बालकाण्ड

तुलसीदास जी का श्लोक – मति कीरति गति भूति भलाई का अर्थ और भावार्थ

मूल श्लोक:


मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई॥
सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ॥3॥


शब्दार्थ (Word by Word Meaning):

  • मति – बुद्धि, विचार शक्ति

  • कीरति – प्रसिद्धि, नाम-कीर्ति

  • गति – मोक्ष, उद्धार

  • भूति – संपत्ति, धन

  • भलाई – कल्याण, भला कार्य

  • जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई – जिसे हम कितनी भी मेहनत या प्रयास से प्राप्त करें

  • सो जानब – यही जानना चाहिए

  • सतसंग प्रभाऊ – सत्संग (सच्चे साधु-संत का संग) में शक्ति, प्रभाव है

  • लोकहुँ बेद न आन उपाऊ – यह शक्ति केवल सत्संग में ही है; लोक, वेद या अन्य कोई उपाय इसे नहीं दे सकते


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning):

बुद्धि, कीर्ति, मोक्ष, संपत्ति और भलाई जैसी जो भी चीज़ हम प्रयास करके प्राप्त करते हैं, उसकी असली शक्ति और प्रभाव सत्संग में ही है। इसे किसी लोक-ज्ञान, वेद या किसी अन्य साधन से नहीं पाया जा सकता।


भावार्थ (Underlying Meaning / Bhavarth):

संत तुलसीदास जी कह रहे हैं कि सच्चा लाभ और जीवन का सच्चा सुख सत्संग में है। चाहे हम कितनी भी मेहनत करें, किसी चीज़ की असली शक्ति और स्थायित्व सत्संग के संग रहने से ही मिलती है। बुद्धि, प्रसिद्धि, धन और भलाई अस्थायी हैं, पर सत्संग का प्रभाव स्थायी और शाश्वत है।


“सच्चा लाभ, भला प्रभाव और जीवन की शक्ति केवल सत्संग में मिलती है, बाकी सब अस्थायी है।”


मान लो, दो दोस्त हैं – अमित और रीता।

  • अमित हर चीज़ खुद सीखने की कोशिश करता है – जैसे पैसे कमाना, प्रसिद्ध होना, बुद्धिमान बनना।

  • रीता अच्छे संतों और सच्चे ज्ञानी लोगों के संग रहती है (सत्संग करती है)।

अमित मेहनत करता है, पर अक्सर भ्रम और कठिनाइयों में फंस जाता है।
रीता सत्संग में रहती है, उसे सही मार्ग, बुद्धि और स्थायी भलाई मिलती है।

सीख / भावार्थ:

  • जितनी भी चीज़ हम मेहनत से कमाएँ, उसका सही असर सत्संग के बिना स्थायी नहीं रहता।

  • सत्संग ही वह शक्ति है जो जीवन में स्थायी भलाई, बुद्धि और मोक्ष देती है।

सत्संग का संदेश – छोटा रूप:

बुद्धि, नाम, धन और भलाई,  
सब कुछ मेहनत से पाई।  
पर असली शक्ति, सच्चा ज्ञान,  
सत्संग संग ही मिलता महान।  


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. यह श्लोक किसने कहा है?
A: यह श्लोक संत तुलसीदास जी के साहित्य में आता है।

Q2. मति, कीरति, गति, भूति और भलाई का अर्थ क्या है?
A:

  • मति – बुद्धि या विचार शक्ति

  • कीरति – प्रसिद्धि, नाम

  • गति – मोक्ष या उद्धार

  • भूति – संपत्ति, धन

  • भलाई – भला कार्य, कल्याण

Q3. “सत्संग प्रभाऊ” का अर्थ क्या है?
A: इसका अर्थ है कि सच्चे साधु-संत के संग रहने से ही शक्ति, भलाई और ज्ञान मिलता है।

Q4. क्या केवल सत्संग में ही सब लाभ मिलता है?
A: हाँ, श्लोक के अनुसार लोक, वेद या अन्य साधन से यह स्थायी शक्ति नहीं मिलती। सत्संग ही वास्तविक मार्ग है।

Q5. इस श्लोक का सरल भावार्थ क्या है?
A: “सच्चा लाभ, भला प्रभाव और जीवन की शक्ति केवल सत्संग में मिलती है, बाकी सब अस्थायी है।”

Q6. इसे जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है?
A: जीवन में संतों का संग लें, सत्संग में भाग लें, ज्ञान और भलाई प्राप्त करें। इससे बुद्धि, प्रसिद्धि, संपत्ति और मोक्ष की वास्तविक शक्ति मिलती है।

Q7. इसे याद रखने का आसान तरीका क्या है?
A: इसे छोटे कविता या दो-लाइन वाले मेमो वर्स के रूप में याद करें:

बुद्धि, नाम, धन और भलाई,  
सब कुछ मेहनत से पाई।  
पर असली शक्ति, सच्चा ज्ञान,  
सत्संग संग ही मिलता महान।  

