaning)


  • करन चाहउँ — करना चाहता हूँ

  • रघुपति — श्री राम

  • गुन गाहा — गुण गाना, गुणों का वर्णन

  • लघु मति मोरि — मेरी छोटी बुद्धि

  • चरित अवगाहा — चरित्र गहरे हैं, जिनमें डूबना कठिन है

  • सूझ न एकउ — एक भी समझ नहीं आती

  • अंग उपाऊ — कोई उपाय / तरीका

  • मन मति रंक — मन और बुद्धि गरीब

  • मनोरथ राउ — इच्छा राजा के समान बड़ी


भावार्थ (Bhavarth)

कवि तुलसीदास जी कहते हैं —
मैं राम जी के दिव्य गुणों का वर्णन करना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बुद्धि छोटी और सीमित है, जबकि राम जी के चरित्र अनंत और गहरे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उनके गुणों का वर्णन कहाँ से शुरू करूँ। मेरे मन की क्षमता भले ही कम हो, लेकिन मेरे हृदय की इच्छा बहुत बड़ी है कि मैं प्रभु श्री राम की महिमा का गान कर सकूँ।

इस चौपाई में विनम्रता और भक्ति का भाव व्यक्त हुआ है। कवि अपनी अयोग्यता स्वीकार करते हुए भी राम भक्ति का संकल्प लेता है।


संदर्भ (Context)

यह चौपाई श्री रामचरितमानस के बालकाण्ड के मंगलाचरण से है। यहाँ तुलसीदास जी भगवान श्री राम के गुण गाने का संकल्प लेते हुए अपनी विनम्रता व्यक्त कर रहे हैं।



विस्तृत भावार्थ (Detailed Bhavarth)


तुलसीदास जी कहते हैं —
मेरे मन में बहुत इच्छा है कि मैं प्रभु श्री राम के पवित्र गुणों का गान करूँ, उनकी कथा कहूँ और उनके जीवन के चरित्र का वर्णन करूँ। परंतु मेरे सामने एक बड़ी समस्या है:


  • मेरी बुद्धि छोटी है, सीमित है,

  • जबकि श्री राम का चरित्र अत्यंत गहरा, विशाल और अनंत है।


मुझे समझ नहीं आ रहा कि किस प्रकार शुरुआत करूँ, कौन सा रास्ता अपनाऊँ, कौन सा शब्द चुनूँ, या कहाँ से राम की लीला को वर्णन करना शुरू करूँ।


मैं अपने मन और विचार के स्तर पर खुद को बहुत गरीब समझता हूँ, लेकिन राम जी के गुण गाने की इच्छा राजा के समान बहुत ऊँची और महान है।


यहाँ तुलसीदास जी अपना मातृत्व और भक्तिभाव दिखा रहे हैं —
वे कहते हैं कि मैं छोटा हूँ, अयोग्य हूँ, पर मेरा उद्देश्य उच्च है क्योंकि मैं प्रभु के नाम का गुण गान करना चाहता हूँ।



इस चौपाई का केंद्र भाव

विनम्रता — अपने को छोटा मानना
भक्तिभाव — इच्छा बहुत बड़ी होना
असीम गुण — राम का चरित्र अनंत होना
सेवा भावना — प्रभु के गुण गाने का संकल्प


जीवन के लिए प्रेरणा

इस चौपाई से हमें यह सीख मिलती है:


कर्म करने की योग्यता भले छोटी हो, पर मन की भावना और नीयत बड़ी होनी चाहिए।
कभी भी भगवान के कार्य में अपनी कमी महसूस होने पर भी प्रयास अवश्य करना चाहिए।


तुलसीदास जी की तरह हम भी जीवन में बड़े काम की इच्छा रख सकते हैं, चाहे हम स्वयं को छोटा ही क्यों न मानते हों।


FAQ (Frequently Asked Questions)


1. यह चौपाई कहाँ से ली गई है?

यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस, बालकाण्ड के मंगलाचरण (आरंभिक प्रार्थना) से ली गई है।


2. इस चौपाई में कौन बोल रहा है?

इस चौपाई में स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी अपने मन की बात भगवान श्री राम से कह रहे हैं।


3. मुख्य संदेश क्या है?

इस चौपाई का मुख्य संदेश विनम्रता, भक्ति और अपनी अयोग्यता को स्वीकार कर भगवान की कृपा माँगना है।


4. "रघुपति" शब्द का क्या अर्थ है?

"रघुपति" का अर्थ है रघुकुल के पति, यानी भगवान श्री राम


5. "लघु मति" का क्या मतलब है?

"लघु मति" का अर्थ है छोटी बुद्धि या सीमित समझ


6. तुलसीदास जी "चरित अवगाहा" क्यों कहते हैं?

क्योंकि भगवान राम का चरित्र अनंत, गहरा और दिव्य है, जिसे पूरी तरह समझ पाना एक सामान्य मनुष्य के लिए कठिन है।


7. "मन मति रंक मनोरथ राउ" का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है मन और बुद्धि भले ही गरीब हैं, पर इच्छा राजा जैसी बड़ी है।


8. यहाँ तुलसीदास जी क्या स्वीकार कर रहे हैं?

वे स्वीकार करते हैं कि

  • वे सीमित हैं,

  • उनकी भाषा और बुद्धि छोटी है,
    फिर भी राम भक्ति का कार्य करने का दृढ़ संकल्प रखते हैं।


9. इस चौपाई में किस गुण का प्रदर्शन है?

यहाँ विनम्रता, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन है।


10. भक्तिभाव का क्या अर्थ है इस चौपाई में?

भक्तिभाव का अर्थ है — भगवान की महिमा का वर्णन करने की ऊँची इच्छा, भले ही अपनी क्षमता कम हो।


11. इस चौपाई को पढ़ने से क्या प्रेरणा मिलती है?

  • बड़ी इच्छा रखना गलत नहीं

  • अपनी कमी स्वीकार करना महानता है

  • भगवान के गुण गाने का साहस और संकल्प रखना चाहिए


12. क्या यह चौपाई जीवन के व्यवहार में लागू होती है?

हाँ, इस चौपाई से सीख मिलती है कि


हमारा मन छोटा हो सकता है, ज्ञान कम हो सकता है, पर लक्ष्य हमेशा बड़ा रखना चाहिए।