लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
(मेवाड़, सिटी पैलेस, उदयपुर , राजस्थान)
| जन्म तिथि | 28 January 1985 |
| जन्म स्थान | 28 जनवरी 1985 (आयु 40) |
| पिता | अरविंद सिंह मेवाड़ |
| माता | विजयराज कुमारी मेवाड़ |
| जीवनसंगी | निवृत्ति कुमारी |
| बच्चे | तीन बच्चे हैं: मोहलक्षिका कुमारी मेवाड़, प्राणेश्वरी कुमारी मेवाड़ और हरितराज सिंह मेवाड़ |
| शिक्षा | मेयो कॉलेज (अजमेर) ब्लू माउंटेंस इंटरनेशनल होटल (ऑस्ट्रेलिया) नानयांग विश्वविद्यालय (सिंगापुर) |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ – एक विस्तृत जीवनी--
भारत की संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की सबसे अमूल्य धरोहरों में राजस्थान का मेवाड़ राजवंश सर्वोपरि माना जाता है। इस राजवंश ने न केवल शौर्य, बलिदान और स्वतंत्रता की अलौकिक मिसालें दी हैं, बल्कि कला, स्थापत्य, धर्म और संस्कृति के संरक्षण में भी अद्वितीय योगदान दिया है।
इसी गौरवशाली परंपरा के आधुनिक संरक्षक हैं लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, जिनका जन्म 28 जनवरी 1985 को हुआ। वे उदयपुर स्थित शाही परिवार के सदस्य और वर्तमान में मेवाड़ की परंपराओं को जीवित रखने वाले प्रमुख व्यक्तित्व हैं।
आज वे न केवल HRH ग्रुप ऑफ़ होटल्स के कार्यकारी निदेशक हैं बल्कि समाजसेवा, परोपकार, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और खेलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़--
- जन्म: 28 जनवरी 1985
- पिता: अरविंद सिंह मेवाड़ (प्रताप का वंशज और उदयपुर राजघराने के पूर्व महाराज)
- पढ़ाई: अजमेर के मेयो कॉलेज से स्कूली शिक्षा, फिर ऑस्ट्रेलिया से ग्रेजुएशन और सिंगापुर से हॉस्पिटैलिटी कोर्स।
- करियर: शुरुआत एक साधारण वेटर के रूप में की, बाद में ऑस्ट्रेलिया के होटल्स में काम किया।
- वर्तमान पद: एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स, उदयपुर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर।
- शौक: गाड़ियों का कलेक्शन, मोटर स्पोर्ट्स, और हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में सक्रिय भागीदारी।
- वे अक्सर बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्तियों के साथ नज़र आते हैं।
निवृत्ति कुमारी सिंह (लक्ष्यराज की पत्नी)--
- पिता: कनकवर्धन सिंह देव (ओडिशा के बालांगीर रियासत से)
- माता: संगीता सिंह देव (दो बार सांसद रह चुकीं)
- शिक्षा: दिल्ली में कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई, फिर स्विट्ज़रलैंड से हॉस्पिटैलिटी, फाइनेंस और रेवेन्यू मैनेजमेंट में डिग्री।
- करियर: 2010 में भारत लौटने के बाद होटल ताज में बतौर कंसल्टेंट काम किया।
- वे अपने खानदानी शाही संस्कारों और आधुनिक सोच का संतुलन रखती हैं।
- शाही शादी (21 जनवरी 2014, सिटी पैलेस उदयपुर)
- इस शादी को राजपूताना परंपराओं के साथ बेहद शाही अंदाज में मनाया गया।
- इसमें देशभर के बड़े राजघरानों, बॉलीवुड हस्तियों और राजनीति के दिग्गजों ने शिरकत की।
यह शादी खास इसलिए भी थी क्योंकि विजया राजे कुमारी (लक्ष्यराज की मां) के बाद 37 साल तक इस घराने में कोई बहू नहीं आई थी।
मेवाड़ राजवंश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि--
शौर्य और बलिदान की भूमि--
मेवाड़ का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक, इस वंश ने मुगलों और विदेशी आक्रांताओं से कभी समझौता नहीं किया। चित्तौड़गढ़ का दुर्ग, हल्दीघाटी का युद्ध और उदयपुर की स्थापत्य कला आज भी इस शौर्यगाथा के प्रतीक हैं।
आधुनिक काल में मेवाड़--
स्वतंत्रता के बाद जब रियासतें भारत गणराज्य में विलय हुईं, तब शाही उपाधियाँ समाप्त कर दी गईं। इसके बावजूद मेवाड़ परिवार ने अपने योगदान को समाज और संस्कृति की सेवा में बदल दिया।
आज भी सिटी पैलेस, जगमंदिर आइलैंड पैलेस और कुम्भलगढ़ दुर्ग जैसे स्थल मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर को जीवित रखते हैं।
जन्म और बचपन--