तुलसीदास जी का श्लोक – मति कीरति गति भूति भलाई का अर्थ और भावार्थ

मूल श्लोक:


मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई॥
सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ॥3॥


शब्दार्थ (Word by Word Meaning):

  • मति – बुद्धि, विचार शक्ति

  • कीरति – प्रसिद्धि, नाम-कीर्ति

  • गति – मोक्ष, उद्धार

  • भूति – संपत्ति, धन

  • भलाई – कल्याण, भला कार्य

  • जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई – जिसे हम कितनी भी मेहनत या प्रयास से प्राप्त करें

  • सो जानब – यही जानना चाहिए

  • सतसंग प्रभाऊ – सत्संग (सच्चे साधु-संत का संग) में शक्ति, प्रभाव है

  • लोकहुँ बेद न आन उपाऊ – यह शक्ति केवल सत्संग में ही है; लोक, वेद या अन्य कोई उपाय इसे नहीं दे सकते


सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning):

बुद्धि, कीर्ति, मोक्ष, संपत्ति और भलाई जैसी जो भी चीज़ हम प्रयास करके प्राप्त करते हैं, उसकी असली शक्ति और प्रभाव सत्संग में ही है। इसे किसी लोक-ज्ञान, वेद या किसी अन्य साधन से नहीं पाया जा सकता।


भावार्थ (Underlying Meaning / Bhavarth):

संत तुलसीदास जी कह रहे हैं कि सच्चा लाभ और जीवन का सच्चा सुख सत्संग में है। चाहे हम कितनी भी मेहनत करें, किसी चीज़ की असली शक्ति और स्थायित्व सत्संग के संग रहने से ही मिलती है। बुद्धि, प्रसिद्धि, धन और भलाई अस्थायी हैं, पर सत्संग का प्रभाव स्थायी और शाश्वत है।


“सच्चा लाभ, भला प्रभाव और जीवन की शक्ति केवल सत्संग में मिलती है, बाकी सब अस्थायी है।”


मान लो, दो दोस्त हैं – अमित और रीता।

  • अमित हर चीज़ खुद सीखने की कोशिश करता है – जैसे पैसे कमाना, प्रसिद्ध होना, बुद्धिमान बनना।

  • रीता अच्छे संतों और सच्चे ज्ञानी लोगों के संग रहती है (सत्संग करती है)।

अमित मेहनत करता है, पर अक्सर भ्रम और कठिनाइयों में फंस जाता है।
रीता सत्संग में रहती है, उसे सही मार्ग, बुद्धि और स्थायी भलाई मिलती है।

सीख / भावार्थ:

  • जितनी भी चीज़ हम मेहनत से कमाएँ, उसका सही असर सत्संग के बिना स्थायी नहीं रहता।

  • सत्संग ही वह शक्ति है जो जीवन में स्थायी भलाई, बुद्धि और मोक्ष देती है।

सत्संग का संदेश – छोटा रूप:

बुद्धि, नाम, धन और भलाई,  
सब कुछ मेहनत से पाई।  
पर असली शक्ति, सच्चा ज्ञान,  
सत्संग संग ही मिलता महान।  


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. यह श्लोक किसने कहा है?
A: यह श्लोक संत तुलसीदास जी के साहित्य में आता है।

Q2. मति, कीरति, गति, भूति और भलाई का अर्थ क्या है?
A:

  • मति – बुद्धि या विचार शक्ति

  • कीरति – प्रसिद्धि, नाम

  • गति – मोक्ष या उद्धार

  • भूति – संपत्ति, धन

  • भलाई – भला कार्य, कल्याण

Q3. “सत्संग प्रभाऊ” का अर्थ क्या है?
A: इसका अर्थ है कि सच्चे साधु-संत के संग रहने से ही शक्ति, भलाई और ज्ञान मिलता है।

Q4. क्या केवल सत्संग में ही सब लाभ मिलता है?
A: हाँ, श्लोक के अनुसार लोक, वेद या अन्य साधन से यह स्थायी शक्ति नहीं मिलती। सत्संग ही वास्तविक मार्ग है।

Q5. इस श्लोक का सरल भावार्थ क्या है?
A: “सच्चा लाभ, भला प्रभाव और जीवन की शक्ति केवल सत्संग में मिलती है, बाकी सब अस्थायी है।”

Q6. इसे जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है?
A: जीवन में संतों का संग लें, सत्संग में भाग लें, ज्ञान और भलाई प्राप्त करें। इससे बुद्धि, प्रसिद्धि, संपत्ति और मोक्ष की वास्तविक शक्ति मिलती है।

Q7. इसे याद रखने का आसान तरीका क्या है?
A: इसे छोटे कविता या दो-लाइन वाले मेमो वर्स के रूप में याद करें:

बुद्धि, नाम, धन और भलाई,  
सब कुछ मेहनत से पाई।  
पर असली शक्ति, सच्चा ज्ञान,  
सत्संग संग ही मिलता महान।