कृष्णदेव राय

कृष्णदेव राय जी के बारे मेंं

कृष्णदेव राय

कृष्णदेव राय

(आंध्रभोज )

जन्म स्थान 16 फरवरी 1471 हम्पी (कर्नाटक)
पिता सालुव नरसिंह
माता नागला देवी
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू
रचनाएँ नाटक ‘जाम्बवती कल्याण’, परिणय’, ‘सकलकथासार– संग्रहम’, ‘मदारसाचरित्र’, ‘सत्यवधु– परिणय’
मृत्यु 1529

जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन--

कृष्णदेवराय का जन्म 16 फरवरी 1471 ई. को कर्नाटक के हम्पी में हुआ। उनके पिता सालुव नरसिंह और माता नागला देवी थीं। उनका जन्म कन्नड़ भाषी क्षेत्र में हुआ, लेकिन उन्होंने तेलुगु साहित्य में अपना अमिट योगदान दिया। बचपन से ही कृष्णदेवराय में नेतृत्व और वीरता के गुण दिखाई दिए। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा में युद्धकला, प्रशासनिक कौशल और संस्कृत एवं तेलुगु साहित्य का अध्ययन किया।

उनके बड़े भाई वीर नरसिंह विजयनगर साम्राज्य के राजा थे। वीर नरसिंह का शासनकाल आंतरिक विद्रोह और बाहरी आक्रमणों के कारण चुनौतीपूर्ण रहा। उनके देहांत के बाद 8 अगस्त 1509 को कृष्णदेवराय को गद्दी पर बैठाया गया। कुछ ऐतिहासिक स्रोत मानते हैं कि उनका वास्तविक शासन 1510 ई. से शुरू हुआ।


राजनीतिक स्थिति और राज्य की चुनौतियाँ--

कृष्णदेवराय के राज्यकाल में दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति अत्यंत जटिल थी। विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ विजयनगर साम्राज्य के चारों ओर सक्रिय थीं।

  1. पुर्तगालियों का आगमन – पश्चिमी तट पर पुर्तगालियों का प्रवेश हुआ, जो समुद्री व्यापार और सामरिक प्रभुत्व के लिए महत्वपूर्ण थे।

  2. कांची और उत्तमत्तूर – कांची का क्षेत्र उत्तमत्तूर के राजा के अधीन था।

  3. उड़ीसा का गजपति राज्य – गजपति नरेश ने उदयगिरि से नेल्लोर तक के प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था।

  4. बहमनी साम्राज्य – विजयनगर पर आक्रमण के अवसर की प्रतीक्षा कर रहा था।

कृष्णदेवराय ने इस जटिल राजनीतिक स्थिति का कुशलतापूर्वक सामना किया। उन्होंने अपने प्रधान मंत्री श्री अप्पाजी की सहायता से राजनीतिक और सैन्य रणनीति को मजबूती दी।


प्रमुख युद्ध और विजय अभियान--

1. उत्तमत्तूर पर विजय

उत्तमत्तूर के राजा ने हारकर शिवसमुद्रम दुर्ग में शरण ली। कावेरी नदी के बहाव को बदलकर कृष्णदेवराय ने दुर्ग को जीत लिया।

2. बहमनी सुल्तान महमूदशाह पर विजय

रायचूड़, गुलबर्ग और बीदर के दुर्गों पर विजयनगर की ध्वजा फहराई। प्राचीन हिंदू शासकों की परंपरा के अनुसार उन्होंने महमूदशाह को उनका राज्य वापस कर दिया। इस विजय के बाद उन्हें “यवन राज्य स्थापनाचार्य” की उपाधि मिली।

3. उड़ीसा पर विजय (1513 ई.)

उदयगिरि दुर्ग और कोंडविडु के क्षेत्र को विजयनगर साम्राज्य में सम्मिलित किया। इसके साथ ही कृष्णा नदी के तटीय प्रदेश पर भी उनका अधिकार स्थापित हुआ।

4. गजपति नरेश के साथ राजनीतिक विवाह

1519 में गजपति नरेश ने अपनी कन्या का विवाह कृष्णदेवराय से किया। इसके बदले उन्होंने कृष्णा के उत्तर के प्रदेश को वापस गजपति को लौटाया।


प्रशासन और दरबार--

कृष्णदेवराय का प्रशासन अत्यंत कुशल और संगठित था। उनके दरबार में अष्टदिग्गज नामक आठ प्रमुख तेलुगु कवि थे:

  1. अल्लसीन पेड्डना

  2. तेनाली रामकृष्ण

  3. नंदितिम्मन

  4. यादय्यगी मल्लन

  5. घूर्जर्टि

  6. भट्टमूर्ति

  7. जिंग्लीरन्न

  8. अच्युलराजु रामचंद्र

कृष्णदेवराय स्वयं भी कवि थे और उन्हें आंध्रभोज के नाम से जाना जाता था।

प्रधान मंत्री: श्री अप्पाजी – उन्होंने राज्य के प्रशासन, राजनैतिक निर्णय और युद्ध नीति में प्रमुख भूमिका निभाई।