28 जनवरी 1985 को उदयपुर में जन्मे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ और विजयाराज कुमारी के सुपुत्र हैं।
उनका बचपन शाही परिवार की परंपराओं और अनुशासन से भरा हुआ था। हालांकि वे विलासिता के वातावरण में पले, लेकिन परिवार ने उन्हें ज़िम्मेदारियों और सेवा-भाव से भी जोड़ा।
बचपन में वे झीलों, महलों और दुर्गों के बीच बड़े हुए और उनके मन में मेवाड़ की संस्कृति और इतिहास की गहरी छाप पड़ी।
शिक्षा और वैश्विक दृष्टिकोण--
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मेयो कॉलेज, अजमेर से प्राप्त की। यह विद्यालय भारत का प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है जहाँ नेतृत्व और संस्कार दोनों पर ज़ोर दिया जाता है।
उच्च शिक्षा--
इसके बाद वे विदेश गए और ऑस्ट्रेलिया के ब्लू माउंटेंस इंटरनेशनल होटल मैनेजमेंट स्कूल से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। यह अनुभव उन्हें आतिथ्य क्षेत्र की बारीकियों से अवगत कराने वाला रहा।
बाद में उन्होंने सिंगापुर के नानयांग विश्वविद्यालय से आगे की पढ़ाई की, जिसने उन्हें एक वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान किया।
शुरुआती करियर और सीख--
शाही परिवार से होने के बावजूद, लक्ष्यराज ने अपने करियर की शुरुआत बेहद साधारण स्तर से की। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के फोर सीज़न्स होटल में वेटर के रूप में काम किया।
इस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि सेवा उद्योग में हर छोटे से छोटा कार्य महत्वपूर्ण होता है। यही अनुभव उनकी नेतृत्व शैली की नींव बना।
HRH ग्रुप ऑफ़ होटल्स में योगदान--
लक्ष्यराज सिंह उदयपुर लौटे और HRH ग्रुप ऑफ़ होटल्स में कार्यकारी निदेशक बने। उनके नेतृत्व में ग्रुप ने नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं।
प्रमुख पहल--
- जगमंदिर आइलैंड पैलेस का संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान।
- पालकीखाना कैफे की स्थापना, जो सिटी पैलेस में आधुनिकता और परंपरा का संगम है।
- हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देना और राजस्थान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना।
- डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए उदयपुर को विश्वभर में प्रसिद्ध बनाना।
पारिवारिक जीवन--
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का विवाह निवृत्ति कुमारी से हुआ है। यह विवाह शाही परंपराओं और आधुनिक जीवन शैली का अद्भुत संगम था।
उनकी तीन संतानें हैं –
- मोहलक्षिता कुमारी मेवाड़
- प्राणेश्वरी कुमारी मेवाड़
- हरितराज सिंह मेवाड़
परिवार के साथ वे पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखते हुए आधुनिक जीवन शैली को भी अपनाते हैं।
परोपकार और गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स--
लक्ष्यराज सिंह का नाम कई गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
दान के लिए सबसे बड़ा कपड़ों का संग्रह
24 घंटों में स्कूल सामग्री का सबसे बड़ा दान
एक घंटे में सबसे अधिक स्वेटर दान
एक घंटे में सबसे अधिक बीज बोना
स्वच्छता उत्पादों का सबसे बड़ा वितरण
इन अभियानों ने उन्हें केवल उदयपुर ही नहीं बल्कि पूरे भारत में परोपकार का प्रतीक बना दिया।
शिक्षा और पर्यावरण हेतु पहल--
वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए अभियान।
स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को मंच प्रदान करना।
पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जल संरक्षण अभियान।
सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देना।
खेल और क्रिकेट से लगाव--
लक्ष्यराज सिंह को विशेष रूप से क्रिकेट का शौक है। वे भास्कर क्रिकेट लीग जैसे आयोजनों से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने जमीनी स्तर पर क्रिकेट प्रतिभाओं को बढ़ावा दिया और स्थानीय खेलों को प्रोत्साहन दिया।
कला, संस्कृति और व्यक्तिगत रुचियाँ--
वे बहुमुखी व्यक्तित्व वाले हैं। उन्हें –
