मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी – सरल अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और FAQ
दोहे (चौपाई) — अर्थ सहित (सरल हिंदी में)
मूल पंक्तियाँ:
मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी॥
छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई॥४॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
-
मति = बुद्धि, सोच
-
अति नीच = बहुत नीची, निम्न
-
ऊँचि रुचि आछी = ऊँची रुचि अच्छी होती है
-
चहिअ = चाहिए
-
अमिअ = अमृत
-
जग जुरइ = संसार को शीतल करना, सुख देना
-
छाछी = छाछ (दही का पतला जल)
-
छमिहहिं = क्षमा कर देंगे
-
सज्जन = अच्छे व्यक्ति, महापुरुष
-
ढिठाई = धृष्टता, नादानी
-
बालबचन = बच्चे जैसे सरल और भोले शब्द
-
मन लाई = मन लगाकर, ध्यान से
सरल अर्थ (Simple Explanation in Hindi)
जिस व्यक्ति की बुद्धि नीची होती है, उसकी रुचि (रुझान) भी अच्छी नहीं हो सकती।
दुनिया को शीतल और सुख देने के लिए अमृत चाहिए, केवल छाछ से काम नहीं चलता।
हे सज्जनों! मेरी नादानी को क्षमा करें, और मेरे बालक समान सरल शब्दों को ध्यान से सुनें।
भावार्थ (Bhavarth)
कवि कहना चाहते हैं कि मानव की सोच ऊँची होनी चाहिए।
अगर बुद्धि और विचार छोटे या नीच होंगे, तो इंसान का जीवन भी अच्छा नहीं बन पाएगा।
जैसे संसार में अमृत से सभी को राहत मिलती है, वैसे ही उच्च विचार और उत्तम संस्कार समाज को सुख देते हैं;
सामान्य या निम्न स्तर की सोच से बड़ा परिवर्तन नहीं आता।
अंत में कवि विनम्र होकर कह रहे हैं कि “मैंने जो कहा, वह सरल और बालक जैसा है,
लेकिन सज्जन लोग इसे समझेंगे और क्षमा करेंगे।”
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. “मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी” का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है — अगर किसी की बुद्धि या सोच नीची हो, तो उसकी रुचि भी अच्छी नहीं हो सकती। ऊँचा जीवन तभी बनता है जब सोच ऊँची हो।
2. दोहे में “अमिअ” और “छाछी” से क्या तात्पर्य है?
अमिअ (अमृत) उच्च, दुर्लभ और हितकारी चीज़ का प्रतीक है।
छाछी (छाछ) साधारण और कमजोर चीज़ का प्रतीक है।
यह तुलना बताती है कि दुनिया को सुधारने के लिए ऊँचे विचार चाहिए, सामान्य सोच से नहीं।
3. “जग जुरइ न छाछी” का क्या अर्थ है?
दुनिया (समाज) को सुख और शांति देने के लिए सर्वोत्तम गुण चाहिए।
सिर्फ साधारण बातों से समाज में बड़ा परिवर्तन नहीं होता।
4. कवि “सज्जनों से क्षमा” क्यों मांग रहा है?
कवि विनम्रता से कह रहा है कि यदि मेरे शब्दों में नादानी लगे, तो सज्जन लोग उसे क्षमा कर दें और मेरे सरल शब्दों को समझकर अपनाएं।
5. “बालबचन” का क्या अर्थ है?
“बालबचन” मतलब बच्चे जैसे सरल, मासूम और सच्चे शब्द।
कवि कह रहा है — “मैं सरल भाषा में कह रहा हूँ, कृपया इसे मन से स्वीकार करें।”
6. इस चौपाई में मुख्य संदेश क्या है?
मुख्य संदेश यह है कि ऊँची सोच और श्रेष्ठ विचार ही जीवन को सुंदर बनाते हैं।
छोटी या नीची सोच से बड़ा भला नहीं हो सकता।
7. यह दोहा/चौपाई किस प्रकार की शिक्षा देती है?
यह हमें प्रेरित करती है कि —
-
अपनी सोच ऊँची रखें
-
बड़े और अच्छे विचार अपनाएँ
-
विनम्रता बनाए रखें
-
सज्जनों की बात ध्यान से सुनें
8. यह शैली किस संत या काव्य परंपरा से मिलती-जुलती है?
