कुंद इंदु सम देह श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥४॥
सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)
जिनका शरीर कुंद (सफेद फूल) और चंद्रमा के समान उज्ज्वल है, जो उमा (पार्वती) के प्रिय पति हैं, जो करुणा के सागर हैं—वे भगवान शिव दीन–दुखियों पर स्नेह करते हैं। हे नाथ! आप हम पर भी कृपा कीजिए और हमारे मन के सभी दुःखों का नाश कीजिए।
शब्दार्थ (Word Meaning)
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कुंद – सफेद फूल
-
इंदु – चंद्रमा
-
सम देह – समान शरीर / चंद्रमा जैसा उज्ज्वल रूप
-
उमा रमन – उमा (पार्वती) के रमन, अर्थात् शिव
-
करुणा अयन – करुणा का स्थान / दयालुता का घर
-
जाहि – जो
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दीन पर नेह करउ – दीनों पर प्रेम करते हैं
-
कृपा – दया
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मर्दन मयन – विनाश करने वाले, नाश करने वाले
भावार्थ (Bhavarth – Deeper Explanation)
इस चौपाई में कवि भगवान शिव की करुणामय छवि का वर्णन करते हैं। शिव का स्वरूप कुंद के फूल और चंद्रमा जैसा शीतल, पवित्र और शांत बताया गया है। वे माता पार्वती के प्रिय हैं और करुणा के सागर हैं। शिव सदा दुखी, निराश और दीन लोगों पर विशेष कृपा करते हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि प्रभु मेरी ओर भी दया दृष्टि करें और मेरे सभी दुखों, पापों तथा मानसिक कष्टों का नाश कर दें।
यह श्लोक शिव की दयालुता, पवित्रता और रक्षक-स्वभाव का सुन्दर भाव व्यक्त करता है।
FAQ
1. यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह श्लोक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित शिव-स्तुति / विनय के प्रसंगों में मिलता है और शिव की करुणा का वर्णन करता है।
2. ‘कुंद इंदु सम देह’ का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है—भगवान शिव का शरीर कुंद के फूल और चंद्रमा की तरह उज्ज्वल, शीतल और पवित्र है।
3. ‘उमा रमन’ किसको कहा गया है?
उमा रमन का अर्थ है उमा (पार्वती) के प्रिय पति, अर्थात भगवान शिव।
4. इस श्लोक में भगवान शिव की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
शिव को करुणा का अयन (करुणा का निवास) कहा गया है, यानी वे अत्यंत दयालु हैं और दीन-दुखियों पर सदा कृपा करते हैं।
5. ‘दीन पर नेह करउ’ का क्या आशय है?
इसका अर्थ है—भगवान शिव गरीब, दुखी, सरल और कष्ट में पड़े लोगों पर विशेष प्रेम और दया रखते हैं।
6. इस श्लोक में भक्त क्या प्रार्थना करता है?
भक्त, शिव से प्रार्थना करता है कि जैसे वे सभी दीन-दुखियों पर दया करते हैं, वैसे ही उस पर भी कृपा करें और उसके मन के दुखों का नाश करें।
7. इस श्लोक का मुख्य संदेश क्या है?
मुख्य संदेश है—भगवान शिव करुणामय, दयालु और भक्तवत्सल हैं, और उनकी कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं।
8. क्या यह श्लोक पाठ करने से कोई विशेष लाभ माना जाता है?
हाँ, शिव के करुणामय स्वरूप का स्मरण करने से मन शांत होता है, कष्ट कम होते हैं, और भक्त में भक्ति, विनम्रता और सकारात्मकता बढ़ती है।
कुंद इंदु सम देह श्लोक का सरल हिंदी अर्थ
श्लोक:
कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥४॥
सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)
जिनका शरीर कुंद (सफेद फूल) और चंद्रमा के समान उज्ज्वल है, जो उमा (पार्वती) के प्रिय पति हैं, जो करुणा के सागर हैं—वे भगवान शिव दीन–दुखियों पर स्नेह करते हैं। हे नाथ! आप हम पर भी कृपा कीजिए और हमारे मन के सभी दुःखों का नाश कीजिए।
शब्दार्थ (Word Meaning)
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कुंद – सफेद फूल
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इंदु – चंद्रमा
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सम देह – समान शरीर / चंद्रमा जैसा उज्ज्वल रूप
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उमा रमन – उमा (पार्वती) के रमन, अर्थात् शिव
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करुणा अयन – करुणा का स्थान / दयालुता का घर
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जाहि – जो
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दीन पर नेह करउ – दीनों पर प्रेम करते हैं
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कृपा – दया
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मर्दन मयन – विनाश करने वाले, नाश करने वाले
भावार्थ (Bhavarth – Deeper Explanation)
इस चौपाई में कवि भगवान शिव की करुणामय छवि का वर्णन करते हैं। शिव का स्वरूप कुंद के फूल और चंद्रमा जैसा शीतल, पवित्र और शांत बताया गया है। वे माता पार्वती के प्रिय हैं और करुणा के सागर हैं। शिव सदा दुखी, निराश और दीन लोगों पर विशेष कृपा करते हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि प्रभु मेरी ओर भी दया दृष्टि करें और मेरे सभी दुखों, पापों तथा मानसिक कष्टों का नाश कर दें।
यह श्लोक शिव की दयालुता, पवित्रता और रक्षक-स्वभाव का सुन्दर भाव व्यक्त करता है।
FAQ
1. यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह श्लोक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित शिव-स्तुति / विनय के प्रसंगों में मिलता है और शिव की करुणा का वर्णन करता है।
2. ‘कुंद इंदु सम देह’ का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है—भगवान शिव का शरीर कुंद के फूल और चंद्रमा की तरह उज्ज्वल, शीतल और पवित्र है।
3. ‘उमा रमन’ किसको कहा गया है?
उमा रमन का अर्थ है उमा (पार्वती) के प्रिय पति, अर्थात भगवान शिव।
4. इस श्लोक में भगवान शिव की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
शिव को करुणा का अयन (करुणा का निवास) कहा गया है, यानी वे अत्यंत दयालु हैं और दीन-दुखियों पर सदा कृपा करते हैं।
5. ‘दीन पर नेह करउ’ का क्या आशय है?
इसका अर्थ है—भगवान शिव गरीब, दुखी, सरल और कष्ट में पड़े लोगों पर विशेष प्रेम और दया रखते हैं।
6. इस श्लोक में भक्त क्या प्रार्थना करता है?
भक्त, शिव से प्रार्थना करता है कि जैसे वे सभी दीन-दुखियों पर दया करते हैं, वैसे ही उस पर भी कृपा करें और उसके मन के दुखों का नाश करें।
7. इस श्लोक का मुख्य संदेश क्या है?
मुख्य संदेश है—भगवान शिव करुणामय, दयालु और भक्तवत्सल हैं, और उनकी कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं।
8. क्या यह श्लोक पाठ करने से कोई विशेष लाभ माना जाता है?
हाँ, शिव के करुणामय स्वरूप का स्मरण करने से मन शांत होता है, कष्ट कम होते हैं, और भक्त में भक्ति, विनम्रता और सकारात्मकता बढ़ती है।