- सूफ़ी संगीत और कव्वाली सुनना
- हिंदी कविता
- अमूर्त चित्रकला
- तबला बजाना
- फोटोग्राफी और बागवानी
- रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक विमान उड़ाना
विशेष रुचि है।
विदेश यात्राएँ और वैश्विक पहचान--
2017 में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान उन्हें रिचमंड फुटबॉल क्लब का मानद सदस्य बनाया गया।
उन्हें मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) की मानद सदस्यता भी मिली। वे उसैन बोल्ट जैसे खिलाड़ियों के साथ मंच साझा कर चुके हैं।
ब्रांड एंबेसडर और सलाहकार भूमिकाएँ--
राजस्थान के राज्यपाल के पर्यटन सलाहकार।
फरवरी 2024 में ताज होटल्स के ब्रांड एंबेसडर।
अप्रैल 2024 में प्रिमांटे (अरविंद मिल्स का ब्रांड) के ब्रांड एंबेसडर।
सोशल मीडिया उपस्थिति--
लक्ष्यराज सिंह इंस्टाग्राम, ट्विटर (एक्स) और फेसबुक पर सक्रिय हैं।
वे शिक्षा, पर्यावरण और समाजसेवा से जुड़े संदेश साझा करते रहते हैं।
उनके लाखों फॉलोअर्स हैं जो उनकी शख्सियत और विचारों से प्रेरित होते हैं।
भारत के शाही परिवार और आय के स्रोत--
भारत में शाही उपाधियाँ समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन मेवाड़ जैसे परिवार अब भी होटल व्यवसाय, सांस्कृतिक आयोजनों और पर्यटन से अपनी आय अर्जित करते हैं।
HRH ग्रुप ऑफ़ होटल्स की कमाई, आयोजन, पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों से होने वाली आय इस परिवार के जीवन का आधार है।
उपलब्धियाँ और सम्मान--
- कई गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा।
- शिक्षा और समाजसेवा के लिए सम्मान।
- कला और खेलों के प्रोत्साहन के लिए पहचान।
भविष्य की दृष्टि--
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का सपना है –
उदयपुर को विश्व का सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज सिटी बनाना।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक योगदान।
स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना।
पर्यावरण संरक्षण के नए अभियान।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ – 25+ रोचक जानकारियाँ--
- लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का जन्म 28 जनवरी 1985 को उदयपुर के शाही परिवार में हुआ।
- वे मेवाड़ राजवंश के वर्तमान संरक्षक अरविंद सिंह मेवाड़ के पुत्र हैं।
- लक्ष्यराज महाराणा प्रताप के प्रत्यक्ष वंशज हैं।
- उनकी माता विजय राज कुमारी हैं।
- इनकी पत्नी का नाम निवृत्ति कुमारी देव है, जो ओडिशा के बालांगीर के राजघराने से संबंध रखती हैं।
- उनकी शादी 21 जनवरी 2014 को शाही रीति-रिवाजों से हुई थी।
- लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की शादी में देश-विदेश के कई शाही परिवारों के लोग शामिल हुए थे।
- उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय और विदेश से पूरी की।
- वे एक फिलान्थ्रॉपिस्ट (सामाजिक कार्यकर्ता) हैं।
- लक्ष्यराज सिंह "मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन" से जुड़े हुए हैं।
- वे कई पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़े हैं।
- उन्होंने उदयपुर में “स्वच्छ भारत मिशन” को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
- लक्ष्यराज ने शहर में सफाई और प्लास्टिक हटाओ अभियान चलाया।
- वे खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी सक्रिय रहते हैं।
- क्रिकेट और हॉकी में उनकी विशेष रुचि है।
- वे पेंटिंग और आर्ट से भी जुड़े रहे हैं।
- लक्ष्यराज सिंह को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह मिली है (सामाजिक कार्य से जुड़ी उपलब्धियों के लिए)।
- वे भारत के सबसे युवा राजपरिवार के सामाजिक कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं।
- उनका जीवनशैली आधुनिक होने के बावजूद राजसी परंपराओं से जुड़ी हुई है।
- लक्ष्यराज सिंह अपने पिता के साथ सिटी पैलेस, उदयपुर का प्रबंधन देखते हैं।
- वे पर्यटन को बढ़ावा देने और राजपरिवार की धरोहर को संरक्षित करने में लगे हैं।