यह शैली भक्तिकालीन संत कवियों की है, जहाँ उदाहरण देकर आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा दी जाती है
मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी – सरल अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और FAQ
दोहे (चौपाई) — अर्थ सहित (सरल हिंदी में)
मूल पंक्तियाँ:
मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी॥
छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई॥४॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
-
मति = बुद्धि, सोच
-
अति नीच = बहुत नीची, निम्न
-
ऊँचि रुचि आछी = ऊँची रुचि अच्छी होती है
-
चहिअ = चाहिए
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अमिअ = अमृत
-
जग जुरइ = संसार को शीतल करना, सुख देना
-
छाछी = छाछ (दही का पतला जल)
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छमिहहिं = क्षमा कर देंगे
-
सज्जन = अच्छे व्यक्ति, महापुरुष
-
ढिठाई = धृष्टता, नादानी
-
बालबचन = बच्चे जैसे सरल और भोले शब्द
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मन लाई = मन लगाकर, ध्यान से
सरल अर्थ (Simple Explanation in Hindi)
जिस व्यक्ति की बुद्धि नीची होती है, उसकी रुचि (रुझान) भी अच्छी नहीं हो सकती।
दुनिया को शीतल और सुख देने के लिए अमृत चाहिए, केवल छाछ से काम नहीं चलता।
हे सज्जनों! मेरी नादानी को क्षमा करें, और मेरे बालक समान सरल शब्दों को ध्यान से सुनें।
भावार्थ (Bhavarth)
कवि कहना चाहते हैं कि मानव की सोच ऊँची होनी चाहिए।
अगर बुद्धि और विचार छोटे या नीच होंगे, तो इंसान का जीवन भी अच्छा नहीं बन पाएगा।
जैसे संसार में अमृत से सभी को राहत मिलती है, वैसे ही उच्च विचार और उत्तम संस्कार समाज को सुख देते हैं;
सामान्य या निम्न स्तर की सोच से बड़ा परिवर्तन नहीं आता।
अंत में कवि विनम्र होकर कह रहे हैं कि “मैंने जो कहा, वह सरल और बालक जैसा है,
लेकिन सज्जन लोग इसे समझेंगे और क्षमा करेंगे।”
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. “मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी” का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है — अगर किसी की बुद्धि या सोच नीची हो, तो उसकी रुचि भी अच्छी नहीं हो सकती। ऊँचा जीवन तभी बनता है जब सोच ऊँची हो।
2. दोहे में “अमिअ” और “छाछी” से क्या तात्पर्य है?
अमिअ (अमृत) उच्च, दुर्लभ और हितकारी चीज़ का प्रतीक है।
छाछी (छाछ) साधारण और कमजोर चीज़ का प्रतीक है।
यह तुलना बताती है कि दुनिया को सुधारने के लिए ऊँचे विचार चाहिए, सामान्य सोच से नहीं।
3. “जग जुरइ न छाछी” का क्या अर्थ है?
दुनिया (समाज) को सुख और शांति देने के लिए सर्वोत्तम गुण चाहिए।
सिर्फ साधारण बातों से समाज में बड़ा परिवर्तन नहीं होता।
4. कवि “सज्जनों से क्षमा” क्यों मांग रहा है?
कवि विनम्रता से कह रहा है कि यदि मेरे शब्दों में नादानी लगे, तो सज्जन लोग उसे क्षमा कर दें और मेरे सरल शब्दों को समझकर अपनाएं।
5. “बालबचन” का क्या अर्थ है?
“बालबचन” मतलब बच्चे जैसे सरल, मासूम और सच्चे शब्द।
कवि कह रहा है — “मैं सरल भाषा में कह रहा हूँ, कृपया इसे मन से स्वीकार करें।”
6. इस चौपाई में मुख्य संदेश क्या है?
मुख्य संदेश यह है कि ऊँची सोच और श्रेष्ठ विचार ही जीवन को सुंदर बनाते हैं।
छोटी या नीची सोच से बड़ा भला नहीं हो सकता।
7. यह दोहा/चौपाई किस प्रकार की शिक्षा देती है?
यह हमें प्रेरित करती है कि —
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अपनी सोच ऊँची रखें
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बड़े और अच्छे विचार अपनाएँ
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विनम्रता बनाए रखें
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सज्जनों की बात ध्यान से सुनें
8. यह शैली किस संत या काव्य परंपरा से मिलती-जुलती है?
यह शैली भक्तिकालीन संत कवियों की है, जहाँ उदाहरण देकर आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा दी जाती है