बालकाण्ड

खल व्यक्ति का स्वभाव – तुलसीदास दोहे का सरल अर्थ, कहानी आधारित व्याख्या और भावार्थ

दोहे:


“बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥”


यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है। इसमें दुष्ट लोगों के स्वभाव और उनकी प्रवृत्ति का वर्णन किया गया है।


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)

इन खल (दुष्ट) लोगों से बार-बार बचकर रहना चाहिए, क्योंकि वे बिना किसी कारण के दाएँ-बाएँ मुँह मारते रहते हैं (हर बात में दखल देते हैं)।
दूसरों का नुकसान करना ही जिनका फायदा है—ऐसे लोग दूसरों की समृद्धि देखकर जलते हैं और उनके दुःख देखकर खुश होते हैं।


शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning)

  • बहुरि बंदि – बार-बार बचना / सावधान रहना

  • खल गन – दुष्ट लोगों का समूह

  • सतिभाएँ – उनसे दूर रहो / सावधान रहो

  • जे बिनु काज – जो बिना किसी काम के

  • दाहिनेहु बाएँ – हर तरफ हस्तक्षेप करते हैं

  • पर हित हानि – दूसरों का नुकसान

  • लाभ जिन्ह केरें – जिनके लिए वही लाभ है

  • उजरें हरष – दूसरों के उजड़ने पर प्रसन्न होना

  • बिषाद बसेरें – दूसरों के सुख से दुखी रहना


भावार्थ (Bhavarth)

इस दोहे में तुलसीदास जी कहते हैं कि हमें दुष्ट लोगों से सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि दुष्ट व्यक्ति बिना कारण ही दूसरों के कार्यों में दखल देते हैं।
दूसरों का अहित करना ही जिनका स्वभाव हो, ऐसे लोग किसी का भला होते नहीं देख सकते।
वे दूसरों की प्रगति देखकर दुखी होते हैं और उनके कष्ट देखकर प्रसन्न होते हैं।
इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है।


कहानी आधारित व्याख्या

एक गाँव में दो पड़ोसी रहते थे—
रामू और कालू

रामू सरल, शांत और सबका भला चाहने वाला था।
लेकिन कालू स्वभाव से दुष्ट, जलन रखने वाला और दूसरों का नुकसान देखकर खुश होने वाला था।


1. बिना बात हस्तक्षेप करने की आदत

रामू किसी काम में लगा होता—कभी खेती में, कभी घर के कामों में—
तभी कालू अचानक आकर बीच में बोलने लगता:

  • “अरे! यह मत करो…”

  • “मैं बताऊँ, ऐसे करो…”

  • “तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं…”

हालाँकि रामू ने कालू से कभी सलाह नहीं माँगी।
कालू बस हर काम में बिना वजह दाएँ-बाएँ हस्तक्षेप करता रहता था।


2. दूसरों का लाभ देखकर जलना

एक बार रामू की फसल बहुत अच्छी हो गई।
पूरा परिवार खुश था।

लेकिन कालू को यह देखकर जलन हुई।
वह बोला—
“हूँ… किस्मत से हो गया होगा। देख लेना, अगली बार कुछ नहीं उगेगा।”

रामू की खुशी कालू को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई।


3. दूसरों का नुकसान देखकर खुशी

कुछ दिनों बाद तेज आँधी आई और रामू की कुछ फसल खराब हो गई।
पूरा घर दुखी था।

लेकिन कालू यह देखकर भीतर ही भीतर खुश हो रहा था।
वह बोला—
“अरे अच्छा हुआ! अब समझेगा कि खेती इतनी आसान नहीं!”

रामू को साफ-साफ पता था कि यह वही व्यक्ति है जो उसके सुख में दुखी और दुख में खुश होता है।


4. रामू ने दूरी बना ली

एक दिन रामू को अपने पिताजी के कहे शब्द याद आए:

“बेटा, दुष्ट लोग बिना कारण टोकते हैं।
उनका लाभ दूसरों के नुकसान में होता है।
ऐसे लोगों से जितना दूरी रखो, उतना अच्छा।”

रामू ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अब कालू से जितना हो सके दूर रहेगा।
नम्रता तो रखेगा, पर अपनी खुशी, योजना और काम उससे साझा नहीं करेगा।

धीरे-धीरे रामू का जीवन शांत होने लगा, क्योंकि उसने दुष्ट व्यक्ति से दूरी बनाकर बुद्धिमानी दिखाई।


इस कहानी का सार (दोहे का भावार्थ)

तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि:
कुछ लोग स्वभाव से दुष्ट होते हैं—

  • बिना वजह दूसरों के काम में टांग अड़ाते हैं

  • दूसरों की प्रगति से दुखी हो जाते हैं

  • दूसरों के नुकसान से खुश होते हैं

ऐसे लोगों से जितनी दूरी रखी जाए, उतना ही सुख मिलता है।


1. ‘बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ’ दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

इस दोहे में कहा गया है कि दुष्ट लोगों से हमेशा सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वे बिना वजह दूसरों को नुकसान पहुंचाने में आनंद लेते हैं।

2. ‘दाहिनेहु बाएँ’ का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है — बिना किसी कारण हर दिशा में दखल देना, हर काम में टांग अड़ाना।

3. यह दोहा किस ग्रंथ से लिया गया है?

यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य से लिया गया है।

4. कहानी आधारित व्याख्या क्यों महत्वपूर्ण है?

कहानी के माध्यम से दोहे का संदेश अधिक सरलता से समझ में आता है और याद भी रहता है।

5. इस दोहे से क्या जीवन-उपयोगी सीख मिलती है?