- उन्हें खेलों और युवाओं को जागरूक करने में काफी रुचि है।
- उन्होंने रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य कैंप आयोजित करवाए हैं।
- लक्ष्यराज सिंह को कई बार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
- वे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और अपने सामाजिक अभियानों और सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी साझा करते रहते हैं।
- उनकी सोच यह है कि राजसी वंश परंपरा केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि समाज की सेवा के लिए है।
- लक्ष्यराज ने कई बार कहा है कि "महाराणा प्रताप की विरासत हमें सदैव प्रेरित करती है।"
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ – 25 प्रश्न और उत्तर--
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 28 जनवरी 1985 को उदयपुर, राजस्थान के शाही परिवार में हुआ।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ किस ऐतिहासिक वीर राजपूत राजा के वंशज हैं?
उत्तर: वे महान वीर महाराणा प्रताप के प्रत्यक्ष वंशज हैं।
प्रश्न: उनके पिता कौन हैं?
उत्तर: उनके पिता उदयपुर के वर्तमान संरक्षक और उदयपुर सिटी पैलेस के मालिक अरविंद सिंह मेवाड़ हैं।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता का नाम क्या है?
उत्तर: उनकी माता का नाम विजय राज कुमारी है।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की पत्नी कौन हैं?
उत्तर: उनकी पत्नी निवृत्ति कुमारी देव हैं, जो ओडिशा के बालांगीर के शाही परिवार से आती हैं।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह की शादी कब हुई थी?
उत्तर: उनकी शादी 21 जनवरी 2014 को शाही रीति-रिवाजों से हुई थी।
प्रश्न: क्या लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का नाम किसी वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है?
उत्तर: हाँ, उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में उनके सामाजिक कार्यों के लिए दर्ज किया गया है।
प्रश्न: वे किस ट्रस्ट या संस्था से जुड़े हुए हैं?
उत्तर: वे मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन से जुड़े हैं।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ किस प्रकार के कार्यों के लिए प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: वे सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न: क्या लक्ष्यराज सिंह खेलों में रुचि रखते हैं?
उत्तर: हाँ, उन्हें क्रिकेट और हॉकी में विशेष रुचि है और वे खेलों को बढ़ावा देते हैं।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की शिक्षा कहाँ हुई?
उत्तर: उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और विदेश से प्राप्त की।
प्रश्न: उन्होंने कौन-सा प्रमुख अभियान चलाया है?
उत्तर: उन्होंने स्वच्छ उदयपुर, प्लास्टिक हटाओ अभियान और रक्तदान शिविर जैसे अभियान चलाए।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ किस राजवंश से संबंधित हैं?
उत्तर: वे मेवाड़ राजवंश से संबंधित हैं, जो विश्व का सबसे पुराना राजवंश माना जाता है।
प्रश्न: वे उदयपुर के किस प्रसिद्ध स्थल का प्रबंधन देखते हैं?
उत्तर: वे अपने पिता के साथ उदयपुर सिटी पैलेस और उससे जुड़े संस्थानों का प्रबंधन करते हैं।
प्रश्न: क्या लक्ष्यराज सिंह कला और संस्कृति से जुड़े हुए हैं?
उत्तर: हाँ, वे पेंटिंग, आर्ट और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में सक्रिय हैं।
प्रश्न: क्या लक्ष्यराज सिंह को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है?
उत्तर: हाँ, उन्हें कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उनके सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।
प्रश्न: क्या वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं?
उत्तर: हाँ, वे अपने अभियानों और सामाजिक कार्यों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं।
प्रश्न: उनकी जीवनशैली कैसी है?
