बालकाण्ड

तुलसीदास दोहा अर्थ: प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग – सरल भाषा में भावार्थ

दोहा

प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
दारु बिचारु कि करइ कोउ बंदिअ मलय प्रसंग॥


सरल हिन्दी अर्थ (Simple Meaning)

मेरी कविता (भनिति) सभी लोगों को बहुत प्रिय लगेगी, क्योंकि उसमें श्रीराम का यश जुड़ा हुआ है। जैसे मलय पर्वत के संपर्क में आकर साधारण लकड़ी भी सुगंधित चंदन बन जाती है और लोग उसका आदर करते हैं, तब कोई यह नहीं सोचता कि वह पहले साधारण लकड़ी थी।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • भनिति – कविता, वाणी

  • राम जस – श्री राम का यश, गुण, महिमा

  • दारु – लकड़ी

  • विचारु – विचार करता है, सोचे

  • बंदिअ – वंदनीय, आदरणीय

  • मलय प्रसंग – मलय पर्वत का संग (जहाँ चंदन होता है)


भावार्थ (Bhavarth)

कवि विनम्रता से कहता है कि मेरी कविता में विशेष गुण मेरे कारण नहीं, बल्कि श्रीराम की महिमा के कारण है। जैसे साधारण लकड़ी मलय पर्वत के संग से चंदन बनकर आदर पाती है, उसी प्रकार कविता में यदि श्रीराम का गुण-गायन हो तो वह स्वतः ही प्रिय और सम्माननीय हो जाती है।
कवि यहाँ यह संदेश देता है कि जब किसी महान और पवित्र विषय का संग मिल जाता है, तो साधारण वस्तु भी महान और वंदनीय बन जाती है।


1. कवि का आशय

कवि कहता है कि मेरी कविता सभी को इसलिए पसंद आएगी क्योंकि इसमें श्रीराम का यश (महिमा) जुड़ा हुआ है।


2. मुख्य विचार

  • साधारण चीज भी महान संग से महान बन जाती है।

  • श्रीराम का नाम जुड़ जाने से कविता मूल्यवान हो जाती है।


3. उदाहरण समझें

  • जैसे मलय पर्वत पर कोई साधारण लकड़ी भी पहुँच जाए, तो वह चंदन जैसी सुगंधित और आदरणीय बन जाती है।

  • तब कोई यह नहीं सोचता कि यह पहले साधारण लकड़ी थी।


4. सीख / शिक्षा

  • अच्छे और महान लोगों का साथ जीवन बदल देता है।

  • किसी वस्तु का मूल्य उसके संगति से भी बढ़ जाता है।


5. सरल शब्दार्थ

शब्दअर्थ
भनितिवाणी, कविता
राम जस          श्रीराम की महिमा
दारुलकड़ी
बंदिअवंदनीय, आदर योग्य
मलयचंदन के पेड़ों वाला पर्वत

6. भावार्थ (2–3 पंक्तियों में)

कवि की कविता में अगर श्रीराम की महिमा शामिल हो, तो वह सबको अच्छी लगेगी। जैसे चंदन के पर्वत का साथ मिल जाने से साधारण लकड़ी भी मूल्यवान बन जाती है।


FAQ – दोहा (सरल प्रश्न-उत्तर)

1. इस दोहे का कवि कौन है?

तुलसीदास जी

2. दोहे में “भनिति” शब्द का क्या अर्थ है?

भनिति का अर्थ है — वाणी, कविता या काव्य रचना।

3. कवि क्या कहना चाहता है?

कवि कहता है कि मेरी कविता सबको इसलिए पसंद आएगी क्योंकि इसमें श्रीराम की महिमा जुड़ी है।

4. “मलय पर्वत” क्या होता है?

मलय पर्वत वह स्थान है जहाँ चंदन के वृक्ष पाए जाते हैं।

5. “दारु” शब्द का अर्थ क्या है?

दारु का अर्थ है — लकड़ी।

6. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

किसी महान संग से साधारण वस्तु भी महान बन जाती है।

7. चंदन का उदाहरण दोहे में क्यों दिया गया है?

क्योंकि साधारण लकड़ी मलय पर्वत से मिलकर चंदन जैसी आदरणीय बन जाती है।

8. “राम जस संग” का अर्थ क्या है?

श्रीराम के यश (महिमा, गुण) का साथ।

9. कवि ने विनम्रता कैसे दिखाई?

