स्याम सुरभि पय: असली मूल्य और गुण का संदेश
दोहा:
स्याम सुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं सब पान।
गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहिं सुजान ॥10 ख॥
सरल हिंदी अर्थ:
श्यामा गो (काली गाय) का दूध काले रंग की होने के बावजूद उज्ज्वल और गुणों से भरपूर होता है। इसलिए सभी लोग उसका दूध पीते हैं। उसी तरह, गँवारू भाषा में बोले जाने पर भी श्रीराम-सीता के यश (महानता) को समझदार लोग बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ गाते और सुनते हैं।
भावार्थ:
यह दोहा यह सिखाता है कि किसी चीज़ की बाहरी रूप-रंग या भाषा देखकर उसकी वास्तविक महिमा और गुण को न आंकें। असली मूल्य उसके गुण और सार में है। जैसे काली गाय का दूध गुणकारी होता है और गँवारू भाषा में भी राम-सीता का यश सुनने योग्य होता है।
छोटा और सरल भावार्थ:
-
काली गाय का दूध भी गुणों से भरपूर होता है।
-
लोग उसका दूध बड़े आनंद से पीते हैं।
-
वैसे ही, साधारण भाषा में भी राम-सीता की महिमा सुनने लायक है।
-
असली मूल्य गुणों और यश में है, रूप-रंग या भाषा में नहीं।
“रंग या भाषा देख कर किसी चीज़ का मूल्य मत आंको, असली गुण और महिमा को पहचानो।”
FAQ: स्याम सुरभि पय वाला दोहा
Q1: इस दोहे का मुख्य विषय क्या है?
A: असली मूल्य और गुण को पहचानने का महत्व। बाहरी रूप या भाषा मायने नहीं रखती।
Q2: “स्याम सुरभि पय” का क्या मतलब है?
A: काली गाय का दूध, जो गुणों से भरपूर और शुद्ध होता है।
Q3: गँवारू भाषा में राम-सीता का यश सुनने का क्या मतलब है?
A: यह बताता है कि भाषा साधारण हो सकती है, लेकिन ज्ञान और महिमा में कमी नहीं होती। बुद्धिमान लोग इसे भी पसंद करते हैं।
Q4: दोहे का भावार्थ सरल शब्दों में क्या है?
A: रंग, रूप या भाषा देखकर किसी चीज़ का मूल्य न आंको। असली मूल्य उसके गुण और महिमा में है।
Q5: यह दोहा हमें क्या सिखाता है?
A: हमें चीज़ों को उनके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उनके गुण और महत्व से आंकना चाहिए।
स्याम सुरभि पय: असली मूल्य और गुण का संदेश
दोहा:
स्याम सुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं सब पान।
गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहिं सुजान ॥10 ख॥
सरल हिंदी अर्थ:
श्यामा गो (काली गाय) का दूध काले रंग की होने के बावजूद उज्ज्वल और गुणों से भरपूर होता है। इसलिए सभी लोग उसका दूध पीते हैं। उसी तरह, गँवारू भाषा में बोले जाने पर भी श्रीराम-सीता के यश (महानता) को समझदार लोग बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ गाते और सुनते हैं।
भावार्थ:
यह दोहा यह सिखाता है कि किसी चीज़ की बाहरी रूप-रंग या भाषा देखकर उसकी वास्तविक महिमा और गुण को न आंकें। असली मूल्य उसके गुण और सार में है। जैसे काली गाय का दूध गुणकारी होता है और गँवारू भाषा में भी राम-सीता का यश सुनने योग्य होता है।
छोटा और सरल भावार्थ:
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काली गाय का दूध भी गुणों से भरपूर होता है।
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लोग उसका दूध बड़े आनंद से पीते हैं।
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वैसे ही, साधारण भाषा में भी राम-सीता की महिमा सुनने लायक है।
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असली मूल्य गुणों और यश में है, रूप-रंग या भाषा में नहीं।
“रंग या भाषा देख कर किसी चीज़ का मूल्य मत आंको, असली गुण और महिमा को पहचानो।”
FAQ: स्याम सुरभि पय वाला दोहा
Q1: इस दोहे का मुख्य विषय क्या है?
A: असली मूल्य और गुण को पहचानने का महत्व। बाहरी रूप या भाषा मायने नहीं रखती।
Q2: “स्याम सुरभि पय” का क्या मतलब है?
A: काली गाय का दूध, जो गुणों से भरपूर और शुद्ध होता है।
Q3: गँवारू भाषा में राम-सीता का यश सुनने का क्या मतलब है?
A: यह बताता है कि भाषा साधारण हो सकती है, लेकिन ज्ञान और महिमा में कमी नहीं होती। बुद्धिमान लोग इसे भी पसंद करते हैं।
Q4: दोहे का भावार्थ सरल शब्दों में क्या है?
A: रंग, रूप या भाषा देखकर किसी चीज़ का मूल्य न आंको। असली मूल्य उसके गुण और महिमा में है।
Q5: यह दोहा हमें क्या सिखाता है?
A: हमें चीज़ों को उनके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उनके गुण और महत्व से आंकना चाहिए।