उत्तर: उनकी जीवनशैली आधुनिक है, लेकिन वे राजसी परंपराओं और संस्कारों से गहराई से जुड़े हैं।
प्रश्न: वे युवाओं को किस प्रकार प्रेरित करते हैं?
उत्तर: वे स्वच्छता, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और खेलों के जरिए युवाओं को प्रेरित करते हैं।
प्रश्न: क्या लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ परंपरा और आधुनिकता दोनों को महत्व देते हैं?
उत्तर: हाँ, वे राजसी परंपरा और आधुनिक सोच दोनों को संतुलित रखते हैं।
प्रश्न: उन्होंने किस जयंती पर विशेष आयोजन किए?
उत्तर: उन्होंने अपने पूर्वज महाराणा प्रताप जयंती पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन किए।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का मानना है कि राजवंश का क्या उद्देश्य होना चाहिए?
उत्तर: उनका मानना है कि राजवंश केवल शान-शौकत के लिए नहीं बल्कि समाज की सेवा के लिए होना चाहिए।
प्रश्न: क्या उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़े कार्य भी किए हैं?
उत्तर: हाँ, उन्होंने स्वास्थ्य कैंप और रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं।
प्रश्न: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की सोच को किस वाक्य से व्यक्त किया जा सकता है?
उत्तर: "हमें महाराणा प्रताप की विरासत को समाज सेवा और प्रेरणा का माध्यम बनाना चाहिए।"
प्रश्न: उनकी सबसे बड़ी पहचान क्या है?
उत्तर: वे युवा सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण संरक्षक और महाराणा प्रताप की विरासत को आगे बढ़ाने वाले राजवंशज के रूप में पहचाने जाते हैं।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की संपत्ति--
मेवाड़ राजवंश की धरोहर
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, उदयपुर के शाही परिवार के सदस्य हैं।
वे सीधे तौर पर किसी राजा या महाराणा के रूप में शासन नहीं करते, बल्कि परंपरागत संरक्षक (Custodian of Mewar Dynasty) माने जाते हैं।
उदयपुर का शाही परिवार भारत का सबसे प्राचीन राजवंश (1,500 साल से भी पुराना) माना जाता है।
संपत्ति का स्वरूप--
उनकी संपत्ति मुख्यतः होटल, पैलेस, हैरिटेज प्रॉपर्टीज और फाउंडेशन के रूप में है।
उदयपुर का सिटी पैलेस परिवार की सबसे बड़ी धरोहर है।
परिवार के पास उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई हेरिटेज होटल और रिसॉर्ट्स हैं।
होटल और रिसॉर्ट्स--
- HRH Group of Hotels (Historic Resort Hotels) – यह अरविंद सिंह मेवाड़ (लक्ष्यराज के पिता) के अधीन है।
- इसमें उदयपुर और राजस्थान में फैले कई हेरिटेज होटल शामिल हैं, जैसे:
- शिव निवास पैलेस (Udaipur)
- फतेह प्रकाश पैलेस (Udaipur)
- गोरडन किला (Bundi)
- गोगुन्दा पैलेस आदि।
संपत्ति का अनुमानित मूल्य--
उनकी कुल संपत्ति और धरोहर का सही आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार उदयपुर राजपरिवार की कुल संपत्ति (Palaces + Hotels + Land + Art Collection) की कीमत हजारों करोड़ रुपये तक आँकी जाती है।
अकेला सिटी पैलेस, उदयपुर ही अरबों रुपये की कीमत का है।
आधिकारिक स्वामित्व--
कानूनी रूप से यह सारी संपत्ति परिवारिक ट्रस्ट और फाउंडेशन के अधीन है, जिसे Mewar Charitable Foundation और HRH Group of Hotels संचालित करते हैं।
लक्ष्यराज सिंह इसमें ट्रस्टी और मैनेजमेंट पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं।
अन्य संपत्ति और आय के स्रोत
हेरिटेज होटल्स से सालाना करोड़ों की आय होती है।
शाही शादी, समारोह और पर्यटन गतिविधियों से भी बड़ा राजस्व आता है।
वे कई सामाजिक संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड्स से जुड़े हैं, जिससे उन्हें मान-सम्मान और आय दोनों प्राप्त होते हैं।
संपत्ति का उपयोग--
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ अपनी संपत्ति को केवल निजी विलासिता के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों, धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी लगाते हैं।
उन्होंने कई बार कहा है कि “राजघराने की संपत्ति का असली मूल्य समाज की सेवा में है।”
निष्कर्ष--
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ केवल एक शाही परिवार के उत्तराधिकारी नहीं बल्कि आधुनिक भारत में परंपरा और प्रगति का संगम हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि यदि जिम्मेदारी और सेवा भाव हो तो शाही उपाधि के बिना भी समाज की सेवा की जा सकती है।
उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है –
संस्कारों को सँभालते हुए आधुनिकता को अपनाना, परंपरा और प्रगति का संतुलन बनाना और समाज की सेवा करना।
Lakshyaraj Singh Mewar – A Detailed Biography--
Introduction
Among the richest traditions of Indian civilization, the Mewar dynasty of Rajasthan stands as one of the oldest and most illustrious. Known for valor, sacrifice, and an unwavering commitment to independence, the dynasty has also contributed to art, architecture, culture, and religion for centuries.
