बाजीराव मस्तानी

बाजीराव मस्तानी जी के बारे मेंं

बाजीराव मस्तानी

बाजीराव मस्तानी

जन्म स्थान लगभग 1699 ईस्वी
पिता महाराजा छत्रसाल
माता रूपमती
जीवनसंगी पेशवा बाजीराव
बच्चे शमशेर बहादुर
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू
मृत्यु बाजीराव की मृत्यु के तुरंत बाद प्रियतम के साथ सती

जीवन परिचय --

मस्तानी अपने समय की अद्वितीय सुंदरी एवं संगीत कला में प्रवीण थी। इन्होंने घुड़सवारी और तीरंदाजी में भी शिक्षा प्राप्त की थी। सुशीला वैद्य के अनुसार गुजरात के नायब सूबेदार शुजाअत खाँ और मस्तानी की प्रथम भेंट 1724 ई० के लगभग हुईचिमाजी अप्पा ने उसी वर्ष शुजाअत खाँ पर आक्रमण किया। युद्ध क्षेत्र में ही शुजाअत खाँ की मृत्यु हुई। लूटी हुई सामग्री के साथ मस्तानी भी चिमाजी अप्पा को प्राप्त हुई। चिमाजी अप्पा ने उन्हें बाजीराव के पास पहुँचा दिया। तदुपरांत मस्तानी और बाजीराव एक दूसरे के लिए ही जीवित रहे। उक्त भवन में ही बाजीराव ने जहाँ मस्तानी के रहने का प्रबंध किया उसे 'मस्तानी महल' और 'मस्तानी दरवाजा' का नाम दिया गया है।


बाजीराव से संबंध के कारण मस्तानी को दुःख --

बाजीराव से संबंध के कारण मस्तानी को भी अनेक दु:ख झेलने पड़े पर बाजीराव के प्रति उसका प्रेम अटूट था। मस्तानी के 1734 ई० में एक पुत्र हुआ। उसका नाम शमशेर बहादुर रखा गया। बाजीराव ने काल्पी और बाँदा की सूबेदारी उसे देने की घोषणा कर दी। शमशेर बहादुर ने पेशवा परिवार की बड़े लगन और परिश्रम से सेवा की। 1761 ई० में शमशेर बहादुर मराठों की ओर से लड़ते हुए पानीपत के मैदान में मारा गया।


पेशवा बाजीराव और मस्तानी का अंतिम समय--

1739 ई० के आरंभ में पेशवा बाजीराव और मस्तानी का संबंध विच्छेद कराने के असफल प्रयत्न किए गए। 1739 ई० के अंतिम दिनों में बाजीराव को आवश्यक कार्य से पूना छोड़ना पड़ा। मस्तानी पेशवा के साथ न जा सकी। चिमाजी अप्पा और नाना साहब ने मस्तानी के प्रति कठोर योजना बनाई।

उन्होंने मस्तानी को पर्वती बाग में (पूना में) कैद किया। बाजीराव को जब यह समाचार मिला, वे अत्यंत दु:खित हुए। वे बीमार पड़ गए। इसी बीच अवसर पा मस्तानी कैद से बचकर बाजीराव के पास 4 नवम्बर 1739 ई० को पटास पहुँची। बाजीराव निश्चिंत हुए, पर यह स्थिति अधिक दिनों तक न रह सकी। शीघ्र ही पुरंदरे, काका मोरशेट तथा अन्य व्यक्ति पटास पहुँचे। उनके साथ पेशवा बाजीराव की माँ राधाबाई और उनकी पत्नी काशीबाई भी वहाँ पहुँची। उन्होंने मस्तानी को समझा बुझाकर लाना आवश्यक समझा। मस्तानी पूना लौटी।


कट्टरपंथी लोग मस्तानी को मार ही डालना चाहते थे--

कट्टरपंथी लोग मस्तानी को मार ही डालना चाहते थे, क्योंकि उनके अनुसार सभी झंझटों का मूल वही थी। उन लोगों ने छत्रपति से आज्ञा भी लेने का प्रयत्न किया, परंतु छत्रपति राजा शाहू अधिक बुद्धिमान थे। उनके अधिकारी गोविंदराव ने 24 जनवरी 1740 ईस्वी को एक पत्र में लिखा है - "मस्तानी के विषय पर मैंने निजी तौर पर राजा की इच्छा का पता लगा लिया है। बलपूर्वक पृथक्करण या व्यक्तिगत निरोध (बंदीवास) के प्रस्ताव के प्रति उस को गंभीर आपत्ति है। वह बाजीराव को किसी भी प्रकार अप्रसन्न किया जाना सहन नहीं करेगा, क्योंकि वह सदैव उसे प्रसन्न रखना चाहता है। दोष उस महिला का नहीं है। इस दोष का निराकरण उसी समय हो सकता है जब बाजीराव की ऐसी इच्छा हो। बाजीराव की भावनाओं के विरुद्ध हिंसा प्रयोग की कैसी भी सलाह राजा किसी भी कारण नहीं दे सकता।"