साहित्यिक योगदान--

तेलुगु साहित्य

  • अमुक्तमाल्यद – यह तेलुगु का प्रसिद्ध महाकाव्य है और पांच महाकाव्यों में गिना जाता है।

  • अपने दरबार में अष्टदिग्गज कवियों को रखकर उन्होंने तेलुगु साहित्य को उत्कर्ष पर पहुँचाया।

संस्कृत साहित्य

  • जाम्बवती कल्याणम् – संस्कृत नाटक

  • ऊषा परिणय – संस्कृत नाटक

उनकी साहित्यिक रचनाएँ धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन का प्रतिबिंब प्रस्तुत करती हैं।


स्थापत्य और संस्कृति--

कृष्णदेवराय ने अपने शासनकाल में अनेक मंदिरों, प्रासादों और दुर्गों का निर्माण कराया।

  • रामस्वामी मंदिर – शिलाफलकों पर रामायण के दृश्य अंकित।

  • किले और दुर्ग – राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक मजबूती के लिए निर्मित।

उनकी शैली में कला और संस्कृति का उत्कर्ष दिखाई देता है।


व्यक्तिगत जीवन और उत्तराधिकार--

कृष्णदेवराय के अंतिम दिनों में उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं और विद्रोहों का सामना करना पड़ा। उनके पुत्र तिरुमल की मृत्यु विष के कारण हुई। मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपने सौतेले भाई अच्युत देव राय को उत्तराधिकारी घोषित किया।


सारांश और महत्व--

  • जन्म: 16 फरवरी 1471, हम्पी

  • राज्यकाल: 1509/1510 – 1529

  • मृत्यु: 1529 ई.

  • उत्तराधिकारी: अच्युत देव राय

  • प्रमुख युद्ध: बहमनी सुल्तान, उत्तमत्तूर, उदयगिरि, कोंडविडु

  • साहित्यिक योगदान: अमुक्तमाल्यद (तेलुगु), जाम्बवती कल्याणम् और ऊषा परिणय (संस्कृत)

  • दरबार: अष्टदिग्गज कवि

  • स्थापत्य: मंदिर, मंडप, प्रासाद और किले

कृष्णदेवराय का शासन न केवल सैन्य और प्रशासनिक दृष्टि से सशक्त था, बल्कि कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भी अद्वितीय था। उनका योगदान दक्षिण भारत के इतिहास में हमेशा स्मरणीय रहेगा।


कृष्णदेवराय से जुड़ी रोचक जानकारियाँ--

  1. जन्म – कृष्णदेवराय का जन्म 16 फरवरी 1471 ई. को हम्पी (कर्नाटक) में हुआ।
  2. वंश – वे सालुवा राजवंश से संबंध रखते थे।
  3. भाषा और साहित्य – कन्नड़ क्षेत्र में जन्म, लेकिन मुख्य साहित्यिक योगदान तेलुगु में।
  4. साहित्यिक उपनाम – अपने साहित्यिक योगदान के कारण उन्हें “आंध्रभोज” कहा जाता था।
  5. प्रसिद्ध ग्रंथ – उन्होंने तेलुगु में अमुक्तमाल्यद की रचना की।
  6. संस्कृत नाटक – जाम्बवती कल्याणम् और ऊषा परिणय।
  7. राजनीतिक रणनीति – दक्षिण भारत के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में कुशल।
  8. प्रधान मंत्री – श्री अप्पाजी, जिनकी मदद से उन्होंने राज्य संचालन और युद्ध नीति तय की।
  9. दरबार के कवि – अष्टदिग्गज, आठ प्रमुख तेलुगु कवियों का समूह।
  10. विजयनगर का विस्तार – बहमनी सुल्तान और गजपति नरेश के क्षेत्रों पर विजय।
  11. सिंहासनारोहण – 8 अगस्त 1509 ई. को विजयनगर का राजा बने।
  12. यवन राज्य स्थापनाचार्य – बहमनी सुल्तान को परास्त करने के बाद प्राप्त उपाधि।
  13. कावेरी नदी का प्रयोग – उत्तमत्तूर के दुर्ग पर अधिकार पाने के लिए नदी का बहाव बदला।
  14. उड़ीसा की विजय – 1513 ई. में उदयगिरि और तटीय प्रदेश विजयनगर में सम्मिलित।
  15. राजनीतिक विवाह – गजपति नरेश की कन्या से विवाह 1519 में।
  16. सैन्य कला – तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्धकला में निपुण।
  17. अंतिम समय – उनकी मृत्यु 1529 में जहर और बीमारी के कारण हुई।
  18. उत्तराधिकारी – सौतेले भाई अच्युत देव राय।
  19. सांस्कृतिक योगदान – मंदिर, प्रासाद, मंडप और गोपुरों का निर्माण।
  20. रामस्वामी मंदिर – शिलाफलकों पर रामायण के दृश्य अंकित।
  21. तेलुगु साहित्य का संरक्षण – अष्टदिग्गज कवियों को अपने दरबार में रखा
  22. नवाचार और कला – स्थापत्य और कला में नवाचार किए, जिससे विजयनगर का गौरव बढ़ा।
  23. सामाजिक दृष्टि – धर्म, संस्कृति और जनता के कल्याण में रुचि।