उसने कहा कि कविता अच्छी इसलिए है क्योंकि श्रीराम से जुड़ी है, स्वयं के कारण नहीं।

10. इस दोहे से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

अच्छा संग (महान व्यक्तियों या गुणों का संग) जीवन एवं कार्य का मूल्य बढ़ा देता है।

तुलसीदास दोहा अर्थ: प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग – सरल भाषा में भावार्थ

दोहा

प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
दारु बिचारु कि करइ कोउ बंदिअ मलय प्रसंग॥


सरल हिन्दी अर्थ (Simple Meaning)

मेरी कविता (भनिति) सभी लोगों को बहुत प्रिय लगेगी, क्योंकि उसमें श्रीराम का यश जुड़ा हुआ है। जैसे मलय पर्वत के संपर्क में आकर साधारण लकड़ी भी सुगंधित चंदन बन जाती है और लोग उसका आदर करते हैं, तब कोई यह नहीं सोचता कि वह पहले साधारण लकड़ी थी।


शब्दार्थ (Word Meaning)

  • भनिति – कविता, वाणी

  • राम जस – श्री राम का यश, गुण, महिमा

  • दारु – लकड़ी

  • विचारु – विचार करता है, सोचे

  • बंदिअ – वंदनीय, आदरणीय

  • मलय प्रसंग – मलय पर्वत का संग (जहाँ चंदन होता है)


भावार्थ (Bhavarth)

कवि विनम्रता से कहता है कि मेरी कविता में विशेष गुण मेरे कारण नहीं, बल्कि श्रीराम की महिमा के कारण है। जैसे साधारण लकड़ी मलय पर्वत के संग से चंदन बनकर आदर पाती है, उसी प्रकार कविता में यदि श्रीराम का गुण-गायन हो तो वह स्वतः ही प्रिय और सम्माननीय हो जाती है।
कवि यहाँ यह संदेश देता है कि जब किसी महान और पवित्र विषय का संग मिल जाता है, तो साधारण वस्तु भी महान और वंदनीय बन जाती है।


1. कवि का आशय

कवि कहता है कि मेरी कविता सभी को इसलिए पसंद आएगी क्योंकि इसमें श्रीराम का यश (महिमा) जुड़ा हुआ है।


2. मुख्य विचार

  • साधारण चीज भी महान संग से महान बन जाती है।

  • श्रीराम का नाम जुड़ जाने से कविता मूल्यवान हो जाती है।


3. उदाहरण समझें

  • जैसे मलय पर्वत पर कोई साधारण लकड़ी भी पहुँच जाए, तो वह चंदन जैसी सुगंधित और आदरणीय बन जाती है।

  • तब कोई यह नहीं सोचता कि यह पहले साधारण लकड़ी थी।


4. सीख / शिक्षा

  • अच्छे और महान लोगों का साथ जीवन बदल देता है।

  • किसी वस्तु का मूल्य उसके संगति से भी बढ़ जाता है।


5. सरल शब्दार्थ

शब्दअर्थ
भनितिवाणी, कविता
राम जस          श्रीराम की महिमा
दारुलकड़ी
बंदिअवंदनीय, आदर योग्य
मलयचंदन के पेड़ों वाला पर्वत

6. भावार्थ (2–3 पंक्तियों में)

कवि की कविता में अगर श्रीराम की महिमा शामिल हो, तो वह सबको अच्छी लगेगी। जैसे चंदन के पर्वत का साथ मिल जाने से साधारण लकड़ी भी मूल्यवान बन जाती है।


FAQ – दोहा (सरल प्रश्न-उत्तर)

1. इस दोहे का कवि कौन है?

तुलसीदास जी

2. दोहे में “भनिति” शब्द का क्या अर्थ है?

भनिति का अर्थ है — वाणी, कविता या काव्य रचना।

3. कवि क्या कहना चाहता है?

कवि कहता है कि मेरी कविता सबको इसलिए पसंद आएगी क्योंकि इसमें श्रीराम की महिमा जुड़ी है।

4. “मलय पर्वत” क्या होता है?

मलय पर्वत वह स्थान है जहाँ चंदन के वृक्ष पाए जाते हैं।

5. “दारु” शब्द का अर्थ क्या है?

दारु का अर्थ है — लकड़ी।

6. इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?

किसी महान संग से साधारण वस्तु भी महान बन जाती है।

7. चंदन का उदाहरण दोहे में क्यों दिया गया है?

क्योंकि साधारण लकड़ी मलय पर्वत से मिलकर चंदन जैसी आदरणीय बन जाती है।

8. “राम जस संग” का अर्थ क्या है?

श्रीराम के यश (महिमा, गुण) का साथ।

9. कवि ने विनम्रता कैसे दिखाई?

उसने कहा कि कविता अच्छी इसलिए है क्योंकि श्रीराम से जुड़ी है, स्वयं के कारण नहीं।

10. इस दोहे से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

अच्छा संग (महान व्यक्तियों या गुणों का संग) जीवन एवं कार्य का मूल्य बढ़ा देता है।