1740 ई० के आरंभ में बाजीराव नासिरजंग से लड़ने के लिए निकल पड़े और गोदावरी नदी को पारकर औरंगाबाद के पास शत्रु को बुरी स्थिति में ला दिया। 27 फरवरी 1740 ई० को मुंगी शेगाँव में दोनों के बीच संधि हो गयी। बाजीराव के जीवन का यह अंतिम अभियान सिद्ध हुआ। उस समय कोई नहीं जानता था कि बाजीराव की मृत्यु सन्निकट है। 7 मार्च 1740 ई० को नानासाहेब के नाम चिमना जी के पत्र से संदेह होता है कि बाजीराव हृदय से रुग्ण थे। चिमना जी ने इस पत्र में लिखा था कि "जब से हम एक दूसरे से विदा हुए हैं, मुझको पूजनीय राव से कोई समाचार प्राप्त नहीं हुआ है। मैंने उसके विक्षिप्त मन को यथाशक्ति शांत करने का प्रयास किया, परंतु मालूम होता है कि ईश्वर की इच्छा कुछ और ही है। मैं नहीं जानता हूं कि हमारा क्या होने वाला है। मेरे पुणे वापस होते ही हम को चाहिए कि हम उसको (मस्तानी को) उसके पास भेज दें। स्पष्ट है कि बाजीराव अत्यंत व्याकुल था। मस्तानी के विरह तथा उसे मुक्त कराने में अपनी अक्षमता से उसे मानसिक क्लेश और क्षोभ था। 28 अप्रैल 1740 ईस्वी को अपनी पहली और अंतिम बीमारी से उसकी मृत्यु हुई। इस समय बाजीराव की आयु केवल 42 वर्ष की थी। उसकी मृत्यु के समय उसके पास उसकी क्षमाशील पत्नी काशीबाई भी थी।


अंतिम समय --

किंकेड एवं पारसनीस के अनुसार मस्तानी अपने प्रियतम के साथ सती हो गयी। उन्होंने लिखा है कि "इस संसार में वह अपने प्रियतम से अलग की गयी थी। वह अग्नि की भयंकर ज्वालाओं के बीच से गुजर कर दूसरे संसार में उसका स्वागत करने पहुंच गयी।"[12] हालांकि यह बात विवादास्पद है। यह कहना कठिन है कि उसने आत्महत्या कर ली या शोक-प्रहार से वह मर गयी। उसका शव पाबल भेजा गया, जो पूना के पूरब में लगभग 20 मील पर एक छोटा सा गाँव है। यह गाँव बाजीराव ने उसको इनाम में दिया था। यहाँ पर एक साधारण-सी कब्र आने-जाने वालों को उसकी प्रेम-कथा तथा दुःखद मृत्यु का स्मरण दिलाती है। सर्वसम्मति से वह अपने समय की सर्वाधिक सुंदरी थी।

मस्तानी का जन्म एक हिंदू पिता और मुस्लिम माता से हुआ था, जिससे उनका जीवन कई दृष्टियों से जटिल और अनूठा रहा। वे अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और नृत्य-गायन-कला में निपुण थीं। उन्होंने युद्ध कला (संधान, तलवारबाजी) का भी अभ्यास किया था।


पेशवा बाजीराव से प्रेम--

मस्तानी और पेशवा बाजीराव प्रथम का प्रेम भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित प्रेम कथाओं में से एक है। बाजीराव ने मस्तानी से मुलाकात तब की जब उन्होंने बुंदेला राजा छत्रसाल की मुगलों से रक्षा की थी। छत्रसाल ने कृतज्ञता में मस्तानी को बाजीराव को भेंट कर दिया या विवाह हेतु प्रस्ताव दिया।

इसके बाद मस्तानी पुणे आ गईं और बाजीराव की दूसरी पत्नी के रूप में उनके साथ रहने लगीं। उन्होंने कसबा-शिवालय के पास एक महल में जीवन बिताया, जिसे आज भी “मस्तानी महल” कहा जाता है।


विरोध और सामाजिक संघर्ष--

मस्तानी का मुस्लिम आधा-पृष्ठभूमि और बाजीराव का ब्राह्मण पेशवा होना, उनके संबंधों को मराठा दरबार और समाज में स्वीकृति नहीं दिला सका |

बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई, उनके पुत्र बालाजी बाजीराव और ब्राह्मण पुरोहितों ने मस्तानी को स्वीकार नहीं किया।

मस्तानी को पुणे से दूर पलटन में नजरबंद कर दिया गया था, लेकिन बाजीराव ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

मस्तानी की मृत्यु: कुछ इतिहासकारों के अनुसार, मस्तानी ने बाजीराव की मृत्यु के तुरंत बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि कुछ कहते हैं कि वे शोक में मर गईं।


समाधि--

मस्तानी की समाधि: पुणे के पास पाबलगांव में स्थित है।

बाजीराव की समाधि: रावेरखेड़ी (मध्य प्रदेश) में है।


मस्तानी के बारे में रोचक जानकारियाँ--

मस्तानी हिंदू और मुस्लिम परंपराओं दोनों में पारंगत थीं।

उन्होंने अपने पुत्र शमशेर बहादुर को जन्म दिया, जिसे मराठों ने बाद में मान्यता दी।

मस्तानी के लिए पुणे में बनाया गया "मस्तानी महल" आज पर्यटक स्थल है।

उनकी प्रेम-कहानी पर आधारित संजय लीला भंसाली की फिल्म "बाजीराव मस्तानी" (2015) बहुत प्रसिद्ध हुई, जिसमें दीपिका पादुकोण ने मस्तानी का किरदार निभाया।


प्रश्न और उत्तर--

प्रश्न: मस्तानी कौन थीं?

उत्तर: मस्तानी बुंदेला राजा छत्रसाल की पुत्री और पेशवा बाजीराव प्रथम की पत्नी थीं।


प्रश्न: मस्तानी की मृत्यु कैसे हुई थी?

उत्तर: कहा जाता है कि बाजीराव की मृत्यु के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।


प्रश्न: मस्तानी का पुत्र कौन था?

उत्तर: शमशेर बहादुर, जिसे बाद में मराठा साम्राज्य में मान्यता दी गई।


अनमोल वचन (कल्पनात्मक)--

"प्रेम न जाति देखता है, न समाज की सीमाएँ; वह बस आत्मा से आत्मा का मिलन है।"

– मस्तानी के जीवन से प्रेरित