बालकाण्ड

नेति-नेति दोहा अर्थ | भगवान की महिमा का अंत नहीं

दोहा :

सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।
नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान॥12॥


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)

सरस्वती जी, शेषनाग, भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा, शास्त्र, वेद और पुराण — सब मिलकर भी जब उस परमात्मा के गुणों का वर्णन करते हैं, तो वे कहते हैं कि "यह भी नहीं, यह भी नहीं", यानी वे उनकी महिमा का अंत नहीं पा सकते। वे सदा ही भगवान के गुणों का गान करते रहते हैं।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • सारद – सरस्वती जी

  • सेस – शेषनाग

  • महेस – भगवान शिव

  • बिधि – ब्रह्मा जी

  • आगम, निगम – शास्त्र, वेद

  • पुरान – पुराण ग्रंथ

  • नेति-नेति – ऐसा नहीं… ऐसा नहीं (सीमा न जाना जाना)

  • गुण करहिं गान – गुणों का वर्णन करना / स्तुति करना


भावार्थ (Bhavarth)

भगवान की महिमा इतनी असीम और अनंत है कि ब्रह्मा, शिव, शेषनाग और सरस्वती जैसी महान दिव्य शक्तियाँ भी उसे पूर्ण रूप से नहीं बता सकतीं। वेद, शास्त्र और पुराण भी भगवान के गुणों को पूरी तरह नहीं समझा सकते। जितना भी वर्णन किया जाए, वह कम ही रहता है। इसलिए विद्वान "नेति-नेति" कहकर स्वीकार करते हैं कि भगवान के गुण अनंत हैं, और सदा उनका गुणगान करते रहते हैं।

यह दोहा हमें सिखाता है कि ईश्वर की महिमा का कोई अंत नहीं है। मनुष्य के ज्ञान की सीमा है, पर भगवान अनंत हैं — इसलिए हमें विनम्र होकर भक्ति करनी चाहिए।

बहुत सरल अर्थ (बच्चों के लिए)

भगवान की महिमा इतनी ज़्यादा है कि बड़े-बड़े देवता और सारे वेद, पुराण भी उसे पूरी तरह नहीं बता सकते। सब कहते हैं कि भगवान के गुणों का कोई अंत नहीं है।


सोशल मीडिया पोस्ट के लिए छोटा अर्थ

ब्रह्मा, शिव, शेष और सरस्वती — सब मिलकर भी भगवान की महिमा नहीं बता सकते।
ईश्वर के गुण अनंत हैं… "नेति-नेति" कहकर सब उनकी स्तुति करते हैं।


FAQ — दोहा और उसका अर्थ


Q1. “नेति-नेति” का क्या मतलब है?

A: “नेति-नेति” का अर्थ है — “यह नहीं… यह नहीं।” इसका मतलब है कि भगवान के गुणों का कोई अंत नहीं है, इसलिए जो भी कहा जाए वह पूरा नहीं है।


Q2. इस दोहे में किन-किन का नाम आया है?

A: सरस्वती जी, शेषनाग, भगवान शिव, ब्रह्मा जी, वेद, शास्त्र (आगम-निगम) और पुराण।


Q3. यह दोहा क्या बताता है?

A: यह दोहा बताता है कि भगवान की महिमा अनंत है। बड़े-बड़े देवता और सारे ग्रंथ भी उनके गुणों को पूरी तरह नहीं बता सकते।


Q4. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

A: मनुष्य को विनम्र रहकर भक्ति करनी चाहिए, क्योंकि भगवान की महिमा हमारी समझ से कहीं अधिक है।


Q5. "आगम" और "निगम" क्या होते हैं?

A:

  • आगम — वे शास्त्र जो भगवान के अनुभव और उपदेशों पर आधारित हैं।

  • निगम — वेदों को कहा जाता है।


Q6. इस दोहे में “गुणगान” का क्या अर्थ है?

A: भगवान के अच्छे गुणों और महिमा का बार-बार वर्णन करना, स्तुति करना।


Q7. इस दोहे का भक्ति में क्या महत्व है?

A: यह बताता है कि ज्ञान कहां खत्म हो जाता है और भक्ति कहां से शुरू होती है। भगवान की महिमा का अंत नहीं, इसलिए भक्ति ही सर्वोत्तम मार्ग है।


Q8. यह दोहा किस भाव को बढ़ाता है?