दुष्ट और नकारात्मक लोगों से दूरी बनाना ही जीवन में शांति और सफलता देता है।

खल व्यक्ति का स्वभाव – तुलसीदास दोहे का सरल अर्थ, कहानी आधारित व्याख्या और भावार्थ

दोहे:


“बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥”


यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है। इसमें दुष्ट लोगों के स्वभाव और उनकी प्रवृत्ति का वर्णन किया गया है।


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)

इन खल (दुष्ट) लोगों से बार-बार बचकर रहना चाहिए, क्योंकि वे बिना किसी कारण के दाएँ-बाएँ मुँह मारते रहते हैं (हर बात में दखल देते हैं)।
दूसरों का नुकसान करना ही जिनका फायदा है—ऐसे लोग दूसरों की समृद्धि देखकर जलते हैं और उनके दुःख देखकर खुश होते हैं।


शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning)

  • बहुरि बंदि – बार-बार बचना / सावधान रहना

  • खल गन – दुष्ट लोगों का समूह

  • सतिभाएँ – उनसे दूर रहो / सावधान रहो

  • जे बिनु काज – जो बिना किसी काम के

  • दाहिनेहु बाएँ – हर तरफ हस्तक्षेप करते हैं

  • पर हित हानि – दूसरों का नुकसान

  • लाभ जिन्ह केरें – जिनके लिए वही लाभ है

  • उजरें हरष – दूसरों के उजड़ने पर प्रसन्न होना

  • बिषाद बसेरें – दूसरों के सुख से दुखी रहना


भावार्थ (Bhavarth)

इस दोहे में तुलसीदास जी कहते हैं कि हमें दुष्ट लोगों से सदैव सावधान रहना चाहिए, क्योंकि दुष्ट व्यक्ति बिना कारण ही दूसरों के कार्यों में दखल देते हैं।
दूसरों का अहित करना ही जिनका स्वभाव हो, ऐसे लोग किसी का भला होते नहीं देख सकते।
वे दूसरों की प्रगति देखकर दुखी होते हैं और उनके कष्ट देखकर प्रसन्न होते हैं।
इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है।


कहानी आधारित व्याख्या

एक गाँव में दो पड़ोसी रहते थे—
रामू और कालू

रामू सरल, शांत और सबका भला चाहने वाला था।
लेकिन कालू स्वभाव से दुष्ट, जलन रखने वाला और दूसरों का नुकसान देखकर खुश होने वाला था।


1. बिना बात हस्तक्षेप करने की आदत

रामू किसी काम में लगा होता—कभी खेती में, कभी घर के कामों में—
तभी कालू अचानक आकर बीच में बोलने लगता:

  • “अरे! यह मत करो…”

  • “मैं बताऊँ, ऐसे करो…”

  • “तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं…”

हालाँकि रामू ने कालू से कभी सलाह नहीं माँगी।
कालू बस हर काम में बिना वजह दाएँ-बाएँ हस्तक्षेप करता रहता था।


2. दूसरों का लाभ देखकर जलना

एक बार रामू की फसल बहुत अच्छी हो गई।
पूरा परिवार खुश था।

लेकिन कालू को यह देखकर जलन हुई।
वह बोला—
“हूँ… किस्मत से हो गया होगा। देख लेना, अगली बार कुछ नहीं उगेगा।”

रामू की खुशी कालू को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई।


3. दूसरों का नुकसान देखकर खुशी

कुछ दिनों बाद तेज आँधी आई और रामू की कुछ फसल खराब हो गई।
पूरा घर दुखी था।

लेकिन कालू यह देखकर भीतर ही भीतर खुश हो रहा था।
वह बोला—
“अरे अच्छा हुआ! अब समझेगा कि खेती इतनी आसान नहीं!”

रामू को साफ-साफ पता था कि यह वही व्यक्ति है जो उसके सुख में दुखी और दुख में खुश होता है।


4. रामू ने दूरी बना ली

एक दिन रामू को अपने पिताजी के कहे शब्द याद आए:

“बेटा, दुष्ट लोग बिना कारण टोकते हैं।
उनका लाभ दूसरों के नुकसान में होता है।
ऐसे लोगों से जितना दूरी रखो, उतना अच्छा।”

रामू ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अब कालू से जितना हो सके दूर रहेगा।
नम्रता तो रखेगा, पर अपनी खुशी, योजना और काम उससे साझा नहीं करेगा।

धीरे-धीरे रामू का जीवन शांत होने लगा, क्योंकि उसने दुष्ट व्यक्ति से दूरी बनाकर बुद्धिमानी दिखाई।


इस कहानी का सार (दोहे का भावार्थ)

तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि:
कुछ लोग स्वभाव से दुष्ट होते हैं—

  • बिना वजह दूसरों के काम में टांग अड़ाते हैं

  • दूसरों की प्रगति से दुखी हो जाते हैं

  • दूसरों के नुकसान से खुश होते हैं

ऐसे लोगों से जितनी दूरी रखी जाए, उतना ही सुख मिलता है।


1. ‘बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ’ दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

इस दोहे में कहा गया है कि दुष्ट लोगों से हमेशा सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वे बिना वजह दूसरों को नुकसान पहुंचाने में आनंद लेते हैं।

2. ‘दाहिनेहु बाएँ’ का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है — बिना किसी कारण हर दिशा में दखल देना, हर काम में टांग अड़ाना।

3. यह दोहा किस ग्रंथ से लिया गया है?

यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य से लिया गया है।

4. कहानी आधारित व्याख्या क्यों महत्वपूर्ण है?

कहानी के माध्यम से दोहे का संदेश अधिक सरलता से समझ में आता है और याद भी रहता है।

5. इस दोहे से क्या जीवन-उपयोगी सीख मिलती है?

दुष्ट और नकारात्मक लोगों से दूरी बनाना ही जीवन में शांति और सफलता देता है।