Carrying forward this glorious heritage into modern times is Lakshyaraj Singh Mewar, born on 28 January 1985 in Udaipur, Rajasthan. A direct descendant of the legendary Maharana Pratap, Lakshyaraj today serves as the Executive Director of HRH Group of Hotels and is recognized as a philanthropist, cultural custodian, environmentalist, and youth icon.
Early Life and Family Background
-
Date of Birth: 28 January 1985
-
Father: Shriji Arvind Singh Mewar (custodian of the Mewar dynasty, businessman, hotelier, and cultural preserver).
-
Mother: Vijayraj Kumari.
-
Dynasty: Direct descendant of Maharana Pratap, one of India’s most celebrated warrior kings.
Growing up in the City Palace of Udaipur, surrounded by lakes, forts, and temples, Lakshyaraj developed a deep respect for his heritage. Despite being raised in royal surroundings, his upbringing emphasized humility, responsibility, and service.
Education and Global Exposure
Lakshyaraj received his schooling at Mayo College, Ajmer, one of India’s most prestigious schools that emphasizes discipline, leadership, and cultural values.
He later pursued Hospitality Management at the Blue Mountains International Hotel Management School, Australia. During his time there, he also worked in the hospitality sector, starting as a waiter at the Four Seasons Hotel, learning the dignity of labor and the nuances of guest service.
He further studied in Singapore (Nanyang University), gaining global exposure and a modern outlook while staying rooted in tradition.
Career Journey
Humble Beginnings
Although born into royalty, Lakshyaraj began his career at the grassroots level, working in international hotels in Australia. This experience instilled in him the belief that no job is too small and that true leadership begins with service.
HRH Group of Hotels
Returning to India, he took charge as the Executive Director of HRH Group of Hotels, Udaipur. Under his leadership, the group has expanded and modernized while retaining its heritage charm.
Major Initiatives:
-
Revitalization of Jagmandir Island Palace.
-
Establishment of Palkikhana Café inside the City Palace, blending tradition with modern hospitality.
-
Promotion of Heritage Tourism in Rajasthan at a global level.
-
Transforming Udaipur into the world’s leading destination for royal weddings.
Marriage and Personal Life
Lakshyaraj married Nivritti Kumari Devi on 21 January 2014 in a grand royal wedding at Udaipur’s City Palace.
About Nivritti Kumari
-
Father: Kanak Vardhan Singh Deo (from the royal family of Balangir, Odisha).
-
Mother: Sangeeta Singh Deo (twice Member of Parliament).
-
Education: Studied at a convent in Delhi, later pursued Hospitality, Finance, and Revenue Management in Switzerland.
-
Career: Worked as a consultant with the Taj Group of Hotels before her marriage.
Children--
The couple has three children:
-
Mohlakshita Kumari Mewar
-
Praneshwari Kumari Mewar
-
Haritraj Singh Mewar
Philanthropy and Guinness World Records
Lakshyaraj Singh Mewar has dedicated himself to charity and social work, and his name features in multiple Guinness World Records for large-scale philanthropy:
-
Largest donation of clothes.
-
Distribution of maximum school supplies in 24 hours.