A: नम्रता का भाव।
चाहे कितना भी ज्ञान हो, परंतु ईश्वर का पूरा वर्णन असंभव है।

नेति-नेति दोहा अर्थ | भगवान की महिमा का अंत नहीं

दोहा :

सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।
नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान॥12॥


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning)

सरस्वती जी, शेषनाग, भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा, शास्त्र, वेद और पुराण — सब मिलकर भी जब उस परमात्मा के गुणों का वर्णन करते हैं, तो वे कहते हैं कि "यह भी नहीं, यह भी नहीं", यानी वे उनकी महिमा का अंत नहीं पा सकते। वे सदा ही भगवान के गुणों का गान करते रहते हैं।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • सारद – सरस्वती जी

  • सेस – शेषनाग

  • महेस – भगवान शिव

  • बिधि – ब्रह्मा जी

  • आगम, निगम – शास्त्र, वेद

  • पुरान – पुराण ग्रंथ

  • नेति-नेति – ऐसा नहीं… ऐसा नहीं (सीमा न जाना जाना)

  • गुण करहिं गान – गुणों का वर्णन करना / स्तुति करना


भावार्थ (Bhavarth)

भगवान की महिमा इतनी असीम और अनंत है कि ब्रह्मा, शिव, शेषनाग और सरस्वती जैसी महान दिव्य शक्तियाँ भी उसे पूर्ण रूप से नहीं बता सकतीं। वेद, शास्त्र और पुराण भी भगवान के गुणों को पूरी तरह नहीं समझा सकते। जितना भी वर्णन किया जाए, वह कम ही रहता है। इसलिए विद्वान "नेति-नेति" कहकर स्वीकार करते हैं कि भगवान के गुण अनंत हैं, और सदा उनका गुणगान करते रहते हैं।

यह दोहा हमें सिखाता है कि ईश्वर की महिमा का कोई अंत नहीं है। मनुष्य के ज्ञान की सीमा है, पर भगवान अनंत हैं — इसलिए हमें विनम्र होकर भक्ति करनी चाहिए।

बहुत सरल अर्थ (बच्चों के लिए)

भगवान की महिमा इतनी ज़्यादा है कि बड़े-बड़े देवता और सारे वेद, पुराण भी उसे पूरी तरह नहीं बता सकते। सब कहते हैं कि भगवान के गुणों का कोई अंत नहीं है।


सोशल मीडिया पोस्ट के लिए छोटा अर्थ

ब्रह्मा, शिव, शेष और सरस्वती — सब मिलकर भी भगवान की महिमा नहीं बता सकते।
ईश्वर के गुण अनंत हैं… "नेति-नेति" कहकर सब उनकी स्तुति करते हैं।


FAQ — दोहा और उसका अर्थ


Q1. “नेति-नेति” का क्या मतलब है?

A: “नेति-नेति” का अर्थ है — “यह नहीं… यह नहीं।” इसका मतलब है कि भगवान के गुणों का कोई अंत नहीं है, इसलिए जो भी कहा जाए वह पूरा नहीं है।


Q2. इस दोहे में किन-किन का नाम आया है?

A: सरस्वती जी, शेषनाग, भगवान शिव, ब्रह्मा जी, वेद, शास्त्र (आगम-निगम) और पुराण।


Q3. यह दोहा क्या बताता है?

A: यह दोहा बताता है कि भगवान की महिमा अनंत है। बड़े-बड़े देवता और सारे ग्रंथ भी उनके गुणों को पूरी तरह नहीं बता सकते।


Q4. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

A: मनुष्य को विनम्र रहकर भक्ति करनी चाहिए, क्योंकि भगवान की महिमा हमारी समझ से कहीं अधिक है।


Q5. "आगम" और "निगम" क्या होते हैं?

A:

  • आगम — वे शास्त्र जो भगवान के अनुभव और उपदेशों पर आधारित हैं।

  • निगम — वेदों को कहा जाता है।


Q6. इस दोहे में “गुणगान” का क्या अर्थ है?

A: भगवान के अच्छे गुणों और महिमा का बार-बार वर्णन करना, स्तुति करना।


Q7. इस दोहे का भक्ति में क्या महत्व है?

A: यह बताता है कि ज्ञान कहां खत्म हो जाता है और भक्ति कहां से शुरू होती है। भगवान की महिमा का अंत नहीं, इसलिए भक्ति ही सर्वोत्तम मार्ग है।


Q8. यह दोहा किस भाव को बढ़ाता है?

A: नम्रता का भाव।
चाहे कितना भी ज्ञान हो, परंतु ईश्वर का पूरा वर्णन असंभव है।