Birth, Family, and Early Life--

Krishna Devaraya was born on 16 February 1471 in Hampi, Karnataka. His father was Saluva Narasimha and his mother Nagala Devi. Although he was born in a Kannada-speaking region, he made an indelible contribution to Telugu literature. From a young age, Krishna Devaraya displayed qualities of leadership and valor. His early education included military training, administrative skills, and studies in Sanskrit and Telugu literature.

His elder brother, Veer Narasimha, was the king of the Vijayanagar Empire. Veer Narasimha’s reign was challenging due to internal rebellions and external invasions. After his demise, Krishna Devaraya ascended the throne on 8 August 1509. Some historical sources suggest that his effective rule began in 1510.


Political Situation and Challenges of the State

During Krishna Devaraya’s reign, the political scenario in South India was extremely complex, with various regional powers active around the Vijayanagar Empire.

  • Arrival of the Portuguese – They reached the western coast, which was important for maritime trade and strategic dominance.

  • Kanchi and Uttamottur – The Kanchi region was under the rule of the king of Uttamottur.

  • Gajapati Kingdom of Odisha – The Gajapati king had control from Udayagiri to Nellore.

  • Bahmani Sultanate – Waiting for an opportunity to attack Vijayanagar.

Krishna Devaraya skillfully navigated this complex political landscape with the assistance of his Prime Minister, Sri Appaji, strengthening both political and military strategies.


Major Wars and Military Campaigns

  1. Victory over Uttamottur
    The king of Uttamottur sought refuge in Shivasamudram Fort. Krishna Devaraya captured the fort by altering the flow of the Kaveri River.

  2. Victory over Bahmani Sultan Mahmood Shah
    Vijayanagar flags were hoisted over Raichur, Gulbarga, and Bidar forts. Following the tradition of ancient Hindu rulers, he restored the kingdom to Mahmood Shah. After this victory, he was given the title “Yavanarajya Sthapanacharya.”

  3. Victory over Odisha (1513)
    He annexed Udayagiri Fort and the Kondavidu region into the Vijayanagar Empire, extending his control over the Krishna River coastal territories.

  4. Political Marriage with Gajapati King
    In 1519, the Gajapati king gave his daughter in marriage to Krishna Devaraya. In return, the northern territories of the Krishna River were returned to the Gajapati kingdom.


Administration and Court

Krishna Devaraya’s administration was highly efficient and organized. His court included Ashtadiggajas, the eight eminent Telugu poets:

  • Allasani Peddana

  • Tenali Ramakrishna

  • Nandi Timmana

  • Ayyalaraju Ramabhadra

  • Pingali Surana

  • Dhurjati

  • Bhattumurthy

  • Jakkana

Krishna Devaraya himself was a poet and was known as Andhra Bhoja.

  • Prime Minister: Sri Appaji – played a key role in governance, political decisions, and military strategy.


Literary Contributions

Telugu Literature:

  • Amuktamalyada – A renowned Telugu epic, considered one of the five greatest Telugu literary works.

  • By hosting the Ashtadiggajas, he elevated Telugu literature to its peak.

Sanskrit Literature:

  • Jambavati Kalyanam – Sanskrit play

  • Usha Parinayam – Sanskrit play

  • His works reflect religious, social, and political life of the time.


Architecture and Culture

During his reign, Krishna Devaraya commissioned the construction of many temples, palaces, and forts:

  • Ramaswami Temple – Stone carvings depicting scenes from the Ramayana.

  • Forts and Citadels – Built for security and administrative strength.

His reign represents the culmination of art and culture in South India.


Personal Life and Succession

In his later years, Krishna Devaraya faced health issues and rebellions. His son Tirumala died from poisoning. Before his death, he appointed his stepbrother, Achyuta Deva Raya, as his successor.


Summary and Significance

  • Birth: 16 February 1471, Hampi

  • Reign: 1509/1510 – 1529

  • Death: 1529

  • Successor: Achyuta Deva Raya

  • Major Wars: Bahmani Sultan, Uttamottur, Udayagiri, Kondavidu

  • Literary Contributions: Amuktamalyada (Telugu), Jambavati Kalyanam, Usha Parinayam (Sanskrit)

  • Court: Ashtadiggajas (eight great poets)

  • Architecture: Temples, Mandaps, Palaces, Forts

Krishna Devaraya’s rule was remarkable not only for its military and administrative strength, but also for art, literature, and culture, making him an immortal figure in the history of South India.