-
Most sweaters donated in one hour.
-
Planting the maximum number of saplings in one hour.
-
Largest distribution of hygiene products.
Through these initiatives, he has set examples of collective action and social responsibility.
Contributions to Education and Environment
-
Campaigns for education of underprivileged children.
-
Support for local artisans and craftsmen by giving them global platforms.
-
Launch of plastic-free Udaipur and city-wide cleanliness drives.
-
Massive tree plantation and water conservation campaigns.
-
Promotion of sustainable tourism.
Interests and Hobbies
Lakshyaraj is a man of varied passions:
-
Collector of vintage cars.
-
Lover of motor sports.
-
Fond of cricket and hockey, often supporting grassroots talent.
-
Enthusiast of Sufi music, poetry, and qawwali.
-
Skilled in tabla and passionate about abstract painting.
-
Enjoys photography, gardening, and flying remote-controlled aircraft.
International Recognition
-
Honored as a member of the Richmond Football Club (Australia).
-
Honorary membership at the Melbourne Cricket Ground (MCG).
-
Shared stage with global icons including Usain Bolt.
Advisory and Brand Roles
-
Advisor on Tourism to the Governor of Rajasthan.
-
Brand Ambassador for Taj Hotels (Feb 2024).
-
Brand Ambassador for Primante by Arvind Mills (Apr 2024).
Social Media Influence
Lakshyaraj Singh Mewar is highly active on Instagram, Twitter (X), and Facebook, where he shares his views on heritage, culture, environment, and social initiatives. His large follower base sees him as an inspiration for youth.
Wealth and Royal Assets-
While titles of kings and rulers were abolished post-independence, the Mewar family remains custodians of heritage rather than rulers.
Assets and Income Sources:
-
City Palace, Udaipur – the family’s grand heritage property.
-
Several heritage hotels and palaces under HRH Group, including:
-
Shiv Niwas Palace, Udaipur
-
Fateh Prakash Palace, Udaipur
-
Gorbandh Palace, Jaisalmer
-
Gogunda Palace, and others.
-
Estimated worth of the royal family runs into thousands of crores, though most assets are under trusts like the Mewar Charitable Foundation and HRH Hotels.
25+ Interesting Facts about Lakshyaraj Singh Mewar
-
Born on 28 January 1985 in Udaipur.
-
Direct descendant of Maharana Pratap.
-
Son of Arvind Singh Mewar, custodian of Mewar dynasty.
-
Married to Nivritti Kumari Devi of Balangir royal family.
-
Their wedding (2014) was one of the grandest royal weddings in India.
-
Studied at Mayo College, Ajmer.
-
Graduate of Blue Mountains, Australia in Hospitality.
-
Worked as a waiter in Australia before joining the family business.
-
Executive Director of HRH Group of Hotels.
-
A well-known philanthropist.
-
Holds several Guinness World Records for charity.
-
Associated with the Mewar Charitable Foundation.
-
Initiated Swachh Udaipur (Clean Udaipur) campaigns.
-
Strong supporter of sports, especially cricket and hockey.
-
Loves art, paintings, and culture.
-
Collector of vintage cars.
-
Passionate about Sufi music and poetry.
-
Supports local artisans and craftsmen.
-
Believes that royalty means responsibility, not luxury.
-
Promotes sustainable tourism in Udaipur.
-
Managed events during Maharana Pratap Jayanti.
-
Organized multiple blood donation and health camps.
-
Awarded internationally for social service.
-
Youth icon for balancing tradition with modernity.
-
Lives by the principle: “The legacy of Maharana Pratap inspires us to serve society.”
Vision for the Future
Lakshyaraj Singh Mewar dreams of:
-
Making Udaipur the world’s best heritage city.
-
Contributing more to education and healthcare.
-
Giving global recognition to local artisans.
-
Strengthening environmental conservation movements.
Conclusion
Lakshyaraj Singh Mewar is not just the heir of a royal dynasty but also a symbol of modern leadership rooted in tradition. Through his philanthropy, environmental efforts, cultural preservation, and hospitality innovations, he has proven that royalty is not about privilege, but about responsibility towards society.
His life is an inspiration for youth
— teaching them to embrace modernity while honoring their roots, and to turn heritage into a living force for progress.